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नक्सलियों की रीढ़ टूटी! गरियाबंद के पहाड़ों से हथियारों का जखीरा बरामद

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 गरियाबंद। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में नक्सलवाद के खिलाफ सुरक्षा बलों को बड़ी और निर्णायक सफलता मिली है। थाना मैनपुर क्षेत्र के अंतर्गत ओडिशा सीमा से सटे ग्राम भालूडिग्गी और मेटाल की दुर्गम पहाड़ियों में छिपाकर रखे गए नक्सलियों के भारी हथियारों और विस्फोटक सामग्री का जखीरा संयुक्त पुलिस बल ने बरामद किया है।


यह कार्रवाई जिला पुलिस बल गरियाबंद की ई-30 ऑप्स टीम द्वारा की गई, जिसमें डीजीएन डिवीजन के माओवादियों द्वारा अलग-अलग 06 स्थानों पर डम्प किए गए हथियार बरामद किए गए।

 बरामद सामग्री में शामिल

  • 02 नग INSAS रायफल
  • 01 नग .303 रायफल
  • 02 नग 12 बोर बंदूक
  • 01 देशी कट्टा
  • भारी मात्रा में BGL सेल

हथियार निर्माण में उपयोग होने वाले औजार और उपकरण

गुप्त हथियार वर्कशॉप से संबंधित सामग्री

 मारे गए शीर्ष नक्सलियों से जुड़ा था नेटवर्क

पुलिस जांच में बड़ा खुलासा हुआ है कि यह पूरा हथियार निर्माण और भंडारण नेटवर्क ओडिशा स्टेट कमेटी के अंतर्गत संचालित हो रहा था।
इस वर्कशॉप की निगरानी मारे जा चुके तीन सेंट्रल कमेटी सदस्यों—चलपति, मनोज और गणेश उईके द्वारा की जाती थी। ये सभी नक्सली संगठन के तकनीकी दस्ते को निर्देश देते थे।

 नक्सल हिंसा की साजिश नाकाम

संयुक्त पुलिस बल की इस कार्रवाई से गरियाबंद क्षेत्र में बड़ी नक्सल हिंसा की साजिश पूरी तरह विफल हो गई है। सुरक्षा एजेंसियों का मानना है कि इन हथियारों का उपयोग आगामी दिनों में बड़ी वारदातों के लिए किया जाना था।

 आंकड़ों में पुलिस की बड़ी सफलता

जनवरी 2025 से अब तक

  • 28 ग्रेडेड ऑटोमैटिक हथियार
  • 29 अन्य हथियार
  • कुल 57 हथियार
  • लगभग 300 कारतूस
  • भारी मात्रा में विस्फोटक सामग्री

बरामद की जा चुकी है।

 नक्सल प्रभाव क्षेत्र सिमटता जा रहा

लगातार हो रही सटीक और खुफिया-आधारित कार्रवाइयों से साफ है कि गरियाबंद और सीमावर्ती इलाकों में नक्सल नेटवर्क कमजोर पड़ चुका है। सुरक्षा बलों की इस सफलता को नक्सलवाद के खिलाफ एक बड़ी रणनीतिक जीत माना जा रहा है।

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