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छत्तीसगढ़ की हर पंचायत में हाई-स्पीड इंटरनेट— केंद्र से ₹3,500 करोड़ का बड़ा प्रस्ताव

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ की सभी ग्राम पंचायतों तक हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचाने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्र सरकार की भारत नेट योजना के तीसरे चरण (फेज-थ्री) के तहत प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों में ऑप्टिकल फाइबर केबल (OFC) बिछाने की तैयारी है। इसके लिए राज्य सरकार ने केंद्र को करीब 3,500 करोड़ रुपये का प्रस्ताव भेजा है। साथ ही प्रदेश में 5,000 नए मोबाइल टावर स्थापित करने का प्रस्ताव भी केंद्र सरकार को भेजा गया है।


11,693 ग्राम पंचायतों को मिलेगा लाभ

त्रिस्तरीय पंचायत राज व्यवस्था के तहत छत्तीसगढ़ में कुल 11,693 ग्राम पंचायतें हैं। वर्ष 2024-25 की स्थिति में भारत नेट परियोजना के पहले और दूसरे चरण के तहत प्रदेश की 9,804 ग्राम पंचायतों को ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क से जोड़ा जा चुका है। नेटवर्क के रखरखाव और संचालन के लिए 66 करोड़ रुपये की पूल निधि के गठन का भी प्रावधान किया गया है।

ग्रामीण इलाकों में वाई-फाई हॉटस्पॉट

ग्रामीण क्षेत्रों में इंटरनेट की पहुंच बढ़ाने के लिए वाई-फाई हॉटस्पॉट (हाट-स्पॉट) स्थापित किए जाएंगे।
प्रथम चरण में 1,000 ग्राम पंचायतों में वाई-फाई सुविधा उपलब्ध कराने के लिए पीएम-वाणी परियोजना के अंतर्गत 37 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
इसके अलावा राज्य सरकार के विभिन्न विभागों द्वारा उपयोग किए जा रहे ई-एसेट्स, मोबाइल ऐप्स और वेबसाइट्स की साइबर सुरक्षा जांच और सर्टिफिकेशन की व्यवस्था भी की जाएगी।

बस्तर के 735 गांव अब भी नेटवर्क से दूर

बस्तर संभाग में माओवाद प्रभावित (LWE) क्षेत्रों में कुल 3,791 स्थान चिन्हित हैं, जिनमें से 3,056 क्षेत्रों में मोबाइल कनेक्टिविटी उपलब्ध है। हालांकि 735 गांव अब भी नेटवर्क से वंचित हैं।
इन इलाकों में कनेक्टिविटी पहुंचाने के लिए 481 नए मोबाइल टावरों की आवश्यकता चिन्हित की गई है, जिन्हें स्वीकृति मिल चुकी है।
केंद्र सरकार ने इस परियोजना को मंजूरी दे दी है और योजना के अनुसार दिसंबर 2026 तक सभी स्वीकृत मोबाइल टावर स्थापित किए जाएंगे। वर्तमान में टावर स्थलों का सर्वे कार्य प्रगति पर है। इन टावरों की स्थापना और संचालन का कार्य बीएसएनएल द्वारा किया जा सकता है।

फेज-टू की कंपनी से कानूनी विवाद

जानकारी के अनुसार, पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में चिप्स और टाटा प्रोजेक्ट्स लिमिटेड के बीच करीब 3,056 करोड़ रुपये का अनुबंध हुआ था, जिसका उद्देश्य 6,000 गांवों तक ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी पहुंचाना था।
हालांकि जमीनी स्तर पर काम नहीं होने के कारण मई 2025 में अनुबंध समाप्त कर दिया गया। कंपनी ने खुदाई में आने वाली बाधाओं और प्रशासनिक दिक्कतों को इसका कारण बताया। यह मामला वर्तमान में न्यायालय में विचाराधीन है, जिससे फेज-टू का काम प्रभावित हुआ।

अधिकारियों का बयान

अंकित आनंद, सचिव, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग ने कहा कि
“राज्य सरकार हर गांव तक मोबाइल और इंटरनेट कनेक्टिविटी पहुंचाने के लिए लगातार काम कर रही है। भारत नेट योजना के तीसरे चरण में सभी ग्राम पंचायतों को कवर करने का लक्ष्य है। इसके लिए केंद्र सरकार को विस्तृत प्रस्ताव भेजा गया है।”

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