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छत्तीसगढ़ में कानून व्यवस्था शर्मसार, महिला पुलिसकर्मी को अर्धनग्न कर दौड़ाया

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 रायगढ़।त्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले के तमनार ब्लॉक में हुई हिंसक घटना ने प्रदेश की कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जिंदल पावर लिमिटेड (JPL) की कोयला खदान के विरोध के दौरान उग्र भीड़ ने एक महिला आरक्षक के साथ अमानवीय बर्बरता की। घटना का करीब 40 सेकेंड का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आने के बाद प्रदेशभर में आक्रोश फैल गया है।


घटना 27 दिसंबर 2025 की बताई जा रही है। प्रदर्शन के दौरान महिला आरक्षक को उग्र भीड़ ने करीब आधा किलोमीटर तक दौड़ाया। खेत में गिरने के बाद उसकी वर्दी फाड़ दी गई और उसे अर्धनग्न अवस्था में घसीटा गया। वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि महिला आरक्षक रोते हुए भीड़ से “भाई” कहकर छोड़ देने की गुहार लगाती रही, लेकिन इसके बावजूद भीड़ की बेरहमी जारी रही। वीडियो में चप्पल से मारने की धमकी भी सुनाई देती है।

इससे पहले भी तमनार थाना प्रभारी कमला पुसाम को लात मारने का वीडियो सामने आ चुका है। इस पूरी हिंसक घटना ने पुलिस बल की सुरक्षा और महिला कर्मियों की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

कैसे भड़की हिंसा

यह विवाद 8 दिसंबर 2025 को धौराभाठा में प्रस्तावित जनसुनवाई के विरोध से जुड़ा है। JPL कोल ब्लॉक सेक्टर-1 से प्रभावित 14 गांवों के ग्रामीण 12 दिसंबर से आंदोलन कर रहे थे।

27 दिसंबर की सुबह करीब 9 बजे लिबरा चौक पर लगभग 300 ग्रामीण एकत्र हुए और सड़क जाम कर दिया। हालात बिगड़ते देख करीब 10 बजे राजस्व और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी मौके पर पहुंचे और समझाइश देकर भीड़ को धरना स्थल तक वापस भेजा गया।

हालांकि तनाव बना रहा। जिला प्रशासन के अनुसार, आसपास के गांवों से लोग लगातार पहुंचते रहे और दोपहर तक भीड़ की संख्या करीब 1000 तक पहुंच गई। घरघोड़ा एसडीएम और पुलिस अधिकारी लगातार माइक से शांति की अपील करते रहे, लेकिन भीड़ बार-बार सड़क जाम करती रही।

करीब ढाई बजे स्थिति पूरी तरह बेकाबू हो गई। भीड़ ने पुलिस बैरिकेड तोड़ दिए और पत्थर व डंडों से हमला शुरू कर दिया। पुलिसकर्मियों पर जमकर पथराव और लाठियां बरसाई गईं।

आगजनी और तोड़फोड़

हिंसा के दौरान पुलिस बस, जीप और एम्बुलेंस में आग लगा दी गई। कई सरकारी वाहनों को नुकसान पहुंचाया गया। इसके बाद उग्र भीड़ जिंदल के कोल हैंडलिंग प्लांट पहुंची, जहां कन्वेयर बेल्ट, दो ट्रैक्टर और अन्य वाहनों में आगजनी की गई। प्लांट कार्यालय में भी जमकर तोड़फोड़ हुई।

स्थिति संभालने लैलूंगा विधायक विद्यावती सिदार, रायगढ़ कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक स्वयं मौके पर पहुंचे, लेकिन अधिकारियों की मौजूदगी में भी पथराव और आगजनी की घटनाएं होती रहीं।

लगातार आंदोलन और बढ़ते तनाव को देखते हुए जिंदल प्रबंधन ने गारे–पेलमा सेक्टर-1 कोल ब्लॉक के लिए प्रस्तावित जनसुनवाई नहीं कराने का निर्णय लिया। इस आंदोलन में 14 गांवों के करीब 4 हजार से अधिक लोग शामिल थे।

घटना के बाद महिला आरक्षक के साथ हुई बर्बरता को लेकर प्रदेशभर में आक्रोश है और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग उठ रही है।

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