Media24Media.com: Delhi Blast के बाद Pakistan अलर्ट मोड पर, डर: कहीं फिर न दोहराई जाए Surgical Strike!

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Delhi Blast के बाद Pakistan अलर्ट मोड पर, डर: कहीं फिर न दोहराई जाए Surgical Strike!

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 नई दिल्ली। दिल्ली के लाल किले मेट्रो स्टेशन के बाहर हुए कार विस्फोट ने न केवल भारत को झकझोर दिया है, बल्कि इसकी गूंज अब सीमाओं के पार पाकिस्तान तक सुनाई दे रही है। आतंकवाद को वर्षों से परोक्ष संरक्षण देने वाला पाकिस्तान इस बार असामान्य रूप से चौकन्ना और चिंतित दिखाई दे रहा है।


सूत्रों के अनुसार, जैसे ही भारतीय जांच एजेंसियों को शुरुआती जांच में जैश-ए-मोहम्मद (JeM) की संलिप्तता के संकेत मिले, इस्लामाबाद ने अपनी सुरक्षा प्रणाली को “अभूतपूर्व स्तर” पर अलर्ट कर दिया। पाकिस्तान के सभी वायु अड्डों, सैन्य ठिकानों और संवेदनशील प्रतिष्ठानों पर रेड अलर्ट जारी कर दिया गया है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, पाकिस्तानी वायुसेना को “इमीडिएट टेकऑफ” के लिए तैयार रहने का आदेश दिया गया है, और सीमावर्ती क्षेत्रों में 11 से 12 नवंबर तक NOTAM (Notice to Airmen) लागू किया गया है।

विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान की यह घबराहट भारत की पिछली सटीक और निर्णायक कार्रवाइयों का परिणाम है — चाहे वह सर्जिकल स्ट्राइक, बालाकोट एयर स्ट्राइक हो या ऑपरेशन सिंदूर जैसी गुप्त सैन्य कार्रवाइयाँ। इन अभियानों ने यह स्पष्ट संदेश दिया कि भारत अब “धैर्य की नीति” से आगे बढ़कर “सटीक प्रतिशोध” की नीति पर काम कर रहा है।

पाकिस्तान की खुफिया एजेंसियों को यह भली-भांति ज्ञात है कि यदि दिल्ली जैसे संवेदनशील केंद्र पर हुआ यह हमला किसी भी रूप में उसके यहां से संचालित नेटवर्क से जुड़ा पाया गया, तो भारत अब केवल कूटनीतिक विरोध तक सीमित नहीं रहेगा। यही कारण है कि इस्लामाबाद अब हर स्तर पर सतर्क हो गया है।

दिल्ली धमाके की खबर पाकिस्तान के प्रमुख मीडिया संस्थानों जैसे Dawn, Geo News, The Express Tribune और Pakistan Today में प्रमुखता से छपी। हालांकि, अधिकांश पाकिस्तानी मीडिया हाउस ने इसे “मिस्टेरियस ब्लास्ट” या “कार एक्सप्लोजन” कहकर रिपोर्ट किया — जिससे स्पष्ट होता है कि वे किसी भी आतंकी संबंध से दूरी बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं।

भारत सरकार की प्रतिक्रिया इस बार संयमित लेकिन रणनीतिक मानी जा रही है। प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में होने वाली कैबिनेट की सुरक्षा मामलों की समिति (CCS) की बैठक से पहले किसी तरह का सार्वजनिक बयान नहीं दिया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह “मौन लेकिन संदेशपूर्ण कूटनीति” पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ा संकेत है — कि भारत अब शब्दों से नहीं, कार्रवाई से जवाब देने की तैयारी में है।

इसी बीच जांच एजेंसियों को मिले सुराग एक नए आतंकवादी तंत्र की ओर इशारा कर रहे हैं — जहां पढ़े-लिखे पेशेवरों, खासकर डॉक्टरों को वैचारिक रूप से उग्र बना कर आतंकी नेटवर्क में शामिल किया जा रहा है। उमर मोहम्मद और उसके साथियों की गिरफ्तारी इस बात का संकेत है कि रैडिकलाइजेशन अब मदरसों से आगे बढ़कर डिजिटल प्लेटफॉर्म तक पहुँच चुका है।

आज जब पाकिस्तान अपनी सेना और वायुसेना को अलर्ट मोड पर रख रहा है, तब यह उसकी मनोवैज्ञानिक असुरक्षा का परिचायक है। आर्थिक संकट, बढ़ती आंतरिक अस्थिरता और IMF पर निर्भरता ने इस्लामाबाद की रणनीतिक सीमाओं को और संकुचित कर दिया है। अब वह केवल सुरक्षा घोषणाओं और मीडिया प्रोपेगेंडा के ज़रिए अपनी जनता में यह भ्रम बनाए रखने की कोशिश कर रहा है कि सब कुछ नियंत्रण में है।

अंततः यह स्पष्ट है कि पाकिस्तान के शासकों में जो भय आज दिख रहा है, वह भारत की रणनीतिक सफलता का प्रमाण है। दक्षिण एशिया के बदलते सुरक्षा समीकरणों में यह भय ही आने वाले समय का सबसे निर्णायक तत्व साबित हो सकता है।

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