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नक्सल मोर्चे पर बड़ी जीत: झीरम हमले का मास्टरमाइंड चैतू ने हथियार डाले

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रायपुर । बस्तर को दहला देने वाले झीरम घाटी नरसंहार का खूंखार मास्टरमाइंड चैतू उर्फ श्याम दादा आखिरकार पुलिस के सामने सरेंडर हो गया। वह वही नक्सली है, जिस पर 29 से अधिक कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं की हत्या का आरोप है, और जिसे स्थानीय लोग बस्तर का “सबसे डरावना चेहरा” कहते रहे हैं।


मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, चैतू ने जगदलपुर में आत्मसमर्पण किया। 25 मई 2013 को झीरम घाटी में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा पर हमले की साजिश इसी ने रची थी, जिसमें 32 लोग मारे गए, जिनमें कांग्रेस के कई शीर्ष नेता शामिल थे।

“बस्तर टाइगर” महेंद्र कर्मा को 100 गोलियां

हमले में सलवा जुडूम के संस्थापक महेंद्र कर्मा को नक्सलियों ने करीब 100 गोलियां मारीं और उनके शरीर पर चढ़कर नाचने जैसी भयावह क्रूरता की — एक बर्बर दृश्य जिसे बस्तर आज भी नहीं भूल पाया है।

चैतू पर 25 लाख का इनाम था और वह नक्सली संगठन में 45 साल तक सक्रिय रहा, जिनमें 35 साल बस्तर के जंगलों में छिपकर बिताए। कई बार पुलिस मुठभेड़ों में बच निकलने वाला चैतू अंततः सुरक्षा बलों की मजबूत रणनीति और दबाव के आगे झुक गया।

IG ने दी जानकारी

बस्तर IG सुंदरराज पी ने बताया कि चैतू सहित सरेंडर करने वाले नक्सलियों पर कुल 65 लाख रुपये का इनाम घोषित था।
अब पुलिस पोलित ब्यूरो सदस्य देवजी, केंद्रीय समिति सदस्य रामदर, DKSZC सदस्य पापाराव और बार्से देवा सहित कई बड़े कमांडरों की तलाश में है।

चैतू का कबूलनामा

सरेंडर के बाद चैतू ने स्वीकार किया: -“रूपेश और सोनू दादा भी रास्ता छोड़ चुके हैं। मेरी उम्र 63 साल है। संगठन में अब कुछ नहीं बचा। हालात बदल चुके हैं, इसलिए हमने हिंसा छोड़ने का निर्णय लिया।”

झीरम हमला: पृष्ठभूमि

25 मई 2013, विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा सुकमा से लौट रही थी।
करीब 200 नेता और कार्यकर्ता 25 गाड़ियों के काफिले में थे। सबसे आगे की गाड़ी में प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, उनके बेटे दिनेश पटेल और कवासी लखमा थे।
दरभा घाटी में नक्सलियों ने घात लगाकर हमला किया—जो छत्तीसगढ़ की राजनीति का सबसे बड़ा और दर्दनाक हमला माना जाता है।

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