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सशक्त भारत के लिए चिप डिजाइन क्रांति: इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने छात्रों को SCL मोहाली में तैयार 28 चिप्स सौंपे

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केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 28 चिप्स (600 बेर डाइज़ और 600 पैकेज्ड चिप्स सहित) छात्रों को सौंपे, जिन्हें देश के 17 शैक्षणिक संस्थानों के छात्रों ने चिप्स टू स्टार्टअप (C2S) प्रोग्राम के तहत Semiconductor Laboratory (SCL), मोहाली में तैयार किया था। यह कार्यक्रम 28 नवंबर 2025 को SCL मोहाली में आयोजित किया गया, जहां मंत्री ने कार्य की प्रगति और आधुनिकरण गतिविधियों की समीक्षा की।

इस अवसर पर मंत्री ने कहा कि भारत तेजी से वैश्विक अर्धचालक परिदृश्य में एक विशिष्ट नेतृत्वकर्ता के रूप में उभर रहा है। अब देश भर के संस्थानों के पास अत्याधुनिक डिजाइन तकनीकें उपलब्ध हैं, जिससे भारत में एक विशाल अर्धचालक विकास इकोसिस्टम विकसित हुआ है।

चिप्स टू स्टार्टअप (C2S) प्रोग्राम और ChipIN सेंटर:

  • ChipIN Centre, C-DAC बैंगलोर में स्थित, छात्रों और संस्थानों को चिप डिजाइन और निर्माण के पूरे चक्र के लिए अत्याधुनिक उपकरण, हार्डवेयर और मेंटरशिप प्रदान करता है।

  • छात्रों के डिजाइन हर तीन महीने में SCL मोहाली में 180 nm तकनीक के तहत तैयार किए जाते हैं।

  • चिप्स के निर्माण के लिए डिजाइन फेब-कम्प्लायंस जांच के बाद MPW रेटिकल पर एकत्रित किए जाते हैं, जिससे समय और लागत दोनों की बचत होती है।

पिछले वर्ष में, ChipIN सेंटर ने SCL के तहत पांच MPW शटल रन आयोजित किए। इस दौरान:

  • 46 संस्थानों ने कुल 122 डिजाइन सबमिट किए।

  • 56 छात्रों द्वारा डिज़ाइन किए गए चिप्स सफलतापूर्वक तैयार किए गए और संबंधित संस्थानों को वितरित किए गए।

  • इन गतिविधियों के दौरान 1 लाख से अधिक छात्रों ने 125 लाख घंटे EDA टूल्स का उपयोग किया।

  • 90 से अधिक स्टार्टअप ने लगभग 50 लाख घंटे EDA टूल्स का उपयोग किया।

  • कुल मिलाकर 175 लाख घंटे EDA टूल्स का उपयोग हुआ, जो इसे विश्व के सबसे बड़े केंद्रीकृत चिप-डिज़ाइन उपयोगकर्ता सुविधाओं में से एक बनाता है।

    देश के विभिन्न राज्यों में EDA टूल्स के साथ समर्थित संस्थाओं की संख्या:


मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि यह प्रगति प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण को प्रतिबिंबित करती है। उनका लक्ष्य है कि भारत कुछ वर्षों में वैश्विक अर्धचालक शक्ति के रूप में स्थापित हो, रणनीतिक आवश्यकताओं के लिए किसी पर निर्भर न रहे और स्वदेशी चिप्स का व्यापक उपयोग सुनिश्चित करे।

यह पहल न केवल छात्रों और स्टार्टअप्स को तकनीकी सशक्तिकरण प्रदान करती है, बल्कि भारत को आत्मनिर्भर अर्धचालक राष्ट्र बनने की दिशा में अग्रसर करती है।


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