Media24Media.com: शारदीय नवरात्रि का छठा दिन आज, जानें मां कात्यायनी की पूजा विधि, मंत्र और आरती

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शारदीय नवरात्रि का छठा दिन आज, जानें मां कात्यायनी की पूजा विधि, मंत्र और आरती

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 Navratri Day 6 : आज शारदीय नवरात्रि का छठा दिन है। हिन्दू धर्मशास्त्रों के अनुसार यह दिन मां दुर्गा के छठे स्वरूप मां कात्यायनी की आराधना के लिए समर्पित है। भक्त इस दिन माता की विशेष पूजा-अर्चना कर व्रत रखते हैं और विवाह व जीवन की बाधाओं को दूर करने के लिए मां से आशीर्वाद मांगते हैं।


मां कात्यायनी का महत्व

धार्मिक मान्यता है कि मां कात्यायनी का जन्म ऋषि कात्यायन की कठिन तपस्या के फलस्वरूप हुआ था। यह स्वरूप शक्ति, साहस और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है। माता शत्रुओं का नाश कर जीवन की सभी रुकावटों को दूर करती हैं। विशेषकर विवाह में आ रही अड़चनें दूर करने के लिए मां कात्यायनी की पूजा अत्यंत फलदायी मानी जाती है।

मां कात्यायनी के मंत्र

“ॐ देवी कात्यायन्यै नमः॥”
“या देवी सर्वभूतेषु मां कात्यायनी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥”
“कात्यायनी शुभं दद्याद् देवी दानवघातिनी॥”

विवाह के लिए विशेष:
“कात्यायनी महामाये, महायोगिन्यधीश्वरी।
नन्दगोपसुतं देवी, पति मे कुरु ते नमः॥”

प्रिय फूल और भोग

फूल: गेंदा, कमल और गुड़हल (विशेषकर पीले रंग के)

भोग: शहद अथवा शहद से बनी खीर। मान्यता है कि इससे मां प्रसन्न होकर सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं।

आज का शुभ रंग

नवरात्रि के छठे दिन पीले रंग के वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है, क्योंकि यह रंग मां कात्यायनी को अत्यंत प्रिय है।

पूजा विधि

सुबह स्नान कर स्वच्छ (अधिमानतः पीले) वस्त्र धारण करें।

पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध कर माता की प्रतिमा/चित्र स्थापित करें।

हाथ में फूल लेकर संकल्प करें और माता को अर्पित करें।

मां को रोली, अक्षत, कुमकुम, चंदन, हल्दी, फूल और 16 श्रृंगार अर्पित करें।

शहद का भोग लगाएं और दुर्गा सप्तशती, दुर्गा चालीसा या कात्यायनी मंत्र का पाठ करें।

दीपक और कपूर से आरती करें।

अंत में प्रसाद वितरित करें।

मां कात्यायनी की आरती

जय जय अम्बे जय कात्यायनी।
जय जगमाता जग की महारानी।।

बैजनाथ स्थान तुम्हारा।
वहां वरदाती नाम पुकारा।।

कई नाम हैं कई धाम हैं।
यह स्थान भी तो सुखधाम है।।

हर मन्दिर में ज्योत तुम्हारी।
कही योगेश्वरी महिमा न्यारी।।

हर जगह उत्सव होते रहते।
हर मन्दिर में भगत हैं कहते।।

कात्यायनी रक्षक काया की।
ग्रंथि काटे मोह माया की।।

झूठे मोह से छुड़ाने वाली।
अपना नाम जपाने वाली।।

बृहस्पतिवार को पूजा करिए।
ध्यान कात्यायनी का धरिये।।

हर संकट को दूर करेगी।
भंडारे भरपूर करेगी।।

जो भी मां को भक्त पुकारे।
कात्यायनी सब कष्ट निवारे।।

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