Media24Media.com: नवरात्रि सप्तमी 2025: मां कालरात्रि को चढ़ाएं गुड़ और ये भोग, दूर होंगी सभी बाधाएं

Responsive Ad Slot

Latest

latest


 

नवरात्रि सप्तमी 2025: मां कालरात्रि को चढ़ाएं गुड़ और ये भोग, दूर होंगी सभी बाधाएं

Document Thumbnail

29 सितंबर 2025, सोमवार। शारदीय नवरात्रि का आज सातवां दिन है, जिसे महासप्तमी के रूप में मनाया जाता है। यह दिन मां दुर्गा के सातवें स्वरूप मां कालरात्रि को समर्पित है। भले ही इनका स्वरूप उग्र और भयावह है, लेकिन श्रद्धा से पूजा करने पर ये अपने भक्तों को भयमुक्त कर सुख-समृद्धि का आशीर्वाद देती हैं।


मां कालरात्रि का स्वरूप

मां कालरात्रि का रंग घोर अंधकार जैसा काला है। इनके तीन नेत्र हैं, बिखरे केश हैं और वाहन गधा है। चार हाथों में तलवार, लोहे का कांटा, वरमुद्रा और अभयमुद्रा है। "काल" यानी मृत्यु और "रात्रि" यानी अंधकार—दोनों का नाश करने वाली होने के कारण इनका नाम कालरात्रि पड़ा।

सप्तमी पर कौन सा भोग लगाएं?

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां कालरात्रि को गुड़ और उससे बने व्यंजन प्रिय हैं। सप्तमी तिथि पर उन्हें ये भोग अर्पित करना शुभ माना जाता है:

गुड़ – जीवन से दुख और कष्ट दूर करता है।
गुड़ की खीर या मालपुए – सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
चना – साहस, शक्ति और आत्मविश्वास की प्राप्ति होती है।
शहद – जीवन में मधुरता और समृद्धि लाता है।

पूजा विधि

सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करें।
पूजा स्थल पर मां कालरात्रि की प्रतिमा/चित्र स्थापित कर गंगाजल से स्नान कराएं।
उन्हें लाल या नारंगी चुनरी अर्पित करें।
रोली, कुमकुम, अक्षत, लाल-पीले फूल और धूप-दीप अर्पित करें।
प्रिय भोग (गुड़, चना, खीर आदि) चढ़ाएं।
घी का दीप जलाकर ॐ देवी कालरात्र्यै नमः मंत्र का जाप करें।
दुर्गा सप्तशती या दुर्गा चालीसा का पाठ कर आरती करें।

सप्तमी तिथि का शुभ मुहूर्त

आरंभ: 28 सितंबर दोपहर 02:27 बजे से
समाप्त: 29 सितंबर शाम 04:31 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:47 से 12:35 बजे तक

विशेष महत्व

सप्तमी पर मां कालरात्रि की पूजा से सभी प्रकार की नकारात्मक शक्तियों का नाश होता है। श्रद्धाभाव से गुड़, पूड़ी और प्रिय भोग अर्पित करने पर देवी प्रसन्न होकर जीवन की रुकावटें दूर करती हैं और किस्मत के ताले खोल देती हैं।

Don't Miss
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.