Media24Media.com: भारत को मिलेगी S-400 की अंतिम खेप, अब नजर S-500 और Su-57 पर

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भारत को मिलेगी S-400 की अंतिम खेप, अब नजर S-500 और Su-57 पर

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 नई दिल्ली। भारत-रूस रक्षा सहयोग एक बार फिर चर्चा में है। रूस अब एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम की अंतिम खेप भारत को सौंपने जा रहा है। इसके साथ ही भविष्य में एस-500 मिसाइल सिस्टम और सु-57 स्टेल्थ फाइटर जेट की खरीद की संभावनाएँ भी बढ़ गई हैं।


भारत-रूस का गहरा रक्षा सहयोग

सोवियत काल से लेकर अब तक भारत ने रूस पर टैंकों, लड़ाकू विमानों, हेलीकॉप्टरों, पनडुब्बियों और मिसाइलों के लिए भरोसा किया है।

  • टी-90 टैंक, मिग-29, कामोव हेलीकॉप्टर, ब्रह्मोस मिसाइल और एके-203 राइफलें इस साझेदारी की मिसाल हैं।
  • पश्चिमी दबाव के बावजूद भारत ने एस-400 सौदा जारी रखा और अब यह सिस्टम वायु रक्षा को मजबूत बना रहा है।

Su-57 फाइटर जेट का प्रस्ताव

रूस ने भारत को पाँचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान सु-57 की आपूर्ति और स्थानीय उत्पादन का प्रस्ताव दिया है। यदि सौदा पक्का हुआ तो:

  • भारतीय वायुसेना को स्टेल्थ और सुपरमैनेवरेबिलिटी जैसी क्षमताएँ मिलेंगी।
  • स्वदेशी उत्पादन से तकनीकी आत्मनिर्भरता भी बढ़ेगी।

संतुलन की नीति

रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के बीच भी भारत ने रूस से न केवल ऊर्जा खरीदी बल्कि हथियारों के सौदे भी जारी रखे। यही कारण है कि रूस ने भारत की प्रशंसा की कि उसने “पश्चिमी दबाव का विरोध किया।”
भारत की नीति स्पष्ट है—वह न तो किसी एक ध्रुव पर पूरी तरह झुकना चाहता है, न ही किसी गठबंधन का अंधानुकरण।

अन्य रक्षा सौदे

  • फ्रांस से 26 राफेल-एम नौसैनिक विमान (आईएनएस विक्रांत के लिए)।
  • अमेरिका से प्रीडेटर-बी ड्रोन सौदा अंतिम चरण में।
  • इज़राइल से हेरोन-टीपी ड्रोन और आयरन डोम जैसी तकनीकों पर बातचीत।

भविष्य की तस्वीर

  • रूस से संभावित हथियार:
  • S-500 मिसाइल प्रणाली
  • Su-57 स्टेल्थ फाइटर जेट
  • ब्रह्मोस का हाइपरसोनिक संस्करण
  • एडवांस सबमरीन तकनीक

निष्कर्ष

भारत की रक्षा रणनीति आज “बहु-स्रोत नीति” पर आधारित है। अमेरिका, फ्रांस और इज़राइल के साथ सहयोग के बावजूद रूस अब भी सबसे बड़ा रक्षा साझेदार है। यदि S-500 और Su-57 भारत की झोली में आते हैं तो आने वाले दशक में भारत न सिर्फ एशिया में संतुलन बनाए रखेगा बल्कि निर्णायक बढ़त भी हासिल करेगा।

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