Media24Media.com: लोरिक गढ़ रीवा में स्थापित मां चंडिका का इतिहास हजारों साल पुराना, 330 मनोकामना ज्योति हो रही है प्रज्ज्वलित

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लोरिक गढ़ रीवा में स्थापित मां चंडिका का इतिहास हजारों साल पुराना, 330 मनोकामना ज्योति हो रही है प्रज्ज्वलित

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आरंग। राजधानी रायपुर से 28 किलोमीटर दूर तथा राष्ट्रीय राजमार्ग 53 से महज दो किलोमीटर दूर वीर अहीर लोरिक, चंदा और पुरातात्विक ग्राम के नाम से विख्यात ग्राम हैं गढ़रीवा। जहां साक्षात् विराजमान है आदिशक्ति माता चंडिका। यहां वर्ष भर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहता है। 

मंदिर समिति के सदस्यगण बताते हैं यह मंदिर का इतिहास हजारों वर्ष पुरानी है। जनमान्यता है महादानी राजा मोरध्वज स्वयं यहां पहुंचकर मां चंडिका की पूजा आराधना कर आशीर्वाद प्राप्त करते थे।राजा महर के शासनकाल में भी लोरिक वीर अहीर के आराध्य देवी के रूप में भी यह मंदिर चर्चित रहा।

मंदिर के पुजारी मोहन भारती बताते हैं पंचमूर्ति मां चण्डी की प्रतिमा एक विशाल शीला में निर्मित है।जिसमें भक्त लंगुरे, मां चंडिका, मां आदिशक्ति,मां महामाया और काल भैरव विराजमान है। यही कारण है कि इस मंदिर को पंचमूर्ति चंडिका सिद्धपीठ के नाम से जाना जाता है।

इस मंदिर से लगा 75 एकड़ का विशाल तालाब है।जिसे बंधुआ तालाब कहा जाता है।यह तालाब का जल सफेद दाग के निवारण के लिए प्रख्यात है। यहां जो भी चर्म संबंधी रोग से ग्रसित लोग श्रद्धाभाव से सात रविवार तक स्नान कर मां चंडिका का आशीर्वाद लेते हैं। 

उनके शरीर से चर्म संबंधी रोग का निवारण हो जाता हैं। चर्म रोग के निवारण के लिए दूर-दूर से लोग यहां आते हैं। और चर्म रोग का निवारण पाते हैं। ग्राम के 73 वर्षीय बुजुर्ग सरपंच घसियाराम साहू बताते हैं कुंवार और चैत्र दोनों ही नवरात्र में यहां सैकड़ों मनोकामना ज्योति प्रज्वलित होती है। काफी दूर-दूर से भक्त यहां आकर मनोकामना ज्योति प्रज्वलित कर मां चंडिका का आशीर्वाद लेते हैं। 

सिद्ध शक्तिपीठ माता चंडिका भक्तों की कामना अवश्य पूरी करती है।यह नवरात्र में भी 330 मनोकामना ज्योति प्रज्वलित हो रही। जो जन आस्था का केंद्र है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में ग्रामीण यहां पहुंचकर माता की जस, सेवा भजन कीर्तन कर रहे हैं।

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