Media24Media.com: डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं में अनुकरणीय मॉडल बन रहा है बस्तर संभाग

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डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं में अनुकरणीय मॉडल बन रहा है बस्तर संभाग

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 रायपुर बस्तर संभाग पूरे प्रदेश के लिए डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं का एक आदर्श मॉडल बनकर उभर रहा है। पिछले तीन महीनों में बस्तर जिले में आभा लिंक के माध्यम से 53% मरीजों ने ओपीडी पंजीकरण कराया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व और स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल की पहल पर “नेक्स्ट जेन ई-हॉस्पिटल” प्रणाली ने स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुलभ, प्रभावी और पारदर्शी बनाया है।


तकनीकी बदलाव का असर

बस्तर के 6 जिला चिकित्सालयों, 2 सिविल अस्पतालों और 41 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में नेक्स्ट जेन ई-हॉस्पिटल प्रणाली लागू है। इससे ओपीडी पंजीकरण, परामर्श, जांच, दवा वितरण और मरीजों का पूरा स्वास्थ्य रिकॉर्ड एक ही डिजिटल मंच पर उपलब्ध हो रहा है। इसका सीधा फायदा मरीजों को समय पर और गुणवत्तापूर्ण सेवाएं मिलने में हो रहा है।

आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन का क्रियान्वयन

अस्पतालों का हेल्थ फैसिलिटी रजिस्ट्रेशन (HFR) और चिकित्सकों-नर्सिंग स्टाफ का हेल्थ प्रोफेशनल रजिस्ट्रेशन (HPR) पूरा किया गया है। अस्पताल परिसरों में आभा कियोस्क स्थापित कर मरीजों को आयुष्मान भारत हेल्थ अकाउंट (आभा) बनाने की सुविधा दी गई है। स्कैन एंड शेयर और आभा आईडी से ऑनलाइन पंजीकरण के चलते मरीजों को लंबी कतारों से राहत मिली है।

डिजिटल एकीकरण के आंकड़े

जिला चिकित्सालय बस्तर: मई–जुलाई 2025 के बीच 60,045 ओपीडी पंजीकरण, जिनमें से 32,379 (53%) आभा लिंक के माध्यम से।

जिला चिकित्सालय दंतेवाड़ा: इसी अवधि में 33,895 पंजीकरण, जिनमें से 13,729 (40%) आभा लिंक के माध्यम से।

मुख्यमंत्री और स्वास्थ्य मंत्री के विचार

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा, “डिजिटल पंजीकरण, हेल्थ रिकॉर्ड और पारदर्शी सेवा प्रणाली से मरीजों को समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण इलाज मिल रहा है। यह मॉडल जल्द ही पूरे प्रदेश में लागू कर ‘स्वस्थ और सशक्त छत्तीसगढ़’ का संकल्प पूरा करेंगे।”

स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने कहा, “बस्तर का यह तकनीकी उन्नयन पूरे प्रदेश के लिए प्रेरणादायक है। लक्ष्य है कि इसे सभी जिलों में सुदृढ़ रूप से लागू किया जाए।”

निष्कर्ष

यह पहल सिर्फ स्वास्थ्य सेवाओं के डिजिटलीकरण तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण और दूरस्थ क्षेत्रों के लोगों को गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सुविधा से जोड़ने का सशक्त माध्यम है। बस्तर का अनुभव साबित करता है कि तकनीक, प्रशासनिक इच्छाशक्ति और जनभागीदारी साथ आएं तो विकास की रफ्तार कई गुना बढ़ जाती है।

 

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