Media24Media.com: दिमागी रूप से बीमार कर सकती है ज्यादा मोबाइल की आदत , जानें कैसे करें कंट्रोल

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दिमागी रूप से बीमार कर सकती है ज्यादा मोबाइल की आदत , जानें कैसे करें कंट्रोल

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आपसी दुश्मनी, ज़मीन-जायदाद और पैसे के लालच में किसी का मर्डर करने की खबरें तो आपने अक्सर पढ़ी-सुनी होंगी लेकिन NCR में दो मर्डर ऐसे हुए जिन्होंने लोगों को अंदर तक झकझोर दिया क्योंकि एक मर्डर भाई ने बहन का तो दूसरा कत्ल बहन ने छोटे भाई का किया। आखिर सगे भाई-बहन एक दूसरे की जान कैसे ले सकते हैं और वो भी एक मामूली से मोबाइल के लिए।


जी हां, एक केस में बहन ने ज़्यादा मोबाइल चलाने के लिए भाई को डांटा तो उसने गुस्से में आकर अपनी ही दीदी की जान ले ली और दूसरे मामले में मोबाइल ना देने पर लड़की ने छोटे भाई का खून कर दिया। क्योंकि मीनाक्षी सेलफोन की आदत बच्चों को इस कदर पड़ गई है कि इस बला को उनसे दूर करने की बात करते ही वो हो जाते हैं। उनके मन मुताबिक चीज़ ना हो तो अपनी बात मनवाने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं।

ये कहानी सिर्फ बच्चों की नहीं है बड़ें बड़े भी दिन हो या रात मोबाइल से चिपके रहते हैं घंटो रील्स देखते हैं। इससे ना सिर्फ उनकी नींद पर असर पड़ता है बल्कि सिरदर्द, माइग्रेन भी अटैक करता है। यही नहीं ज़्यादा मोबाइल चलाने से बचपन में ही आंखें बूढ़ी हो रही हैं स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू रेज स्किन खराब कर रही है तो, वहीं मोबाइल का रेडिएशन थायराइड के साथ कैंसर तक का रोग देता है।

अलग अलग स्टडी कहती हैं कि 30 मिनट से ज़्यादा मोबाइल चलाने से हाइपरटेंशन तो पूरा दिन वीडियो गेम्स खेलने से बच्चों की फिज़िकल-मेंटल हेल्थ खतरे में पड़ गई है। यानि बच्चे हों या बड़े, मोबाइल बम के साइलेंट विस्फोट से हर किसी को बचना ज़रूरी है और इसके लिए पता होना चाहिए कि डिजिटल डिटॉक्स कैसे करें फोन कितनी देर इस्तेमाल करें। कैसे वीडियो गेम्स की आदत छुड़ाएं। इसके लिए तो स्वामी रामदेव को बुलाते हैंजो मोबाइल के साइड इफेक्ट्स से बिगड़ी सेहत भी दुरुस्त करवाएंगे और इसके बेजा इस्तेमाल से कैसे बचें ये भी सिखाएंगे।

स्मार्टफोन विजन सिंड्रोम

नजर कमजोर
ड्राईनेस
पलकों में सूजन
रेडनेस
तेज रोशनी से दिक्कत
एकटक देखने की आदत
आंखों का दुश्मन
स्मार्टफोन की वजह से ब्लू लाइट, रेटिना डैमेज और नज़र कमज़ोर

फोन की लत से छुटकारा पाने के आसान उपाय

अपने फोन रखने की जगह जल्दी-जल्दी चेंज करते रहें। इससे, फोन पास रहने पर उसे ‘थोड़ा देख लेने’ की आदत को कंट्रोल करना आसान हो जाएगा।

दिनचर्या में कुछ समय ऐसा भी होना चाहिए जब आप फोन का इस्तेमाल ना करें।
घर में नो फोन ज़ोन बनाएं जहां फोन का इस्तेमाल मना हो।

माता-पिता अपने बच्चों को कड़ाई से कह दें कि उन्हें डाइनिंग टेबल पर फोन का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता ।

बच्चों को घर के बाहर जाकर खेलने और नये दोस्त बनाने के लिए प्रोत्साहित करें।
हर नये ऐप को डाउनलोड करने की बजाय केवल उन्हीं ऐप को फोन में रखें जो आपके लिए बहुत ज़रूरी हैं।

फोन में गेमिंग और जुए जैसी गतिविधियों से जुड़े ऐप्स ना डाउनलोड करे। इससे मोबाइल पर गेम खेलने का लालच कम होगा और आप कम समय तक फोन का इस्तेमाल करेंगे।

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