Media24Media.com: यूनानी चिकित्सा प्रणाली के विकास के लिए हाथ मिलाया

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यूनानी चिकित्सा प्रणाली के विकास के लिए हाथ मिलाया

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Unani system of medicine : आयुष मंत्रालय और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने संयुक्त रूप से भारत में यूनानी चिकित्सा पद्धति को बढ़ावा देने और विकसित करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने केंद्र प्रायोजित योजना (सीएसएस) प्रधानमंत्री जन विकास कार्यक्रम (पीएमजेवीके) के तहत 45.34 करोड़ रुपये के अनुदान को मंजूरी दी है। इस योजना की सहायता से हैदराबाद, चेन्नई, लखनऊ, सिलचर और बेंगलुरु स्थानों पर यूनानी चिकित्सा सुविधाओं को बेहतर बनाया जाएगा।


हैदराबाद, चेन्नई, लखनऊ, सिलचर और बेंगलुरु में यूनानी चिकित्सा की विभिन्न सुविधाओं की स्थापना के लिए अनुदान स्वीकृत किया गया है। यूनानी चिकित्सा में अनुसंधान के लिए केंद्रीय परिषद (सीसीआरयूएम) को कुल 35.52 करोड़ रुपये और राष्ट्रीय यूनानी चिकित्सा संस्थान (एनआईयूएम), बेंगलुरु को 9.81 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है।

हैदराबाद के राष्ट्रीय त्वचा रोग अनुसंधान संस्थान में यूनानी चिकित्सा में मौलिक अनुसंधान के लिए 16.05 करोड़ रुपये की लागत से यूनानी चिकित्सा अनुसंधान केंद्र की स्थापना की जाएगी। मंत्रालय ने यूनानी चिकित्सा, चेन्नई के क्षेत्रीय अनुसंधान संस्थान में प्रीक्लिनिकल प्रयोगशाला सुविधा के लिए 8.15 करोड़ रुपये की लागत का प्रस्ताव दिया है। केंद्रीय यूनानी चिकित्सा अनुसंधान संस्थान, लखनऊ में मस्कुलोस्केलेटल विकारों के लिए इलाज बित तदबीर (रेजिमेनल थेरेपी) के एक केंद्र के लिए 8.55 करोड़ रुपये और रीजनल रिसर्च इंस्टीट्यूट ऑफ यूनानी मेडिसिन, सिलचर में त्वचा एवं जीवन शैली संबंधी विकारों के लिए इलाज बित तदबीर (रेजिमेनल थेरेपी) के केंद्र के लिए 2.75 करोड़ रुपये का अनुदान स्वीकृत किया गया है।

बेंगलुरु के एनआईयूएम को मरीजों के परिचारकों के लिए विश्राम गृह की स्थापना के लिए 5.55 करोड़ रुपये और मॉडल यूनानी कॉस्मेटिक देखभाल के एक कौशल केंद्र, छोटे पैमाने पर यूनानी फार्मेसी और यूनानी कच्चे दवा भंडारण के लिए 4.26 करोड़ रुपये दिए जायेंगे।

अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय की अधिकार प्राप्त समिति ने 02 मार्च, 2023 को हुई अपनी बैठक में प्रस्तावों पर विचार किया था और चेन्नई, लखनऊ तथा सिलचर में इसकी तीन परियोजनाओं की कुल स्वीकृत लागत की पहली किस्त के रूप में सीसीआरयूएम को 4.86 करोड़ रुपये (25%) पहले ही जारी किए जा चुके हैं। हैदराबाद के लिए सीसीआरयूएम परियोजना और एनआईयूएम, बेंगलुरू की परियोजनाओं का अनुदान एक बार उनकी डीपीआर स्वीकृत होने और अन्य तकनीकियों को अंतिम रूप देने के बाद जारी किया जाएगा। पीएमजेवीके एक क्षेत्र विकास कार्यक्रम है जिसके तहत चिह्न्ति क्षेत्रों में सामुदायिक बुनियादी ढांचे और बुनियादी सुविधाओं का निर्माण किया जा रहा है।

केंद्रीय आयुष मंत्री सर्बानंद सोनोवाल के नेतृत्व में मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों ने अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय और आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा के साथ इस मामले पर चर्चा की तथा केंद्रीय अल्पसंख्यक मामलों की मंत्री श्रीमती स्मृति जुबिन इरानी के साथ इस मामले को आगे बढ़ाया था। दोनों मंत्रालयों के संयुक्त प्रयासों के माध्यम से, अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने पहली बार यूनानी चिकित्सा के लिए वित्तीय सहायता देने पर विचार किया है।

 

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