Media24Media.com: प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम के आज 100 एपिसोड पूरे हुए

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम के आज 100 एपिसोड पूरे हुए

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PM Modi Man Ki Baat : पीएम मोदी के मन की बात का आज 100वां एपिसोड है जिसे अलग-अलग जगहों पर प्रसारित किया है. इसी के साथ पीएम मोदी ने मन की बात को एक पर्व बताया है और बहुत सी बड़ी बातें पीएम मोदी ने कही है. 


प्रधानमंत्री ने कहा- 3 अक्टूबर 2014 को विजयादशमी से शुरू हुआ यह त्योहार हम हर महीने मनाते हैं। मन की बात कार्यक्रम नहीं, यह मेरे लिए आस्था,पूजा और व्रत है। जैसे लोग ईश्वर की पूजा करने जाते हैं तो प्रसाद की थाल लाते हैं। मन की बात ईश्वर रूपी जनता जनार्दन के चरणों में प्रसाद की थाल जैसे है।

मोदी ने कहा कि आज मन की बात का 100वां एपिसोड है। मुझे आप सबकी हजारों चिट्ठियां और संदेश मिले। कोशिश की है कि ज्यादा से ज्यादा चीजों को पढ़ पाऊं देख पाऊं। संदेशों को समझने की कोशिश करूं। कई बार पत्र पढ़ते वक्त भावुक हो गया, भावनाओं में बह गया और संभाला। 100वें एपिसोड पर सच्चे दिल से कहता हूं कि बधाई आपने दी, पात्र आप सभी श्रोता हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि तीन अक्टूबर 2014 को विजयादशमी के मौके पर हम सबने मिलकर विजयादशमी के दिन मन की बात की यात्रा शुरू की थी। विजयादशमी यानी बुराई पर अच्छाई की जीत का पर्व। यह एक ऐसा पर्व बन गया है, जो हर महीने आता है। हम इसमें सकारात्मकता और लोगों की पार्टिसिपेशन को सेलीब्रेट करते हैं। यकीन नहीं होता कि इसे इतने साल गुजर गए। हर एपिसोड नया रहता है। देशवासियों की नई सफलताओं का विस्तार इसमें मिलता है। देश के कोने-कोने से हर आयु वर्ग के लोग जुड़े।

मोदी बोले कि मन की बात जिस विषय से जुड़ी वो जन आंदोलन बन गई। आप लोगों ने बना दिया। जब मैंने तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के साथ मन की बात की तो इसकी चर्चा दुनिया में हुई। मन की बात मेरे लिए दूसरों के गुणों की पूजा का मौका है। मेरे मार्गदर्शक थे लक्ष्मण राव, वो कहते थे कि हमें दूसरों के गुणों की पूजा करनी चाहिए। उनकी इस बात ने मुझे प्रेरणा देती है। यह कार्यक्रम दूसरों से सीखने की प्रेरणा बन गया है। इसने मुझे आपसे कभी दूर नहीं होने दिया।

उन्होंने ने कहा कि जब मैं गुजरात का सीएम था, तब सामान्य तौर पर लोगों से मिलना-जुलना हो जाता था। 2014 में दिल्ली आने के बाद मैंने पाया कि यहां का जीवन और काम का स्वरूप अलग है। सुरक्षा का तामझाम, समय की सीमा सबकुछ अलग है। शुरुआती दिनों में खाली-खाली सा महसूस करता था।

मोदी ने कहा कि 50 साल पहले घर इसलिए नहीं छोड़ा था कि अपने ही देशवासियों से संपर्क नहीं हो पाएगा। देशवासी सबकुछ हैं और उनसे कटकर नहीं रह सकता था। मन की बात ने मुझे मौका दिया। पदभार और प्रोटोकॉल व्यवस्था तक सीमित रहा। जनभाव मेरा अटूट अंग बन गया।

प्रधानमन्त्री ने कहा कि हर महीने मैं देशवासियों के त्याग की पराकाष्ठा देखता हूं। मुझे लगता ही नहीं है कि आपसे थोड़ा भी दूर हूं। मन की बात कार्यक्रम नहीं, यह मेरे लिए आस्था,पूजा और व्रत है। जैसे लोग ईश्वर की पूजा करने जाते हैं तो प्रसाद की थाल लाते हैं। मन की बात ईश्वर रूपी जनता जनार्दन के चरणों में प्रसाद की थाल जैसे है। यह मेरे लिए अध्यात्मिक यात्रा बन गया है। अहम से वयम की यात्रा है। यह तो मैं नहीं, तू ही की संस्कार साधना है।

उन्होंने ने कहा कि कल्पना करिए कि कोई देशवासी 40-40 साल से निर्जन जमीन पर पेड़ लगा रहा है। कोई 30 साल से जल संरक्षण के लिए बावड़ी बना रहा है। कोई निर्धन बच्चों को पढ़ा रहा है। कोई गरीबों की इलाज में मदद कर रहा है। कितनी ही बार मन की बात में इनका जिक्र करते वक्त मैं भावुक हुआ। आकाशवाणी के साथियों को इसे दोबारा रिकॉर्ड करना पड़ा। मन की बात में जिन लोगों का हम जिक्र करते हैं, वे सब हमारे हीरोज हैं, जिन्होंने इस कार्यक्रम को जीवंत बनाया है। आज जब हम 100वें एपिसोड के पड़ाव पर पहुंचे हैं तो मेरी इच्छा है कि एक बार फिर इन हीरोज के पास जाकर उनके बारे में जानें।

प्रधानमंत्री ने देशभर में जून 2015 में सेल्फी विद डॉटर कैंपेन शुरू किया था। PM ने कहा- मैंने बेटी बचाओ अभियान हरियाणा से शुरू किया। ये अभियान पूरी दुनिया में फैल गया। जीवन में बेटी का स्थान कितना बड़ा होता है, इस कैंपेन से यह प्रकट हुआ। आज हरियाणा में जेंडर रेशियो में सुधार आया। उन्होंने इस कैंपेन का आइडिया देने वाले हरियाणा के सुनील जगलान से बातचीत की।

मोदी- आज सुनील जी से गप्प मार लेते हैं। सुनील जी सेल्फी विद डॉटर हर किसी को याद है। आपको कैसा लग रहा है।

सुनील- ये हमारे प्रदेश हरियाणा से पानीपत की चौथी लड़ाई शुरू की थी, यह मेरे लिए और बेटियों के पिता के लिए बहुत बड़ी बात है।

मोदी- आपकी बिटिया कैसी हैं?

सुनील- दोनों बेटियां आपकी बहुत प्रशंसक हैं। उन्होंने अपने क्लास मेट्स से थैंक्यू प्रधानमंत्री जी लेटर भी लिखवाए थे।

हरियाणा के सुनील जगलान अपनी दोनों बेटियों के साथ सेल्फी लेते हुए।

जम्मू-कश्मीर में पेंसिल स्लेट बनाने वाले मंजूर अहमद से बात की

साथियों मुझे संतोष है कि मन की बात में हमने नारी शक्ति की प्रेरणादायी गाथाओं का जिक्र किया है। छत्तीसगढ़ के गांव की महिलाओं के स्वच्छता अभियान चलाने वाले स्वसहायता समूह की बात की। तमिलनाडु की आदिवासी समुदाय की टेराकोटा कप बनाने वाली महिलाओं की बात की। वहीं 20 हजार महिलाओं ने वेल्लोर में नाग नदी को पुनर्जीवित किया। मन की बात में जम्मू-कश्मीर की पेंसिल स्लेट का जिक्र करते हुए मंजूर अहमद का जिक्र किया था। वो साथ हैं।

मंजूर जी पेंसिल-स्लेट का काम कैसा चल रहा है?

मंजूर अहमद- ये काम बढ़ गया है, बहुत लोगों को रोजगार मिल गया। अभी 200 प्लस लोग काम कर रही हैं। आगे 200 लोगों को और रोजगार मिलेगा।

मोदी- मंजूरजी आपने कहा था कि इस काम की पहचान नहीं, आपकी पहचान नहीं। आपको पीड़ा थी। अब पहचान भी है और 200 से ज्यादा लोगों को रोजगार दे रहे हैं।

मंजूर- किसानों को भी फायदा मिला। 2 हजार का ट्री बेचते थे और अब 5 हजार बढ़ गई है।

मोदी- आपने लोकल फॉर वोकल को जमीन पर उतार दिया।





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