Media24Media.com: राज्योत्सव प्रदर्शनी में जनजातीय बाजार हाटुम बना लोगों के आकर्षण का केंद्र

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राज्योत्सव प्रदर्शनी में जनजातीय बाजार हाटुम बना लोगों के आकर्षण का केंद्र

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रायपुर। छतीसगढ़ी आभूषणों के इस स्टाल की संचालिका सुश्री भेनू ठाकुर और उनके सहयोगी प्रीतेश साहू जी ने बताया कि हाटुम एक गोड़ी शब्द है जिसका अर्थ बाजार होता है। हाटुम एक ऐसा प्लेटफॉर्म है जिसमे विभिन्न जनजातियों के  द्वारा बनाई गई सामग्रियों की बिक्री की जाती है। इसमें गोंड, धुरवा, उरांव व बैगा जनजातियों के द्वारा प्रयोग की जाने वाली सामग्री, आभूषण एवं परिधान सम्मिलित है।



इसमें गिलट से बने आभूषण जिसमे सुता, पहुंची, रुपया माला, करधनी, बनुवारिया, ककनी, मुंदरी, पैरी आदि सम्मिलित है। बांस, लकड़ी व घास से बनी वस्तुओ में पिसवा, गप्पा, छोटे पर्स, पनिया (कंघी), पीढ़ा, चटाई सम्मिलित है।



हाटुम एक गोड़ी शब्द है जिसका अर्थ है बाजार

धुरवा जनजाति के द्वारा आभूषणों के रूप में प्रयोग की जाने वाली सिहाडी के बीजों से बने माला व पैजन सम्मिलित है। सभी जनजातियों के द्वारा प्रयोग की जाने वाली झालिंग, फुनद्रा, कौड़ी का श्रृंगार, नेर्क माला, आदि आभूषणों को सम्मिलित किया गया है।


साथ ही जनजातीय समूहों के द्वारा प्रयोग में लाए जाने वाले परिधानों में साड़ी, गमछा, मास्क, कोट, कुर्ता, बैग एवं आदि भी शामिल हैं। सुश्री भेनु ठाकुर का कहना है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने इस महोत्सव में आदिवासी युवाओं को अपनी पहचान स्थापित करने का जो मौका दिया है उसने के लिए वो मुख्यमंत्री को दिल से धन्यवाद देते हैं।
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