Media24Media.com: सरकारी आदेश से हड़कंप, कोरोना का टीका नहीं लगाया तो नहीं मिलेगी सैलरी

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सरकारी आदेश से हड़कंप, कोरोना का टीका नहीं लगाया तो नहीं मिलेगी सैलरी

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पूरे देश में कोरोना टीकाकरण की शुरुआत हो गई है और step by step इसे लोगों को लगाया जा रहा है। लेकिन इसे सबसे पहले स्वास्थ्यकर्मियों (Health Workers) को लगाया जाना है। जिसके लिए सरकार से गाइड लाइन भी जारी हुआ है। हालांकि यह स्वैच्छिक है, लेकिन झारखंड के कोडरमा जिले के स्वास्थ विभाग के अधिकारी ने एक आदेश (corona vaccination order) जारी कर बवाल खड़ा कर दिया है। हालांकि विरोध के बाद उस आदेश को वापस ले लिया गया।





स्थानीय मीडिया की एक खबर के अनुसार झारखंड के कोडरमा जिले के स्वास्थ विभाग के अधिकारी ने आदेश जारी किया कि जो स्वास्थ्यकर्मी (Health Workers) कोरोना का टीका नहीं लगवायेगा, उनका वेतन रोक दिया जाएगा। इसके बाद वहां के स्वास्थ्यकर्मियों (Health Workers) ने इस आदेश का विरोध शुरू कर दिया। उनके विरोध के बाद इस आदेश को वापस ले लिया गया है।





स्वास्थ विभाग के कर्मचारी नहीं दिखा रहे रूचि (corona vaccination order)





दरअसल, कोविड के टीकाकरण को लेकर स्वास्थ विभाग के कर्मचारी रुचि नहीं दिख रहे हैं। लक्ष्य से काफी कम लोगों ने अबतक टीकाकरण में हिस्सा लिया है। इसे लेकर तरह तरह की धारणा बानी हुई है। कोडरमा जिले में मुख्य चिकित्सा अधिकारी एवं जिला स्वास्थ्य समिति की मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी पार्वती कुमारी नाग और जिला प्रतिरक्षण अधिकारी एवं एसीएमओ डॉ. अभय भूषण प्रसाद की ओर से 16 जनवरी एक आदेश जारी हुआ था।





टीकाकरण का प्रमाण पत्र देने के बाद ही मिलेगी सैलरी





जिसमें स्वास्थ्य विभाग के कर्मचारियों को चेतावनी देते हुए लिखा गया था कि ''कार्यालय आदेश ज्ञापांक 90, कोडरमा दिनांक 15-01-2021 के निर्देशानुसार जो सरकारी सेवक कोविड-19 का टीका नहीं लगाये हैं, वे शीघ्र कोविड-19 टीका लगायें। कोविड-19 का टीकाकरण नहीं लेने की स्थिति में अगले आदेश तक संबन्धित सरकारी सेवकों का वेतन अवरुद्ध रहेगा। लिये गये टीकाकरण का प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने के बाद ही वेतन का भुगतान किया जायेगा।'





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झारखंड के प्रमुख स्वास्थ्य सचिव नितिन ने स्थानीय मीडिया को बताया कि इस तरह का आदेश निकाला गया था। लेकिन इसे वापस ले लिया गया है। दरअसल टीकाकरण के पहले दिन कोडरमा जिले के दोनों केन्द्रों पर सौ-सौ लोगों को टीका लगाने का लक्ष्य था। लेकिन जब लोग कम संख्या में पहुंचे। स्वास्थ विभाग ने उनपर दबाव डालने के लिए यह आदेश जारी किया था। लेकिन इस आदेश के बाद भी 70 प्रतिशत लोगों ने ही टीकाकरण करवाया।


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