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समय रैना और वरुण धवन का वीडियो वायरल, ‘इंडियाज़ गॉट लेटेंट’ के नए सीजन को लेकर बढ़ी हलचल

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मुंबई- कॉमेडियन समय रैना का चर्चित कॉमेडी शो ‘इंडियाज़ गॉट लेटेंट’ एक बार फिर सोशल मीडिया पर सुर्खियों में है। शो के नए सीजन को लेकर दर्शकों के बीच पहले से ही काफी उत्सुकता है और अब बॉलीवुड अभिनेता वरुण धवन की मौजूदगी वाले प्रोमो ने इस चर्चा को और तेज कर दिया है।

सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में समय रैना और वरुण धवन के बीच मजेदार बातचीत और हास्य से भरपूर अंदाज देखने को मिल रहा है। वीडियो सामने आते ही इसे लेकर सोशल मीडिया पर प्रतिक्रियाओं का सिलसिला शुरू हो गया और शो के प्रशंसक नए एपिसोड को लेकर काफी उत्साहित नजर आ रहे हैं।

वरुण धवन की एंट्री ने बढ़ाया उत्साह

‘इंडियाज़ गॉट लेटेंट’ में समय रैना अपने बेबाक और अलग तरह के हास्य के लिए जाने जाते हैं। ऐसे में वरुण धवन जैसे लोकप्रिय बॉलीवुड अभिनेता की शो में मौजूदगी ने दर्शकों की दिलचस्पी और बढ़ा दी है।

प्रोमो में दोनों के बीच हल्के-फुल्के मजाक और मजेदार बातचीत देखने को मिलती है। यही वजह है कि शो का छोटा-सा वीडियो क्लिप भी सोशल मीडिया पर तेजी से चर्चा में आ गया है।

सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा वीडियो

समय रैना के शो से जुड़े वीडियो अक्सर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होते हैं। इस बार वरुण धवन की मौजूदगी ने इस चर्चा को और बड़ा बना दिया है।

प्रशंसक वीडियो को साझा करते हुए अपनी प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। कई लोग पूरे एपिसोड का इंतजार कर रहे हैं, जबकि कुछ दर्शक समय रैना और वरुण धवन की बातचीत को लेकर अपनी उत्सुकता जाहिर कर रहे हैं।

नए सीजन को लेकर दर्शकों में उत्सुकता

‘इंडियाज़ गॉट लेटेंट’ के नए सीजन को लेकर सोशल मीडिया पर लगातार चर्चा बनी हुई है। शो का अनोखा प्रारूप, समय रैना की कॉमेडी और अलग-अलग मेहमानों की मौजूदगी इसे दर्शकों के बीच खास बनाती है।

वरुण धवन की एंट्री के बाद अब इस एपिसोड से दर्शकों की उम्मीदें और बढ़ गई हैं। प्रोमो के बाद लोग यह जानने के लिए उत्सुक हैं कि पूरे एपिसोड में दोनों के बीच किस तरह की बातचीत और कॉमेडी देखने को मिलेगी।

आज स्ट्रीम होने की जानकारी

रिपोर्ट्स के अनुसार, ‘इंडियाज़ गॉट लेटेंट’ के नए सीजन का वरुण धवन वाला एपिसोड 4 सितंबर 2026 को नेटफ्लिक्स पर स्ट्रीम होने की जानकारी है। ऐसे में आज दर्शकों की नजर इस खास एपिसोड पर रहेगी।

मनोरंजन और वायरल कंटेंट का नया मेल

समय रैना का शो अपनी अनस्क्रिप्टेड और बेबाक कॉमेडी के कारण सोशल मीडिया पर चर्चा बटोरता रहा है। दूसरी ओर, वरुण धवन की लोकप्रियता को देखते हुए इस एपिसोड के छोटे-छोटे हिस्सों के भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल होने की संभावना है।

निष्कर्ष

कुल मिलाकर, समय रैना और वरुण धवन की जोड़ी ने ‘इंडियाज़ गॉट लेटेंट’ के नए एपिसोड को लेकर सोशल मीडिया का माहौल गर्म कर दिया है। वायरल प्रोमो और दोनों के मजेदार अंदाज ने दर्शकों की उत्सुकता बढ़ा दी है। अब सभी की नजर पूरे एपिसोड पर है कि इसमें दर्शकों को कितना मनोरंजन और कितना बेबाक हास्य देखने को मिलता है।

भारत को लेकर वायरल AI वीडियो पर अमेरिकी महिला का करारा जवाब, बोलीं—“यह भारत की असली तस्वीर नहीं”

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नई दिल्ली- भारत को लेकर सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक AI-जनरेटेड वीडियो ने इन दिनों इंटरनेट पर बहस छेड़ दी है। वीडियो में भारत की ऐसी तस्वीर पेश की गई है, जिसे कई लोग नकारात्मक और रूढ़िवादी नजरिए से जोड़कर देख रहे हैं। इसी बीच एक अमेरिकी महिला ने इस वीडियो पर खुलकर आपत्ति जताते हुए भारत के समर्थन में अपनी बात रखी है।

अमेरिकी महिला ने वायरल वीडियो की आलोचना करते हुए कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता से तैयार की गई कुछ तस्वीरों या वीडियो के आधार पर भारत जैसे विशाल और विविध देश को समझना सही नहीं है। उनका कहना है कि भारत की वास्तविकता इससे कहीं अधिक व्यापक और विविध है।

AI वीडियो को लेकर क्यों शुरू हुई बहस?

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे इस AI वीडियो में भारत को कुछ चुनिंदा नकारात्मक दृश्यों और रूढ़िवादी धारणाओं के माध्यम से दिखाया गया। वीडियो तेजी से अलग-अलग सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर शेयर होने लगा, जिसके बाद यूजर्स के बीच इस बात को लेकर चर्चा शुरू हो गई कि AI तकनीक का इस्तेमाल किसी देश या समाज की छवि को किस तरह प्रभावित कर सकता है।

आलोचकों का कहना है कि AI-generated कंटेंट कई बार वास्तविकता और कल्पना के बीच अंतर को धुंधला कर देता है। ऐसे में बिना स्रोत और संदर्भ की जांच किए किसी वायरल वीडियो को सच मान लेना भ्रामक हो सकता है।

अमेरिकी महिला ने भारत के पक्ष में रखी बात

वायरल वीडियो देखने के बाद अमेरिकी महिला ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट/वीडियो के जरिए इसकी आलोचना की। उन्होंने भारत की विविध संस्कृति, लोगों और जीवनशैली की ओर ध्यान दिलाते हुए कहा कि किसी भी देश को केवल नकारात्मक या सीमित तस्वीरों के जरिए परिभाषित नहीं किया जा सकता।

उनकी प्रतिक्रिया सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में भारतीय यूजर्स ने उनका समर्थन किया। कई लोगों ने कहा कि विदेशी नागरिक द्वारा भारत की वास्तविकता को लेकर इस तरह आवाज उठाना सकारात्मक संदेश देता है।

भारत की तस्वीर सिर्फ AI वीडियो से तय नहीं हो सकती

भारत दुनिया के सबसे विविध देशों में से एक है, जहां अलग-अलग भाषाएं, संस्कृतियां, परंपराएं, खान-पान और जीवनशैली देखने को मिलती हैं। ऐसे में किसी AI मॉडल द्वारा तैयार किए गए कुछ दृश्यों को पूरे देश की वास्तविक तस्वीर मानना उचित नहीं होगा।

यह मामला एक बार फिर इस सवाल को भी सामने लाता है कि AI-generated कंटेंट के दौर में सोशल मीडिया पर दिखाई जाने वाली तस्वीरों और वीडियो की सत्यता की जांच कितनी जरूरी है।

सोशल मीडिया पर छिड़ी चर्चा

अमेरिकी महिला की प्रतिक्रिया के बाद यह मामला सोशल मीडिया पर और तेजी से चर्चा में आ गया है। कई यूजर्स ने उनके बयान की सराहना की, जबकि कुछ लोगों ने AI तकनीक के जरिए देशों और समुदायों की छवि प्रस्तुत करने के तरीके पर सवाल उठाए।

फिलहाल यह पूरा मामला इस बात की याद दिलाता है कि वायरल होना और वास्तविक होना एक ही बात नहीं है। AI से तैयार किसी भी कंटेंट को शेयर करने से पहले उसके स्रोत, संदर्भ और वास्तविकता की जांच करना बेहद जरूरी है।

श्रीनगर एयरपोर्ट पर मुंबई से पहुंची फ्लाइट हादसे का शिकार, लैंडिंग के दौरान ब्रेक सिस्टम फेल होने की सूचना

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श्रीनगर- मुंबई से श्रीनगर पहुंची एक यात्री फ्लाइट शुक्रवार को श्रीनगर एयरपोर्ट पर लैंडिंग के दौरान हादसे का शिकार हो गई। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, विमान के ब्रेक सिस्टम में खराबी आने के बाद लैंडिंग के दौरान विमान नियंत्रण में नहीं रह सका और टक्कर हो गई।

हादसे के बाद एयरपोर्ट पर कुछ समय के लिए अफरा-तफरी का माहौल बन गया। विमान के अगले हिस्से को नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, राहत की सबसे बड़ी बात यह है कि विमान में सवार सभी यात्री सुरक्षित बताए जा रहे हैं।

लैंडिंग के दौरान आई तकनीकी समस्या

बताया जा रहा है कि मुंबई से श्रीनगर पहुंची फ्लाइट सामान्य तरीके से एयरपोर्ट पर उतर रही थी। इसी दौरान लैंडिंग के बाद विमान के ब्रेक सिस्टम में तकनीकी समस्या सामने आई। ब्रेक ठीक से काम नहीं करने के कारण विमान को रोकने में दिक्कत हुई और इसके बाद विमान की टक्कर हो गई।

हादसे के तुरंत बाद एयरपोर्ट पर मौजूद सुरक्षा और बचाव दल सक्रिय हो गए। विमान की जांच की गई और यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकालने की कार्रवाई की गई।

सभी यात्री सुरक्षित, बड़ा हादसा टला

इस घटना में सबसे राहत वाली खबर यह है कि किसी यात्री के हताहत होने की सूचना नहीं है। विमान के अगले हिस्से में नुकसान हुआ है, लेकिन यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित कर ली गई।

घटना के बाद एयरपोर्ट अधिकारियों और संबंधित एजेंसियों की ओर से विमान की तकनीकी स्थिति और हादसे के कारणों की जांच की जा रही है। विस्तृत जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि ब्रेक सिस्टम में खराबी किस वजह से आई और टक्कर किन परिस्थितियों में हुई।

हादसे की जांच जारी

विमानन सुरक्षा से जुड़ी एजेंसियां घटना के हर पहलू की जांच करेंगी। इसमें विमान के ब्रेक सिस्टम, लैंडिंग के दौरान उसकी गति, रनवे की स्थिति और चालक दल की कार्रवाई समेत अन्य तकनीकी पहलुओं की जांच की जा सकती है।

फिलहाल इस घटना में जानमाल का बड़ा नुकसान नहीं होना राहत की बात है। यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए विमान को जांच के लिए अलग किया गया है और घटना से जुड़ी विस्तृत जानकारी का इंतजार है।

CGPSC परीक्षा परिणाम जारी: 608 अभ्यर्थी इंटरव्यू के लिए चयनित

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रायपुर- छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग (CGPSC) ने राज्य सेवा मुख्य परीक्षा-2025 का परिणाम जारी कर दिया है। परीक्षा में सफल 608 अभ्यर्थियों का चयन अब अगले चरण यानी साक्षात्कार के लिए किया गया है।

आयोग की प्रक्रिया के अनुसार चयनित अभ्यर्थियों के साक्षात्कार 21 सितंबर 2026 से शुरू होने की जानकारी है। परिणाम जारी होने के साथ ही अभ्यर्थियों में आगे की चयन प्रक्रिया को लेकर उत्साह बढ़ गया है।

राज्य सेवा परीक्षा के माध्यम से विभिन्न महत्वपूर्ण प्रशासनिक पदों पर नियुक्तियां की जानी हैं। मुख्य परीक्षा में सफल उम्मीदवार अब साक्षात्कार की तैयारी में जुट गए हैं। अंतिम चयन मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार में प्रदर्शन के आधार पर किया जाएगा।

आगे क्या होगा?

  • मुख्य परीक्षा: परिणाम जारी

  • साक्षात्कार: 21 सितंबर 2026 से प्रस्तावित

  • चयनित अभ्यर्थी: 608

  • अगला चरण: साक्षात्कार के बाद अंतिम चयन सूची

CGPSC के इस परिणाम का लंबे समय से इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों के लिए यह बड़ी खबर है। अब सभी चयनित उम्मीदवारों की नजर साक्षात्कार और अंतिम मेरिट सूची पर रहेगी।

एनवीडिया का बड़ा एआई कदम: हगिंग फेस को करीब 13 अरब डॉलर में खरीदने की तैयारी

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एनवीडिया (Nvidia) एआई के क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाने जा रही है। रिपोर्टों के अनुसार, कंपनी हगिंग फेस (Hugging Face) को करीब 13 अरब डॉलर में खरीदने की तैयारी कर रही है।

यह सौदा पूरा होने पर एआई उद्योग के सबसे बड़े अधिग्रहणों में शामिल हो सकता है। हगिंग फेस एआई मॉडल, मशीन लर्निंग टूल्स और डेवलपर्स के लिए ओपन-सोर्स प्लेटफॉर्म के लिए जाना जाता है।

इस संभावित सौदे को एआई के क्षेत्र में बुनियादी ढांचे, तकनीक और प्रतिभाशाली विशेषज्ञों पर बढ़ती प्रतिस्पर्धा के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। एनवीडिया पहले से ही एआई चिप्स और कंप्यूटिंग इंफ्रास्ट्रक्चर में एक प्रमुख कंपनी है, जबकि हगिंग फेस का मजबूत आधार एआई डेवलपर्स और ओपन-सोर्स मॉडल समुदाय में है।

अगर यह अधिग्रहण पूरा होता है, तो एनवीडिया को एआई सॉफ्टवेयर, मॉडल और डेवलपर समुदाय में अपनी मौजूदगी बढ़ाने में मदद मिल सकती है। साथ ही, इससे एआई तकनीक के हार्डवेयर और सॉफ्टवेयर दोनों क्षेत्रों में एनवीडिया की स्थिति और मजबूत होने की संभावना है।

कुल मिलाकर, हगिंग फेस का संभावित अधिग्रहण यह दिखाता है कि दुनिया की बड़ी टेक कंपनियां एआई की अगली दौड़ में तकनीक के साथ-साथ एआई प्रतिभा और डेवलपर इकोसिस्टम पर भी बड़ा निवेश कर रही हैं।

Nepal Flood Rescue: 9 दिन बाद टनल से जिंदा निकले 2 कर्मचारी, देश में जगी नई उम्मीद

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काठमांडू- नेपाल में विनाशकारी बाढ़ के बीच शुक्रवार को एक ऐसी खबर सामने आई जिसने राहत और बचाव अभियान में नई उम्मीद जगा दी। लगभग नौ दिनों से एक जलविद्युत परियोजना की सुरंग में फंसे दो कर्मचारियों को जिंदा बाहर निकाल लिया गया। दोनों कर्मचारी Upper Trishuli 3A Hydropower Project की सुरंग में फंसे हुए थे।

बचाए गए दोनों कर्मचारियों की पहचान 30 वर्षीय Sanjay Sah, जो mechanical foreman हैं, और 45 वर्षीय Kabir Maharjan, जो mechanical supervisor हैं, के रूप में हुई है। अधिकारियों के मुताबिक, दोनों को सुरंग के अंदर करीब 170 मीटर की गहराई से सुरक्षित बाहर निकाला गया।

26 अगस्त को आई थी विनाशकारी बाढ़

यह पूरा हादसा 26 अगस्त 2026 को हुआ, जब नेपाल के Trishuli River क्षेत्र में भारी बाढ़ और मलबे ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी। रिपोर्टों के अनुसार, नेपाल-तिब्बत सीमा के पास हुए ice और rock avalanche/glacier collapse के बाद अचानक आई बाढ़ ने नदी के आसपास के इलाकों, सड़कों और कई hydropower projects को भारी नुकसान पहुंचाया।

बाढ़ का पानी अपने साथ भारी मात्रा में कीचड़, चट्टान और मलबा लेकर आया। इससे जलविद्युत परियोजनाओं की सुरंगों के प्रवेश द्वार और अंदर के रास्ते बुरी तरह प्रभावित हुए। बड़ी संख्या में कर्मचारी लापता हो गए और कई लोगों के सुरंगों के अंदर फंसे होने की आशंका जताई गई।

सुरंग के अंदर कैसे बचे दोनों कर्मचारी?

Sanjay Sah ने rescue के बाद बताया कि जब बाढ़ का पानी underground area में घुसना शुरू हुआ, तब वहां बड़ी संख्या में कर्मचारी मौजूद थे। उन्होंने पहले अपने साथियों को सुरक्षित बाहर निकालने की कोशिश की।

Sah के मुताबिक, उस समय वहां सामान्य से कहीं ज्यादा लोग मौजूद थे और उन्होंने कई लोगों को बाहर निकलने के लिए कहा। दूसरों को बचाने की कोशिश में उनका खुद का बाहर निकलने का मौका निकल गया और वे सुरंग के अंदर फंस गए।

उन्होंने बताया कि सुरंग में फंसे रहने के दौरान उन्होंने प्रार्थना करते हुए समय बिताया और बाहर से मदद पहुंचने का इंतजार किया। उनके मुताबिक, आसपास कुछ और लोगों की आवाजें भी सुनाई दे रही थीं, जिससे यह उम्मीद बढ़ी कि सुरंग में अन्य लोग भी जीवित हो सकते हैं।

आवाज सुनाई देने के बाद तेज हुआ Rescue Operation

कई दिनों तक सुरंग में फंसे लोगों की तलाश जारी रही। Rescue teams ने भारी मशीनों की मदद से सुरंग के रास्ते में जमा मलबा हटाना शुरू किया।

शुक्रवार को अभियान के दौरान rescuers को सुरंग के अंदर से आवाज सुनाई देने की सूचना मिली। इसके बाद बचाव दल ने उसी दिशा में खुदाई और मलबा हटाने का काम तेज कर दिया। लगभग 50 से 60 मीटर तक मलबा हटाने के बाद rescue teams उन कर्मचारियों तक पहुंचने में सफल हुईं।

बचाव अभियान में Nepal Army, Nepal Police और Armed Police Force के जवानों के साथ technical experts भी शामिल रहे। विदेशी tunnel-rescue specialists ने भी अभियान में सहायता और सलाह दी।

अस्पताल में कराया गया भर्ती

सुरंग से बाहर निकाले जाने के बाद दोनों कर्मचारियों को प्राथमिक उपचार दिया गया और फिर उन्हें काठमांडू के अस्पताल ले जाया गया।

रिपोर्टों के अनुसार, Sanjay Sah की हालत स्थिर बताई गई है, जबकि Kabir Maharjan को इलाज और निगरानी की जरूरत है। दोनों को rescue site से Kathmandu ले जाया गया।

Kabir Maharjan भी पहुंचे थे Maintenance के लिए

Kabir Maharjan स्थायी रूप से Trishuli 3A में तैनात नहीं थे। वे routine maintenance work के लिए वहां पहुंचे थे। उनके परिवार के मुताबिक, वह 25 अगस्त को project site के लिए रवाना हुए थे और अगले दिन बाढ़ आने के बाद उनसे संपर्क टूट गया।

उनके परिवार के लिए नौ दिन बेहद मुश्किल रहे। फोन बंद होने के बाद परिवार लगातार अधिकारियों से संपर्क कर उनके बारे में जानकारी लेने की कोशिश करता रहा। उनके जिंदा मिलने की खबर के बाद परिवार में राहत की लहर दौड़ गई।

लेकिन अभी Rescue Operation खत्म नहीं हुआ

दो कर्मचारियों के जिंदा मिलने से जहां राहत की उम्मीद बढ़ी है, वहीं Nepal में rescue operation अभी भी जारी है।

अधिकारियों के मुताबिक, कई hydropower projects की सुरंगों में अभी भी बड़ी संख्या में लोग लापता हैं। अलग-अलग रिपोर्टों में सैकड़ों workers के लापता होने और कई लोगों के सुरंगों में फंसे होने की बात कही गई है। Trishuli 3A site पर भी rescuers को उम्मीद है कि कुछ और लोग जीवित हो सकते हैं।

Rescue teams अब सुरंगों में संभावित survivable pockets की तलाश कर रही हैं। मशीनों, tunnel maps, oxygen systems और technical expertise की मदद से अभियान लगातार आगे बढ़ाया जा रहा है।

9 दिन बाद मिली जिंदगी की उम्मीद

नेपाल की इस भीषण प्राकृतिक आपदा में हजारों लोगों की जान गई है और बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं। ऐसे समय में नौ दिन तक सुरंग के अंदर फंसे दो कर्मचारियों का जिंदा बचना एक बड़ी राहत और उम्मीद की खबर बनकर सामने आया है।

दोनों की कहानी ने rescue teams को भी नई ऊर्जा दी है। अब उनकी सुरक्षित वापसी के बाद सबसे बड़ी उम्मीद यही है कि सुरंगों में फंसे अन्य लोगों को भी जल्द से जल्द जिंदा बाहर निकाला जा सके।

बड़ी बात

9 दिन तक अंधेरी और मलबे से घिरी सुरंग में फंसे दो कर्मचारियों का जिंदा बचना Nepal के अब तक के सबसे कठिन rescue operations में से एक में उम्मीद की किरण बन गया है। Rescue teams का अभियान जारी है और अब नजर इस बात पर है कि क्या सुरंग के अंदर से और लोगों को भी सुरक्षित बाहर निकाला जा सकता है।

ISRO की बड़ी कामयाबी: GSLV-F17 ने EOS-05 को सफलतापूर्वक अंतरिक्ष में पहुंचाया

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भारत ने अंतरिक्ष के क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने शुक्रवार को GSLV-F17 रॉकेट के जरिए EOS-05 Earth Observation Satellite का सफल प्रक्षेपण किया। यह मिशन भारत की पृथ्वी निगरानी और अत्याधुनिक satellite imaging क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

ISRO के मुताबिक, GSLV-F17 ने EOS-05 को निर्धारित Sub-Geosynchronous Transfer Orbit (Sub-GTO) में सफलतापूर्वक स्थापित किया। EOS-05 को geosynchronous orbit से पृथ्वी की imaging के लिए भारत का पहला satellite बताया गया है।

सुबह 2:55 बजे हुआ लॉन्च

GSLV-F17/EOS-05 मिशन का प्रक्षेपण 4 सितंबर को सुबह 2:55 बजे IST पर श्रीहरिकोटा स्थित Satish Dhawan Space Centre के Second Launch Pad से किया गया। यह GSLV की 19वीं उड़ान है।

लॉन्च के दौरान रॉकेट ने निर्धारित चरणों को पूरा करते हुए EOS-05 को उसकी लक्षित कक्षा तक पहुंचाया। ISRO ने मिशन को सफल घोषित करते हुए कहा कि GSLV-F17 ने अपने मिशन को सफलतापूर्वक पूरा किया है।

क्या है EOS-05

EOS-05 एक अत्याधुनिक Earth Observation Satellite है, जिसका उद्देश्य अंतरिक्ष से पृथ्वी की निगरानी और imaging क्षमता को बढ़ाना है।

यह satellite geosynchronous orbit से पृथ्वी के बड़े हिस्से का observation करने में सक्षम होगा। इस तरह की क्षमता का इस्तेमाल पृथ्वी की सतह में होने वाले बदलावों की निगरानी, प्राकृतिक संसाधनों के अध्ययन और विभिन्न Earth-observation applications में किया जा सकता है।

भारत के लिए क्यों अहम है यह मिशन?

EOS-05 की खासियत यह है कि इसे geosynchronous orbit से imaging के लिए तैयार किया गया है। इससे भारत की Earth-observation infrastructure को एक नई क्षमता मिलने की उम्मीद है।

इस तरह के satellite data का उपयोग भविष्य में कृषि, पर्यावरण निगरानी, प्राकृतिक आपदा प्रबंधन, जल संसाधन और strategic applications जैसे क्षेत्रों में किया जा सकता है।

हालांकि, satellite की सभी operational और security-related capabilities सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं हैं।

GSLV-F17 की उपलब्धि

GSLV-F17 भारत के Geosynchronous Satellite Launch Vehicle कार्यक्रम का एक और महत्वपूर्ण मिशन है। ISRO की आधिकारिक सूची के अनुसार यह GSLV की 19वीं flight है।

इस मिशन की सफलता भारत की उस क्षमता को भी दर्शाती है जिसमें देश अपने भारी satellites को geosynchronous transfer-type trajectories तक पहुंचाने के लिए GSLV जैसे launch vehicles का इस्तेमाल कर रहा है।

प्रधानमंत्री मोदी ने दी ISRO को बधाई

EOS-05 के सफल प्रक्षेपण के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ISRO को बधाई दी। प्रधानमंत्री ने इसे देश के लिए गर्व का क्षण बताते हुए कहा कि GSLV-F17 के जरिए EOS-05 का सफल प्रक्षेपण भारत के space sector की excellence, innovation और बढ़ती क्षमताओं को दर्शाता है।

उन्होंने ISRO और भारतीय उद्योग के बीच बढ़ती साझेदारी को भी भारत के space ecosystem के लिए महत्वपूर्ण बताया।

Bottom Line

GSLV-F17 और EOS-05 मिशन की सफलता भारत के Earth-observation और space technology programme के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इस मिशन के जरिए भारत ने geosynchronous orbit से imaging की अपनी क्षमता को आगे बढ़ाया है और देश की satellite-based Earth monitoring capabilities को मजबूत किया है।

ISRO की यह सफलता एक बार फिर दिखाती है कि भारत अंतरिक्ष तकनीक के क्षेत्र में लगातार अपनी क्षमताओं का विस्तार कर रहा है।

CG Murder Case: थप्पड़ का बदला लेने रची हत्या की साजिश, 16 साल के नाबालिग ने रेलवे सुपरवाइजर को मार डाला

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 बिलासपुर। तोरवा थाना क्षेत्र की आरपीएफ कॉलोनी में रेलवे ठेकेदार के सुपरवाइजर नरेश गुप्ता की हत्या का पुलिस ने खुलासा किया है। मामले में पुलिस ने 16 वर्षीय नाबालिग को हिरासत में लिया है। पुलिस के मुताबिक, बारिश के पानी के छींटे पड़ने के बाद सुपरवाइजर द्वारा थप्पड़ मारे जाने से नाराज नाबालिग ने बदला लेने की साजिश रची और रात में कंस्ट्रक्शन साइट में घुसकर वारदात को अंजाम दिया।


घटना के बाद सामने आए सीसीटीवी फुटेज और जांच के आधार पर पुलिस नाबालिग तक पहुंची। पूछताछ में उसने कथित तौर पर हत्या के पीछे की वजह बताई।

पानी की टंकी के पास मिला था शव

घटना गुरुवार सुबह सामने आई। रेलवे कंस्ट्रक्शन साइट पर काम करने पहुंचे कर्मचारियों ने नरेश गुप्ता को आवाज दी और फोन किया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला। इसके बाद कर्मचारियों ने अंदर जाकर देखा तो पानी की टंकी के पास नरेश का खून से सना शव पड़ा था।

मृतक नरेश गुप्ता (35) मूल रूप से आरा, बिहार का रहने वाला था। वह रेलवे ठेकेदार अनिल सिंह की कंस्ट्रक्शन साइट पर सुपरवाइजर के रूप में काम कर रहा था।

सूचना मिलते ही जीआरपी, आरपीएफ और तोरवा पुलिस की टीमें मौके पर पहुंचीं। एफएसएल टीम और डॉग स्क्वायड की मदद से घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए गए।

CCTV में दिखा संदिग्ध

पुलिस ने घटनास्थल और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। फुटेज में एक संदिग्ध युवक हाफ पैंट और टी-शर्ट में नजर आया। जांच आगे बढ़ने पर पुलिस को नाबालिग के संबंध में सुराग मिला।

पुलिस के अनुसार, नाबालिग ने कथित तौर पर स्टोर रूम के पास रखे हथौड़े से नरेश के सिर पर हमला किया। गंभीर चोट लगने से वह जमीन पर गिर गया और उसकी मौत हो गई।

बारिश के पानी के छींटे से शुरू हुआ विवाद

पूछताछ में नाबालिग ने पुलिस को बताया कि मंगलवार रात तेज बारिश हो रही थी और वह साइकिल से घर लौट रहा था। इसी दौरान सड़क किनारे खड़े नरेश के ऊपर साइकिल से बारिश के पानी के छींटे पड़ गए।

पुलिस के मुताबिक, इसी बात को लेकर नरेश ने नाबालिग को रास्ते में रोककर कथित तौर पर तीन थप्पड़ मारे थे। नाबालिग ने पूछताछ में बताया कि इस घटना से वह खुद को अपमानित महसूस कर रहा था और उसने इसका बदला लेने की ठान ली।

रात में साइट में घुसकर किया हमला

पुलिस के अनुसार, नाबालिग ने कथित तौर पर पहले हत्या की योजना बनाई। इसके बाद रात करीब 11:30 बजे वह कंस्ट्रक्शन साइट के पीछे से अंदर दाखिल हुआ। वहां से हथौड़ा लेकर वह नरेश के कमरे के पास पहुंचा।

पुलिस के मुताबिक, नरेश के सो जाने के बाद नाबालिग ने कथित तौर पर उसके सिर पर हथौड़े से कई वार किए। वारदात को अंजाम देने के बाद वह मौके से फरार हो गया।

फिलहाल पुलिस ने नाबालिग को हिरासत में लेकर मामले में आगे की वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी है। हत्या में इस्तेमाल हथौड़े सहित अन्य साक्ष्यों की भी जांच की जा रही है।

CG NEWS : सहकारी बैंकों में 1,360 पदों पर होगी भर्ती, सरकार ने दी मंजूरी

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 रायपुर। छत्तीसगढ़ में सहकारी बैंकिंग व्यवस्था को मजबूत करने और युवाओं को रोजगार के अवसर उपलब्ध कराने की दिशा में राज्य सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सहकारिता विभाग ने प्रदेश के पांच जिला सहकारी केंद्रीय बैंक क्षेत्रों और उनसे संबद्ध प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों में कुल 1,360 पदों पर भर्ती की अनुमति दे दी है।


इनमें जिला सहकारी केंद्रीय बैंकों के विभिन्न संवर्गों के 198 पद और प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों में 1,162 समिति प्रबंधक के पद शामिल हैं। समिति प्रबंधकों के 1,162 पदों में से 596 पद सीधी भर्ती और 566 पद सीमित चयन के माध्यम से भरे जाएंगे।


पांच बैंक क्षेत्रों में होगी भर्ती

भर्ती के लिए सबसे अधिक पद रायपुर क्षेत्र में 508 स्वीकृत किए गए हैं। इसके बाद बिलासपुर में 444, बस्तर-जगदलपुर में 187, दुर्ग-राजनांदगांव में 154 और रायगढ़ में 67 पदों पर भर्ती होगी।

जिला सहकारी केंद्रीय बैंकों में उप प्रबंधक, प्रोग्रामर, सहायक प्रबंधक, फील्ड ऑफिसर, सहायक प्रोग्रामर और सामान्य सहायक समेत विभिन्न पदों पर नियुक्तियां की जाएंगी।

मंत्री के निर्देश के बाद आगे बढ़ी प्रक्रिया

सहकारिता मंत्री केदार कश्यप ने 21 अगस्त को हुई विभागीय समीक्षा बैठक में सहकारी बैंकों और समितियों में रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया जल्द शुरू करने के निर्देश दिए थे। इसके बाद विभाग ने संबंधित बैंकों से प्राप्त प्रस्तावों का परीक्षण किया और कर्मचारी सेवा नियम, आरक्षण प्रावधान तथा वित्तीय मानदंडों के आधार पर भर्ती की अनुमति जारी की।

मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में सरकार सहकारी व्यवस्था को अधिक सक्षम और किसान हितैषी बनाने के लिए लगातार काम कर रही है। उन्होंने कहा कि 1,360 पदों पर भर्ती से युवाओं को रोजगार के अवसर मिलने के साथ सहकारी बैंकों और समितियों की कार्यक्षमता भी बढ़ेगी।

किसानों और खाताधारकों को मिलेगी बेहतर सुविधा

नए कर्मचारियों की नियुक्ति से जिला सहकारी केंद्रीय बैंकों और प्राथमिक कृषि साख सहकारी समितियों के कामकाज में तेजी आने की उम्मीद है। इससे किसानों के ऋण प्रकरण, बैंकिंग लेन-देन और अन्य सेवाओं का संचालन अधिक सुगमता और समयबद्ध तरीके से किया जा सकेगा।

समिति प्रबंधकों की नियुक्ति से पैक्स समितियों के दैनिक कामकाज, अभिलेख संधारण, वित्तीय प्रबंधन और विभिन्न सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन को भी मजबूती मिलेगी। वहीं, समितियों के कम्प्यूटरीकरण और डिजिटल सेवाओं के विस्तार में भी नए कर्मचारियों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी।

नियमों और आरक्षण प्रावधानों के तहत होगा चयन

भर्ती प्रक्रिया संबंधित जिला सहकारी केंद्रीय बैंक कर्मचारी सेवा नियम-2023, आरक्षण नियमों, स्वीकृत पदों की संख्या और निर्धारित वित्तीय मानदंडों के अनुसार पूरी की जाएगी। भर्ती एवं चयन समिति में संबंधित संभागीय संयुक्त पंजीयक को अनिवार्य सदस्य के रूप में शामिल किया जाएगा।

विभाग के अनुसार भर्ती प्रक्रिया निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से पूरी की जाएगी। हालांकि, यह भर्ती प्रक्रिया सर्वोच्च न्यायालय में विचाराधीन विशेष अनुमति याचिका के अंतिम आदेश के अधीन रहेगी।

क्या भगवान श्रीकृष्ण की थीं 16,108 पत्नियां? जानिए 16,100 कन्याओं से जुड़ी पूरी पौराणिक कथा

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 Krishna 16108 wives Story : भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं और उनके जीवन से जुड़ी कथाएं सदियों से लोगों की आस्था का केंद्र रही हैं। श्रीकृष्ण के जीवन से जुड़ी अनेक कथाएं धार्मिक ग्रंथों और पुराणों में मिलती हैं। इनमें सबसे चर्चित प्रसंगों में से एक उनकी 16,108 पत्नियों से जुड़ा हुआ है। अक्सर यह सवाल उठता है कि क्या भगवान श्रीकृष्ण ने वास्तव में 16,108 विवाह किए थे? अगर ऐसा था, तो इसके पीछे की कथा क्या है?


पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, श्रीकृष्ण की आठ प्रमुख पत्नियां थीं, जिन्हें अष्टभार्या या अष्टमहिषी कहा जाता है। इनमें रुक्मिणी, सत्यभामा, जाम्बवती, कालिंदी, मित्रविंदा, नाग्नजिती, भद्रा और लक्ष्मणा के नाम प्रमुख रूप से बताए जाते हैं।

नरकासुर से जुड़ी है 16,100 कन्याओं की कथा

पौराणिक कथाओं के अनुसार, नरकासुर नामक एक शक्तिशाली असुर ने बड़ी संख्या में कन्याओं को बंदी बनाकर रखा था। मान्यता है कि नरकासुर का जन्म भूदेवी से हुआ था और उसे वरदान प्राप्त था कि उसका वध उसकी माता के हाथों ही हो सकता है।

धार्मिक मान्यताओं में सत्यभामा को भूदेवी का स्वरूप माना जाता है। कथा के अनुसार, जब भगवान श्रीकृष्ण को नरकासुर के अत्याचारों का पता चला तो वे सत्यभामा के साथ उसका वध करने पहुंचे। युद्ध में नरकासुर का अंत हुआ और उसके बंदीगृह में कैद 16,100 कन्याओं को मुक्त कराया गया।

समाज में स्वीकार किए जाने की चिंता

कथा के अनुसार, मुक्त होने के बाद इन कन्याओं के सामने सामाजिक सम्मान और भविष्य को लेकर चिंता खड़ी हो गई। उन्हें भय था कि समाज उन्हें स्वीकार नहीं करेगा। ऐसी स्थिति में भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें सम्मान और सुरक्षा प्रदान करने के लिए अपनी पत्नियों का दर्जा दिया।

पौराणिक मान्यता के अनुसार, इसके बाद वे सभी द्वारका में रहने लगीं और श्रीकृष्ण ने उन्हें सम्मानजनक जीवन प्रदान किया। इस प्रकार उनकी आठ प्रमुख पत्नियों के साथ 16,100 मुक्त कन्याओं को जोड़ने पर संख्या 16,108 बताई जाती है।

एक अन्य कथा भी है प्रचलित

श्रीकृष्ण की 16,100 पत्नियों से जुड़ी एक अन्य पौराणिक कथा भी प्रचलित है। इसके अनुसार, पूर्व जन्म में ये कन्याएं ऋषि-मुनि थीं। उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण को पति रूप में प्राप्त करने के लिए कठोर तपस्या की थी। मान्यता है कि अगले जन्म में उन्होंने कन्याओं के रूप में जन्म लिया और श्रीकृष्ण ने उन्हें पत्नी का दर्जा देकर उनकी मनोकामना पूर्ण की।

क्या है 16,108 का रहस्य?

धार्मिक ग्रंथों और पौराणिक परंपराओं में श्रीकृष्ण की आठ प्रमुख पत्नियों के साथ 16,100 मुक्त कन्याओं का उल्लेख मिलता है। इसी आधार पर उनकी कुल पत्नियों की संख्या 16,108 बताई जाती है। हालांकि, इस विषय को धार्मिक और पौराणिक मान्यताओं के संदर्भ में ही देखा जाता है।

नोट: यह लेख धार्मिक ग्रंथों और प्रचलित पौराणिक मान्यताओं में वर्णित कथाओं पर आधारित है। अलग-अलग ग्रंथों और परंपराओं में इस प्रसंग के विवरण में अंतर मिल सकता है।

अवैध खनन एवं परिवहन पर साय सरकार की सख्ती, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही में खनिज विभाग की बड़ी कार्रवाई

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रेत एवं ईंट निर्माण के लिए मिट्टी के अवैध परिवहन में संलिप्त 4 ट्रैक्टर जब्त

रायपुर- मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा सुशासन, पारदर्शिता और कानून के प्रभावी क्रियान्वयन को प्राथमिकता देते हुए प्राकृतिक संसाधनों के अवैध दोहन के विरुद्ध लगातार कार्रवाई की जा रही है। इसी क्रम में गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही जिले में खनिज विभाग ने अवैध खनन एवं परिवहन के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए रेत एवं मिट्टी के अवैध परिवहन में संलिप्त 4 ट्रैक्टर वाहनों को जब्त किया है।

कलेक्टर विजय दयाराम के. के निर्देश पर खनिज विभाग की टीम द्वारा जिले के विभिन्न क्षेत्रों में लगातार निगरानी एवं जांच की जा रही है। इसी दौरान विभागीय टीम ने सिलपहरी क्षेत्र में रेत का अवैध परिवहन करते हुए 3 ट्रैक्टर वाहनों तथा ज्योतिपुर तिराहा में ईंट निर्माण के लिए मिट्टी का अवैध परिवहन करते हुए 1 ट्रैक्टर वाहन को पकड़ा।

सभी 4 वाहनों को जब्त कर सुरक्षित अभिरक्षा में रखा गया है। इनमें 3 ट्रैक्टर वाहनों को अमरपुर थाना परिसर तथा 1 ट्रैक्टर वाहन को नगर सैनिक परिसर में सुरक्षित रखा गया है। जब्त वाहनों के मालिकों के विरुद्ध खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 1957 की धारा 21(5) एवं 23(क) के तहत नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण को सर्वोच्च प्राथमिकता

कलेक्टर विजय दयाराम के. ने जिले में खनिजों के अवैध उत्खनन एवं परिवहन पर प्रभावी नियंत्रण के लिए संबंधित अधिकारियों को सतत निगरानी रखने और नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं।

उन्होंने स्पष्ट किया है कि जिले के प्राकृतिक संसाधन जनता की सामूहिक संपत्ति हैं और इनके अवैध दोहन को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। प्रशासन द्वारा खनिज संपदा के संरक्षण के साथ-साथ वैध खनन एवं परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा देने पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है।

सुशासन की दिशा में प्रशासन की सक्रिय पहल

राज्य सरकार की सुशासन नीति के अनुरूप जिला प्रशासन द्वारा यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि प्राकृतिक संसाधनों का उपयोग नियमों के दायरे में हो और अवैध गतिविधियों पर समयबद्ध एवं प्रभावी कार्रवाई की जाए। खनिज विभाग की लगातार कार्रवाई से अवैध खनन एवं परिवहन में संलिप्त तत्वों को स्पष्ट संदेश दिया जा रहा है कि नियमों का उल्लंघन करने पर किसी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी।

इस कार्रवाई का उद्देश्य केवल वाहनों की जब्ती तक सीमित नहीं है, बल्कि खनिज संसाधनों के अवैध दोहन पर प्रभावी अंकुश लगाना, शासन के राजस्व की सुरक्षा करना और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखना भी है।

लगातार जारी रहेगी निगरानी और कार्रवाई

खनिज विभाग ने बताया कि जिले में अवैध उत्खनन, परिवहन एवं खनिजों के अनधिकृत उपयोग की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। विभागीय अमला विभिन्न क्षेत्रों में नियमित जांच एवं कार्रवाई कर रहा है। आने वाले दिनों में भी अवैध खनन एवं परिवहन के विरुद्ध अभियान निरंतर जारी रहेगा।

इस कार्रवाई में खनि निरीक्षक सुजीत कंवर, शिवकुमार लहरे, सतीश साहू एवं सैनिक साहिब गनी शामिल रहे।

उत्तर प्रदेश में बाढ़ का कहर, 23 जिले प्रभावित; 16,784 लोगों को सुरक्षित निकाला गया, 3 की मौत

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लखनऊ- उत्तर प्रदेश में लगातार हो रही भारी बारिश के चलते कई इलाकों में बाढ़ की स्थिति गंभीर बनी हुई है। राज्य के 23 जिले इस समय बाढ़ से प्रभावित हैं, जबकि अब तक 16,784 लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा चुका है। बुधवार को ही 3,042 लोगों को रेस्क्यू किया गया। बारिश और बाढ़ से जुड़ी घटनाओं में अब तक तीन लोगों की मौत की भी सूचना है।

कई नदियां खतरे के निशान के ऊपर

लगातार बारिश और जलस्तर बढ़ने के कारण राज्य की कई प्रमुख नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। पूर्वी और मध्य उत्तर प्रदेश में बाढ़ का खतरा अधिक बना हुआ है। गंगा, सरयू, शारदा और अन्य नदियों के बढ़ते जलस्तर ने निचले इलाकों में रहने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी और राहत-बचाव अभियान तेज कर दिया है।

1,499 नावें और 1,067 मेडिकल टीमें तैनात

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्य के लिए सरकार ने 1,499 नाव और मोटरबोट तैनात की हैं। इसके साथ ही 1,067 मेडिकल टीमें प्रभावित लोगों तक स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने में जुटी हैं। प्रशासन ने राज्य में 1,311 बाढ़ राहत शिविर स्थापित किए हैं, जिनमें से 201 शिविर फिलहाल संचालित किए जा रहे हैं।

चित्रकूट और बलिया में हालात चिंताजनक

चित्रकूट में मंदाकिनी नदी के बढ़ते जलस्तर के कारण चौरा गांव से करीब 150 लोगों को मोटरबोट की मदद से सुरक्षित निकाला गया। वहीं बलिया में गंगा और सरयू का जलस्तर बढ़ने से करीब 20,500 लोग प्रभावित हुए हैं। यहां राहत कार्यों के लिए नावों की तैनाती के साथ राशन, दवाइयां और पका हुआ भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।

वाराणसी में भी बढ़ा बाढ़ का खतरा

वाराणसी में गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और कई निचले इलाकों में पानी भर गया है। स्थिति को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वाराणसी के जिलाधिकारी से बात कर बाढ़ की स्थिति और राहत कार्यों की जानकारी ली। प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में निगरानी बढ़ाने के साथ राहत एवं बचाव दलों को सक्रिय रखा है।

बारिश का दौर अभी जारी

मौसम विभाग ने दक्षिणी उत्तर प्रदेश और बुंदेलखंड के कई हिस्सों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। ऐसे में आने वाले दिनों में नदियों के जलस्तर में और बढ़ोतरी की आशंका बनी हुई है। प्रशासन ने निचले इलाकों में रहने वाले लोगों से सतर्क रहने और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की है।

उत्तर प्रदेश में बिगड़ते बाढ़ हालात के बीच प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रभावित लोगों तक समय पर राहत पहुंचाना और निचले इलाकों से लोगों को सुरक्षित निकालना है। फिलहाल राहत एवं बचाव अभियान लगातार जारी है।

भारत की GDP ग्रोथ 7.8% पर पहुंची, आंकड़ों की विश्वसनीयता पर उठे सवाल; सरकार ने दी सफाई

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नई दिल्ली- भारत की अर्थव्यवस्था ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही यानी अप्रैल-जून 2026 में 7.8 प्रतिशत की मजबूत GDP ग्रोथ दर्ज की है। यह आंकड़ा बाजार के अनुमान और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के अनुमान से बेहतर रहा। हालांकि, मजबूत आर्थिक वृद्धि के आंकड़े जारी होने के बाद अब इसकी गणना और विश्वसनीयता को लेकर आर्थिक जगत में बहस छिड़ गई है।

अनुमान से बेहतर रही आर्थिक वृद्धि

सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अप्रैल-जून तिमाही में भारत की वास्तविक GDP वृद्धि दर 7.8 प्रतिशत रही। यह RBI के करीब 7 प्रतिशत के अनुमान और अर्थशास्त्रियों के 7.1 प्रतिशत के औसत अनुमान से अधिक है। इससे वैश्विक आर्थिक चुनौतियों के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती का संकेत मिला है।

इस वृद्धि में मैन्युफैक्चरिंग, निवेश और सेवा क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका रही। वित्तीय, रियल एस्टेट और प्रोफेशनल सेवाओं में भी मजबूत विस्तार दर्ज किया गया। घरेलू मांग और सरकारी खर्च ने भी आर्थिक गतिविधियों को समर्थन दिया।

GDP के आंकड़ों पर क्यों उठे सवाल?

GDP के 7.8 प्रतिशत आंकड़े सामने आने के बाद पूर्व वित्त सचिव सुभाष चंद्र गर्ग समेत कुछ अर्थशास्त्रियों ने इसकी गणना पर सवाल उठाए। उनका तर्क है कि नई GDP सीरीज में पिछले साल के आंकड़ों में बड़े संशोधन किए गए हैं, जिससे मौजूदा वृद्धि दर की तुलना को लेकर सवाल पैदा होते हैं। पूर्व RBI गवर्नर रघुराम राजन ने भी पूछा कि यदि अर्थव्यवस्था इतनी तेज गति से बढ़ रही है, तो इसका असर रोजगार, घरेलू निवेश और विदेशी निवेश जैसे संकेतकों में अधिक स्पष्ट रूप से क्यों नहीं दिखाई दे रहा।

एक अन्य प्रमुख मुद्दा GDP Deflator को लेकर है। आलोचकों का कहना है कि अप्रैल-जून तिमाही में कीमतों के समायोजन के लिए इस्तेमाल किया गया डिफ्लेटर अपेक्षाकृत कम रहा, जिससे वास्तविक GDP वृद्धि अधिक दिखाई दे सकती है। हालांकि, इस मुद्दे पर अर्थशास्त्रियों की राय एक जैसी नहीं है।

सरकार ने आंकड़ों का किया बचाव

आंकड़ों पर उठे सवालों के बाद केंद्र सरकार और सांख्यिकी मंत्रालय ने GDP गणना की नई पद्धति का बचाव किया है। सरकार ने स्पष्ट किया कि GDP की नई सीरीज में आधार वर्ष को 2011-12 से बदलकर 2022-23 किया गया है। साथ ही डेटा स्रोतों और कीमतों के समायोजन की प्रक्रिया में भी बदलाव किए गए हैं।

सरकार का कहना है कि नए आंकड़े अधिक विस्तृत और आधुनिक डेटा पर आधारित हैं तथा संशोधन का उद्देश्य आर्थिक गतिविधियों की वास्तविक तस्वीर को बेहतर तरीके से सामने लाना है। सरकार ने यह भी कहा कि अलग-अलग GDP सीरीज के आंकड़ों की सीधे तुलना करना सही तरीका नहीं है।

मजबूत ग्रोथ के बीच चुनौती भी बरकरार

जहां GDP के आंकड़े भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती का संकेत दे रहे हैं, वहीं महंगे कच्चे तेल, वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता, रुपये पर दबाव और कमजोर वैश्विक मांग जैसी चुनौतियां बनी हुई हैं। ऐसे में आने वाली तिमाहियों में विकास की गति कैसी रहती है, इस पर बाजार और अर्थशास्त्रियों की नजर रहेगी।

फिलहाल 7.8 प्रतिशत GDP ग्रोथ भारत की आर्थिक क्षमता का सकारात्मक संकेत है, लेकिन आंकड़ों की गणना को लेकर शुरू हुई बहस ने पारदर्शिता और डेटा की विश्वसनीयता को भी चर्चा के केंद्र में ला दिया है। आने वाले महीनों में नए आंकड़े और संशोधन इस बहस को और स्पष्ट कर सकते हैं।

महासमुंद हादसा: 5 दिन बाद चांदन सूखरी नदी से मिला लापता बाइक सवार का शव, NDRF-SDRF की संयुक्त कार्रवाई

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 महासमुंद। जिले के सांकरा थाना क्षेत्र अंतर्गत जोक नदी के पुराने पुल पर 5 दिन पूर्व हुए भीषण सड़क हादसे में लापता बाइक सवार भागीरथी साहू का शव गुरुवार को बरामद कर लिया गया है। NDRF, SDRF और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीमों ने कड़ी मशक्कत के बाद शव को बलौदाबाजार जिले की चांदन सूखरी नदी में झाड़ियों के बीच से बाहर निकाला। इस घटना में कुल मृतकों की संख्या बढ़कर दो हो गई है।


कार-बाइक की टक्कर में पुल से नीचे गिरे थे वाहन

प्राप्त जानकारी के अनुसार, पांच दिन पूर्व सांकरा क्षेत्र में जोक नदी के पुराने पुल पर एक तेज रफ्तार कार और मोटरसाइकिल के बीच सीधी भिड़ंत हो गई थी। टक्कर इतनी भीषण थी कि दोनों वाहन अनियंत्रित होकर सीधे पुल से नीचे नदी में जा गिरे।

घटनास्थल पर ही एक की हुई थी मौत

हादसे के समय कार में चार लोग सवार थे। दुर्घटना में दुधीपाली निवासी राजकुमार निषाद की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि कार सवार तीन अन्य लोगों को स्थानीय ग्रामीणों की मदद से सुरक्षित बाहर निकालकर अस्पताल पहुंचाया गया। वहीं बाइक चला रहे वारनवापारा क्षेत्र के गवरौद निवासी भागीरथी साहू पानी के तेज बहाव में बह गए थे।

5 दिनों तक चला व्यापक रेस्क्यू ऑपरेशन

भागीरथी के लापता होने के बाद NDRF और SDRF की टीमों ने नदी क्षेत्र में सर्च ऑपरेशन शुरू किया। पानी के तेज बहाव, गहराई और किनारे पर घनी झाड़ियों के कारण रेस्क्यू टीम को भारी चुनौतियों का सामना करना पड़ा। लगभग 5 दिनों तक कई किलोमीटर के दायरे में चले खोज अभियान के बाद गुरुवार को चांदन सूखरी नदी की झाड़ियों में फंसा हुआ शव दिखाई दिया।

पुलिस ने शुरू की वैधानिक कार्रवाई

शव की पहचान भागीरथी साहू के रूप में होने के बाद परिजनों को सूचित किया गया। पुलिस ने शव का पंचनामा तैयार कर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और दुर्घटना के कारणों की विस्तृत जांच शुरू कर दी है।

जल संरक्षण में छत्तीसगढ़ देश में नंबर-1, ‘जल संचय जन भागीदारी 3.0’ अभियान में हासिल किया पहला स्थान

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रायपुर- जल संरक्षण और जल संचय के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ ने देशभर में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। ‘जल संचय जन भागीदारी 3.0’ अभियान के तहत बेहतर प्रदर्शन करते हुए छत्तीसगढ़ ने देश में पहला स्थान प्राप्त किया है। राज्य की इस उपलब्धि को जल संरक्षण के प्रति सरकार, प्रशासन और आम लोगों की बढ़ती भागीदारी का परिणाम माना जा रहा है।

अभियान के दौरान राज्य में बारिश के पानी को सहेजने, भूजल स्तर को बढ़ाने और जल स्रोतों के संरक्षण के लिए बड़े पैमाने पर काम किया गया। गांवों से लेकर शहरों तक जल संचयन संरचनाओं के निर्माण और पुराने जल स्रोतों के संरक्षण पर जोर दिया गया।

पांच जिले देश के टॉप-10 में शामिल

छत्तीसगढ़ की इस उपलब्धि की सबसे खास बात यह है कि राज्य के पांच जिले देश के टॉप-10 जिलों में शामिल हुए हैं। इससे यह स्पष्ट होता है कि जल संरक्षण को लेकर राज्य के विभिन्न जिलों में जमीनी स्तर पर व्यापक गतिविधियां संचालित की गईं।

स्थानीय स्तर पर लोगों को जल संरक्षण से जोड़ने, वर्षा जल को व्यर्थ बहने से रोकने और उपलब्ध जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन के लिए विभिन्न स्तरों पर प्रयास किए गए।

जनभागीदारी बनी अभियान की ताकत

‘जल संचय जन भागीदारी 3.0’ की सबसे बड़ी विशेषता जनभागीदारी है। जल संरक्षण को केवल सरकारी विभागों की जिम्मेदारी न मानकर आम नागरिकों, पंचायतों, स्थानीय संस्थाओं और विभिन्न संगठनों को भी अभियान से जोड़ा गया।

लोगों को वर्षा जल संचयन, जल स्रोतों की साफ-सफाई और संरक्षण तथा पानी के विवेकपूर्ण उपयोग के प्रति जागरूक किया गया। सामुदायिक भागीदारी के जरिए जल संरक्षण को एक जनअभियान का रूप देने का प्रयास किया गया।

बारिश के पानी को सहेजने पर विशेष जोर

अभियान के तहत वर्षा के दौरान मिलने वाले पानी को अधिक से अधिक मात्रा में जमीन में पहुंचाने और भविष्य के लिए सुरक्षित रखने पर जोर दिया गया। इसके लिए जल संचयन से जुड़ी संरचनाओं के निर्माण और पुनर्जीवन जैसे कार्यों को बढ़ावा दिया गया।

विशेषज्ञों के अनुसार, बारिश के पानी का संरक्षण भूजल स्तर को बनाए रखने के साथ-साथ गर्मी के मौसम में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

जल संरक्षण के क्षेत्र में नई मिसाल

देश में पहला स्थान हासिल करना छत्तीसगढ़ के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि है। यह राज्य में जल संरक्षण को लेकर किए जा रहे प्रयासों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलने का संकेत भी है।

राज्य के पांच जिलों का टॉप-10 में शामिल होना इस अभियान की व्यापक सफलता को दर्शाता है। अब जरूरत इस बात की है कि जल संरक्षण के इन प्रयासों को लगातार जारी रखा जाए और अधिक से अधिक लोगों को इससे जोड़ा जाए।

जल है तो कल है—इसी सोच के साथ छत्तीसगढ़ ने जल संरक्षण की दिशा में देश के सामने एक नई मिसाल पेश की है।

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