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गर्मियों में केलोरेटिक आहार और दिनचर्या का करें पालन: डॉ. संजय शुक्ला

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रायपुर: हमारी सेहत पर खान-पान और मौसम का बहुत ज्यादा प्रभाव पड़ता है। आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति में शरीर को त्रिदोषात्मक यानी वात, पित्त और कफ दोष माना गया है, जिनके सामान्य अवस्था में रहने से शरीर स्वस्थ रहता है, लेकिन इनमें बदलाव होने से बीमारी होती है। गर्मियों में लू लगने के साथ ही दूषित पानी या पेट से संबंधित कई रोग जैसे उल्टी, दस्त, डायरिया, पीलिया और टायफाइड होने की संभावना रहती है। इसलिए बाजार और खुले में बिकने वाले पेय और खाद्य पदार्थों के सेवन में परहेज करना चाहिए।

रायपुर शासकीय आयुर्वेद कॉलेज के सह-प्राध्यापक डॉ. संजय शुक्ला ने बताया कि आयुर्वेद पद्धति में कुल 6 ऋतु हेमंत, शिशिर, वसंत, ग्रीष्म, वर्षा और शरद माने गए हैं। इस पद्धति में सभी ऋतुओं में शारीरिक स्वास्थ्य को उत्तम रखने के लिए खान-पान, पहनावा, दिनचर्या और औषधियों की व्यवस्था सुनिश्चित है। आयुर्वेद पद्धति में बताए गए खान-पान, दिनचर्या और सावधानियों को अपनाकर हर मौसम में सेहतमंद रहा जा सकता है। गर्मियों के मौसम में गरम, खटाई, तीखा, नमकीन, तला-भुना, तेज मिर्च-मसालेदार, उड़द दाल, मैदा और बेसन से बने खाद्य पदार्थों, फास्ट-फूड, मांसाहार और शराब का सेवन सेहत के लिए नुकसानदायक होता है। इसलिए इनका परहेज करना चाहिए। 

गर्मी में शारीरिक स्वच्छता आवश्यक 

इस मौसम में शारीरिक स्वच्छता आवश्यक है। इसलिए सुबह और शाम ठंडे पानी से स्नान करना चाहिए। डॉ. संजय शुक्ला ने बताया कि आयुर्वेद के अनुसार ग्रीष्म ऋतु में शरीर में पित्त दोष की अधिकता रहती है।  इसलिए व्यक्ति को पित्तशामक आहार और दिनचर्या का पालन करना चाहिए। जैसा कि गर्मियों में सूर्य की तपिश बहुत ज्यादा होती है, फलस्वरूप लोगों में डिहाइड्रेशन, थकान, घबराहट और बेहोशी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं। शरीर में पानी और अन्य इलेक्ट्रोलाइट्स मिनरल्स की मात्रा संतुलित रखने के लिए आयुर्वेद में हल्का, सुपाच्य, मधुर रस वाले स्वच्छ ठंडा या उबाले हुए तरल पेय पदार्थों के सेवन करने का निर्देश है।

जीरा का करें सेवन

गर्मियों में पीसी जीरा और नमक मिलाकर मठा यानि छाछ, दही की लस्सी, दूध, कच्चे आम का जलजीरा, नींबू की शिकंजी या शरबत, घर में बनी ठंडाई, गन्ने का रस, बेल का शरबत, नारियल पानी, मौसमी और ताजे फलों का रस पीना चाहिए। गर्मियों के समय भोजन में पुराने जौ, पुराने चांवल, खिचड़ी, मूंग की दाल, गेहूं की रोटी, सत्तू, रायता, सब्जियों में चौलाई, करेला, बथुआ, मुनगा, परवल, भिंडी, तरोई, पुदीना, टमाटर, खीरा, ककड़ी, अदरक, प्याज, आंवला का मुरब्बा को शामिल करना चाहिए। इसके अलावा तरबूज, खरबूज, मौसंबी, संतरा, अनार, शहतूत, आंवला का प्रयोग हितकारी है।

धूप में नहीं करना चाहिए व्यायाम 

डॉ. शुक्ला ने बताया कि गर्मियों के मौसम में सूर्योदय से पहले पैदल चलना, हल्का व्यायाम, योगाभ्यास और तैराकी करना चाहिए। जैसे कि इस मौसम में लू (तेज बुखार) लगने की ज्यादा संभावना रहती है। इसलिए यथासंभव ठंडी जगह पर रहना चाहिए। धूप में निकलने के पहले संतुलित और सुपाच्य भोजन और पर्याप्त पानी का सेवन जरूर करना चाहिए। गर्म लू से बचाव के लिए शरीर, सिर, कान को सूती कपड़े से ढांक लें। सूर्य की तेज किरणों के कारण चेहरे और शरीर में सन-बर्न होने और त्वचा से संबंधित अन्य रोग होने का खतरा होता है। इसके बचाव के लिए शरीर में आयुर्वेदिक क्रीम या लोशन का प्रयोग करना चाहिए। इस मौसम में धूप में व्यायाम नहीं करना चाहिए।

गर्मियों में लें हल्का भोजन, शरीर में पानी की कमी न होने दें, मौसमी फलों का सेवन करें: डॉ. संजय शुक्ला

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मार्च-अप्रैल के महीनों में जैसे-जैसे मौसम अपना रंग बदलता है, उसी तरह हमारे शरीर में भी काफी बदलाव होने लगते हैं। बढ़ते तापमान के कारण कई मौसमी बीमारियां भी अपना असर दिखाने लगती हैं। बेचौनी, घबराहट, सुस्ती के साथ पेट संबंधी परेशानियां भी इस मौसम में आम बात है। इसलिए इस मौसम में खान-पान का विशेष ख्याल रखना चाहिए। गर्मियों के मौसम में ज्यादा तला-भुना या ज्यादा मसाले वाला खाना हमारे शरीर पर बुरा असर डालता है। इस तरह का खाना हमारे पाचन प्रक्रिया को खराब कर देता है जिससे कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। गर्मियों में खाना हल्का और आसानी से पचने वाला होना चाहिए।

इस मौसम में खूब पीएं पानी 

शासकीय आयुर्वेद कॉलेज रायपुर के सह-प्राध्यापक डॉ. संजय शुक्ला ने बताया कि गर्मियों के मौसम में पानी खूब पीना चाहिए क्योंकि गर्मियों में हमारे शरीर से पसीना निकलता है जिससे डिहाइड्रेशन होने का खतरा रहता है। दिनभर कोशिश करें कि ज्यादा से ज्यादा पानी थोड़ी-थोड़ी देर में जरूर पिएं। इससे शरीर से सारी गंदगी बाहर निकल जाती है और पाचन क्रिया भी ठीक रहती है। गर्मियों में जितना हो सके सामान्य पानी पीने की कोशिश करें। फ्रिज़ के पानी की जगह घड़े या सुराही का पानी पियें। गर्मी में लू से बचने के लिए भी सामान्य पानी पीना चाहिए।

ताजा खाना ही खाएं

डॉ. शुक्ल ने बताया कि गर्मियों में हमेशा ताजा भोजन ही करना चाहिए। गर्मियों में फूड पॉयजनिंग होने का खतरा ज्यादा होता है। इस मौसम में सब्जी और दालें जल्दी खराब हो जाती हैं। इसलिए ताजा खाना ही खाएं। इस मौसम में सुपाच्य भोजन ही करना चाहिए। ज्यादा मसालेदार भोजन नुकसानदेह हो सकता है। भोजन में सलाद या स्प्राउट्स जरुर खाएं, इससे मांसपेशियां मजबूत होती हैं और पेट की समस्या भी नहीं होती है। गर्मियों में ज्यादा देर तक खाली पेट रहने से शरीर में पौष्टिक तत्वों की कमी हो जाती हैं, जिससे कमजोरी के साथ-साथ कई बीमारियां होने का डर रहता है। इसलिए खाली पेट रहने से बचें। इस बात का हमेशा ध्यान रखें कि कभी भी एक साथ ज्यादा खाना खाना सेहत के लिए नुकसानदायक है।

मौसमी फल और सब्जियों का सेवन लाभदायक

 गर्मी में मौसमी फलों और सब्जियों का सेवन करने से शरीर चुस्त और तरोताजा रहता है। इसलिए तरबूज, खरबूज, खीरा, ककड़ी, फालसा, अनानास, मौसम्बी और लीची खाना फायदेमंद है। इससे शरीर में पानी की कमी नहीं होगी।

गर्मियों में है जूस-लस्सी फायदेमंद

गर्मी के मौसम में जूस, दही, लस्सी, मट्ठा, सत्तू, नींबू पानी, आम पना, बेल शर्बत, नारियल पानी, गन्ने का रस को अपनी डाइट में शामिल अवश्य करना चाहिए। साथ ही विटामिन-बी से भरपूर आहार लेना चाहिए जिससे शरीर में चुस्ती व स्फूर्ति बनी रहती है। साथ ही मांसपेशियों के दर्द और थकान में भी आराम मिलता है।

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