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बढ़ती महंगाई को लेकर भाजपा सरकार पर कड़ा प्रहार : डॉ रश्मि चंद्राकर

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महासमुंद। कांग्रेस जिला अध्यक्ष डॉ रश्मि चंद्राकर ने बढ़ती महंगाई को लेकर भाजपा के मोदी सरकार पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि सरकार के पास कीमतें बढ़ने के हर तर्क मौजूद हैं, मगर उन्हें रोकने का एक भी उपाय नहीं है। महंगाई ने गरीब आदमी तो क्या, मध्यवर्ग के आदमी तक का जीना मुहाल कर दिया है, मगर सरकार कुछ भी नहीं कर पा रही है। महंगाई डायन की तरह लोगों के पीछे पड़ कर उनका जीना मुश्किल कर रही है। कभी खाद्य सामग्री, कभी पेट्रोल तो कभी एलपीजी के दाम बढ़ रहे हैं। इससे सिर्फ गरीब ही नहीं मध्यवर्ग के लोग भी परेशान होने लगे हैं। एलपीजी गैस डीलरों के मुताबिक,



मई 2020 में एलपीजी का जो घरेलू रसोई गैस सिलेंडर 596 रुपये में मिलता था। अब बढ़कर 1119 रुपये का हो गया है। पिछले दो वर्षों में घरेलू रसोई गैस सिलेंडर के दाम में 523 रुपये बढ़ गए। इससे पिछले दो वर्षों में रसोई गैस सिलेंडर के दाम दोगुने बढ़ चुके हैं। मई से दिसंबर 2020 में एलपीजी के घरेलू सिलेंडर में कुल मिला कर 64 रुपये का इजाफा हुआ। जबकि वर्ष 2021 में अप्रैल माह में एकमुश्त 91 बढ़े। कुल मिला कर अप्रैल से लेकर अक्टूबर 2021 के बीच घरेलू रसोई गैस सिलेंडर के दामों में 306 की वृद्धि हुई।

वृद्धि का यह दौर वर्ष 2022 में भी जारी है। वर्ष 2022 में मार्च माह में एक साथ पचास रुपये दाम बढ़े। मार्च से लेकर 6 जुलाई माह तक चार बार बढ़े दामों की वजह से एलपीजी रसोई गैस सिलेंडरों में 153 रुपये का इजाफा हो गया है।सरकार आम जनता को मारने पर तुली है। पहले कभी कभार सिलेंडर की कीमत में चंद रुपये का इजाफा होता था, मगर अब हर दूसरे माह सिलेंडरों की कीमत में भारी वृद्धि की जा रही है। सरकार को आम लोगों का भी ख्याल रखना चाहिए। 

एक ओर महंगाई से जनता परेशान है वहीं दूसरी ओर केंद्र के मोदी सरकार के द्वारा इन दिनों खेती किसानी का कार्य लगे हुए हैं किसान विरोधी भाजपा सरकार जो छत्तीसगढ़ किसानों के लिए रासायनिक खाद नहीं भेज रही है जिसके कारण किसान यूरिया की दिक्कत से जूझ रहे हैं महासमुंद लोकसभा सांसद चुन्नी लाल साहू अपने आपको किसान बताते हैं और आज किसान डी पी खाद की दिक्कत से जुझ रहे जिस पर सांसद महोदय चुप्पी साधे हुए बैठे हैं। उनकी चुप्पी ही भाजपा को किसान विरोधी चरित्र को दर्शाती है।

कभी गोबर से घर को पोतकर दीवारों को मजबूत बनाते थे, आज गोबर बेचकर मजबूत घर बना रहे हैं

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बैकुण्ठपुर के भर्रा की रहने वाली मीनल का एक सपना था कि उनका खुद का एक घर हो, लेकिन ये सपना लंबे समय से सपना ही बना हुआ था। मीनल के पास पैसे नहीं थे कि वो अपने लिए घर बनाए। मीनल ने गांव में दूसरे की घरों की दीवारों को मजबूत करने के लिए अक्सर उनपर गोबर की पुताई करती थी, लेकिन आज इसी गोबर को बेचकर मीनल ने अपने लिए मजबूत घर बना लिया है। गोधन न्याय योजना की मदद से मीनल ने 140 क्विंटल गोबर बेचकर 28 हजार रूपए कमाए और गोबर से 500 क्विंटल वर्मी कंपोस्ट खाद बनाकर बेचने से 5 लाख रूपए की आय अर्जित की। 


गोधन न्याय योजना के हितग्राहियों को मिल रही है खुशियां, 

मीनल
का ये कारवां अभी थमा नहीं है और वो इस योजना का ज्यादा से ज्यादा लाभ उठाना चाहती है,छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के द्वारा शुरू की गयी गोधन न्याय योजना की ये कहानी सिर्फ मीनल की ही नही है, छत्तीसगढ़ में गोधन न्याय योजना के शुरू होने के बाद से ऐसे कई जीवंत उदाहरण सामने आए हैं जिसमें गोबर बेचकर लोगों ने अपने सपनों को साकार किया है। किसी ने गोबर बेचकर मोबाइल खरीदा, किसी ने मोटरसायकिल, किसी ने गहने तो किसी ने अपने बेटी की शादी की है।

मुख्यमंत्री के द्वारा इस योजना के शुरू करने के पीछे का उद्देश्य पशुपालकों की आय में वृद्धि, पशुधन की खुली चराई में रोक लगाकर फसलों की सुरक्षा, द्विफसली क्षेत्र का विस्तार करना, जैविक खाद के उपयोग को बढ़ावा देना, स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर प्रदान करना, भूमि की उर्वरता में सुधार करना और सुपोषण को बढ़ावा देना है।छत्तीसगढ़ सरकार की गोधन न्याय योजना पूरे देश में लोकप्रिय योजना का रूप ले चुकी है जिसकी प्रशंसा भारत सरकार ने भी की है। इस योजना से ग्रामीण और शहरी इलाकों में गौ पालकों को आमदनी का अतिरिक्त जरिया मिला है।

अब पैसों की नहीं सताती है चिंता, 

गोधन न्याय योजना देश दुनिया की इकलौती ऐसी योजना है जिसके तहत छत्तीसगढ़ राज्य के गौठानों में 2 रूपए किलो की दर से गोबर की खरीदी की जा रही है। गौठानों में 15 जून तक खरीदे गए गोबर के एवज में गोबर बेचने वाले ग्रामीणों को 147.06 करोड़ रूपए का भुगतान भी किया जा चुका है। गौठान समितियों एवं महिला स्व सहायता समूहों को अब तक 136.04 करोड़ रूपए की  राशि का  भुगतान किया जा चुका है।

गोबर बेच कर रहे हैं सपनों को साकार

गौठानों में महिला समूहों द्वारा गोधन न्याय योजना के अंतर्गत क्रय गोबर से बड़े पैमाने पर वर्मी कंपोस्ट, सुपर कंपोस्ट एवं सुपर कंपोस्ट प्लस खाद का निर्माण किया जा रहा है। गौठानों में महिला स्वसहायता समूहों अन्य आयमूलक गतिविधियों का भी संचालन किया जा रहा है जिससे महिला समूहों को अब तक 72.19 करोड़ रूपए की आय हो चुकी है। राज्य में अब तक गौठानों से 13,969 महिला स्वसहायता समूह सीधे जुड़ चुके हैं जिनकी सदस्य संख्या 82,874 है

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