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अच्छी बारिश से किसानों के खिले चेहरे, पानी बरसा तो किसान खुशी से झूम उठे

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महासमुंद। जिले में हुई बारिश ने किसानों की उम्मीदें बढ़ा दी हैं। पानी बरसा तो किसान खुशी से झूम उठे। यह बारिश किसानों के लिए किसी वरदान से कम नहीं है। पिछले कई दिनों से बारिश होने से किसान बेहद परेशान थे। उनको अपनी फसलों के बर्बाद होने की चिंता सता रही थी। यही दुआ कर रहे थे कि किसी भी तरह पानी बरसा दो। मानसून आने के बाद जिले में खरीफ की बुआई भी हो चुकी है और धान के साथ अन्य फसल भी खेतों में नजर आने लगी लेकिन अब तक अच्छी बारिश होने से किसानों के चेहरे पर खुशी झलक रही है। 



कृषि विभाग द्वारा अब तक 68,016 कृषकों को खेती किसानी के लिए 299 करोड़ 92 लाख का ऋण वितरण  किया गया। वर्ष 2021-22 खरीफ वर्ष में 54,082 कृषकों को खेती-किसानी के लिए 220.93 करोड़ का ऋण वितरण किया गया था। सहायक संचालक कृषि अमित मोहंती ने बताया कि किसानों ने खरीफ वर्ष 2022-23 में लगभग 50 प्रतिशत से ज्यादा बोनी पूरी कर ली है। किसान धान रोपा में व्यस्त हो गए है। हर तरफ खेतों में महिलायें रोपा लगाती हुई नजर रही है। कृषि विभाग द्वारा जिले में तकरीबन 264.200 हजार हेक्टेयर में खरीफ फसल बोनी का लक्ष्य है।

जो पिछले खरीफ वर्ष से ज्यादा है। इस लक्ष्य के विरूद्ध अब तक लगभग 95 हजार 110 हेक्टेयर में किसानों द्वारा खरीफ मौसम की धान, मक्का, दलहन और तिलहन फसलों की बुआई पूरी की जा चुकी है। पिछले साल इस अवधि में बोनी का प्रतिशत इसी के आस-पास था। जिले में चालू मानसून के दौरान विगत एक जून से आज 18 जुलाई तक 465 मिलीमीटर औसत वर्षा हो चुकी है। इस दौरान सबसे ज्यादा 713 मिलीमीटर बारिश महासमुन्द विकासखंड में हुई है। जिले में किसानों द्वारा धान रोपाई का काम किया जा रहा है। कृषि अधिकारियों ने बताया कि विभाग की ओर से जिले के किसानों को 41,555 क्विंटल बीज वितरण किया जा चुका है। 

इसमें स्थानीय बीज विक्रेता भी शामिल है, वहीं अब तक 50,662 मेट्रिक टन खाद का वितरण किया गया है। जिसका लक्ष्य 1,21,750 मेट्रिक टन है। प्राथमिक कृषि सहकारी साख समितियों में मांग के अनुसार किसानों को खाद और बीज उपलब्ध कराने की कार्रवाई की चल रही है। किसानों के लिए सस्ता कृषि लोन मिल रहा है, वही खेती में तकनीकी प्रयोग बढ़ानें पर केन्द्र और राज्य सरकार का विशेष जोर है। इसके साथ ही कृषि उपज की लागत कम करने पर भी जोर दिया जा रहा है। राज्य सरकार द्वारा किसानों को उपज का सही मूल्य दिलाने के प्रति वचनबद्ध है। कृषि बीमा योजना से किसानों को राहत भी मिल रही है।

किसान अब 31 जुलाई तक करा सकेंगे खरीफ फसलों का बीमा

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रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार के आग्रह पर खरीफ सीजन 2022 के लिए केन्द्र सरकार द्वारा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत नामांकन की तिथि 15 जुलाई से बढ़ाकर 31 जुलाई कर दी गई है। भारत सरकार के कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्रालय द्वारा छत्तीसगढ़ के कृषि उत्पादन आयुक्त को पत्र भेजकर इस संबंध में अवगत कराया गया है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के नामांकन की तिथि में वृद्धि के मद्देनजर प्रदेश के ऐसे किसानों से जो अब तक खरीफ और उद्यानिकी फसलों का बीमा नही करा पाए हैं, उनसे बीमा कराने की अपील की है।



प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के नामांकन की तिथि बढ़ने से अब छत्तीसगढ़ के किसान 31 जुलाई तक अपनी खरीफ फसलों का बीमा करा सकेंगे। राज्य में खरीफ 2022 के तहत धान सिंचित, धान असिंचित, मक्का, सोयाबीन, मूंगफली, मूंग, उड़द एवं तुअर (अरहर) फसल का बीमा कृषक करा सकते है। अऋणी कृषक जो भू-धारक बटाईदार हो, योजना में सम्मिलित हो सकते है। इस योजना अंतर्गत प्रावधानित जोखिम बाधिक रोपाई, स्थानीय आपदाएं, फसल कटाई उपरांत होने वाली क्षति तथा फसलवार पैदावार के आधार पर व्यापक क्षति अंतर्गत फसल क्षति हेतु दावा राशि का भुगतान प्रावधानानुसार किया जाता है।

अधिसूचित फसल को बीमित कराने हेतु इच्छुक कृषक फसल बीमा हेतु 31 जुलाई 2022 तक नजदीकी बैंक या लोक सेवा केन्द्रों या बीमा कंपनी अथवा ग्रामीण पोस्ट ऑफिस में संपर्क कर अपनी फसल को बीमित करा सकते हैं। खरीफ फसलों के बीमा के लिए किसानों को प्रीमियम राशि का 2 प्रतिशत और उद्यानिकी फसलों के बीमा के लिए प्रीमियम राशि का 5 प्रतिशत अंशदान के रूप में देना होता है। किसान अपनी फसलों का बीमा कराकर प्राकृतिक आपदा एवं मौसम की अनिश्चितता के चलते होने वाली फसल हानि, उत्पादन में कमी की भरपाई मिलने वाली बीमा दावा राशि से कर सकते हैं।

‘न्याय सब्बो बर-सब्बो डहर’ के ध्येय को पूरा कर रही छत्तीसगढ़ सरकार

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देश-दुनिया में छत्तीसगढ़ की पहचान बीते साढ़े तीन साल के दरम्यान ग्रामीणों और किसानों के साथ न्याय करने वाले राज्य के रूप में कायम हुई है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारान्याय सब्बो बर-सब्बो डहरके ध्येय को लेकर योजनाएं लागू की जा रही हैं और उनका क्रियान्वयन भी तेजी से किया जा रहा है। राज्य के ग्रामीणों, किसानों, मजदूरों, गरीबों और महिलाओं के हितों की रक्षा और उन्हें सीधे-सीधे लाभ पहुंचाने के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने जो फैसले लिए हैं। इसकी वजह से किसान, मजदूर और ग्रामीणों के जीवन में खुशहाली का नया दौर शुरू हो गया है।


छत्तीसगढ़ सरकार ने बीते साढ़े तीन साल में अपनी नीतियों से ग्रामीण और किसानों को सिर्फ सम्मान से जीने का अवसर उपलब्ध कराया है, बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था को एक नई गति दी है। वास्तव में छत्तीसगढ़ सरकार की यही रणनीति छत्तीसगढ़ के विकास का मॉडल है, जिसकी आज पूरे देश में चर्चा हो रही है। गौरतलब है कि विभिन्न वर्गों के लिएन्यायकी कड़ी में छत्तीसगढ़ राज्य में गरीब ग्रामीण भूमिहीन परिवारों को सीधे आर्थिक मदद पहुंचाने के लिए भारत रत्न पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी के नाम से

 राजीव गांधी ग्रामीण कृषि मजदूर न्याय योजनाशुरू की गई। इस योजना का शुभारंभ 3 फरवरी 2022 को सांसद राहुल गांधी ने किया था। राजधानी रायपुर के साइंस कॉलेज मैदान में योजना के शुभारंभ मौके पर आयोजित भव्य समारोह में राज्य सरकार द्वारा योजना के तहत पात्र 3 लाख 55 हजार भूमिहीन कृषक मजदूरों को डीबीटी के माध्यम से सीधे उनके बैंक खातों राशि अंतरण किया गया था। तब राज्य सरकार ने हितग्राही परिवार को प्रतिवर्ष 6 हजार रुपये आर्थिक सहायता देने का प्रावधान किया था, जिसे वित्तीय वर्ष 2022-23 से 7 हजार रुपये कर दिया गया है। हितग्राहियों को वर्ष 2022-23 की प्रथम किश्त के रूप में 71 करोड़ 8 लाख 4 हजार रुपए की राशि जारी भी कर दी गई है।


उल्लेखनीय है कि इस योजना के जरिए समाज के उन परिवारों को सीधी मदद मिल रही है, जिनका जीवन-यापन खेतिहर मजदूर के रूप में होने वाली आय पर निर्भर है। छत्तीसगढ़ में राजीव गांधी ग्रामीण भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना के अंतर्गत लगभग 3 लाख 55 हजार 402 ऐसे परिवार पंजीकृत हुए हैं, जिनके पास कृषि भूमि नहीं है और वह मजदूरी कर जीवन-यापन करते हैं। ग्रामीण भूमिहीन कृषि मजदूर परिवारों के अंतर्गत चरवाहा, बढ़ई, लोहार, मोची, नाई, धोबी, मांझी, चालकी, गायता, सिरहा, पुजारी, गुनिया और पुरोहित जैसे पौनी-पसारी व्यवस्था से जुड़े परिवार, वनोपज संग्राहक तथा समय-समय पर नियत अन्य वर्ग भी पात्र हैं। भूमिहीन परिवारों को लाभान्वित करने की छत्तीसगढ़ सरकार की यह अभिनव योजना है। इस तरह की योजना देश के अन्य राज्यों में कहीं नहीं है।

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