Media24Media.com: हरेली

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हरेली में पौधरोपण कर दिया हरियाली का संदेश

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आरंग। स्वयंसेवी सामाजिक संगठन पीपला वेलफेयर फाउंडेशन नगर में निरंतर रचनात्मक कार्यों में अहम् भूमिका निभा रहे है। फांऊडेशन के सदस्यों ने बताया फाउंडेशन के द्वारा रोज कुछ न कुछ रचनात्मक गतिविधियां  किया जाता है।


नगर में हरियाली लाने पौधारोपण करने व उनके संरक्षण को लेकर पीपला फाउंडेशन लगातार लोगों से अपील कर रहे हैं। वहीं फाउंडेशन के सदस्यों ने हरेली के अवसर पर मंडी रोड में स्थित विशाल मैदान में नीम, आम, आंवला , बरगद इत्यादि अनेक पौधे रोपित कर हरियाली का संदेश दिया। साथ ही लोगों से भी पौधारोपण व संरक्षण के लिए लगातार अपील कर रहे हैं। 

वही सावन के तीसरे सोमवार को नगर, क्षेत्र, प्रदेश व संपूर्ण देशवासियों की सुख समृद्धि की कामना के लिए नगर के अनेक स्वयंभू शिवलिंगों में देश के विभिन्न नदियों के जल से जलाभिषेक कर भगवान शिव से कामना करने की तैयारी में जुटे हैं।

कृषि हितैषी योजनाओं ने लौटाया हरेली का उत्साह : मुख्यमंत्री बघेल

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने हरेली त्योहार केवल गेड़ी चढ़ने का त्योहार नहीं है। यह जीवन के उल्लास का त्योहार है। जीवन में उल्लास ऐसे ही नहीं आता। इसके लिए वातावरण बनाना होता है। हमारे प्रदेश में किसानों की आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी। पिछले पौने पांच सालों में हमारी सरकार ने कृषि हितैषी नीतियां बनाईं जिससे किसान के घर खुशियां लौटीं हैं।आज हरेली के त्योहार पर जो अपूर्व उल्लास किसानों के बीच छलक रहा है उससे बहुत खुशी हो रही है।

हरेली तिहार के मौके पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल अपने निवास में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे।  उन्होंने कहा कि हमने किसान-मजदूर को लक्षित कर योजनाएं बनाईं। इससे कृषि का रकबा बढ़ा और अब तो प्रति एकड़ 20 क्विंटल धान खरीदने के निर्णय से यह उल्लास अपने चरम पर है। गोधन न्याय योजना के माध्यम से दूध उत्पादन बढ़ा है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में आर्थिक स्थिति बेहतर होने से त्योहार का उल्लास अपने चरम पर है।

उन्होंने प्रदेशवासियों को हरेली त्यौहार की शुभकामनाएं देते हुए अच्छी फसल और किसानों की समृद्धि की कामना की। मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि हरेली में किसान अपने कृषि उपकरणों की पूजा करते हैं और पशुधन को लोंदी खिलाया जाता है। इस तरह से हम अपने पशुधन को सहेजते हैं और उनके माध्यम से हमारी तरक्की का रास्ता खुलता है। उन्होंने कहा कि आज आदिवासी क्षेत्रों में भी खुशी का माहौल है।

हमारे पूर्वजों द्वारा बरसों से तैयार की गई संस्कृति नष्ट हो रही थी। इसे सहेजने-संरक्षित करने का प्रयास हमने किया है और बहुत बढ़िया काम हो रहा है। आदिवासी अंचल में आस्था केन्द्रों को संरक्षित करने का काम किया जा रहा है। नारायणपुर में घोटुल का संरक्षण किया गया है। बस्तर के आसना में बादल के माध्यम से आदिम संस्कृति को सहेजने की दिशा में हम आगे बढ़ रहे हैं। हमारे आदिवासी जीवन की परंपरा बहुत समृद्ध है। इन परंपराओं के बारे में हम सोचे तो चकित हो जाते हैं। यह ऐसी संस्कृति है जो अपने देवी-देवताओं के साथ रहती है। उनसे गहन लगाव रखती है। हमने इसे संरक्षित करने का काम किया है।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में हमने स्वामी आत्मानंद स्कूल आरम्भ किये। इससे बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण अंग्रेजी शिक्षा मिल रही है। रामायण मण्डलियों के माध्यम से हम लोगों के जीवन में भगवान राम का आदर्श उतारने की कोशिश कर रहे हैं। रायगढ़ में आयोजित राष्ट्रीय रामायण महोत्सव को बहुत लोकप्रियता मिली। चंदखुरी, शिवरीनारायण और राजिम जैसे धार्मिक केन्द्रों के साथ ही राम वनगमन पथ को विकसित करने का कार्य किया है।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कहा कि छत्तीसगढ़िया संस्कृति को पुनर्स्थापित करने के लिए हम शुरू से ही कार्य कर रहे है। मजदूरों, किसानों का परंपरागत भोजन बारे-बासी अब फाइव स्टार होटल तक पहुंच गया है। अपनी संस्कृति को सम्मान और पहचान मिलने से गौरव महसूस कर रहे हैं और छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया वाक्य चरितार्थ हो रहा है।  मुख्यमंत्री ने हरेली त्योहार के साथ प्रदेशवासियों के उज्जवल भविष्य की कामना की।

इस अवसर पर संस्कृति मंत्री अमरजीत भगत, गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष महंत राम सुंदर दास, विधायक सत्यनारायण शर्मा, कुलदीप जुनेजा, रामपुकार सिंह, मुख्यमंत्री के सलाहकार प्रदीप शर्मा, खनिज विकास निगम के अध्यक्ष गिरिश देंवांगन, राज्य महिला आयोग के अध्यक्ष डॉ किरणमयी नायक, शाकम्भरी बोर्ड के अध्यक्ष रामकुमार पटेल, छत्तीसगढ़ राज्य उद्योग विकास निगम के अध्यक्ष नंदकुमार साय, अल्प संख्यक आयोग के अध्यक्ष महेंद्र छाबड़ा, सिरपुर विकास प्राधिकरण के अध्यक्ष सतीश जग्गी, तेलघानी बोर्ड के अध्यक्ष संदीप साहू, कृषि उत्पादन आयुक्त डॉ कमलप्रीत सिंह सहित कृषि, संस्कृति व पशुधन विकास विभाग के अधिकारी-कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में आमजन उपस्थित थे। 

 

हरेली के रंग में रंगा मुख्यमंत्री निवास, CM बघेल ने की कृषि औजारों की पूजा

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रायपुर। छत्तीसगढ़ का पहला त्यौहार माना जाने वालो हरेली तिहार पर मुख्यमंत्री निवास में छत्तीसगढ़िया संस्कृति से रंगा रहा। मुख्यमंत्री ने कृषि उपकरणों की पूजा की। परंपरा का निर्वाह करते हुए उन्होंने गेड़ी चढ़ां गौधन को चीला-रोटी खिलाया। हरा घास खिलाया। यहीं नहीं उन्होंने भौंरा चलाया और रचूली यानी झूला भी झूला। पूरे मुख्यमंत्री निवास को छत्तीसगढ़ी संस्कृति के दर्शन हो रहे थे।


मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अपने निवास कार्यालय में आज परंपरागत रूप से छत्तीसगढ़ का पहला त्यौहार हरेली परिवार व आमजनों संग धूमधाम से मनाया। मुख्यमंत्री श्री बघेल ने धर्मपत्नी श्रीमती मुक्तेश्वरी बघेल एवं परिजनों के साथ विधिवत रूप से ग्राम देवी-देवताओं, तुलसी माता, नांगर, कृषि उपकरणों, गेड़ी और गौमाता की पूजा कर अच्छी फसल, किसानों और प्रदेशवासियों की सुख समृद्धि और खुशहाली की कामना की।

नातिन के साथ मुख्यमंत्री ने रहचुली का लिया आनंद

मुख्यमंत्री आवास आज हरेली ग्राउंड मेला जैसा लग रहा था। लोक संस्कृति की अनूठी झलक दिख रही थी। मुख्यमंत्री ने अपनी बेटी और नातिन के साथ रहचुली झूले का आनंद लिया। इस दौरान उपस्थित जनप्रतिनिधियों ने भी रहचुली का आनंद लिया।

गेड़ी चढ़कर सरपट चले मुख्यमंत्री

छत्तीसगढ़ में हरेली तिहार पर गेड़ी चढ़ने की पुरानी परंपरा है। मुख्यमंत्री श्री बघेल आज गेड़ी चढ़कर सरपट चले और बरसों पुरानी यह परंपरा निभाई। मुख्यमंत्री उसी तरह से उत्साह और ऊर्जा से भरपूर नजर आ रहे थे। जैसे कोई किशोर हरेली के मौके पर गेड़ी चढ़कर अपनी खुशी जाहिर करता है।


उन्होंने प्रदेशवासियों को हरेली त्यौहार की शुभकामनाएं देते हुए अच्छी फसल और किसानों की समृद्धि की कामना की। मुख्यमंत्री श्री बघेल ने कहा कि हरेली में किसान अपने कृषि उपकरणों की पूजा करते हैं और पशुधन को लोंदी खिलाया जाता है। इस तरह से हम अपने पशुधन को सहेजते हैं और उनके माध्यम से हमारी तरक्की का रास्ता खुलता है।

उन्होंने कहा कि आज आदिवासी क्षेत्रों में भी खुशी का माहौल है। हमारे पूर्वजों द्वारा बरसों से तैयार की गई संस्कृति नष्ट हो रही थी। इसे सहेजने-संरक्षित करने का प्रयास हमने किया है और बहुत बढ़िया काम हो रहा है।

गोधन न्याय योजना : हरेली पर्व से दो गौठानों में गोमूत्र की ख़रीदी की शुरुआत

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महासमुंद हरेली पर्व के अवसर पर आज गुरुवार को पूरे छत्तीसगढ़ के साथ महासमुंद ज़िले के दो स्वावलंबी गौठानों पहली महासमुंद विकासखंड के ग्राम बिरकोनी और दूसरी पिथौरा विकासखंड के ग्राम गोड़बहाल से गोमूत्र की ख़रीदी शुरू हो गई। गोड़बहाल में संसदीय सचिव एवं खल्लारी विधायक द्वारिकाधीश यादव बतौर मुख्य आतिथि शामिल हुए। जहां उन्होंने गाय को हरा चारा खिलाया और सरकार की महत्वपूर्ण 'गोधन न्याय योजना' के तहत गोमूत्र ख़रीदी का जिले में शुभारंभ किया। संसदीय सचिव एवं विधायक द्वारिकाधीश यादव ने खेती-किसानी से जुड़े औजारों की पूजा की।



उन्होंने छत्तीसगढ़ माटी के पहली तिहार, किसानी संस्कृति, और कृषि सभ्यता के पवित्र तिहार, हरेली की सभी को बधाई एवं शुभकामनाएँ देते हुए प्रकृति के आशीर्वाद सब के ऊपर बने रहे कामना की।संसदीय सचिव यादव ने कहा कि छत्तीसगढ़ की संस्कृति और लोक परंपराओं को संरक्षित करने की दिशा में सरकार द्वारा लगातार प्रयास किए जा रहे है। बीते तीन वर्षों में हरेली की पर्व की महत्ता और इसकी लोकप्रियता में बढ़ी है। आज से यानि हरेली पर्व से राज्य में गोमूत्र खरीदी शुरू हो गयी है।पशुपालक चार रुपए प्रति लीटर गोमूत्र बेच सकेंगे।

अब तक किसान गोबर का विक्रय करते आये थे। गांव के पशुपालक चार रुपए प्रति लीटर गोमूत्र बेच सकेंगे. हरेली के मौके पर होने वाली गोमूत्र खरीदी से गौवंशपालकों को आर्थिक रूप से बड़ी मजबूती मिलेगी। अब गोमूत्र की बिक्री से भी किसानों की आय में इजाफा होगा और पशुधन विकास के कार्य को बढ़ावा मिलेगा। इसी के साथ जिले में गोपालकों से गोमूत्र  खरीदी की प्रक्रिया शुरू हो गई है। यहाँ 13 हितग्राहियों से 124 लीटर गोमूत्र की ख़रीदी की गयी। वही बिरकोनी में भी सभापति जनपद पंचायत अमर चंद्राकरसहित स्थानीय जनप्रतिनिधि


ने विधिविधान से कृषि यंत्रों की पूजा की गाय को चारा और पारंपरिक व्यंजन  खिलाए। इस मौक़े पर ग्रामीणजन और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद थे। यहाँ 3 हितग्राहियों से 55 लीटर गोमूत्र क्रय किया गया। इस प्रकार आज ज़िले की दो गोठनो में179 लीटर गोमूत्र की ख़रीदी हुई। समूह की महिलाओं को गौमूत्र से जैविक कीटनाशक बनाए जाने की विधि बताई गई। पशु चिकित्सक अधिकारी डॉ.डी.डी.झारियाँ ने स्व-सहायता समूह की महिलाओं को गौमूत्र की गुणवत्ता का परीक्षण करने हेतु पीएच स्ट्रिप एंव युरिनोमीटर से जांच करने की विधि बताई।

इस मौक़े पर संसदीय सचिव द्वारिकाधीश यादव और अध्यक्ष ज़िला पंचायत श्रीमती ऊषा पटेल सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने पौधा रोपण किया। वही बिरकोनी में भी सभापति जनपद पंचायत अमर चंद्राकर,  सहित स्थानीय जनप्रतिनिधि, ने विधिविधान से कृषि यंत्रों की पूजा की गाय को चारा और पारंपरिक व्यंजन  खिलाए। इस मौक़े पर ग्रामीणजन और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद थे। बिरकोनी में अतिथियों का स्वागत मुख्यकार्यपालन अधिकारी ज़िला पंचायत एस आलोक ने किया। उन्होंने गैडी भी मज़ा लिया।

विशेष लेख: प्रकृति के प्रति प्रेम और समर्पण का लोकपर्व : हरेली

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रायपुर। छत्तीसगढ़ के ग्रामीण जन-जीवन में रचा-बसा खेती-किसानी से जुड़ा पहला त्यौहार है, हरेली। सावन मास की अमावस्या को मनाया जाने वाला यह त्यौहार वास्तव में प्रकृति के प्रति प्रेम और समर्पण का लोकपर्व है। हरेली के दिन किसान अच्छी फसल की कामना के साथ धरती माता का सभी प्राणियों केे भरण-पोषण के लिए आभार व्यक्त करते हैं। सभी लोग बारिश के आगमन के साथ चारो ओर बिखरी हरियाली और नई फसल का उत्साह से स्वागत करते हैं। हरेली पर्व को छोटे से बड़े तक सभी उत्साह और उमंग से मनाते है। 


गांवों में हरेली के दिन नागर
, गैती, कुदाली, फावड़ा समेत खेती-किसानी से जुड़े सभी औजारों, खेतों और गोधन की पूजा की जाती है। सभी घरों में चीला, गुलगुल भजिया का प्रसाद बनाया जाता है। पूजा-अर्चना के बाद गांव के चौक-चौराहों में लोगों को जुटना शुरू हो जाता है। यहां गेड़ी दौड़, नारियल फेक, मटकी फोड़, रस्साकशी जैसी प्रतियोगिताएं देर तक चलती रहती हैं। लोग पारंपरिक तरीके से गेड़ी चढ़कर खुशियां मनाते हैं। माना जाता है कि बरसात के दिनों में पानी और कीचड़ से बचने के लिए गेड़ी चढ़ने का प्रचलन रहा है, जो समय के साथ परम्परा में परिवर्तित हो गया।


इस अवसर पर किया जाने वाला गेड़ी लोक नृत्य भी छत्तीसगढ़ की पुरातन संस्कृति का अहम हिस्सा रहा है। हरेली में लोहारों द्वारा घर के मुख्य दरवाजे पर कील ठोककर और नीम की पत्तियां लगाने का रिवाज है। मान्यता है कि इससे घर-परिवार अनिष्ट से बचे रहते हैं। 
छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की पहल पर माटी से जुड़ी अपनी गौरवशाली संस्कृति और परम्परा को सहेजने और आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने की पहल की गई है। छत्तीसगढ़ सरकार ने मुख्यमंत्री निवास सहित पूरे राज्य में लोकपर्वों के धूम-धाम से सार्वजनिक आयोजन कर इसकी शुरूआत की है।


इससे नई पीढ़ी के युवा भी अपनी पुरातन परम्पराओं से जुड़ने लगे हैं। सरकार ने हरेली त्यौहार के दिन सार्वजनिक अवकाश घोषित किया गया है। इस साल से प्रदेश के स्कूलों में हरेली तिहार को विशेष रूप से मनाने की शुरूआत की जा रही है। 
इससे बच्चे न सिर्फ अपनी कृषि संस्कृति को समझेंगे, उसका सक्रिय हिस्सा बनेंगे बल्कि अपनी संस्कृति के मूल भाव को आत्मसात भी कर सकेंगे। साथ ही स्कूलों में गेड़ी दौड़, वृक्षारोपण, पर्यावरण संरक्षण पर संगोष्ठी जैसे आयोजनों से बच्चों में अपनी संस्कृति और प्रकृति के प्रति प्रेम विकसित होगा।   


छत्तीसगढ़ में पारंपरिक लोक मूल्यों को सहेजते हुए गढ़बो नवा छत्तीसगढ़ की परिकल्पना को साकार रूप दिया जा रहा है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में पारंपरिक संसाधनों के उपयोग से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने का काम किया जा रहा है। इसके चलते राज्य सरकार ने दो साल पहले सन्
2020 में हरेली के दिन गो-धन न्याय योजनाशुरू की थी। शुरूआत में किसी ने कल्पना नहीं की थी, कि गोबर खरीदी की यह योजना गांवों की अर्थव्यवस्था के लिए एक मजबूत आधार तैयार करेगी। आज यह ग्रामीण अंचल की बेहद लोकप्रिय योजना साबित हुई है। 

इस अनूठी योजना के तहत सरकार ने गोबर को ग्रामीणों की आय का नया जरिया बनाया और किसानों और पशुपालकों से दो रूपए की दर से गोबर खरीदी शुरू की। पशुपालक ग्रामीणों ने गोबर बेचकर पिछले दो सालों में 150 करोड़ रूपये से अधिक की कमाई की है। खरीदे गए गोबर से गौठानों में स्व-सहायता समूहों ने 20 लाख क्विंटल से अधिक वर्मी कम्पोस्ट तैयार किया है, जिससे प्रदेश में जैविक खेती को बढ़ावा मिल रहा है। अब तक महिला समूह और गौठान समितियां 143 करोड़ से अधिक की राशि वर्मी खाद के निर्माण और विक्रय से प्राप्त कर चुकी हैं। 

इसके साथ ही गौठानों में गोबर से दिए, गमले सहित विभिन्न सजावटी समान बनाने से स्थानीय महिलाओं को रोजगार का नया साधन मिला है। गोधन न्याय योजना को विस्तार देते हुए राज्य सरकार इस साल हरेली तिहार से गौठानों में 4 रूपए प्रति लीटर की दर से गो-मूत्र की खरीदी की शुरूआत करने जा रही है। इस गो-मूत्र से महिला स्व-सहायता समूह द्वारा जीवामृत और कीट नियंत्रक उत्पाद तैयार किये जाएंगे। इससे रोजगार और आय का नया जरिया मिलने के साथ जैविक खेती को बढ़ावा मिलेगा और कृषि लागत कम होगी। 

गौ-मूत्र से बने कीट नियंत्रक उत्पाद का उपयोग किसान भाई रासायनिक कीटनाशक के बदले कर सकेंगे, जिससे खाद्यान्न की विषाक्तता में कमी आएगी और महंगे रासायनिक कीटनाशकों पर निर्भरता कम होगी। इन नवाचारों ने हरेली को प्रदेश में जैविक खेती और आर्थिक सशक्तिकरण के नए अध्यायों का प्रतीक बना दिया है। इससे लगता है कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के ग्राम-स्वराज का सपना अब आत्मनिर्भर गांवों के रूप में छत्तीसगढ़ में साकार हो रहा है। 

छत्तीसगढ़ में परंपराओं को सहेजते हुए उसे आधुनिक जरूरतों के अनुसार ढालने की जो शुरूआत की गई है, उसे जरूरत है सबके सहयोग से आगे बढ़ाने की। प्रकृति से जुड़कर पर्यावरण अनुकूल विकास की दिशा में आगे बढ़ने का हमारा यह कदम बेहतर कल के लिए सर्वोत्तम योगदान होगा।

 

विशेष लेख : इस बार भी हरेली पर रहेगी धूम

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रायपुर। हरेली छत्तीसगढ़ी संस्कृति, कृषि संस्कृति, परम्परा, लोक पर्व एवं पर्यावरण की महत्ता को दर्शाता है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के राजधानी रायपुर स्थित निवास पर हर बार की तरह इस बार भी किसानों, बहनों एवं भाइयों के साथ हरेली का पर्व पारंपरिक एवं धूमधाम से मनाया जाएगा। मुख्यमंत्री बघेल इस अवसर पर कृषि यंत्रों की पूजा भी करेंगे। हरेली पर्व को धूमधाम से मनाने के लिए मुख्यमंत्री निवास में तैयारियां जोर शोर से शुरू हो गई हैं। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ी लोक कलाकारों द्वारा सुआ, कर्मा, ददरिया और गेड़ी नृत्य की प्रस्तुति दी जाएगी तथा हरेली गीत भी गाए जाएंगे। छत्तीसगढ़ राज्य में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने जिन  सार्वजनिक अवकाशों की घोषणा की है, उनमें हरेली त्यौहार भी शामिल है।



 गोमूत्र खरीदी का शुभारंभ

 हरेली के पावन अवसर पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल पाटन ब्लाक के गांव करसा से गोधन न्याय योजना का विस्तार करते हुए गोमूत्र खरीदी का शुभारंभ करेंगे। गांव के पशुपालक चार रुपए प्रति लीटर में गोमूत्र विक्रय कर सकेंगे। हरेली के मौके पर होने वाली इस खरीदी से प्रदेश के गौवंशपालकों को आर्थिक रूप से बड़ी मजबूती मिलेगी। अब तक किसान गोबर का विक्रय करते आये थे अब गोमूत्र भी बेचने से उनकी आय में इजाफा होने से पशुधन विकास के कार्य को बढ़ावा मिलेगा। 

विशेषज्ञ मानते हैं कि कृषि के साथ पशुपालन का कार्य करने से किसान अपनी आय दोगुनी करने का लक्ष्य हासिल कर सकते हैं। इस मौके पर करसा में कृषि सम्मेलन का आयोजन भी किया गया है। यहां नये कृषि उपकरणों की लांचिंग होगी। खेती किसानी के लिए उपयोगी कृषि प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। मुख्यमंत्री किसानों से खेती किसानी के बारे में बातचीत करेंगे और उनका सम्मान भी करेंगे। 20 जुलाई 2020 को मुख्यमंत्री  भूपेश बघेल ने हरेली पर्व के अवपर पर ही देश की अनूठी गोधन न्याय योजना की शुरूआत की थी।

बैलगाड़ी से पहुंचेंगे पूजास्थल

मुख्यमंत्री हरेली पूजास्थल में बैलगाड़ी से पहुंचेंगे। वहां वे गौमाता की पूजा करेंगे। साथ ही परंपरागत रूप से कृषि उपकरणों की पूजा करेंगे। वे मशीन से पैरा काटेंगे और गायों को खिलाएंगे। हरेली के मौके पर गोवंश की पूजा होती है। उल्लेखनीय है कि पिछले साल भी मुख्यमंत्री ने अपने निवास से बैलगाड़ी से निकले थे और सुंदर परंपरागत तरीके से हरेली का उत्सव मनाया था।

नये कृषि उपकरणों की होगी लांचिंग

किसान सम्मेलन का खास आकर्षण नये कृषि उपकरणों की लांचिंग होगा। इसमें सबसे खास है एक ऐसा ड्रोन जिसके माध्यम से फर्टिलाइजर और कीटनाशक की समुचित मात्रा में काफी कम समय में छिड़काव हो सकेगा। इसके साथ ही कृषि के लिए उपयोगी अत्याधुनिक उपकरण भी डिस्प्ले के लिए लगाए जाएंगे। कृषि सम्मेलन में विशेषज्ञ भी मौजूद रहेंगे जिनसे किसान आधुनिक तरीके से खेती के संबंध में और खेती में आई नई तकनीक के बारे में जानकारी ले सकेंगे।

छत्तीसगढ़ी खेलों की होगी धूम

हरेली खेती का त्योहार है और साथ ही छत्तीसगढ़ में खेलों का सबसे बड़ा दिन। इस मौके पर छोटे बच्चे तो गेड़ी चढ़ते ही हैं बड़े बुजुर्ग भी गेड़ी चढ़ते हैं। इस दिन करसा में गेड़ी प्रतियोगिता भी होगी और इसके विजेताओं को सम्मानित भी किया जाएगा। इस मौके पर गेड़ी रेस, भौंरा, पिट्ठूल, कंचा, पतंग, गोली चम्मच, खोखो, रस्सा खींच, तिग्गा गोटी और गिल्ली डंडा जैसे खेलों का आयोजन भी किया जाएगा। प्रदेश के सभी स्कूलों में भी गेड़ी प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा।

खेती किसानी पर होगी चर्चा

हरेली का त्योहार अच्छी फसल की कामना के लिए सबसे खास त्योहार है। यह उत्सव का समय भी है और बेहतर खरीफ फसल के लिए विचारविमर्श कर योजना बनाने का भी। मुख्यमंत्री कृषक सम्मेलन में किसानों से बातचीत करेंगे। मुख्यमंत्री स्वयं किसान भी हैं इसलिए अपने अनुभव भी साझा करेंगे। साथ ही सरकार द्वारा किसानों के हित में आरंभ की गई योजनाओं की जानकारी भी देंगे। वे किसानों के अनुभव भी जानेंगे और उनसे चर्चा भी करेंगे।

गोमूत्र खरीदी इसलिए

छत्तीसगढ़ सरकार जैविक खेती की ओर राज्य को ले जाने की दिशा में लगातार कार्य कर रही है। इसके लिए आवश्यक है कि गोवंश संवर्धन हो और इनका पालन किसानों के लिए उपयोगी हो। गोबर खरीदी के माध्यम से और इसके द्वारा वर्मी कंपोस्ट बनाकर जैविक खाद का बड़े पैमाने पर उत्पादन प्रदेश में हो रहा है। अब गोमूत्र खरीदी से किसानों के लिए अतिरिक्त आय का जरिया तैयार होगा। इससे वे पशुपालन की दिशा में और तेजी से आगे बढ़ेंगे और उनकी आय की स्तर में बढ़ोत्तरी होगी।

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