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रायपुर के बीटीआई मैदान में 15 दिसम्बर से 25 दिसम्बर तक क्षेत्रीय सरस मेला

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रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के अंतर्गत गठित महिला स्वसहायता समूहों द्वारा निर्मित उत्पादों की प्रदर्शनी और विक्रय के लिए रायपुर के शंकर नगर स्थित बीटीआई मैदान में 15 दिसम्बर से 25 दिसम्बर तक क्षेत्रीय सरस मेला का आयोजन किया गया है। 11 दिनों तक चलने वाले इस मेले में छत्तीसगढ़ के साथ ही कई राज्यों के ग्रामीण समुदायों द्वारा निर्मित सामग्रियों की बिक्री और प्रदर्शन किया जाएगा। मेला में छत्तीसगढ़ी व्यंजनों के फूड स्टॉल में लोग स्थानीय व्यजंनों का लुत्फ उठा सकेंगे।



क्षेत्रीय सरस मेला में असम, गुजरात, मध्यप्रदेश, आंध्रप्रदेश, उत्तरप्रदेश, उत्तराखंड, झारखंड, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल के ग्रामीण समुदायों द्वारा उत्पादित उत्कृष्ट उत्पाद भी प्रदर्शनी-सह-विक्रय के लिए उपलब्ध रहेंगे। मेलास्थल में शाम को सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति भी होगी। 'बिहान' के अंतर्गत ग्रामीण महिलाओं तथा प्रदेश के गौठानों में रूरल इंडस्ट्रियल पार्क में काम कर रहे समूहों द्वारा उत्पादित व निर्मित प्राकृतिक उत्पादों के प्रोत्साहन और विक्रय के लिए आयोजित इस मेला में लोग प्रतिदिन सवेरे दस बजे से रात दस बजे तक प्रदर्शनी, खरीदी, छत्तीसगढ़ी व्यंजनों तथा सांस्कृतिक संध्या का आनंद ले सकेंगे।

राज्य शासन के पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग द्वारा गांवों की समृद्धि और रोजगार के लिए संचालित छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन - 'बिहान' योजना के अंतर्गत इस क्षेत्रीय सरस मेला का आयोजन किया जा रहा है। मेला में 'बिहानके तहत प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में गठित महिला स्वसहायता समूहों द्वारा निर्मित कई विशिष्ट जैविक उत्पादों की प्रदर्शनी-सह-विक्रय की व्यवस्था रहेगी। कोसा, सिल्क, खादी, हैण्डलूम, बैलमेटल, टेराकोटा, बांस, काष्ठ शिल्प इत्यादि उत्पाद बिक्री और प्रदर्शनी के लिए उपलब्ध रहेंगे। प्रदेश के विभिन्न जिलों से रसायन मुक्त विशेष उत्पादों जैसे सुगंधित चावल, ब्लैक राइस, मसाले, तेल, वनोपज आधारित दुर्लभ उत्पाद, शहद इत्यादि की मेला में बिक्री की जाएगी।

गोधन न्याय योजना लक्ष्मणी राठिया के लिए बनी वरदान

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रायपुर गोधन न्याय योजना लोगों के जीवन को किस तरह से बदल रही है इसकी एक झलक रायगढ़ के खरसिया में दिखी. गौठानों के माध्यम से गोबर खरीदकर महिला स्वसहायता समूह वर्मी कंपोस्ट खाद बनाते हैं और उसकी बिक्री करते हैं. खरसिया के जोबी गांव की रहने वाली लक्ष्मणी राठिया भी इस योजना से जुड़ी और उजाला महिला स्व सहायता समूह के माध्यम से खुद को  गोधन न्याय योजना से जोड़ा. इस समूह ने लगभग 600 क्विंटल वर्मी कंपोस्ट की बिक्री की और 2 लाख 15 हजार रूपए का लाभांश अर्जित किया. 



लक्ष्मणी राठिया ने इस पैसे से बच्चों के लिए कंप्यूटर खरीदा ताकि उन्हें बेहतर शिक्षा मिले. लक्ष्मणी ने 10वीं कक्षा में पढ़ने वाले यतिन्द्र और 12वी में पढ़ रही भावना की राह में संसाधनों के रोड़े को गोधन न्याय योजना सॆ दूर किया और वो इसके लिए छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का धन्यवाद करती हैं. लक्ष्मणी का कहना है कि भूपेश बघेल सरकार की योजनाओं ने गरीबों, मजदूरों, किसानों एवं महिलाओं के लिए जो योजनाएं शुरू की हैं वो अब छत्तीसगढ़ में आर्थिक सशक्तिकरण का माध्यम बन रही हैं और इससे लाभांवित होने वाली वो भी एक हितग्राही हैं.

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