Media24Media.com: सुश्री अनुसुईया उइके

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निर्वाचन से तय होती है देश की दिशा और दशा : राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके

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रायपुर। राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके ने आज भोपाल में आयोजित एक समारोह में प्रलय श्रीवास्तव द्वारा लिखित किताब ‘‘मध्यप्रदेश में चुनाव और नवाचार’’ पुस्तक का विमोचन किया। राज्यपाल ने समारोह को संबोधित करते हुए देश के कल्याण एवं विकास के लिए निर्वाचन एवं मताधिकार के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि भारत न केवल विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है बल्कि यह मजबूत एवं सफल भी है। इसका श्रेय उन्होंने चुनाव प्रक्रिया में होने वाले नवाचारों एवं  भारतीय जनमानस की लोकतंत्र में आस्था को दिया है। उन्होंने निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव को भारतीय लोकतंत्र की पहचान बताया। साथ ही उन्होंने  इस अवसर पर देश निर्माण में लोकतंत्र के चौथे स्तंभ, मीडिया की भूमिका को भी रेखांकित किया।

राज्यपाल सुश्री उइके ने आज अपने कर्म स्थल मध्यप्रदेश के भोपाल में आयोजित इस समारोह में शामिल होकर प्रसन्नता व्यक्त की और कहा कि भारत जैसे विशाल लोकतांत्रिक देश में निर्वाचन प्रक्रिया का विशेष महत्व है। हमारा लोकतंत्र न सिर्फ मजबूत बल्कि पूर्णतः सफल भी है। उन्होने कहा कि निर्वाचन वह प्रक्रिया है जो देश की दिशा और दशा तय करती है। इससे न केवल राजनैतिक दलों का बल्कि देश का भविष्य भी तय होता है। राज्यपाल ने निष्पक्ष और स्वतंत्र चुनाव को भारतीय प्रजातंत्र की सफलता बताया। उन्हेांने कहा कि लोकतंत्र ,निर्वाचन के जरिए मतदाताओं को ईमानदार और सशक्त प्रतिनिधि चुनने का मौका देता है। स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव समाज में सकारात्मक परिवर्तन की बुनियाद है,

जिससे देश का भविष्य तय होता है। इसीलिए समाज के सभी वर्गों को न सिर्फ निर्वाचन प्रक्रिया में पूरी ईमानदारी से भाग लेना चाहिए, बल्कि अपने बहुमूल्य वोट का उपयोग भी करना  चाहिए। क्योंकि एक-एक बहुमूल्य वोट मिलकर ऐसी सरकार बनाते है, जिससे देश का हित जुड़ा होता है। इस देश का कल्याण और विकास पूरी तरह से मतदाताओं के वोट पर निर्भर करता है। राज्यपाल ने चुनाव प्रक्रिया में होने वाले नवाचारों एव सुधारों को रेखांकित करते हुए, चुनाव प्रक्रिया में अपनाई जा रही तकनीकों को भी उल्लेखित किया। उन्होंने कहा कि नवाचार ने चुनाव प्रक्रिया को आसान, विश्वसनीय और सरल बनाया है। 

निर्वाचन प्रक्रिया जितनी निष्पक्ष, शुद्ध और स्वतंत्र होगी, प्रजातंत्र भी उतना ज्यादा मजबूत होगा। उन्हेांने कहा कि चुनाव प्रक्रिया में सुधार के साथ साथ अपनाए गये नवाचारो ने लोकतंत्र के प्रति भारतीय जनमानस की आस्था को और मजबूत किया है। देश में वोट देने का अधिकार, अपनी भावनाओं को अभिव्यक्त करने का सबसे बड़ा और सशक्त माध्यम है। राज्यपाल ने कहा कि मतदान के सशक्त अधिकार का उपयोग प्रत्येक व्यक्ति को ऐसी सरकार को चुनने में करना चाहिए, जिसमें हम सबका हित शामिल हो। उन्हेंने देश एवं प्रदेश की सभी महिलाओं एवं युवाओं से आग्रह किया कि हमेशा मतदान में बढ़ चढ़कर हिस्सा लें ।

राज्यपाल ने श्री प्रलय श्रीवास्तव को पुस्तक के लेखन को सराहनीय बताते हुए उन्हें बधाई एवं शुभकामनाएं दीं और आशा व्यक्त करते हुए कहा कि यह पुस्तक शोधकर्ताओं और विद्यार्थियों के लिए भी उपयोगी सिद्ध होगी। साथ ही राज्यपाल ने समारोह में उपस्थित मीडिया के वरिष्ठ लोगों के समाज के प्रति उनके योगदानो को रेखांकित करते हुए उनकी सराहना की। इस अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि उनके जीवन मे मीडिया की अहम भूमिका रही है। वे अलग-अलग पदों पर रहते हुए जनमानस की भलाई के लिए  निरंतर कार्य कर रहीं हैं। इस दौरान मीडिया ने उनके कार्य कार्यो का प्रचार प्रसार कर उन्हें नई ऊर्जा प्रदान की  और कहा कि यही ऊर्जा उन्हें आज भी लोगों के हित मे काम करने की प्रेरणा देते हैं। 

इस अवसर पर उन्होंने संबोधित करते हुए कहा कि समाज में जो गलत हो रहा है, उसका निर्भीक होकर विरोध अवश्य होना चाहिए और सत्य की तलाश की जानी चाहिए। तभी एक बेहतर समाज का निर्माण हो पाएगा। इस अवसर पर भारत के पूर्व चुनाव आयुक्त ओ.पी.रावत, मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी जे.एस.माथुर, श्रीमती उर्मिला शुक्ला, महेश श्रीवास्तव, विजय दत्त श्रीधर, एन.के.सिंह, उमेश त्रिवेदी, रमेश शर्मा एवं अन्य वरिष्ठ पत्रकारों समेत गणमान्य नागरिक उपस्थित थे।

स्वदेशी मेले में दिखती है भारत की समृद्ध परंपरा की झलक, स्वदेशी वस्तुओं का करें उपयोग: राज्यपाल

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रायपुर। राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके गत दिवस साइंस कॉलेज मैदान, रायपुर में स्वदेशी जागरण फाउंडेशन की ईकाई भारतीय विपणन विकास केन्द्र द्वारा आयोजित स्वदेशी मेले के समापन कार्यक्रम में शामिल हुई। इस मौके पर राज्यपाल सुश्री उइके ने स्वदेशी मेले में आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेता प्रतिभागियों को पुरस्कृत किया। साथ ही राज्यपाल ने पेंटिंग प्रदर्शनी का अवलोकन कर चित्रकारों की प्रशंसा की। चित्रकारों ने राज्यपाल को उनका स्केच भेंट किया। स्वदेशी मेला के आयोजकों द्वारा राज्यपाल को स्मृति चिन्ह तथा स्वदेशी उत्पादों की टोकरी भेंट की गई।

राज्यपाल सुश्री उइके ने समापन समारोह को संबोधित करते हुए 20 वर्षों से स्वदेशी मेले के सफल आयोजन के लिए मेला प्रबंधन को शुभकामनाएं दी और विभिन्न प्रतियोगिताओं में विजेता प्रतिभागियों से कहा कि वे दूत बनकर स्वदेशी मेला का प्रचार प्रसार करें तथा स्वदेशी उत्पाद के उपयोग के लिए लोगों को जागरूक करें। राज्यपाल सुश्री उइके ने कहा कि छत्तीसगढ़वासियों की रूचि और सक्रियता ने भी मेले को विशेष पहचान दिलाई है और लोग वर्षभर मेले का इंतज़ार करते हैं तथा जमकर पसंदीदा देशी वस्तुओं की खरीदी करते हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के वोकल फ़ॉर लोकल के संदेश के साथ ही देशी उत्पादों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए हो रहे प्रयासों का भी जिक्र किया। राज्यपाल ने कहा कि स्वदेशी मेले के माध्यम से वोकल फ़ॉर लोकल और आत्मनिर्भर भारत की संकल्पना को विस्तार मिला है।

इस दौरान राज्यपाल ने दत्तोपंत ठेंगढ़ी को भी नमन किया और स्वदेशी की संकल्पना में उनके योगदान को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि स्वदेशी मेला जहां एक ओर लोगों का भारत के स्थानीय उत्पादों से परिचय कराता है, वहीं लघु व मध्यम उद्योगों को अवसर प्रदान करने का भी काम करता है। स्वदेशी मेले जैसा शायद ही कोई मंच है, जो लोक उत्पाद को इतना बड़ा बाजार उपलब्ध कराता है। समेकित रूप से इन आयोजनों में भारत की समृद्ध परंपरा की झलक देखने को मिलती है। राज्यपाल ने प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में आयोजित हुए स्वदेशी मेलों की सराहना की और इसे भारतीय उद्योगों के लिए लाभकारी बताया। राज्यपाल सुश्री उइके ने स्वदेशी मेले के ऐतिहासिक पक्ष का उल्लेख करते हुए भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में स्वदेशी आंदोलन के उद्भव और इसके प्रभाव का उल्लेख किया।

राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके ने इस अवसर पर छत्तीसगढ़ में पाए जाने वाले लघु वनोपजों के संबंध में जानकारी देते हुए कहा कि यह वनांचल में रहने वाले लोगों की आजीविका का प्रमुख साधन है और पिछले कुछ वर्षों में बदलती जीवन शैली ने वन तथा जैविक उत्पादों की ओर लोगों का रुझान बढ़ाया है। लोग प्राकृतिक उत्पादों का उपयोग कर रहे हैं और


प्रदेश के सरगुजा तथा बस्तर अंचल में स्व सहायता समूह की महिलाएं वनउत्पादों से आर्थिक तरक्की के रास्ते में आगे बढ़ रही है। उन्होंने आयोजकों से प्रदेश के अन्य स्थलों में भी मेला आयोजन करने का आग्रह किया ताकि ग्रामीणों और छोटे उद्यमियों व स्व सहायता समूह की महिलाओं को भी अपने उत्पाद बेचने के पर्याप्त अवसर मिल पाए।

छत्तीसगढ़ शासन के पूर्व मंत्री और वर्तमान विधायक बृजमोहन अग्रवाल ने भी समापन समारोह को संबोधित किया और स्वदेशी उत्पादों की विशेषता और मेले के बारे में जानकारी दी। उल्लेखनीय है कि सात दिवसीय स्वदेशी मेले में 15 से 16 प्रांतों से आए व्यवसायियों ने 250 स्टॉल लगाए। मेले में थर्माकोल से बना भगवान जगन्नाथ का मंदिर तथा कोणार्क के सूर्य मंदिर का चक्र आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहा। मेले में व्यंजन, मेहंदी, केश सज्जा, चित्रकला, शिशु वेशभूषा, समूह नृत्य और रंगोली जैसी बहुआयामी प्रतियोगिताओं में लोगों ने उत्साह के साथ भागीदारी दी।

पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर के कुलपति नियुक्ति हेतु समिति गठित

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रायपुर। राज्यपाल एवं कुलाधिपति सुश्री अनुसुईया उइके द्वारा छत्तीसगढ़ विश्वविद्यालय अधिनियम, 1973 (क्रमांक 22 सन् 1973) की धारा 13 की उपधारा (2) में निहित प्रावधान अंतर्गत पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर के कुलपति नियुक्ति हेतु समिति का गठन किया गया है। उक्त समिति के अध्यक्ष बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय, झांसी एवं सिद्धार्थ विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ.सुरेन्द्र दुबे,



पंडित दीनदयाल उपाध्याय स्मृति स्वास्थ्य विज्ञान एवं आयुष विश्वविद्यालय रायपुर के पूर्व कुलपति पद्मश्री डॉ. ए.टी. दाबके तथा भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, धारवाड़ के निदेशक प्रोफेसर वेंकप्पाया आर. देसाई सदस्य होंगे। यह समिति अधिसूचना प्रसारित होने की तिथि से 6 सप्ताह के अंदर कुलपति नियुक्ति के लिए तीन व्यक्तियों के पैनल कुलाधिपति को प्रस्तुत करेगी। इस संबंध में 13 दिसंबर को राजभवन सचिवालय से अधिसूचना जारी की गई है।

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