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सरायपाली में अवैध धान परिवहन पर कार्रवाई, ट्रक जब्त कर मंडी के सुपुर्द

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महासमुंद। सरायपाली अनुविभागीय अधिकारी (आईएएस) सुश्री नम्रता चौबे के निर्देशन में आज सरायपाली क्षेत्र में अवैध धान परिवहन पर सख्ती बरतते हुए प्रशासन ने बिना दस्तावेजों के धान ले जा रहे एक ट्रक को जब्त कर मंडी के सुपुर्द कर दिया।

अधिकारियों को सूचना मिली थी कि एक ट्रक बिना वैध दस्तावेजों के धान का परिवहन कर रहा है। तत्पश्चात, जांच टीम ने कार्रवाई करते हुए ट्रक को रोका और दस्तावेज मांगे, परंतु चालक दस्तावेज प्रस्तुत करने में असमर्थ रहा। इस मामले में प्रशासन द्वारा ट्रक को जब्त कर मंडी में सुरक्षित रखा गया। प्रशासन का कहना है कि अवैध परिवहन पर सख्ती जारी रहेगी, और जांच में दोषी पाए जाने वालों पर उचित कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

 

विश्व बाल सुरक्षा दिवस: बाल अधिकारों के प्रति जागरूकता जरूरी : सीएम

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 01 जून को विश्व बाल सुरक्षा दिवस के अवसर पर सभी बच्चों के सुरक्षित, स्वस्थ और खुशहाल भविष्य की कामना की है। विश्व बाल सुरक्षा दिवस के अवसर पर जारी अपने संदेश में उन्होंने कहा है कि बच्चों को स्वस्थ, सुपोषित और सुरक्षित जीवन देना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

बाल सुरक्षा दिवस ऐसा ही अवसर है, जब हम बच्चों के लिए अपनी जिम्मेदारियों और प्रतिबद्धता को फिर से दोहराते हैं। आज के नौनिहाल ही कल भविष्य गढ़ेंगे। बच्चों के साथ उनके बाल मन को समझते हुए संवेदनशीलता से व्यवहार करना चाहिए। बच्चों के अधिकारों के प्रति समाज में जागरूकता जरूरी हैं। बघेल ने बच्चों को ढेर सारा प्यार देते हुए ईश्वर से अपनी कृपा बच्चों पर बनाए रखने की प्रार्थना की।

सुरक्षित गर्भपात सेवाओं में नवाचार के लिए छत्तीसगढ़ को प्रथम पुरस्कार

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रायपुर। सुरक्षित गर्भपात सेवाओं में नवाचार के लिए छत्तीसगढ़ को प्रथम पुरस्कार मिला है। केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा नई दिल्ली में आयोजित गर्भपात देखभाल पर राष्ट्रीय परामर्श कार्यक्रम (National Consultation on Comprehensive Abortion Care) में राज्य को यह पुरस्कार प्रदान किया गया।

प्रदेश के निजी चिकित्सालयों में सुरक्षित गर्भपात सेवाओं की उपलब्धता तथा एमटीपी अधिनियम (Medical Termination of Pregnancy Act) के पालन की निगरानी के लिए ई-कल्याणी एप (e-Kalyani Application) तैयार किया गया है। सुरक्षित गर्भपात सेवाओं में इस नवाचार के लिए छत्तीसगढ़ को प्रथम पुरस्कार प्राप्त हुआ है। मातृत्व स्वास्थ्य के राज्य नोडल अधिकारी डॉ. शैलेन्द्र अग्रवाल और राज्य सलाहकार श्रीमती अभिलाषा शर्मा रात्रे ने छत्तीसगढ़ की ओर से यह पुरस्कार ग्रहण किया।

देश में सुरक्षित गर्भपात सेवाओं की निगरानी के लिए एमटीपी एक्ट लागू किया गया है। मेडिकल टर्मिनेशन आफ प्रेग्नेंसी (संशोधन) एक्ट, 2021 के अनुसार गर्भवती महिला 24 हफ्ते तक गर्भपात करा सकती है। यौन उत्पीड़न, दुष्कर्म, नाबालिग या गर्भावस्था के दौरान वैवाहिक स्थिति में बदलाव (विधवा और तलाक), शारीरिक रूप से अक्षम और मानसिक रूप से बीमार महिलाओं को गर्भपात की अनुमति है। साथ ही वे महिलाएं भी गर्भपात करा सकती हैं जिनके गर्भ में पल रहे भ्रूण में विकृति हो। प्रदेश में निजी चिकित्सालयों में सुरक्षित गर्भपात सेवाओं की उपलब्धता एवं एमटीपी एक्ट के पालन की निगरानी के लिए ई-कल्याणी एप तैयार किया गया है।

इस एप के माध्यम से निजी चिकित्सालय अधिनियम के अंतर्गत सेवाएं प्रदान करने के लिए आवेदन कर सकती हैं जिसकी जिला स्तरीय समिति द्वारा समीक्षा कर अनुमति प्रदान की जाती है। छत्तीसगढ़ में अभी ई-कल्याणी एप में 136 निजी चिकित्सालय पंजीकृत हैं जहां एमटीपी एक्ट के तहत सुरक्षित गर्भपात सेवाएं प्रदान की जा रही हैं। इनके साथ ही 193 शासकीय चिकित्सालयों में भी सुरक्षित गर्भपात संबंधी सेवाएं उपलब्ध हैं। राज्य में सुरक्षित गर्भपात सेवाओं के संचालन में आईपास डेवलपमेन्ट फाउंडेशन (Ipas Development Foundation) द्वारा सहयोग प्रदान किया जा रहा है।

श्रमिक लछवंतीन को अब नहीं सताती बेटे के भविष्य की चिंता

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रायपुर। हर मां का सपना अपने बच्चे के भविष्य को बेहतर और सुरक्षित बनाने का होता है। श्रमिक वर्ग की माताएं हजारों अभावों के बीच अपने बच्चे के सुनहरे भविष्य के सपने बुनती हैं। इन सपनों को साकार करने में राज्य सरकार की मिनीमाता महतारी जतन योजना अहम भूमिका निभा रही है। योजना के तहत मिलने वाली 20 हजार रूपए की एकमुश्त राशि से श्रमिक परिवार के बच्चों के भविष्य को संवारने में काफी मदद मिल रही है। दिहाड़ी मजदूर श्रीमती लछवंतीन साहू की अपने छह माह के बेटे मोक्ष के भविष्य को लेकर चिन्ता भी दूर हो गई है, क्योंकि श्रम विभाग की मिनीमाता महतारी जतन योजना से उन्हें 20 हजार रूपए मिले हैं जो उन्होंने बेटे के भविष्य के लिए बैंक खाते में जमा करा दिए हैं। यह रकम बेटे मोक्ष के बडे़ होने पर उसकी शिक्षा और कामकाज का सहारा बनेंगे।

धमतरी जिले के दानीटोला वार्ड की निवासी श्रीमती लछवंतीन साहू छत्तीसगढ़ संगठित कर्मकार कल्याण मण्डल के तहत पंजीकृत दिहाड़ी श्रमिक हैं, जो गृह निर्माण कार्य में रेजा का काम करती हैं। उनके पति सुभाष साहू भी पेशे से मजदूर है। गत वर्ष 28 अगस्त 2022 को साहू दम्पति को पुत्र रत्न की प्राप्ति हुई जिसका नाम मोक्ष रखा। जन्म के साथ ही उसके भविष्य की चिंता मां को सताने लगी। इसी बीच उन्हें पता चला कि श्रम विभाग में मिनीमाता महतारी जतन योजना के तहत पंजीकृत श्रमिकों को आर्थिक सहायता राशि प्रदाय की जाती है। साहू दम्पति ने इसके लिए आवेदन दिया और उनके खाते में 20 हजार रूपए की राशि जमा हो गई।

श्रमिक परिवार के लिए यह राशि बहुत बड़ी है। भावुक होकर लछवंतीन ने कहा- योजना के तहत मिले 20 हजार रूपए को वह बैंक खाते में तब तक जमा रखेंगी, जब तक बेटा मोक्ष बड़ा न हो जाए।उन्होंने बताया कि यह राशि उनके लिए बड़ी रकम है जिसे वह अपने बेटे के भविष्य को सुरक्षित करने में उपयोग करेंगी। श्रीमती साहू ने प्रदेश सरकार के प्रति आभार प्रकट करते हुए कहा शासन की यह योजना हम जैसे गरीब और दिहाड़ी श्रमिकों के लिए वरदान सिद्ध हुई है। राज्य सरकार हम श्रमिकों के लिए सोच रही है, यह बहुत बड़ी बात है। इस योजना से हमें काफी राहत मिली है।

श्रम पदाधिकारी ने बताया कि राज्य सरकार द्वारा श्रम विभाग (छत्तीसगढ़ भवन एवं अन्य सन्निर्माण कर्मकार कल्याण मण्डल) के तहत पंजीकृत महिला निर्माण श्रमिकों को प्रथम दो संतानों के जन्म पर 20-20 हजार रूपए की राशि प्रदान की जाती है। योजना का लाभ लेने के लिए श्रमिक का पंजीयन बच्चे के जन्म से 90 दिनों के पूर्व का होना चाहिए। पंजीकृत श्रमिक को आवेदन के साथ जच्चा-बच्चा कार्ड, जन्म प्रमाण-पत्र, आधार कार्ड, स्वघोषणा प्रमाण पत्र और नियोजक प्रमाण पत्र प्रस्तुत किया जाना आवश्यक है। योजना के तहत अब तक 4 हजार 191 पात्र एवं पंजीकृत महिला श्रमिकों को लाभान्वित किया जा चुका है। अधिकाधिक श्रमिक परिवारों को योजना का लाभ दिलाने विभिन्न ग्राम पंचायतों में शिविर लगाए जाते हैं।

सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम सहित सुरक्षित यातायात व्यवस्था पर हो प्रभावी पहल : परिवहन मंत्री अकबर

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रायपुर। परिवहन मंत्री मोहम्मद अकबर की अध्यक्षता में आज छत्तीसगढ़ राज्य सड़क सुरक्षा परिषद की बैठक नवा रायपुर मंत्रालय स्थित महानदी भवन में ली गई। उन्होंने राज्य में सड़क दुर्घटनाओं के रोकथाम सहित सुरक्षित यातायात व्यवस्था के लिए सभी संबंधित विभागों को प्रभावी पहल हेतु विशेष जोर दिया। परिवहन मंत्री अकबर ने इस दौरान लोगों में यातायात नियमों के प्रति जागरूकता लाने और इसका कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने के भी निर्देश दिए। इस अवसर पर छत्तीसगढ़ राज्य गृह निर्माण मंडल के अध्यक्ष कुलदीप जुनेजा, छत्तीसगढ़ राज्य भण्डार गृह निगम के अध्यक्ष अरूण वोरा और प्रमुख सचिव मनोज पिंगुआ, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (यातायात) प्रदीप गुप्ता, सचिव परिवहन एस. प्रकाश तथा आयुक्त परिवहन दीपांशु काबरा उपस्थित थे। 



परिवहन मंत्री अकबर ने बैठक में चर्चा करते हुए हर माह जिला सड़क सुरक्षा समिति की बैठक नियमित रूप से आयोजित करने के लिए विशेष जोर दिया। जिलों में जिला कलेक्टर द्वारा प्रतिमाह के मान से वर्ष में 12 तथा सांसद की अध्यक्षता में प्रति तिमाही के मान से 4 बैठकों का आयोजन किया जाना होता है। उन्होंने इस दौरान ब्लैक स्पॉट के चिन्हांकन पश्चात उनमें तत्परता से सुधार की कार्रवाई के लिए निर्देश दिए। इसी तरह उन्होंने सड़क सुरक्षा दुर्घटना को रोकने के उपायों के तहत सड़कों के जंक्शन में सुरक्षा संबंधी उपायों पर भी तेजी से कार्य करने के लिए निर्देशित किया।

परिवहन मंत्री अकबर ने ब्लैक स्पॉट के सुधार कार्य में विलंब पर नाराजगी व्यक्त की और संबंधित विभागीय अधिकारियों को तेजी से कार्यवाही के लिए आवश्यक निर्देश दिए। बैठक में दुर्घटना के शिकार लोगों के त्वरित उपचार हेतु व्यवस्था, राज्य में ट्रांमा सेंटर की स्थिति, पाठ्यपुस्तकों में यातायात शिक्षा सामग्री का समावेश और यातायात के नियमों के उल्लंघन पर चालानी कार्रवाई तथा यातायात नियमों के पालन आदि विषयों पर विस्तार से चर्चा की गई। उन्होंने वाहनों की सघन जांच और तेज गति को नियंत्रित करने के लिए स्पीड गवर्नर लगाने की दिशा में कार्रवाई करने तथा नशापान और सड़क पर स्टंट करके वाहन चलाने वालों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करने के लिए भी निर्देशित किया।

बैठक में इंस्टिट्यूट ऑफ ड्राईविंग एण्ड ट्रैफिक रिसर्च संस्थान में उत्खन्न से जुड़े मशीनों के संचालन के लिए प्रशिक्षण शुरू करने के संबंध में भी विस्तार से चर्चा हुई। इससे उत्खन्न के क्षेत्र में भी युवाओं के लिए रोजगार के अवसर खुलेंगे। नवा रायपुर में संचालित आईडीटीआर में अब तक 12 हजार से अधिक वाहन चालकों को उनके कौशल वृद्धि के लिए प्रशिक्षण दिया जा चुका है। इस दौरान अध्यक्ष अंतर्विभागीय लीड एजेंसी सड़क सुरक्षा संजय शर्मा ने अवगत कराया कि प्रदेश के दुर्घटनाजन्य क्षेत्रों राजनांदगांव, धरसींवा, अभनपुर, पाली, सिमगा, सुकमा, बेमेतरा तथा पत्थलगांव में ट्रामा स्टेब्लाईजेशन यूनिट्स की शीघ्र स्थापना होगी। इनके निर्माण हेतु राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के तहत राशि की स्वीकृति मिल गई है। इसी तरह राजनांदगांव, जांजगीर-चांपा, बालोद तथा धमतरी में सि.टी. स्कैन मशीन की भी स्थापना की कार्यवाही जारी है। इस दौरान बताया गया कि इस वर्ष प्रदेश के समस्त 67 हजार 682 मितानिनों को एस.एच.आर.सी. के द्वारा प्राथमिक उपचार हेतु फर्स्ट ऐड संबंधी प्रशिक्षण दिया गया है।  

जिले में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने में एचडब्लूसी खोरपा अग्रणी प्राइवेट अस्पतालों जैसी मिलती है सेवा - लाभार्थी

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रायपुर। जिले में बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने में हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर खोरपा अपनी अग्रणी भूमिका निभा रहा है। सुरक्षित प्रसव के मामले वर्ष 2019-20 में जहां 204 प्रसव हुए वहीं कोविड संक्रमण काल के वर्ष 2020-21 में भी 163 संस्थागत प्रसव करवा कर अपनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी को निभाया है।रात को 11:30 बजे जब बिमला अपनी बहू योगेश्वरी को लेकर हेल्थ एंड वैलनेस सेंटर खोरपा पहुंची तो उन्हें विश्वास भी नहीं हुआ कि उनकी बहू को शासकीय चिकित्सालय में संस्थागत प्रसव की सुविधा मिलेगी। वह कहती है: "ऐसी सुविधाएं तो प्राइवेट अस्पतालों में ही मिलती हैं। अब तो ऐसी सुविधाये शासकीय चिकित्सालय में भी मिलने लगी है।"



वहीं चमेली भट्ट का कहना है, "रात को 11 बजे मैं अपनी बहू को लेकर पहुंची। तो मुझे इतनी अच्छी सुविधाएं मिली कि विश्वास ही नहीं हुआ। पूरी टीम ने बेहतर कार्य किया। स्टाफ नर्स प्रीति गहिरवारे ने जानकारी दी कि घबराने की कोई बात नहीं है, सारी सुविधाएं यही मिलेंगी आप इंतज़ार करिए। कुछ देर बाद उसने जानकारी दी कि लक्ष्मी को बेटी हुई है, व मां और बेटी दोनों स्वस्थ है।" प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र खोरपा  की प्रभारी डॉ. शारदा प्रसाद साहू ने बताया: "संस्थागत प्रसव में जिले में बेहतर सुविधाएं प्रदान करने में सेंटर का सातवां स्थान है बीते सात माह में सेंटर में  85 संस्थागत प्रसव हैं।

वहीं बीते सात माह में सेंटर से 5604 लोगों ने स्वास्थ्य सेवा ली है, अप्रैल में 683, मई में 760, जून में 711, जुलाई में 875, अगस्त में 799, सितंबर में 967, वहीं बीते माह अक्टूबर में 809, लोगों ओपीडी (बाहृय रोगी विभाग) में आए। आईपीडी (आंतरिक रोगी विभाग) में कुल 342 लोगों ने सेवा ली, अप्रैल में 34, मई में 57, जून में 40, जुलाई में 49, अगस्त में 38, सितंबर में 48, वहीं बीते माह अक्टूबर में 76, लोगों ने सेवाएं प्राप्त की।"



वहीं सेंटर ने संस्थागत प्रसव में जिले में अपना अलग स्थान बनाया है, अप्रैल माह में 11, मई में 7, जून में 18, जुलाई में 13, अगस्त में 11, सितंबर में 15, एवं अक्टूबर में 10 संस्थागत प्रसव हुए। आरएमए डीएस नेताम ने बताया: "सेंटर पर प्रसव उपरांत जिस वार्ड  में शिफ्ट किया जाता है वह मच्छर दानी युक्त है एवं डिलीवरी रूम में एसी की सुविधा है। बॉथरूम मे मरीजों के लिए गर्म पानी की सुविधा के लिए सोलर हीटर लगाये गए है। पीने के पानी के लिए आरओ की व्यवस्था भी अस्पताल परिसर में है, साथ ही साफ सफाई का विशेष ध्यान रखा जाता है, अस्पताल प्रबंधन द्वारा नियमित अंतराल से जच्चा और बच्चा की देखरेख की जाती है।"

छत्तीसगढ़ में सुगम तथा सुरक्षित यातायात के लिए वाहन चालन कौशल को विकसित करने की अहम पहल

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रायपुर. छत्तीसगढ़ में सुगम तथा सुरक्षित यातायात के लिए नवा रायपुर में संचालित इंस्टिट्यूट ऑफ़ ड्राइविंग एंड ट्रैफिक रिसर्च संस्थान छत्तीसगढ़ शासन की एक महत्वपूर्ण पहल साबित हो रही है. गौरतलब है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा विगत दिवस 9 दिसम्बर 2021 को परिवहन मंत्री मोहम्मद अकबर की अध्यक्षता में आयोजित कार्यक्रम में इसका शुभारंभ हुआ था. संस्थान में अब तक विगत 6 माह में 5 हजार से अधिक प्रशिक्षु, वाहन चालन तथा सड़क सुरक्षा से जुड़े हुए नियमों का प्रशिक्षण प्राप्त कर चुके हैं.


संस्थान में इस वर्ष जनवरी माह से आधिकारिक रूप से प्रशिक्षण आरम्भ होने के उपरांत अंतर्विभागीय लीड एजेंसी (सड़क सुरक्षा) ने प्रशिक्षण का रिपोर्ट कार्ड जारी करते हुए जानकारी साझा की है कि यहां सड़क सुरक्षा में जागरूकता लाने के लिए विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाये जा रहे हैं। केंद्र सरकार द्वारा जारी किये गए आकड़ों के अनुसार 72 प्रतिशत दुर्घटनाओं में वाहन चालकों को दोषी पाया गया है। इसे संज्ञान में लेते हुए संस्था ने 4 हजार से अधिक भारी वाहन चालकों को रिफ्रेशर ट्रेनिंग प्रदान किया गया है। 

स्कूली बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथामिकता के आलोक में स्कूल बस चालकों के लिए भी विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया जा रहा है, इसके तहत प्रदेश भर के 800 से अधिक स्कूल बस चालक इस प्रशिक्षण कार्यक्रम से अब तक लाभान्वित हो चुके है. इसके अलावा 350 से अधिक शासकीय वाहन चालकों को विशेष प्रशिक्षण देते हुए मॉडल चालक बनने हेतु प्रेरित किया गया है, प्रशिक्षण निरंतर जारी है।

परिवहन विभाग, छत्तीसगढ़ शासन एवं मारुती सुजुकी इंडिया लिमिटेड के संयुक्त तत्वाधान में संचालित इंस्टिट्यूट ऑफ़ ड्राइविंग एंड ट्रैफिक रिसर्च संस्थान में आधुनिकतम तकनीक का इस्तेमाल करते हुए 20 एकड के क्षेत्रफल में विशेष ड्राइविंग ट्रैक से ड्राइविंग प्रशिक्षण देने की योजना कार्यान्वित हुई। संस्थान में एक साथ 300 प्रशिक्षणार्थियों के प्रशिक्षण लेने के लिए 5 स्मार्ट क्लासरूम तथा विशालकाय ऑडिटोरियम का उपयोग किया जा रहा है। उच्च स्तर के प्रशिक्षक सड़क सुरक्षा से जुड़ी बारीकियों से छत्तीसगढ़ राज्य के चालकों को प्रशिक्षित कर रहे है। 



संस्थान में 80 प्रशिक्षुओं के लिए आवासीय प्रशिक्षण एवं कैंटीन सुविधा भी उपलब्ध कराई जा रही है।वाहन चालन कौशल को बढ़ावा देने हेतु शासन ने महिला वाहन चालकों के लिए अतिरिक्त छूट की भी घोषणा की है। नये चालकों में 50 प्रतिशत से अधिक महिलाओं ने प्रशिक्षण प्राप्त किया है और उनमें विशेष उत्साह देखा गया। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा चलाये जा रहे इन कार्यक्रमों के जरिए राज्य के चालकों में वाहन चालन कौशल का विकास होगा एवं उनके लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। 

साथ ही सड़क सुरक्षा को लेकर जागरूकता आएगी और राज्य में हो रही सड़क दुर्घटनाओं में कमी लायी जा सकेगी। बढ़ती हुई ईंधन की कीमतों को ध्यान में रखते हुए संस्थान में ईंधन बचत के लिए वाहन चालकों में जागरूकता लाने हेतु भी विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार किया गया है। इसके अलावा संस्थान में ज्वलनशील प्रदार्थ एवं खतरनाक रसायन के परिवहन में वाहन चालकों के लिए कार्यक्रम तैयार किये गए हैं।

लीड एजेंसी (सड़क सुरक्षा) अध्यक्ष संजय शर्मा एवं संस्थान के संयुक्त संचालक अमित गुप्ता के सतत् पर्यवेक्षण में संस्था में संचालित प्रशिक्षण कार्यक्रमों में विशेष रूप से दुर्घटना से जुड़े कारण एवं निवारण, रक्षात्मक वाहन चालन, सड़क संकेत एवं सिग्नल, प्राथमिक उपचार, सड़क संबंधी नियम एवं उल्लंघन करने से होने वाली दंडात्मक कार्यवाही, फाइन और पेनल्टी से जुड़े हुए नियम, कठिन परिस्तिथियों में वाहन चालन का कौशल इत्यादि विषयों पर विस्तार से प्रशिक्षुओं को ऑडियो-वीडियो माध्यम से तरीके से अवगत कराया जा रहा है।

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