Media24Media.com: साज-सज्जा

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स्वच्छता दीदीयों द्वारा वेस्ट-टू-वंडर से डेकोरेट हो रहे मकान

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रायपुर। स्वच्छता दीदीयों द्वारा वेस्ट-टू-वंडर के तहत डोर-टू-डोर कलेक्ट किए गये कचरा से साज-सज्जा और घरेलू उपयोग की सामग्री बनाकर अतिरिक्त आमदनी प्राप्त कर रही है। लोगों के घर अब वेस्ट-टू-वंडर से स्वच्छता दीदियों द्वारा निर्मित साज-सज्जा की सामग्री से डेकोरेट होने लगी है। स्वच्छता दीदियों द्वारा डोर-टू-डोर कलेक्ट की कचरा से उपयोगी और सजावटी वस्तुयें बनाई जा सकती है और अतिरिक्त आमदनी भी की जा सकती है।

अगर यह हुनर देखना या सीखना है, तो आपको छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से तक़रीबन 75 किलोमीटर दूर बेमेतरा ज़िले के ब्लॉक बेरला आना पड़ेगा। ज़िले के नगर पंचायत बेरला में स्वच्छता दीदियाँ रोजाना डोर-टू-डोर कचरा कलेक्शन कर रही है। इन दीदियों को कचरा कलेक्शन के दौरान प्राप्त कपड़े से वेस्ट टू वंडर के अतंर्गत घरेलू साज-सज्जा और उपयोगी सामग्री डोरमैट, परदा, कवर, मैट, थैला आदि बनाया जा रहा है। वे मांग अनुसार स्थानीय बाजार में स्टॉल लगाकर विक्रय भी कर रही है। इससे उन्हें अतिरिक्त आमदनी हो रही है।

उल्लेखनीय है कि अधिकांश लोगों को घर में उपलब्ध कचरे से उपयोगी और सजावटी वस्तुओं को बनाने के बजाय उन्हें फेंकना उनके लिए सबसे सरल और अच्छा लगता है। घर पर रोजाना ढेर सारा कचरा पैदा होता है। जैसे फटे-पुराने कपड़े, नारियल के छिलके, पुराने अखबार, कांच के जार, प्लास्टिक की बोतलें और गत्ते के डिब्बे आदि। इन सभी का उपयोग रचनात्मक तरीके से आंतरिक सज्जा को सजाने के लिए भी किया जा सकता है। वेस्ट- आउट-ऑफ-वेस्ट का सीधा सा मतलब है कि ऐसी सामग्री से कुछ नया और आकर्षक बनाना जो किसी काम का न हो। पुराने से कुछ नया बनाना और पुनर्चक्रण किसी के कार्बन पदचिन्ह को कम करने का सबसे अच्छा तरीका है। कचरे से बने सामानों से कोई भी अपने घर को सजा सकता है। महिलाएं डोर टू डोर कचरा कलेक्शन एवं अपशिष्ट प्रबंधन के कार्यों को बखूबी अंजाम दे रही हैं। महिलाएं सूखे एवं गीले कचरे को अलग-अलग करने वर्मी कम्पोस्ट के माध्यम से खाद बनाने का काम भी कर रही हैं।

पुरखौती मुक्तांगन में नई साज-सज्जा के साथ बढ़ायी जाएगी सुविधाएं

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रायपुर। पुरखौती मुक्तांगन में नई साज-सज्जा कर इसे भव्य और आकर्षक बनाया जाएगा। संस्कृति मंत्री अमरजीत भगत ने आज विभागीय कार्यों की समीक्षा के दौरान अधिकारियों से कहा कि पुरखौती मुक्तांगन में पर्यटक सुविधाएं बढ़ायी जाए। उन्होंने कहा कि यहां आने वाले पर्यटक एवं सैलानियों को बेहतर सुविधाएं मिलनी चाहिए।

संस्कृति मंत्री भगत ने कहा कि पुरखौती मुक्तांगन में आने के लिए पर्यटकों को ऑनलॉइन टिकिट की व्यवस्था की जाए। इसके अलावा टिकिट काउन्टर की संख्या बढ़ाए जाने के निर्देश दिए। उन्होंने  कहा कि पुरखौती मुक्तांगन में नई साज-सज्जा की जाए। यहां प्रवेश द्वारा को और अधिक भव्य और आकर्षक बनाया जाए। यहां पार्किंग-स्पेस को भी बढ़ाया जाए।

चिन्हारी योजना की समीक्षा में उन्होंने अधिकारियों को ज्यादा से ज्यादा स्थानीय कलाकारों को मौका दिया जाने के निर्देश दिए। बैठक में उन्होंने कलाकारों का पंजीयन, वरिष्ठता व राष्ट्रीय स्तर पर दिए गए कार्यक्रमों के आधार पर उनका ग्रेडेशन करने और कलाकारों की प्रोत्साहन राशि बढ़ाए जाने के लिए प्रस्ताव तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कलाकारों के पंजीयन, चिकित्सा सुविधा, पेंशन संबंधी प्रकरणों के संबंध में आवश्यक दिशा निर्देश दिए।

संस्कृति मंत्री भगत ने बैठक में छत्तीसगढ़ी संस्कृति और परम्परा के व्यापक प्रचार-प्रसार के लिए पर्यटन केन्द्रों तथा सूचना केन्दों में आदिम कला संस्कृति व राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव की ब्रोशर, पोस्टर लगाने के निर्देश दिए। मंत्री भगत ने गढ़ कलेवा की प्रगति की भी समीक्षा की। अधिकारियों ने बताया कि प्रदेश के 33 जिलों में से 16 जिलों में गढ़ कलेवा का संचालन किया जा रहा है। शेष जिलों में भी इस वर्ष गढ़ कलेवा का संचालन शुरू हो जाएगा। इस मौके पर संस्कृति एवं पुरातत्व विभाग के सचिव अन्बलगन पी., संचालक विवेक आचार्य सहित अन्य संबंधित वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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