Media24Media.com: साक्षात्कार

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सेजेस पटेवा प्राचार्य प्रधान का दिल्ली में व्याख्यान एवं साक्षात्कार

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देवराज साहू पटेवा। स्वामी आत्मानंद शासकीय उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय पटेवा के प्राचार्य समीर चन्द्र प्रधान  राष्ट्रीय शैक्षिक योजना एवं प्रशासन संस्थान में आयोजित सेमिनार में शामिल हुए। दिल्ली में  एन सी ई आर टी परिसर में  स्थित  नीपा‌(NIEPA) नाम से प्रख्यात इस विशिष्ट राष्ट्रीय शैक्षिक योजना एवं प्रशासन संस्थान के द्वारा 17 अक्टूबर 2024 से 19 अक्टूबर 2024 तक आयोजन किया गया था। नई शिक्षा नीति 2020 (NEP 2020)  तथा नए डिजिटल युग के परिपेक्ष्य में स्कूल प्रमुखों की महती भूमिका को अधिकाधिक सतत तथा व्यावसायिक कलेवर देने के‌ उद्देश्य से दिल्ली में तीन दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई।

जिसका नाम "कन्सल्टिंग मीट फार डेवलपमेंट आफ गाइडलाइंस आन कन्टीन्युवश प्रोफेशनल डेवलपमेंट आफ स्कूल लीडर" था। इस सेमीनार सह वर्कशॉप (कार्यशाला) में देश के नौ राज्यों के सत्रह निरन्तर सफल नेतृत्व क्षमता से अपने विद्यालय का कायाकल्प कर प्रगति कराने और समाज को‌ भी प्रेरित करने वाले प्राचार्यों को नवीन परिपेक्ष्य में स्कूल प्रमुखों के नेतृत्व क्षमता के सतत व्यावसायिक विकास करने के लिए दिशानिर्देश का ड्राफ्ट तैयार करने में अपने अनुभव का उपयोग करने के लिए आमंत्रित किया गया था। छत्तीसगढ़ से राष्ट्रीय शैक्षिक योजना एवं प्रशासन संस्थान से सीधे समीर चन्द्र प्रधान प्राचार्य सेजेस पटेवा तथा एस सी ई आर‌टी छत्तीसगढ़ से श्रीमती सुधा परमार प्राचार्य शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कन्या एल बी 2 को चयनित किया गया था।

प्रथम दिवस नीपा संस्थान  की वाइस चांसलर  तथा NCSL की प्रमुख प्रोफेसर शशिकला वंजारी  ने मां सरस्वती के चित्र पर पुष्पांजलि तथा दीप प्रज्ज्वलित कर  सेमिनार सह कार्यशाला का शुभारंभ किया। प्रो‌फसर शशिकला वंजारी ने अपने असीम विद्वतापूर्ण  संक्षिप्त उद्बोधन में समस्त प्राचार्यो का आह्वान किया कि ये कार्य शाला स्कूल लीडरशिप के सतत् व्यावसायिक विकास हेतु इस तरह का गाइडलाइन  (दिशा निर्देश) तैयार करें कि भारत  को पुनः विश्व में "सेंटर आफ ग्रेव्हिटी" (गुरुत्व का केंद्र) बने।प्रथम सत्र में सुधा परमार छ‌ग तथा अन्य राज्यों के‌ प्राचार्यों ने दिये गए विषय पर अपने विचार रखे। द्वितीय सत्र में  समीर चन्द्र प्रधान प्राचार्य सेजेस पटेवा को न‌ई शिक्षा नीति 2020 (NEP2020) एवं बदलते डिजिटल युग के परिपेक्ष्य में स्कूल लीडर के "सतत् व्यावसायिक विकास "हेतु अपने विचार रखने सर्वाधिक समय 01 घण्टे का समय दिया गया।

जिसमें प्रधान ने अपने विद्वतापूर्ण व्याख्यान में भारतीय उपनिषदों, वेदों की‌ मिमांषा करते हुए रेखांकित किया कि भारतीयता की मूल प्रवृति सहिष्णुता, विश्वबन्धुत्व,सहसम्बंध, समाधान है। अतः आने वाले समय में स्कूल लीडरशिप का यह दायित्व होना जरूरी है कि शिक्षा व्यवस्था में इन भारतीय संवेदनशीलता और‌ आत्मा को शिक्षा के हर क्षेत्र में प्रतिस्थापित करने में अपना योगदान दे। प्रधान ने निरन्तर धाराप्रवाह विश्लेषण में यह स्पष्ट किया कि विद्यालयीन समस्या या किसी भी स्तर का समाधान आम जनता, विद्यार्थी, सहकर्मी, अधिकारी कर्मचारी के साथ अच्छे सम्बन्ध के द्वारा ही निकाला जा सकता है।इस सम्बन्ध में उन्होंने अपने अनुभवों से भी सदन को अवगत कराया। प्रधान के व्याख्यान की सभी आयोजकों तथा लीडर्स ने तालियां बजा कर सराहना की। आयोजक संस्था" नीपा" ने प्रधान एवं अन्य समस्त प्राचार्यों के विचारों को तत्काल लिपीबद्ध किया।

समीर चन्द्र प्रधान प्राचार्य सेजेस के  प्राचार्य के रुप में 14 वर्षीय कार्यकाल का विश्लेषण करने के पश्चात उन्हें सबसे अधिक कठिन चुनौतियों का सामना करते हुए विद्यालय का स्वरुप बदलने में सफल प्राचार्य के रुप में लाइव स्ट्रीम साक्षात्कार के लिए आमंत्रित किया गया तथा NCERT(नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशनल रिसर्च एंड ट्रेनिंग) दिल्ली के स्टूडियो में, राष्ट्रीय शैक्षिक योजना एवं प्रशासन संस्थान (नीपा)की प्रोफेसर साधना अबसार ने 45 मिनट का साक्षात्कार लिया। साक्षात्कार में प्रधान ने अपने विद्यालय को 2011 से विभिन्न चुनौतियों के मध्य निरन्तर किस तरह विकसित किया और आज विद्यालय किस उत्कृष्ट अवस्था में पहुंचा है, विस्तृत जानकारी दी।

उन्होंने  प्राचार्य या संस्था प्रमुख को समय समय पर स्वयं को परिस्थिति अनुसार अधिकारी और‌ मित्र के मध्य अनुपात निर्धारित करते‌ रहना जरुरी बताया। यह 60-40,70-30,80-20 भी हो सकता है। विद्यालय के विकास यात्रा में उन्होंने पटेवा अंचल के विद्यार्थियों,पालक, जनप्रतिनिधियों, शाला प्रबंधन एवं विकास समिति सदस्यों,शिक्षक, कर्मचारी साथियों, वरिष्ठ अधिकारियों, पत्रकारों के साथ सम्बन्ध और उनके सहयोग को सबसे महत्वपूर्ण बताया। साक्षात्कार के दौरान स्क्रीन पर विद्यालय की विकास यात्रा को स्पष्ट करने के लिए अनेक फोटोग्राफ, विडियो भी दिखाए गए। उन्होंने बताया कि इस साक्षात्कार की रिकार्डिंग यूट्यूब, फेसबुक पर‌भी NCSL के साईट ,पर देखी जा सकती है। 

उल्लेखनीय है कि शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय पटेवा को विकास यात्रा को देखते हुए 2023-2024 में स्वामी आत्मानंद शासकीय उत्कृष्ट अंग्रेजी/हिन्दी माध्यम विद्यालय के‌ रुप‌‌ मे उन्नत किया गया। प्राचार्य प्रधान के नेतृत्व में 2023-2024 में विद्यालय का परीक्षा परिणाम कक्षा 10वीं एवं 12वीं का 90% से अधिक रहा। वर्कशॉप सह सेमीनार का  समापन विभिन्न प्राचार्यों द्वारा अपने विद्यालय की विकास यात्रा, योजनाओं को दिखा कर तथा राष्ट्रीय शैक्षिक योजना एवं प्रशासन संस्थान (नीपा) द्वारा प्राचार्यों को प्रमाणपत्र दे कर 19 .10.2024 को संध्या‌ विदा किया गया। संपूर्ण आयोजन की संयोजक डॉ.चारू मलिक ने प्राचार्यो को निरन्तर अथक परिश्रम करने के लिए संस्थान की ओर से आभार व्यक्त किया तथा उम्मीद जताई की कि सभी विद्यालय को अपने नेतृत्व क्षमता से प्रेरणादाई विद्यालय के रूप में निरन्तर विकसित करेंगे। उन्होंने ध्येय वाक्य "सतत प्रयास,सतत विकास" को सदैव जारी रखने का आह्वान किया।


Chunnilal Sahu: जमीन से उठकर 'सर्वोच्च सदन' तक का सफर

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छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले में स्थित है छोटा सा गांव मोंगरापाली। गांव का लाल, चुन्नीलाल वर्तमान में महासमुन्द संसदीय क्षेत्र से सांसद हैं। वे लघु-सीमांत किसान परिवार से हैं। सांसद (MP Chunni Lal Sahu) बनने के बावजूद जब भी उन्हें मौका मिलता है, अपने खेत में वे हल चलाते (नागर जोतते) नजर आते हैं। चुन्नीलाल गांव में पैदा हुए, जमीन से जुड़कर भाजपा संगठन का काम किया।




देखें VIDEO:-





https://youtu.be/OB39G3WCoXs




2013 में वे छत्तीसगढ़ विधानसभा के लिए खल्लारी से विधायक चुने गए। अब 2019 से महासमुंद संसदीय क्षेत्र से सांसद हैं। नई दिल्ली के एक मैग्जीन ने देश के शीर्ष 25 सांसदों में उन्हें स्थान दिया है। सर्वे  रिपोर्ट के अनुसार चुन्नीलाल की गिनती देश के 'जागरूक सांसद' में हैं। उनका फर्श से अर्श तक का राजनीतिक सफर बहुत ही रोमांचक है। और आम आदमी के लिए प्रेरणास्पद है।





वरिष्ठ पत्रकार आनंदराम साहू से साक्षात्कार (MP Chunni Lal Sahu)





वरिष्ठ पत्रकार आनंदराम साहू से एक खास साक्षात्कार में उन्होंने जमीन से उठकर सर्वोच्च सदन तक पहुँचने की दास्तान खुलकर कही। पेश है साक्षात्कार के प्रमुख अंश, उन्हीं की जुबानी-
 





सवाल- आपकी पारिवारिक पृष्ठभूमि क्या है, आप राजनीति में कैसे और क्यों आए ? 





चुन्नीलाल- मैं एक साधारण किसान परिवार से हूं। पिताजी सुखराम साहू भाजपा के जमीनी कार्यकर्ता थे। नाना जीवनलाल साव मीसाबंदी रहे हैं। बचपन में स्कूल शिक्षा के दिनों की बात है, घर में आपातकाल की खूब चर्चा होती थी। इसका मेरे जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ा। चचेरे भाई स्वर्गीय भाऊलाल साहू संघ के जमीनी कार्यकर्ता थे। उनके साथ अक्सर रायपुर के गद्रे भवन स्थित पार्टी कार्यालय जाना होता था।





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अन्याय और अत्याचार की बातें सुनकर मन मस्तिष्क में हलचल पैदा होती है। मैं बचपन में ही संघ परिवार और भाजपा के विचारधारा से जुड़ गया। विद्या भारती धर्मजागरण विभाग से जुड़ाव था। जनसेवा की भावना से जुड़कर कार्य करता रहा। राजनीति में यकायक कैसे कदम पड़े, कहना कठिन है। मेरी (MP Chunni Lal Sahu) सेवा भावना और संगठन क्षमता को देखकर भाजपा मंडल और जिला स्तर की जिम्मेदारी सौंपी गई।





सात हजार वोटों के अंतर से विधायक निर्वाचित





सबकुछ अच्छे से निभाता रहा। अचानक 2013 में मुझे खल्लारी विधानसभा से मैदान में उतारा गया। यह मेरे जीवन का पहला चुनाव था। और मैं करीब सात हजार वोटों के अंतर से विधायक निर्वाचित हुआ। 






 सवाल- कभी आपने सोचा था विधायक और सांसद बनेंगे? 





चुन्नीलाल- साधारण किसान परिवार का होने से विधायक और सांसद बनने का सोचना भी दिवा स्वप्न से कम नहीं था। जब 2013 के विधानसभा चुनाव के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री रमन सिंह का फोन आया और मुझे चुनाव लड़ने कहा गया तो मैं हैरान था। जुबां पर शब्द नहीं आ रहे थे। "चुप कैसे हो गए? डॉ रमन सिंह के सवाल पर मैंने कहा- भाई साहब! गरीब किसान परिवार से हूं। चुनाव बहुत खर्चीला हो गया है, मैं कैसे चुनाव लड़ पाऊंगा?उन्होंने दो टूक कहा-तुम्हें चुनाव लड़ना है, तैयारी करो।" इस तरह अप्रत्याशित रूप से मुझे टिकट मिली। विधायक भी बन गया, लेकिन तब यह नहीं सोचा था कि मैं कभी सांसद भी बन सकता हूं।





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सवाल- पांच साल विधायक कार्यकाल की आपकी उपलब्धि क्या है?





चुन्नीलाल- वर्ष 2013 से 2018 तक पांच साल खल्लारी (छत्तीसगढ़ विधानसभा) से विधायक रहा। मेरे कार्यकाल की उपलब्धि सिंचाई, शिक्षा और आवागमन के लिए सड़कों का जाल बिछाया जाना प्रमुख है। कांदाजरी डायवर्सन से वर्तमान में 17 गांव के दो हजार एकड़ जमीन की सिंचाई हो रही है। दूरस्थ अंचल तक हाई स्कूल शिक्षा और गांव-गांव में पक्की सड़क मार्ग का विस्तार किया है। जनसामान्य से निरंतर संपर्क में रहना, सबके सुख-दुख में सहभागिता निभाना मेरी प्रमुख उपलब्धि है।





सवाल- डेढ़ साल के संसदीय कार्यकाल की कोई बड़ी उपलब्धि है? 





चुन्नीलाल- पार्टी ने जो भी जिम्मेदारी सौंपी, सब पर खरा उतरने जी-जान लगा दिया। संसदीय क्षेत्र की मूलभूत आवश्यकताओं के लिए निरंतर प्रयास कर रहे हैं। महासमुन्द संसदीय मुख्यालय में मेडिकल कॉलेज की स्थापना के लिए केंद्र सरकार के समक्ष पहल और इसे मूर्तरूप में लाने निरंतर प्रयास अब तक की मेरी सबसे बड़ी उपलब्धि है। 






सवाल- राजनीति में कोई बड़ा सपना, जिसे पूरा करना है? 
 





चुन्नीलाल- मैंने लोकसभा चुनाव के दौरान ही मगध  (महासमुन्द-गरियाबंद-धमतरी) परियोजना की परिकल्पना की है। जैसे ओड़िशा का नुआपाड़ा जिला 1936 तक तत्कालीन महासमुन्द तहसील का हिस्सा था। तब नुआपाड़ा का कालाहांडी क्षेत्र की पहचान पलायन और भुखमरी के लिए राष्ट्रीय स्तर पर थी।





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कालाहांडी के समन्वित विकास के लिए केबीके (कालाहांडी-बलांगीर-कोरापुट) परियोजना बनाई गई।जिससे क्षेत्र का विकास हुआ और आज यह क्षेत्र भुखमरी मुक्त है। वैसे ही मगध परियोजना से महासमुन्द संसदीय क्षेत्र के समन्वित विकास की जरूरत है। इस परियोजना को लागू करने के लिए लोकसभा में निरंतर आवाज उठा रहे हैं। हमें उम्मीद है इस ड्रीम प्रोजेक्ट को जरूर लागू किया जाएगा। और हमारा संसदीय क्षेत्र खासकर महासमुन्द जिला गरीबी और पलायन से मुक्त हो सकेगा।
 





सवाल- 542 सांसदों में आप  जागरूक सांसद कैसे चुने गए ? 





चुन्नीलाल- मुझे नहीं मालूम कि किस मापदंड से मुझे जागरूक सांसद चुने हैं। मैं जमीन से जुड़ा हुआ हूं, आज भी आम आदमी हूं। किसान-मजदूरों की समस्याओं को सदन में प्रमुखता से उठाया हूं। पहली बार का सांसद होने के बावजूद लोकसभा में निरन्तर मुखर रहा। महासमुन्द जिले से 72 हजार श्रमिक पलायन कर गए थे।





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राज्य सरकार ने नीति आयोग को महज सात-आठ सौ लोगों के पलायन का मिथ्या आंकड़ा देकर श्रमिकों का बड़ा नुकसान किया। इसे मैं सदन और सदन के बाहर भी मुखर होकर उठाया। आम आदमी की आवाज उठाने की वजह से मुझे जागरूक सांसद माना गया होगा। संभवतः यह भी मेरे चयन का एक कारण हो सकता है।






सवाल- जनता के नाम कोई संदेश देंगे ? 





चुन्नीलाल- हमारे क्षेत्र का प्रमुख व्यवसाय खेती है। खेती और खेती आधारित व्यापार पर ही संपूर्ण अर्थव्यवस्था निर्भर है। इसलिए हमने अकालमुक्त महासमुन्द का सपना संजोया है। सिकासेर जलाशय के उलट (वेस्ट वेयर) से बहने वाली पानी को नहर नाली निर्माण कराकर बागबाहरा के चंडी-चरौदा बांध और महासमुन्द के कोडार जलाशय तक लाने की व्यवस्था के लिए पुरजोर प्रयास जारी है। इससे सिंचाई का रकबा और भूमिगत वाटर लेवल दोनों बढ़ेगा। इसके लिए राज्य के कृषि मंत्री से लेकर केंद्रीय कृषि मंत्री के मध्य समन्वय स्थापित कर कार्ययोजना तैयार कर रहे हैं। इससे आम आदमी के जीवन में खुशहाली आएगी। महासमुन्द और बागबाहरा एनएच-353 पर शहर के बाहर से बाइपास निर्माण का लंबित प्रस्ताव को गति देकर निर्माण कराने जुटे हुए हैं।


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