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राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा लघु फिल्म महोत्सव छत्तीसगढ़-2023

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रायपुर। अंतर्विभागीय लीड एजेंसी (सड़क सुरक्षा) छत्तीसगढ़ से प्राप्त जानकारी के अनुसार सड़क सुरक्षा जनजागरूकता में सहभागिता हेतु अनेक फिल्म निर्माताओं तथा गणमान्य नागरिको के अनुरोध पर राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा लघु फिल्म महोत्सव छत्तीसगढ़ 2023 में  पंजीकरण की अंतिम तिथि 25 जुलाई 2023 से बढ़ाकर 10 अगस्त 2023 तथा फिल्म प्रविष्टि की अंतिम तिथि 26 जुलाई 2023 से बढ़ाकर 12 अगस्त 2023 की गई है।

उल्लेखनीय है कि इस महत्वपूर्ण आयोजन में अब तक देश के विभिन्न राज्यों में उत्तर प्रदेश गुजरात, मध्यप्रदेश, कर्नाटक, केरल, महाराष्ट्र, बिहार, पंजाब, असम, राजस्थान, पश्चिम बंगाल, आंध्रप्रदेश, हरियाणा, झारखण्ड, दिल्ली, उड़ीसा से कुल 64 तथा छत्तीसगढ़ के विभिन्न क्षेत्रो के 80 प्रतिभागियों के पंजीकरण हुए है। इस संबंध में अधिक जानकारी के लिये मोबाईल नंबर- +9190408-34734 अथवा +9194791-91791 में संपर्क किया जा सकता है।

प्रतिभागियों के लिये दिशा-निर्देश

फिल्म एक डॉक्यूमेंट्री, प्रयोगात्मक, कथात्मक, काल्पनिक, गैर कॉल्पनिक या एनीमेशन हो सकती है। मूल फिल्म यथासंभव उच्चतम गणवत्ता (1920X1080 या उससे ऊपर) की सड़क सुरक्षा थीम पर आधारित होनी चाहिए। प्रतिभागियों के लिए सर्वप्रथम https://forms.gle/6fixo79kCbuzbydh8 में पंजीकरण अनिवार्य है। राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा लघु फिल्म महोत्सव, छत्तीसगढ़ में भाग लेने के लिए कोई प्रवेश शुल्क नहीं है और आयोजक टीम से कोई भी कभी भी किसी भी प्रकार का शुल्क नहीं मांगेगा। प्रतिभागी की न्यूनतम आयु 18 वर्ष या उससे अधिक होनी चाहिए। एक प्रतिभागी के लिए अधिकतम तीन प्रविष्टियों की पात्रता है। फिल्म की कुल अवधि क्रेडिट सहित (फ्रंट और एण्ड) अधिकतम 140 सेकण्ड (2.20 मिनट) हो सकती है।

                                       

राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा लघु फिल्म महोत्सव, छत्तीसगढ़ 2023 में दो श्रेणियों में प्रस्तुतियां स्वीकार की जाएगी। इनमें (1) छत्तीसगढ़ी भाषा (छत्तीसगढ़ी, गोडी, धुर्वा, भतरी, दोरली, संबलपुरी, कुड़ख, सदरी, बैगानी, कमारी, औरिया, सरगुजिया, दंतेवाड़ा गोड़ी आदि) और (2) अन्य भारतीय भाषा, सभी प्रविष्टियों के लिए हिंदी में उपशीर्षक अनिवार्य है। प्रस्तुत की जाने वाली लघु फिल्में प्रवेशकत्ताओं की मूल रचना होनी चाहिए एवं किसी भी कॉपीराइट या किसी तीसरे पक्ष के किसी अन्य अधिकार का उल्लंघन नहीं करना चाहिए। प्रतियोगी इस बात से सहमत है कि उन्होंने अपनी लघु फिल्मों में प्रस्तुत संगीत, ध्वनि और या छवियों के संबंघ में सभी आवश्यक अनुमतियां प्राप्त कर ली हैं। किसी भी प्रकार के सामाजिक भेदभाव और अश्लील/वयस्क फिल्म को स्वीकार नहीं किया जाएगा और राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा लघु फिल्म महोत्सव छत्तीसगढ़ से अयोग्य घोषित कर दिया जायेगा।

छत्तीसगढ़ पुलिस एवं अंतर्विभागीय लीड एजेंसी (सड़क सुरक्षा) छत्तीसगढ़ को अधिकार होगा कि महोत्सव के प्रचार उद्देश्यों के लिए प्रविष्टियों (प्रेषित चयनित/नामांकित फिल्में) एवं फिल्म की सामग्री का उपयोग छत्तीसगढ़ पुलिस एवं अंतर्विभागीय लीड एजेंसी (सड़क सुरक्षा) छत्तीसगढ़ द्वारा किया जा सकेगा और प्रत्येक फिल्म की प्रतियों को अपने महोत्सव पुस्तकालय के हिस्से के रूप में रखा जा सकेगा। सभी प्रविष्टियां चाहे पुरस्कृत हों या नहीं, छत्तीसगढ़ पुलिस और संबंधित एजेंसियों द्वारा व्यावसायिक हित के बिना सड़क सुरक्षा जागरूकता के लिये उपयोग की जा सकती है। एक बार चयनित और अंतिम स्क्रीनिंग के लिए प्रस्तुत की गई फिल्मों को महोत्सव समाप्त होने तक किसी भी परिस्थिति मे वापस लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

प्रवेश के साथ फिल्म का एक डिजिटल पोस्टर (सोशल मीडिया क्रिएटिव) संलग्न करना होगा। जमा की गई सामग्री आवेदक को वापस नहीं की जाएगी। फिल्में समय सीमा से पहले जमा की जानी चाहिए और किसी भी परिस्थिति में देर से प्रस्तुति स्वीकार नहीं की जाएगी। राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा लघु फिल्म महोत्सव, छत्तीसगढ़ किसी भी क्षति, के लिए जिम्मेदार नहीं होगा। गलत/अपर्याप्त/अस्पष्ट/अपूर्ण विवरण वाले प्रवेश प्रपत्रों पर विचार नहीं किया जाएगा। महोत्सव समिति बिना कोई कारण बताए किसी भी फिल्म को स्वीकार या अस्वीकार करने का अधिकार सुरक्षित रखती है। एक बार चयन के लिए प्रस्तुत की गई फिल्म को अंतिम माना जाएगा और प्रस्तुत करने के बाद किसी भी बदलाव पर विचार नहीं किया जाएगा। विजेताओं (प्रथम, द्वितीय और तृतीय) के चयन के लिए जूरी का मूल्यांकन अंतिम होगा। कोई भी प्रतियोगी जूरी के फैसले के खिलाफ अपील नहीं करेगा।

मुख्य कार्यक्रम के दिन, प्रत्येक भाग लेने वाली टीम का कम से कम एक सदस्य उपस्थित होना चाहिए। प्रस्तुत की जाने वाली लघु फिल्में निर्माताओं की मूल रचना होनी चाहिए एवं किसी भी कॉपीराइट या किसी तीसरे पक्ष के कियी अन्य अधिकार का उल्लंघन नहीं करना चाहिए। प्रतियोगी इस बात से सहमत है कि उन्होंने आपनी लघु फिल्म में प्रस्तुत संगीत, ध्वनि और या छवियों के संबंध में सभी आवश्यक अनुमतियां प्राप्त कर ली है। लघु फिल्म जमा करने समय प्रतिभागी को सामग्री की मौलिकता के बारे में एक स्व-घोषित पत्र (आयोजन समिति द्वारा प्रदत्त) अनिवार्य रूप से हस्ताक्षरित और संलग्न करना होगा। महोत्सव में प्रवेष करके, प्रतिभागी इस बात से सहमत है कि राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा लघु फिल्म महोत्सव छत्तीसगढ़ आपके या आपकी लघु फिल्म द्वारा किए गए किसी भी कॉपीराइट उल्लंघन के लिए उत्तरदायी नहीं होगा।

राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा लघु फिल्म महोत्सव, छत्तीसगढ़ वैध समझे जाने वाले किसी भी फिल्म को प्रदर्शित न करने का अधिकार सुरक्षित रखता है। प्रतिभागी लघु फिल्म निर्माताओं पर किसी भी अपराध या उल्लंघन के लिए भारतीय आपराधिक प्रक्रिया संहिता और भारतीय मीडिया कानून के अनुसार मुकदमा चलाने का जोखिम भी हो सकता है। प्रस्तुत की जा रही फिल्म के किसी भी हिस्से में नस्लीय, धार्मिक और क्षेत्रीय भेदभाव को चित्रित नहीं किया जाएगा। काूननी मुद्दे, यदि कोई हों, रायपुर, छत्तीसगढ़ की न्यायिक अदालतों के अधिकार क्षेत्र में आएंगे।

किसी भी फिल्म निर्माता, संस्था, संगठन को ‘‘राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा लघु फिल्म महोत्सव छत्तीसगढ़’’ नाम के उपयोग की अनुमति नहीं है। आयोजन समिति की अनुमति के बिना किसी भी व्यावसायिक, गैर-व्यावसायिक, सांस्कृतिक या व्यक्तिगत उपयोग के लिए ‘‘राष्ट्रीय सड़क सुरक्षा लघु फिल्म महोत्सव छत्तीसगढ़’’ नाम एवं आयोजन के प्रतीक चिन्ह के उपयोग की स्थिति में संबंधित व्यक्ति या संस्था के विरूद्ध सख्त कानूनी कार्यवाही की जाएगी।

तेज रफ्तार, बिना हेलमेट और सीट बेल्ट नहीं लगाने से होती हैं मौतें: पूर्व न्यायाधीश

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अगर 40 किमी प्रति घंटा की स्पीड हो तो दुर्घटना में बचने की पूर्ण संभावना होती है। अगर यह रफ्तार दोगुनी हो तो बचने की संभावना केवल 20 फीसदी रह जाती है। यह बात सुप्रीम कोर्ट कमेटी ऑन रोड सेफ्टी के अध्यक्ष और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश अभय मनोहर सप्रे ने रोड सेफ्टी को लेकर दुर्ग जिले में हुई प्रदेश स्तरीय समीक्षा बैठक में बताई। उन्होंने छत्तीसगढ़, भारत और दुनिया के अनेक देशों में सड़क दुर्घटनाओं के आंकड़ों की जानकारी दी तथा तुलनात्मक समीक्षा भी की। 

न्यायमूर्ति अभय मनोहर सप्रे ने बताया कि जिन देशों में रोड सेफ्टी को लेकर दुर्ग में जागरूकता ज्यादा है। वहां इनकी संख्या में तेजी से गिरावट आई है। उन्होंने वियतनाम का उदाहरण देते हुए बताया कि गंभीरता से उपाय करने से वहां सड़क दुर्घटना में मौतों की संख्या में काफी गिरावट आई। उन्होंने कहा कि अधिकतम मौत तेज रफ्तार गाड़ी चलाने से होती हैं इसके बाद हेल्मेट नहीं पहनने, सीट बेल्ट नहीं लगाने जैसे सुरक्षा उपाय नहीं अपनाने से मौतें होती हैं। 

शराब पीकर गाड़ी चलाने से बड़ी संख्या में मौतें 

शराब पीकर गाड़ी चलाने से भी बड़ी संख्या में मौतें होती हैं। उन्होंने कहा कि लोग अपनी सुरक्षा के प्रति जागरूक होकर सेफ्टी रूल्स अपनायें तो ज्यादातर मौतें घट सकती हैं। सड़क सुरक्षा से जुड़े अधिकारी इस बात में बेहद गंभीरता से काम करते हुए सेफ्टी रूल्स का अनुपालन सुनिश्चित कराएं। सतत मानिटरिंग से स्वत ही लोग ट्रैफिक नियमों को अपनाने लगते हैं। 

सड़क सुरक्षा को लेकर विशेष फंड उपलब्ध

बैठक में सचिव परिवहन टोपेश्वर वर्मा ने बताया कि सड़क सुरक्षा को लेकर शासन ने विशेष रूप से फंड उपलब्ध कराया है। सड़क सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इंस्टीट्यूट ऑफ ड्राइविंग ट्रेनिंग एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट 17 करोड़ की लागत से तेंदुआ में बनाया गया है। क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय रायपुर में 5.22 करोड़ रुपए की लागत से ई-ट्रैक बनाया गया है। 

'नियमित रूप से होती है समीक्षा बैठक'

दुर्ग रेंज IG ओपी पाल ने बताया कि प्रशासन द्वारा नियमित रूप से मोटर व्हीकल एक्ट की गाइडलाइन के मुताबिक जांच की जा रही है। इसके साथ ही जागरूकता कार्यक्रम भी चलाया जा रहा है।  दुर्ग कलेक्टर सर्वेश्वर नरेंद्र भुरे ने बताया कि सड़क सुरक्षा को लेकर नियमित रूप से समीक्षा बैठक होती है और इसके अनुरूप निर्णय लिए जाते हैं। लोगों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देकर कार्य किया जा रहा है। एसपी बद्रीनारायण मीणा ने बताया कि ग्रामीण क्षेत्रों में अंजोर रथ के माध्यम से यातायात जागरूकता के कार्य किए जा रहे हैं। 

छत्तीसगढ़ में हो रहे ये उपाय 

सड़क सुरक्षा को लेकर छत्तीसगढ़ सरकार के प्रयासों के बारे में इंटर डिपार्टमेंट लीड एजेंसी के चेयरमैन संजय शर्मा ने बताया कि तेंदुआ में ड्राइविंग ट्रेनिंग और रिसर्च सेंटर में वर्तमान में 200 वाहन चालकों को विश्वस्तरीय इंफ्रास्ट्रक्चर में ट्रेनिंग दी जा रही है। सिलेबस में रोड सेफ्टी को शामिल किया गया है। सड़क सुरक्षा को लेकर रायपुर जिले में पायलेट प्रोजेक्ट चल रहा है। इसमें अधिक दुर्घटना वाले 83 गांवों में सड़क सुरक्षा को लेकर चौपाल आयोजित कराई गई है। इससे दुर्घटनाओं में कमी आई है। 

 3 लाख 59 हजार प्रकरणों पर कार्रवाई

उन्होंने बताया कि ओवर लोडेड वाहनों पर इस साल 4 लाख 81 हजार प्रकरण प्रदेश भर में दर्ज किए गए। मुख्य सड़कों की सुरक्षा ऑडिट कराई गई और 53 सड़कों में सुधार काम किया गया। जंक्शन सुधार के 1797 काम किए गए। यातायात नियमों के उल्लंघन के 3 लाख 59 हजार प्रकरणों पर कार्रवाई की गई। सड़क सुरक्षा के लिए रंबल स्ट्रिप, ब्लिंकर्स भी बनाए गए।

रोड सेफ्टी अब CSR में भी शामिल

अध्यक्ष सप्रे ने बताया कि रोड सेफ्टी अब CSR में भी शामिल है। कोयंबटूर का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि यहां पर होंडा सिटी कंपनी ने CSR से मोटर व्हीकल एक्ट की जागरूकता को लेकर पार्क बनाया है। उन्होंने कहा कि इसी तरह से सोशल मीडिया में वीडियो के माध्यम से व्यापक जागरूकता कार्यक्रम चलाया जा सकता है।

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