Media24Media.com: संरक्षण

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राज्यपाल डेका ने बेमेतरा जिले में प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठक

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रायपुर। छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका आज दो दिवसीय दौरे पर बेमेतरा पहुँचे। उन्होंने सर्किट हाउस परिसर में एक पेड़ माँ के नाम अभियान के अंतर्गत मौलश्री का पौधा रोपित कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।

राज्यपाल डेका ने सर्किट हाउस स्थित सभाकक्ष में जिला प्रशासन के अधिकारियों के साथ बैठक लेकर विकास कार्यों की जानकारी ली। उन्होंने नवागढ़ विकासखंड के उनके द्वारा गोद लिए गए ग्राम टेमरी में संचालित योजनाओं की विस्तृत जानकारी ली। बैठक में उन्होंने शिक्षाए स्वास्थ्यए पेयजलए कृषिए उद्यानिकीए प्रधानमंत्री आवास योजना सहित अन्य बुनियादी सुविधाओं की प्रगति की जानकारी की।

राज्यपाल ने जैविक खेती को बढ़ावा देने पर विशेष बल देते हुए कहा कि टेमरी गांव में जैविक भिण्डी की खेती की संभावनाएँ बेहतर हैं। उन्होंने ग्रामीणों को प्रेरित करते हुए कहा कि वे अपने बाड़ी में जैविक भिण्डी का उत्पादन करें। उद्यानिकी अधिकारी द्वारा यह बताया गया कि ग्राम टेमरी का वातावरण भिण्डी उत्पादन के लिए उपयुक्त है।

उन्होंने कहा कि गोद लिए गए ग्राम के प्रत्येक व्यक्ति तक शासकीय योजनाओं का लाभ पहुँचेए यह सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने जनपद पंचायत के सी ई ओ को निर्देशित किया कि ग्राम विकास की नियमित मॉनिटरिंग की जाए तथा मिशन मोड में कार्य कर ग्राम को आदर्श गांव के रूप में विकसित किया जाए।

बैठक के दौरान राज्यपाल को गांव में तीन तपेदिक ;टीण्बीण्द्ध रोगियों की जानकारी दी गईए जिस पर उन्होंने व्यक्तिगत रूप से छह माह की दवा हेतु आर्थिक सहयोग देने की घोषणा की। इसके अतिरिक्तए डेका ने आठ मेधावी विद्यार्थियों को 5.5 हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि देने की भी घोषणा की।

राज्यपाल ने श्रीराम बुनकर सहकारी समिति देवरबीजा के सदस्यों से भेंट की और उनकी भवन मरम्मत व अन्य समस्याओं के समाधान हेतु कलेक्टर को आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने राष्ट्रीय शालेय क्रीड़ा प्रतियोगितादृ2025 में पदक प्राप्त करने वाले खिलाड़ियों से भी मुलाकात कर उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। समापन पर राज्यपाल को स्मृति चिन्ह भेंट कर उनका आभार व्यक्त किया गया।

वर्षा ऋतु में मछलियों के संरक्षण हेतु 16 जून से 15 अगस्त तक मत्स्याखेट रहेगा प्रतिबंधित

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महासमुन्द। राज्य शासन द्वारा मछलियों की वंश वृद्धि एवं प्रजनन काल को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2025-26 में भी विगत वर्षों की भांति मत्स्याखेट पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया गया है। यह प्रतिबंध आगामी 16 जून 2025 से 15 अगस्त 2025 तक लागू रहेगा।

इस अवधि में जिले के सभी तालाबों एवं जल स्त्रोतों (जो नदी-नालों से जुड़े हुए हैं) में मत्स्याखेट (मछली पकड़ने) की गतिविधियाँ पूर्णतः प्रतिबंधित रहेंगी। केवल ऐसे छोटे तालाब अथवा जल स्त्रोत, जिनका संबंध किसी भी नदी या नाले से नहीं है, एवं जलाशयों में किये जा रहे केज कल्चर को इस प्रतिबंध से मुक्त रखा गया है। यदि कोई व्यक्ति इस आदेश का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो छत्तीसगढ़ मत्स्य क्षेत्र (संशोधित) अधिनियम के नियम-3 (5) के अंतर्गत उस पर एक वर्ष तक का कारावास, 10,000 रुपए तक का जुर्माना अथवा दोनों एक साथ दंड के रूप में दिए जा सकते हैं।

मत्स्य विभाग द्वारा सभी मत्स्य पालकों, ठेकेदारों एवं मछुआ समुदाय को निर्देशित किया गया है कि वे उक्त अवधि में मछली पकड़ने से परहेज करें, जिससे प्राकृतिक रूप से मछलियों की संख्या में वृद्धि हो सके एवं जल स्रोतों में जैव विविधता बनी रहे।

 

जल को सिर्फ संसाधन नहीं, संस्कार के रूप में अपनाएं - अरुण साव

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रायपुर। उप मुख्यमंत्री तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री अरुण साव ने पंडित दीनदयाल उपाध्याय भू-जल संवर्धन मिशन (शहरी) के शुभारंभ पर आयोजित कार्यशाला में जल संरक्षण की प्राचीन परंपरा और वर्तमान में इसे पुनर्जीवित करने की जरूरतपर पीपीटी के माध्यम से अपनी बातें रखीं। उन्होंने रायपुर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में कार्यशाला में मौजूद विशेषज्ञों, जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, अभियंताओं, स्वयंसेवी और गैर-सरकारी संगठनों से कहा कि इस गर्मी में सभी लोगों ने महसूस किया होगा कि जल संरक्षण क्यों जरूरी है।

नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग भी गंभीरता से इसे महसूस कर वर्षा जल और भू-जल संवर्धन का अभियान मिशन मोड पर शुरू कर रही है। इसमें सभी शहरवासियों की सहभागिता जरूरी है। कार्यशाला में हाइड्रोलॉजिस्ट्स, कॉलोनाइजर्स, उद्योग समूह और राज्य शासन के विभिन्न विभागों ने भू-जल और वर्षा जल के प्रभावी संवर्धन पर चार घंटे तक संवाद किया। उप मुख्यमंत्री अरुण साव और भारत के वाटरमैन के नाम से प्रसिद्ध राजेन्द्र सिंह ने ओपन सेशन (Open Session) में प्रतिभागियों के सवालों के जवाब भी दिए।


उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने अपने प्रस्तुतिकरण में कहा कि आने वाली पीढ़ी के लिए जल को सहेजकर रखना हमारा सामाजिक दायित्व है। हमारे पूर्वजों ने भावी पीढ़ियों के लिए तालाब, कुएं और बावली बनाकर जल संरक्षित किया था। बाद की पीढ़ियों ने इनके संरक्षण-संवर्धन पर ध्यान नहीं दिया। नतीजतन, आज बड़ी संख्या में ये पट गए हैं या अतिक्रमण का शिकार हो गए हैं। जलस्रोतों के प्रति हमारी उदासीनता ने आज हमें जल संकट की ओर धकेल दिया है। साव ने प्राचीन भारतीय ग्रंथों में उल्लेखित जल के महत्व को रेखांकित करते हुए इसके संरक्षण पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि जल न सिर्फ प्यास बुझाता है, अपितु यह संस्कृति, आस्था और जीवन का संगम है। जल संरक्षण जरूरत नहीं, हमारा सामाजिक दायित्व है।

उप मुख्यमंत्री साव ने कार्यशाला में प्रतिभागियों को भू-जल और वर्षा जल के संरक्षण के लिए प्रेरित करते हुए कहा कि हमने नए तालाब और नए कुएं खोदने बंद कर दिए हैं। जल की हमारी सभी जरूरतों के लिए हम सरकार पर आश्रित हो गए हैं। हमने पूर्वजों के दिए स्रोतों को भी संरक्षित नहीं किया। इसने एक बड़ी विसंगति को जन्म दिया है। एक ओर गर्मी में बूंद-बूंद के लिए संघर्ष करते हैं तो दूसरी ओर बरसात में बाढ़ झेलते हैं। साव ने कार्यशाला में शहरों में जल संकट की प्रमुख चुनौतियों को सामने रखते हुए भू-जल और वर्षा जल के संरक्षण के विभिन्न तरीकों को प्रभावी रूप से अमल में लाने पर जोर दिया।

भारत के वाटरमैन के नाम से मशहूर राजेन्द्र सिंह ने कार्यशाला में कहा कि छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य है जिसने शहरी जल के पुनर्भरण का जिम्मा लिया है। इसके लिए मैं उप मुख्यमंत्री और विभागीय मंत्री अरुण साव को बधाई देता हूं। समाज को अपनी जिम्मेदारियों को समझते हुए राज्य के साथ मिलकर जल संरक्षण करना होगा। उन्होंने कहा कि यदि हम पानी का अनुशासित उपयोग करेंगे तो पेयजल, निस्तारी, सिंचाई, खेती और उद्योग सभी के लिए पर्याप्त पानी मिलेगा। हम जलस्रोतों के रिचार्ज की तुलना में डिस्चार्ज ज्यादा कर रहे हैं। इससे स्थिति बिगड़ती जा रही है। उन्होंने भारतीय ग्रंथों में जल के महत्व और इसके संयमित उपयोग का जिक्र करते हुए कहा कि भारत का प्राचीन ज्ञान, तकनीक, अभियांत्रिकी, संस्कृति और संस्कार धरती की पोषक हैं, शोषक नहीं। हमें धरती के पर्याप्त पोषण पर भी गंभीरता से ध्यान देना होगा।

राजेन्द्र सिंह ने खेती के चक्र को वर्षा के चक्र के साथ जोड़ने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि शहरों के चारों ओर की खेती को शहरों में पानी की जरूरत के अनुकूल करना होगा। शिक्षा के पाठ्यक्रम में पानी की पढ़ाई शामिल करना चाहिए। विद्यार्थियों और शिक्षकों के लिए जल साक्षरता का अभियान चलाना चाहिए। उन्होंने कहा कि धरती के पोषण और पर्यावरण की सुरक्षा के लिए जल, जंगल और जमीन के रिश्ते को समझना जरूरी है। भावी पीढ़ी को जल, जंगल और जमीन के रक्षण, संरक्षण और पोषण का महत्व समझाना होगा। सिंह ने कार्यशाला में सर्वसम्मति से गंदे पानी को साफ पानी के साथ नहीं मिलने देने का संकल्प पारित करने का सुझाव दिया। उन्होंने सभी शहरों में वाटर-बॉडीज (Water-bodies) की पहचान और सीमांकन कर उन्हें अधिसूचित करने का भी सुझाव दिया, जिससे इन पर अतिक्रमण को रोकने स्थानीय शासन द्वारा प्रभावी कदम उठाए जा सके।

भू-वैज्ञानिक डॉ. विपिन दुबे ने कार्यशाला में रायपुर शहरी क्षेत्र के भूगर्भीय जलस्रोतों में रेन वाटर हार्वेस्टिंग के प्रभावों के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि हम बारिश के पानी को व्यर्थ बहने देते हैं, जबकि इसका उपयोग जलस्तर को रिचार्ज करने में किया जाना चाहिए। उन्होंने उपयोग किए हुए पानी के रिसायकल और रियूज पर भी जोर दिया। भू-वैज्ञानिक डॉ. के. पाणिग्रही ने कार्यशाला में कहा कि यदि हम 30 प्रतिशत वर्षा जल को भी हार्वेस्ट कर लें तो रायपुर में पानी की दिक्कत नहीं होगी।

कार्यशाला में गुजरात के सूरत म्युनिसिपल कार्पोरेशन के पर्यावरण अभियंता शरद काक्लोतर और सहायक अभियंता भरत चौधरी ने वहां भू-जल और वर्षा जल के संवर्धन के लिए किए जा रहे नवाचारों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि भू-जल को रिचार्ज करने के विभिन्न तरीकों को अमल में लाने के साथ ही वहां जल संरक्षण के लिए उद्यान विकास, सरोवर पुनरोत्थान (Lake Rejuvenation), प्रभावी सीवेज प्रबंधन और उपयोग किए हुए जल के उपचार के बाद दोबारा उपयोग में लाने जैसे काम प्राथमिकता से किए जा रहे हैं।

छत्तीसगढ़ क्रेडाई (CREDAI) के अध्यक्ष मृणाल गोलछा, छत्तीसगढ़ चेम्बर ऑफ कॉमर्स के जयशंकर गिरी, वन विभाग के प्रधान मुख्य वन संरक्षक अरुण कुमार पाण्डेय, जल संसाधन विभाग के उप अभियंता जयंत कुमार बिसेन, लोक निर्माण विभाग के कार्यपालन अभियंता विशाल द्विवेदी तथा लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग के अधीक्षण अभियंता ए.के. मालवे और कार्यपालन अभियंता सुश्री आशालता गुप्ता ने अपने-अपने कार्यक्षेत्रों में जल संरक्षण-संवर्धन के लिए किए जा रहे कार्यों के बारे में प्रस्तुतिकरण दिया।

नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के सचिव डॉ. बसवराजु एस., संचालक आर. एक्का और राज्य शहरी विकास अभिकरण (SUDA) के सीईओ शशांक पाण्डेय सहित सभी नगर निगमों के महापौर, सभापति और आयुक्त, नगर पालिकाओं और नगर पंचायतों के अध्यक्ष एवं मुख्य नगर पालिका अधिकारी, नगरीय निकायों के अभियंता, जल विशेषज्ञ, समाजसेवी, स्वयंसेवी संगठनों के प्रतिनिधि, नगरीय प्रशासन विभाग और सुडा के अधिकारी बड़ी संख्या में कार्यशाला में शामिल हुए।

मुख्यमंत्री की पहल पर छत्तीसगढ़ राज्य ने तैयार की इकोरेस्टोरेशन पॉलिसी

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की पहल पर राज्य में जल्द इकोरेस्टोरेशन पॉलिसी लागू की जाएगी। वन विभाग द्वारा इसका ड्राफ्ट तैयार कर लिया गया है। छत्तीसगढ़ देश का दूसरा राज्य होगा, जहां इकोरेस्टोरेशन पॉलिसी लागू होगी। अभी तक देश के एक मात्र राज्य केरल में यह पॉलिसी लागू है। इस पॉलिसी के लागू होने से राज्य में वनों का संवर्धन, जल स्त्रोतों का संरक्षण, मिट्टी का कटाव रोकने के साथ ही जैव विविधता को बढ़ावा मिलेगा।

यह जानकारी वनमंत्री केदार कश्यप एवं वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने आज नया रायपुर के मेफेयर में क्लाइमेट रेसिलिएंट छत्तीसगढ़ हरित और सशक्त भविष्य की ओरविषय पर आयोजित कार्यशाला को सम्बोधित करते हुए दी। यह कार्यशाला छत्तीसगढ़ राज्य जलवायु परिवर्तन केंद्र एवं सेंटर फॉर एनवायरनमेंट एंड एनर्जी डेवलपमेंट (सीड) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित की गई थी। इस कार्यशाला का उद्देश्य छत्तीसगढ़ और पूर्वी राज्यों में जलवायु अनुकूलता और लो कार्बन आधारित विकास को बढ़ावा देने के लिए ज्ञान साझा करना और विभिन्न हितधारकों के बीच संवाद स्थापित करना था।

कार्यक्रम में वन मंत्री केदार कश्यप और वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने जलवायु परिवर्तन के गंभीर प्रभावों और उससे निपटने के महत्व पर चर्चा की। वन मंत्री केदार कश्यप ने कहा कि जनजाति समुदाय सदैव जल, जंगल, और जमीन का संरक्षक रहा है।  उन्होंने 1910 के भूमकाल आंदोलन का उल्लेख करते हुए जनजातीय समाज ने अंग्रेजों से अपने प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा के लिए संघर्ष किया। कश्यप ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण हमारी सरकार के सतत विकास लक्ष्यों का अभिन्न हिस्सा है।

वित्त मंत्री चौधरी ने अपने संबोधन में छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक परंपराओं को पर्यावरण संरक्षण के आदर्श उदाहरणों के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने कैलाश पर्वत और भगवान शिव-पार्वती, गणेश और कार्तिकेय के साथ उनके वाहन नंदी, बाघ, मूषक और मोर सबके एक साथ रहने के उदाहरण देते हुए सामंजस्यपूर्ण सह-अस्तित्व की महत्ता को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, ‘जलवायु परिवर्तन केवल चर्चा का विषय नहीं है; यह हमारे राज्य और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित करने का माध्यम है।उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार ने ग्रीन इकॉनमी को बढ़ावा देने के लिए कई ठोस कदम उठाए हैं। चौधरी ने ग्रीन इकॉनमी, बायोफ्यूल, और सोलर एनर्जी पर विशेष जोर देते हुए युवाओं को पर्यावरण नवाचारों और हरित निवेश में भागीदारी का आह्वान किया।

कार्यक्रम के दौरान छत्तीसगढ़ वन विभाग के अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक अरुण कुमार पांडे ने कहा कि राज्य सरकार ने क्लाइमेट स्टूडियो की स्थापना को स्वीकृति दी है। उन्होंने जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए नेटिव स्पीशीज के पौधों के रोपण, वन क्षेत्रों के विकास और वेटलैंड संरक्षण की योजनाओं पर जोर दिया। कार्यक्रम में राज्य और राष्ट्रीय स्तर के पर्यावरणविद, शिक्षाविद और नीति-निर्माताओं ने व्यापक चर्चा की।

इस कार्यशाला में पर्यावरण और सामाजिक कार्यकर्ता प्रभात मिश्रा, सीड के डायरेक्टर डॉ. मनीष राम, क्रेडा के अभिषेक शुक्ला, झारखंड वन विभाग के रवि रंजन, पश्चिम बंगाल सरकार के चीफ एनवायरनमेंट ऑफिसर धर्मदेव राय, ठाकुर प्यारेलाल इंस्टीट्यूट निमोरा के डायरेक्टर पी. सी. मिश्रा, छत्तीसगढ़ राज्य जलवायु परिवर्तन केंद्र के प्रोजेक्ट साइंटिस्ट डॉ. अनिल श्रीवास्तव, चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के चेयरमैन प्रदीप टंडन, आईआईएम रायपुर के डॉ. राहुल बी. हीरेमथ, पंडित रविशंकर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर निनाद बोधनकर, सीजी कास्ट के साइंटिस्ट और कलिंगा विश्वविद्यालय के डॉ. मनोज सिंह सहित कई विशेषज्ञ उपस्थित थे।

बच्चों के व्यक्तित्व का सम्पूर्ण विकास राज्य सरकार की प्राथमिकता में - लक्ष्मी राजवाड़े

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रायपुर। महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने कहा कि राज्य सरकार की प्राथमिकता सभी बच्चों का सर्वांगीण विकास करना है, इसमें वे बच्चे भी शामिल है, जिन्हें विभिन्न कारणों से संस्थाओं में रहना पड़ रहा है। संस्थाएं उन बच्चों का घर नहीं है। उन्होंने कहा कि वास्तव में किसी व्यक्ति का सम्पूर्ण विकास परिवार और समाज के बीच रहकर ही हो सकता है। इसे ध्यान में रखकर किशोर न्याय (बालकों की देखरेख एवं संरक्षण) अधिनियम 2015 में गैर संस्थागत देखरेख का समावेश किया गया है।

महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने आज रायपुर के स्थानीय होटल में आयोजित पोषण देखरेख कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु राज्य स्तरीय पोषक परिवार सम्मेलन एवं पोषक परिवार नेटवर्क पर कार्यशाला उमंग का शुभारंभ किया। इस कार्यशाला में देखरेख और संरक्षण की आवश्यकता वाले बच्चों के पुनर्वास और उन्हें समाज की मुख्य धारा में शामिल करने पर चर्चा की गई। कार्यक्रम में पोषण देखरेख ब्रोशर का विमोचन एवं वीडियो जारी की गई। इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने पोषण देखरेख (फॉस्टर केयर) कर रहे पोषक परिवारों को भी सम्मानित किया। इस कार्यशाला का आयोजन महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा यूनिसेफ के सहयोग से किया गया।

कार्यक्रम के दौरान श्रीमती राजवाड़े ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के कुशल नेतृत्व में विभाग ने महिलाओं एवं बच्चों के लिये अनेकों कल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही है। उन्होंने कहा कि समाज के सभी वर्ग बच्चों को विकास के अवसर देने से प्रत्येक क्षेत्र में आगे बढ़ सकते हैं और अपने समाज और प्रदेश का नाम गौरवान्वित कर सकते हैं। मंत्री श्रीमती राजवाड़े ने कहा कि पोषण देखरेख (फॉस्टर केयर) संस्था के बाहर बच्चों की देखरेख का एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम है। ‘‘मिशन वात्सल्य’’ के तहत जरूरतमंद और संरक्षण वाले बच्चों को पारिवारिक वातावरण उपलब्ध कराने के लिए गैर नातेदार परिवार में अस्थाई देखरेख और संरक्षण की व्यवस्था की जाती है। इससे पोषक परिवार में जहां उत्साह, उमंग का संचार होता है। वहीं बच्चों को समुचित विकास का पूरा मौका मिलता है। इन बच्चों को समाज की मुख्य धारा से जोड़ने के लिये प्रत्येक नागरिक को संवेदनशील और सहयोगी होना होगा। उन्होंने अपील कि है कि समाज के सभी वर्ग, स्वयं-सेवी संस्थाएं, सरकार के साथ बच्चों को पारिवारिक वातावरण उपलब्ध कराने और उनके विकास के अवसर उपलब्ध कराने एकजुट होना होगा, जिससे एक योग्य नागरिक और सशक्त भारत का निर्माण हो सके।

महिला एवं बाल विकास विभाग की सचिव श्रीमती शम्मी आबिदी ने बताया कि छत्तीसगढ़ में बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए उल्लास, उम्मीद,  उजियार, उमंग और उदय कार्यक्रम पर काम किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि वर्तमान में राज्य में 112 बाल देखरेख संस्थायें संचालित हैं, जिनमें से 33 विशिष्ट दत्तक ग्रहण अभिकरणों में 125 बच्चे निवासरत हैं। वित्तीय वर्ष 2024-25 में 56 बच्चों को विभिन्न परिवारों में दत्तक ग्रहण के माध्यम से पुर्नवासित किया है। 76 बाल देखरेख संस्थाओं में 2112 बच्चें निवासरत हैं, इनमें 61 बच्चे पोषण देखरेख कार्यक्रम हेतु चिन्हांकित किए गए हैं। राज्य में 22 बच्चें पोषण देखरेख कार्यक्रम अंतर्गत निवास कर रहे है एवं प्रवर्तकता (स्पॉन्सरशिप) कार्यक्रम के अन्तर्गत 1080 बच्चों को लाभ दिलाया जा रहा है।

कार्यक्रम में संचालक महिला एवं बाल विकास विभाग सुश्री तूलिका प्रजापति, बाल संरक्षण विशेषज्ञ यूनिसेफ दिल्ली प्रभात कुमार, नंदलाल चौधरी संयुक्त संचालक, सुश्री वसुंधरा, सुश्री बिभूति दुग्गर, रामशरण चौकसे सहित अधिकारी-कर्मचारी एवं पोषक परिवार उपस्थित थे।

गोंडी बोली के संरक्षण एवं संवर्द्धन हेतु ट्रिपल आईटी के सहयोग से तैयार किए जा रहे आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस एप की प्रमुख सचिव बोरा ने की समीक्षा

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रायपुर। आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा द्वारा आदिमजति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संथान द्वारा राज्य की गोंडी बोली के संरक्षण एवं संवर्द्धन हेतु ट्रिपल आईटी नवा रायपुर के सहयोग से तैयार किए जा रहे आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस एप की प्रगति की समीक्षा की। उक्त बैठक में ट्रिपल आईटी के प्रोफेसर डॉ. संतोष कुमार द्वारा इस एप के संबंध में प्रमुख सचिव को अवगत कराते हुए आदिमजाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान से लगभग 25 हजार हिन्दी-गांेडी वाक्यों की आवश्यकता बताई गई ताकि आगामी 15 नवंबर तक मशीन ट्रांसलेशन परीक्षण का कार्य पूर्ण कर अंतिम रूप दिया जा सके। ज्ञातव्य है कि आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान द्वारा पूर्व के वर्षों में विभिन्न जनजातीय बोलियों का वर्णमाला चार्ट भी तैयार किया गया है। इसी क्रम में अब गोंडी बोली के संरक्षण एवं संवर्द्धन हेतु ट्रिपल आईटी नवा रायपुर के सहयोग से आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस एप तैयार किया जा रहा है।

प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा द्वारा टी.आर.टी.आई. संचालक पी.एस.एलमा एवं संस्थान के अधिकारियों को गोंडी विशेषज्ञ अनुवादकों के माध्यम से शीघ्रताशीघ्र जनजातीय जीवन से सरोकार रखने वाले विषयों के वाक्यों को समाहित करते हुए उनका गोंडी अनुवाद पूर्ण कर संबंधित तकनीकी संस्थान को उपलब्ध कराये जाने के निर्देश दिये गये। साथ ही कांकेर जिला मुख्यालय के माध्यम से भी स्थानीय स्तर पर हिन्दी वाक्यों का गोंडी अनुवाद 09 अक्टूबर 2024 से 30 गोंडी अनुवादकों से संस्थान स्तर पर एवं कांकेर जिला मुख्यालय में भी दल गठित कर जिला कार्यालय एवं सहायक आयुक्त, आदिवासी विकास के माध्यम से भी समानांतर रूप से कार्य कराये जाने के निर्देश दिये गये। आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस आधारित ट्रासंलेशन एप विकसित करने हेतु लगभग 50 हजार हिन्दी-गोंडी वाक्यों के अनुवाद का लक्ष्य रखा गया है। उक्त विषय पर आगामी 16 अक्टूबर को पुनः समीक्षा किये जाने के निर्देश दिये गये।

प्रमुख सचिव ने संस्थान द्वारा किये जा रहे अन्य कार्यों के साथ-साथ प्रमुख सचिव द्वारा संस्थान परिसर में तैयार किये जा रहे जनजातीय संग्रहालय की प्रगति की समीक्षा कर समय-सीमा में कार्य पूर्ण करने संबंधितों को निर्देश दिये। संस्थान परिसर में निर्माणाधीन शहीद वीर नारायण सिंह आदिवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी संग्रहालय के प्रगति की समीक्षा के दौरान प्रमुख सचिव द्वारा कार्य की प्रगति पर नाराजगी व्यक्त की गई तथा कांट्रेक्टर, आर्किटेक्ट एवं संचालक टीआरटीआई को निर्धारित समय में कार्य पूर्ण करने के निर्देश दिये।

पुनीत सागर अभियान : एनसीसी कैडेटस ने लोगो को तालाबों, नदियों और जलाशयों को स्वच्छ रखने का दिया संदेश

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रायपुर। एनसीसी केडिट्स के द्वारा पुनीत सागर अभियान के माध्यम से लोगो को तालाबोंनदियों और जलाशयों को स्वच्छ रखने का लगातार संदेश दिया जा रहा है। इसी कड़ी में आज सुबह राजधानी रायपुर के तेलीबांधा तालाब में पुनीत सागर अभियान का कार्यक्रम आयोजित हुआ। इस मौके पर लोगो को तालाबों, नदियों और जलाशय को स्वच्छ रखने के लिए लोगो को  प्रेरित करने के लिए एनसीसी कैडेटों को सम्मानित किया गया। इस दौरान एनसीसी कैडेटों द्वारा जल संरक्षण और उसके सदुपयोग से संबंधित नारे भी लगाए।

आज के कार्यक्रम में एनसीसी रायपुर ग्रुप के विभिन्न संस्थाओं के 2000 से अधिक कैडेट्स ने भाग लिया। यह कार्यक्रम स्थानीय लोगों तथा भावी पीढ़ी को तालाबों, नदियों और जलाशयों को स्वच्छ रखने के लिए प्रेरित करने एवं इसके महत्व को रेखांकित करने पुनीत सागर अभियान के एक वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में एनसीसी केडिटस द्वारा आयोजित किया गया। स्वच्छ भारत मिशन का विस्तार करते हुए एनसीसी द्वारा देशभर में पुनीत सागर अभियान संचालित किया जा रहा है।

इसका उद्देश्य समुद्री किनारों और बीचों, झीलों, नदियों तथा तालाबों को प्लास्टिक एवं अन्य कचरों से मुक्त करना है। पर्यावरण को प्लास्टिक कचरे से बचाने के लिए लोगों को जागरूक करना और इस संदेश का प्रचार-प्रसार करना भी इस अभियान का मकसद है। ज्ञात हो छत्तीसगढ़ राज्य में एनसीसी ग्रुप रायपुर और इसकी राज्य भर में फैली 16 इकाइयां पिछले एक साल से पुनीत सागर अभियान में शामिल है। रायपुर छत्तीसगढ़ में एनसीसी के पूरे राज्य भर के लगभग 253 स्कूलों और 100 कॉलेजों में लगभग 18 हजार कैडेट्स हैं।

रायपुर ग्रुप के एनसीसी कैडैटस् द्वारा अब तक छत्तीसगढ़ के 75 जल ईकाईयो को प्लास्टिक मुक्त बनाया गया है। कुल 2400 किलोग्राम प्लास्टिक कचरा एकत्र कर रिसाईक्लिंग के लिए भेजा गया है। स्थानीय आबादी के बीच जल निकायो की सफाई और संरक्षण के बारे में जागरूकता फैलाने के लिए छत्तीसगढ़ के एनसीसी कैडेटो द्वारा एक व्यापक जागरूकता अभियान शुरू किया गया है। इस संबंध में एनसीसी ईकाईयो द्वारा स्थानीय आबादी, ग्राम पंचायत, नगर निगम और गैर सरकारी संगठनो (एन०जी०ओ०) के साथ जागरूकता रैलियां, नुक्कड नाटक, पेन्टिंग प्रतियोगिता और हस्ताक्षर अभियान जैसी विभिन्न गतिविधियां आयोजित की गई है।

सम्मान कार्यक्रम में विधायकगण कुलदीप जुनेजा, विकास उपाध्याय, बृजमोहन अग्रवाल, श्रम विभाग के अध्यक्ष सुशील सन्नी अग्रवाल, मुख्य अतिथि के रूप में मेजर जनरल संजय शर्मा, (सेवानिवृत्त) पूर्व एडीजी, मध्यप्रदेश एवं छत्तीसगढ़, ब्रिगेडियर विवेक शर्मा, व्हीएसएम (सेवानिवृत्त), कर्नल विष्णु शिकरवार, कर्नल संतोष रावत, कर्नल राकेश बुधानी सहित बड़ी संख्या में नागरिकगण उपस्थित थे।

आज के  इस मेगा इंवेन्ट में रायपुर शहर के नागरिक,स्वयं सेवको और एन.जी.ओ.के साथ 8 सीजी गर्ल्स बटा, 27 सीजी बटा, 5 सीजी सीजीआई 1 सीजी नेवल युनिट एवं 3 सीजी एयर स्क्वाड्रन के स्कूल और कॉलेजो के एनसीसी कैडेट ने भाग लिया। तेलीबांधा रायपुर में आयोजित सम्मान कार्यक्रम में एनसीसी कैडेट द्वारा नुक्कड़ नाटक, पुनीत सागर गीत, नृत्य और भाषण प्रस्तुत किये।इस अवसर पर स्थानीय छत्तीसगढ़ी कलाकार सुनील तिवारी ने भी प्रस्तुति दी। ग्रुप कमांडर ब्रिगेडियर विक्रम सिंह चौहान, वाईएसएम ने एनसीसी कैडेटो द्वारा छत्तीसगढ़ राज्य में किये गये पुनीत सागर अभियान के बारे में विस्तारपूर्वक जानकारी दी।

ब्रिगेडियर चौहान ने बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओनशा मुक्ति अभियान, रक्तदान, मतदाता जागरूकता अभियान, वृक्षारोपण शहीदो की मूर्तियों की सफाई और रख रखाव, महिता सशक्तिकरण वोकल फॉर लोकल और बैन प्लास्टिक ड्राईव जैसी सामाज सेवा और सामुदायिक विकास गतिविधियों पर भी प्रकाश डाला जिनमे छत्तीसगढ़ में एनसीसी द्वारा जोरदार तरीके से कार्य किया जा रहा है।

छत्तीसगढ़ में अखाड़ों के संरक्षण और संवर्धन के लिए शुरू होगी बजरंगबली अखाड़ा प्रोत्साहन योजना

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रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य में अखाड़ों के संरक्षण और संवर्धन के साथ ही पहलवानों की प्रतिभाओं को निखारने के लिए बजरंगबली अखाड़ा प्रोत्साहन योजना आरंभ की जाएगी। इसके साथ ही राजधानी रायपुर में राज्य स्तरीय कुश्ती अकादमी खुलेगी जिसके माध्यम से इस क्षेत्र की प्रतिभाओं को तैयार किया जाएगा। राज्य में कुश्ती को प्रोत्साहन देने के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने ये दो बड़ी घोषणाएं नागपंचमी पर्व के अवसर पर की।

इसके पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल राज्य में मल्लखांब जैसे पारंपरिक खेलों को प्रोत्साहित करने के लिए भी अकादमी की घोषणा कर चुके हैं। बजरंगबली अखाड़ा प्रोत्साहन योजना के पीछे मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का उद्देश्य छत्तीसगढ़ में कुश्ती जैसे पारंपरिक खेलों का सुंदर वातावरण पुनः तैयार करना है। साथ ही हमारे प्रदेश की कुश्ती की प्रतिभाओं को राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय मंच पर लाना है।

बजरंगबली प्रोत्साहन योजना के माध्यम से अखाड़ों का संरक्षण और संवर्धन भी हो सकेगा। जिन अखाड़ों में पहले पहलवानों की कुश्तियां दिखा करती थी जहां पहलवान अपने दांव पेंच दिखाया करते थे लेकिन अब वहां सूना पसरा रहता है। इस योजना के माध्यम से इन अखाड़ों को पुनर्जीवन मिल सकेगा और एक बार पुनः यहां पहलवानों के दांव पेच देखने मिलेंगे और प्रदेश के तथा देश के प्रतिभाशाली पहलवान यहां से भी तैयार हो सकेंगे।

इसके साथ ही राजधानी रायपुर में राज्य स्तरीय कुश्ती अकादमी भी शुरू की जाएगी। इस आकदमी के माध्यम से कुश्ती की प्रतिभाओं को निखारने का प्रयास करेगी। भारत में तथा छत्तीसगढ़ में भी कुश्ती की बड़ी समृद्ध अपरंपरा रही है। धोबी पछाड़, धाक, झोली जैसे दांवपेच अखाड़ों से निकलकर हमारी जुबान में भी पहुंच गए हैं। इससे पता चलता है कि कुश्ती का खेल हमारी परंपरा का कितना गहरा हिस्सा रहा है इस परंपरा को पुनः सहेजने के लिए ये दो बड़ी घोषणा मुख्यमंत्री ने की है।

खास बात यह है कि यह घोषणा नाग पंचमी के मौके पर हुई है नाग पंचमी का त्यौहार कुश्ती के दंगलों के लिए जाना जाता है। लोग उत्साह से त्योहार के दौरान अखाड़े में जुटते हैं। बजरंगबली अखाड़ा प्रोत्साहन योजना आरंभ होने से अगली नाग पंचमी में बहुत सारे अखाड़ों में पहलवानों की और दर्शकों की धूम दिखेगी और अगली बार छत्तीसगढ़ के लोग नाग पंचमी और ज्यादा उत्साह से मना सकेंगे।

पर्यावरण संरक्षण के लिये जन-भागीदारी जरूरी : मोहम्मद अकबर

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रायपुर। छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मण्डल को 05 जून विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर तीन विश्व रिकार्ड प्राप्त हुए। इनमें गोबर पेंट से 3600 स्क्वैयर फीट की कैनवास पेंटिंग बनाये जाने पर लिमका बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड, एक दिन में 12 लाख 38 हजार 116 पर्यावरण संरक्षण की शपथ लिये जाने पर स्टार बुक ऑफ वर्ल्ड रिकार्ड और वर्ल्ड रिकार्ड बुक की ट्राफियॉं व प्रमाण-पत्र मंत्री मोहम्मद अकबर द्वारा मण्डल के अध्यक्ष सुब्रत साहू को प्रदान किए।

वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री मोहम्मद अकबर ने इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण में जन-भागीदारी को जरूरी बताते हुए मण्डल के जन-जागरूकता अभियान की प्रशंसा की। मोहम्मद अकबर ने कहा कि प्लास्टिक के उन्मूलन हेतु हम सबकी भागीदारी जरूरी है। हमारे पूर्वजों ने विरासत में स्वस्थ और स्वच्छ वातावरण सौंपा है। हम सब का दायित्व है कि उसे और बेहतर करते हुए भावी पीढ़ी को सौंपे। अकबर ने छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल द्वारा विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर ’’व्यक्तिगत आदतों और व्यवहारों में परिवर्तन लाकर सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग में कमी करना’’ विषय पर आधारित संगोष्ठी को संबोधित करते हुए कहा कि प्रकृति और जीवन के बीच गहरा संबंध होता है। इसके संरंक्षण तथा संवर्धन में ही जीवन की सुरक्षा और हमारे भविष्य की खुशहाली निर्भर है। वर्तमान में पर्यावरण का संरक्षण व प्रदूषण पर रोकथाम अत्यंत आवश्यक है और इसमें हम सबकी भागीदारी होनी चाहिए।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए वरिष्ठ विधायक सत्यनारायण शर्मा ने कहा कि प्रकृति हमारी धरोहर है और इसे बचाने के लिये पूरे विश्व को एकजुट होकर सामूहिक प्रयास करना होगा। मण्डल के अध्यक्ष एवं अतिरिक्त मुख्य सचिव सुब्रत साहू ने मण्डल के कार्यकलापों की जानकारी देते हुए सिंगल यूज प्लास्टिक के उपयोग को रोके जाने के लिये व्यक्तिगत प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने मण्डल द्वारा जनभागीदारी के साथ प्राप्त तीनों विश्व रिकार्ड की जानकारी दी और मण्डल को इसके लिये बधाई दी।

मण्डल के सदस्य सचिव आर.पी. तिवारी ने कहा कि मण्डल द्वारा चलित प्रयोगशाला वाहन शीघ्र ही प्रारंभ किया जा रहा है। उन्होंने मण्डल द्वारा तैयार की जा रही अत्याधुनिक पर्यावरणीय प्रयोगशाला का उल्लेख करते हुए इसे अंतराष्ट्रीय स्तर की प्रयोगशाला बताया। उन्होंने मण्डल के क्षेत्रीय कार्यालय के नवनिर्मित भवन के संबंध में भी जानकारी दी। मण्डल के जनसंपर्क अधिकारी ए.पी. सावंत ने मण्डल को प्राप्त वर्ल्ड रिकार्ड की जानकारी देते हुए बताया कि इसमें मुख्यमंत्री की जनभागीदारी अपील का प्रभाव पड़ा और हर समुदाय व हर वर्ग के लोगों ने मण्डल की इस मुहिम का साथ दिया। इस अवसर पर काटॅून वॉच पत्रिका के नेशनल पुरस्कार भी वितरित किए गए। इस अवसर पर संसदीय सचिव विकास उपाध्याय, छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल के अध्यक्ष कुलदीप जुनेजा आदि उपस्थित थे।


 

पर्यावरण संरक्षण के लिए 01 जून को छत्तीसगढ़ में पांच लाख लोग लेंगे शपथ

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रायपुर। छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मण्डल द्वारा विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर आयोजित किए जा रहे कार्यक्रमों की श्रृंखला में 01 जून को पर्यावरण संरक्षण के लिये शपथ का कार्यक्रम रखा गया है। इसके तहत शपथ हिन्दी या अंग्रेजी में समूह या व्यक्तिगत रूप से लेकर उसका वीडियो व फोटो वॉट्सएप नम्बर 7415781776, 9109028361, 7415796619 पर 01 जून को प्रातः 8 बजे से भेजी जा सकेगी।

गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में 01 जून को एक दिन में पांच लाख लोग पर्यावरण संरक्षण के लिए शपथ लेंगे। प्रदेश में मिशन लाईफ कार्यक्रम के अंतर्गत लाईफ स्टाईल फॉर इन्वायरमेंट कार्यक्रम का संचालन किया जा रहा है। लाईफ प्लेज के अंतर्गत पूरे राज्य में एक साथ पांच लाख लोगों द्वारा प्लेज लिये जाने का निर्णय लिया गया है, जिससे कि व्यापक स्तर पर पर्यावरण संरक्षण के प्रति जन-जागरूकता लायी जा सके।

एक ही दिन में पांच लाख लोग शपथ लेकर पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में अपनी प्रतिबद्धता दर्शायेंगे। पूरे प्रदेश में यदि पॉच लाख लोग एक साथ शपथ लेंगे या रायपुर जिले से शपथ की संख्या डेढ़ लाख से पार होगी, तो यह एक विश्व रिकार्ड होगा। छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मण्डल द्वारा सभी लोगों से यह आग्रह किया गया है कि वे 01 जून 2023 को पर्यावरण संरक्षण के लिये शपथ लेकर इस महाअभियान में भागीदार बनें। शपथ इस प्रकार है-मैं प्रतिज्ञा करता हूं कि पर्यावरण को बचाने के लिये अपने दैनिक जीवन में हर संभव बदलाव लाऊगा। मैं यह भी वचन देता हूं कि अपने परिवार, मित्रों व अन्य लोगों को पर्यावरण के अनुकूल आदतों और व्यवहारों के महत्व के विषय में सतत् रूप से प्रेरित करूंगा।

 


CG भर्ती प्रक्रिया : वन विभाग में विभिन्न संवर्ग के 1920 रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू

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वन रक्षकों के 1525 पद सहित कार्यालयीन संवर्ग के 395 पद शामिल


CG भर्ती प्रक्रिया । वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा बड़े पैमाने पर विभिन्न संवर्ग में 1920 रिक्त पदों पर भर्ती प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। इनमें वन एवं वन्य प्राणियों के प्रबंधन एवं संरक्षण को सुदृढ़ करने के लिए वन रक्षकों के 1525 रिक्त पदों की भर्ती की स्वीकृति जारी की गई है। इसके साथ ही वन विभाग के प्रशासनिक इकाईयों में विभागीय एवं कार्यालयीन कार्यों को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से सहायक ग्रेड-3 के 187, डाटा एण्ट्री ऑपरेटर के 30, शीघ्र लेखक के 34, वाहन चालकों के 144 पद सहित कुल 395 पद शामिल किए गए हैं।

गौरतलब है कि राज्य सरकार के निर्देश पर त्वरित पहल करते हुए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मंशा के अनुरूप वन मंत्री मोहम्मद अकबर कुशल के मार्गदर्शन में वन विभाग द्वारा उक्त पदों पर शासन से स्वीकृति प्राप्त होने के तत्काल बाद इन पदों की भर्ती की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गई है। वन विभाग द्वारा रिक्त पदों की भर्ती की प्रक्रिया को पारदर्शिता एवं त्वरित गति से करने के उद्देश्य से वनरक्षक, सहायक ग्रेड-3, डाटा एन्ट्री ऑपरेटर, शीघ्रलेखकों के पदों की भर्ती छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग के माध्यम से किए जाने का निर्णय लिया गया है।

जल स्रोतों के संरक्षण और संवर्धन के लिए प्रतिबद्ध होने की जरूरत : मुख्यमंत्री भूपेश बघेल

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने प्रदेशवासियों को विश्व जल दिवस की शुभकामनाएं दी है। उन्होंने अपने संदेश में कहा है कि जल जीवन का आधार है। विश्व जल दिवस के मौके पर सभी के लिए और भी जरूरी हो गया है कि जल स्रोतों के संरक्षण और संवर्धन हेतु प्रतिबद्ध हों।

मुख्यमंत्री ने कहा है कि हमारा छत्तीसगढ़ तालाबों, नदियों का प्रदेश है। सही देखरेख और जागरूकता से हम इन जल स्त्रोतों का संरक्षण और संवर्धन कर सकते हैं। छत्तीसगढ़ सरकार नरवा कार्यक्रम के तहत् इन जल स्रोतों के संवर्धन का प्रयास कर रही है, मगर इसके लिए जन समुदाय की सहभागिता भी उतनी ही जरूरी है। सभी नागरिकों से आग्रह है कि हमारे धरोहर तालाब, नदियों और जल स्रोतों को बचाने के लिए स्वयमेव पहल करें और नई पीढ़ी को भी इसके लिए प्रेरित करें।

धरती को जीने योग्य बनाए रखने के लिए वनों और वन्य-जीवों का संरक्षण जरूरी- मुख्यमंत्री चौहान

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भोपाल। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि आने वाली पीढ़ियों के लिए धरती को जीने योग्य बनाए रखने के लिए वनों और वन्य-जीवों का संरक्षण जरूरी है। विकास और प्रकृति के बीच द्वंद न हो, समन्वय बना रहे, वन में रहने वालों के लिए वन, आजीविका का सतत रूप से स्रोत बना रहे, इसका ध्यान रखना आवश्यक है। इनके प्रबंधन का दायित्व भारतीय वन सेवा के अधिकारियों पर है। इस दृष्टि से मानव जीवन के सुगम और सतत संचालन के लिए अखिल भारतीय वन सेवा के अधिकारियों की जिम्मेदारी बहुत महत्वपूर्ण है।

अधिकारी अपने दायित्वों का निर्वहन संपूर्ण प्रतिबद्धता और संवेदनशीलता से करें। मुख्यमंत्री चौहान भारतीय वन सेवा संघ के दो दिवसीय वानिकी सम्मेलन का शुभारंभ कर रहे थे। प्रशासन अकादमी में हुए कार्यक्रम में वन मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह, राज्य वन विकास निगम के अध्यक्ष माधव सिंह डाबर, अपर मुख्य सचिव वन जे.एन. कंसोटिया, प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख रमेश कुमार गुप्ता, अध्यक्ष अखिल भारतीय वन सेवा संघ के अतुल श्रीवास्तव विशेष रूप से उपस्थित थे। कार्यक्रम में प्रदेश में पदस्थ भारतीय वन सेवा के अधिकारी शामिल हुए।

मुख्यमंत्री ने फिल्म "एक्सप्लोरिंग सतपुड़ा" का विमोचन किया

मुख्यमंत्री चौहान ने दीप जला कर कार्यक्रम का शुभारम्भ किया। मुख्यमंत्री चौहान को वन मंत्री डॉ. शाह ने तुलसी का पौधा भेंट कर तथा वानिकी सम्मेलन का लेपल पिन लगा कर स्वागत किया। मुख्यमंत्री चौहान ने "वन विभाग- सफलता के नए आयाम" पुस्तिका और सतपुड़ा टाइगर रिजर्व वेबसाइट, कूनो नेशनल पार्क में चीता पुनर्स्थापन पर बनाई गई फिल्म "कूनो : रिटर्न ऑफ चीता" के टीजर तथा सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के प्राकृतिक सौन्दर्य, अद्भुत जैव-विविधता और ईको पर्यटन को दर्शाती फिल्म "एक्सप्लोरिंग सतपुड़ा" का विमोचन किया।

प्रदेश की वन गतिविधियों पर लघु फिल्में बनाई जाए

मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि वन सेवा के अधिकारियों ने वनों को बचाने के साथ उन्हें बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। मध्यप्रदेश ने बाघ, तेंदुआ, गिद्द, घड़ियाल आदि के संरक्षण में उल्लेखनीय उपलब्धि अर्जित की है। अब हम देश के इकलौते चीता प्रदेश भी बन गए हैं। पन्ना में बाघों का पुनर्स्थापन भी महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इसके लिए वन सेवा के अधिकारी बधाई के पात्र हैं। प्रदेश के पार्कों के प्रबंधन,वन और टाइगर सुरक्षा में भी उदाहरण प्रस्तुत किया गया है। वनों के संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले फारेस्ट गार्ड, महावत, वाचर तथा घास कटर सहित जमीनी स्तर पर कार्य कर रहे कर्मचारियों के कल्याण के लिए विशेष नीति बनाई जाना आवश्यक है। मुख्यमंत्री चौहान ने वन विभाग की सकारात्मक गतिविधियों, वन क्षेत्र तथा वन्य-जीवों के संरक्षण जैसी उपलब्धियों पर लघु फिल्में बना कर सोशल मीडिया पर उनका प्रचार-प्रसार किये जाने की जरूरत रेखांकित की।

गोवर्धन पूजा प्रकृति के संरक्षण का संदेश देती है

 मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि भारतीय संस्कृति के अनुसार एक ही चेतना सब में है। भारतीय मानस "जिओ और जीने दो" के दर्शन में विश्वास रखता है। इसका अर्थ है कि मानव, जीव-जन्तु, पेड़-पौधे एक ही चेतना के अंग हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में हुआ जी-20 देशों का सम्मेलन भी "एक धरती- एक परिवार -एक भविष्य" की थीम पर हो रहा है, जो भारतीय विचार का ही विस्तार है।

भगवान श्रीकृष्ण द्वारा दिए गए गोवर्धन पूजा के संदेश में प्रकृति के संरक्षण की भावना निहित है। भारतीय संस्कृति में वटवृक्ष, तुलसी, केला, सुपारी, नारियल की पूजा और भगवानों के वाहनों के रूप में नंदी, मूषक, शेर आदि की पूजा यह बताती है कि मनुष्य मात्र ही नहीं अपितु जीव-जन्तु और पेड़-पौधों का समग्र संरक्षण प्राकृतिक संतुलन के लिए आवश्यक है। यह जरूरी है कि मनुष्य अपने अस्तित्व को बनाए रखने के लिए प्रकृति का दोहन करे परन्तु शोषण नहीं। अन्यथा हमें जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग का संकट झेलना होगा।

कृषि वानिकी तथा बाँस मिशन की गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जाए

मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि प्रदेश में पौध-रोपण के लिए जारी गतिविधियों के सकारात्मक परिणाम आए हैं। मेरे द्वारा प्रतिदिन पौध-रोपण और इसमें जन-सामान्य की भागीदारी को प्रोत्साहित करने से प्रदेशवासी अब अपने जन्म-दिवस, वर्षगाँठ और परिजन की स्मृति में पौध-रोपण कर रहे हैं। पौध-रोपण को जन-अभियान बनाने में सफलता मिली है। अंकुर अभियान का भी इसमें विशेष योगदान है। प्रदेश में कृषि वानिकी, बाँस मिशन की गतिविधियों को प्रोत्साहित करने तथा वृक्षारोपण से वनीकरण से संबंधित नियमों को सरल बनाने की आवश्यकता है।

पेसा नियम के सफल क्रियान्वयन में वन विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका

मुख्यमंत्री चौहान ने कहा कि प्रदेश में पेसा नियम के सफल क्रियान्वयन में वन विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका है। जनजातीय समुदाय को तेंदूपत्ता सहित अन्य वनोपज के संग्रहण और उसके विपणन के संबंध में प्रशिक्षण और उसके प्रबंधन में सहयोग देना आवश्यक है। जनजातीय क्षेत्रों में संचालित क्रेशर और गौण खनिज की खदानों के संचालन में भी जनजातीय युवाओं की भागीदारी को प्रोत्साहित करना होगा। जनजातीय भाई-बहनों की जमीन की रक्षा में भी वन विभाग के अमले की महत्वपूर्ण भूमिका है। यह आवश्यक है कि वन विभाग का अमला वन क्षेत्र में माफियाओं को पनपने नहीं दे और जनजातीय भाई-बहनों के साथ उनका व्यवहार संवेदनशीलता का हो।

वृक्ष दूसरों के लिए जीने की प्रेरणा देते हैं: वन मंत्री शाह

वन मंत्री डॉ. कुंवर विजय शाह ने कहा कि मुख्यमंत्री चौहान के नेतृत्व में प्रदेश ने वन और वन्य-जीव सरंक्षण में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ अर्जित की हैं। वृक्ष दूसरों के लिए जीने की प्रेरणा देते हैं। मुख्यमंत्री चौहान द्वारा प्रतिदिन पौध-रोपण के माध्यम से यह संदेश दिया जा रहा है कि हम भी पौध-रोपण करें और अपने जीवन को प्रदेश के विकास तथा जन-कल्याण के लिए समर्पित करें।

 4 लाख 31 हजार हेक्टयर बिगड़ा वन क्षेत्र अच्छे वन क्षेत्र के रूप में विकसित हुआ

प्रधान मुख्य वन सरंक्षक एवं वन बल प्रमुख श्री रमेश कुमार गुप्ता ने वन विभाग की उपलब्धियों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि समुदाय आधारित वन प्रबंधन से 1152 ग्राम के 4 लाख 31 हजार हेक्टयर बिगड़े वन क्षेत्र को अच्छे वन क्षेत्र की श्रेणी में शामिल करना संभव हुआ है। विगत चार वर्ष में 20 करोड़ 72 लाख पौधे लगाए गए हैं। ग्रीन इनिशियेटिव में बेम्बूपोल का उपयोग किया जा रहा है। बफर में सफर में 26 गेट प्रारंभ होने से पर्यटकों की संख्या में वृद्धि हुई और ग्रामीणों को प्रत्यक्ष लाभ मिलना आरंभ हुआ है। वर्ष 2022 में तेंदूपत्ता का एक हजार करोड़ रूपये का व्यापार हुआ। पेसा अधिनियम में 268 ग्राम सभा में वन विभाग के सक्रिय सहयोग से तेंदूपत्ता संग्रहण की कार्यवाही शुरू की गई है।

मुख्यमंत्री चौहान के साथ हुआ ग्रुप फोटो

वानिकी सम्मेलन में मुख्यमंत्री चौहान के साथ भारतीय वन सेवा के अधिकारियों का ग्रुप फोटो सेशन हुआ। 13 फरवरी तक चलने वाले वानिकी सम्मेलन में 2 तकनीकी सत्र, सेवागत अनुभवों का आदान-प्रदान, फेसबुक प्रतियोगिता और सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे।

महालेखाकार के तीन अधिकारी राष्ट्रीय ध्वज लेकर पर्यावरण संरक्षण, ईंधन की बचत और सेफ हेल्थ के सन्देश के साथ छत्तीसगढ़ से काशी तक साईकिल यात्रा पर निकले

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कवर्धा। छत्तीसगढ़ के महालेखाकार के तीन अधिकारी राष्ट्रीय ध्वज लेकर पर्यावरण संरक्षण, ईंधन की बचत और सेफ हेल्थ के सन्देश के साथ छत्तीसगढ़ से काशी तक साईकिल यात्रा की शुरुआत की है। इन तीनों अधिकारियों ने छत्तीसगढ़ के प्रदेश द्वार कबीरधाम जिले के चिल्फ़ीघाटी से इस साइकिल यात्रा पर निकले। लगभग 700 किलोमीटर की साइकिल यात्रा के बाद काशी(बनारस) पहुँचेंगे। कबीरधाम पुलिस अधीक्षक डॉ लाल उम्मेद सिंह ने इस साइकिल यात्रा को हरि झंडी दिखाकर रवाना किया। इस साइकिल यात्रा की औपचारिक शुरुआत कवर्धा के आउटडोर स्टेडियम से हुई। 

एसपी डॉ सिंह ने इस साइकिल यात्रा के लिए बधाई और शुभकामनाएं दी। इस साइकिल यात्रा में राज्य वित्त विभाग के अधिकारी संदीप बनरवाल संभागीय लेखा अधिकारी,लोक निर्माण, अनिल कुमार संभागीय लेखा अधिकारी जल सँसाधन विभाग और संकल्प दीक्षित संभागीय लेखा अधिकारी विद्युत यांत्रिकी शामिल है। साइकिल यात्रा प्रारंभ करने से पहले अधिकारियों ने कहा कि पर्यावरण के संरक्षण और संवर्धन के लिए हम सबको सजग होना और इसके लिए हम सबको प्रभावी कदम उठाने की जरूरत है।इसके लिए सबसे पहले छोटी छोटी जरूरतों के लिए साइकिल का उपयोग अपने जीवन मे लाना होगा।

इससे ईंधन की बचत होगी और प्राकृतिक संसाधनों के दोहन को रोका जा सकता है। तभी हम स्वच्छ और सुंदर पर्यावरण की परिकल्पना को साकार कर सकते है। साइकिल यात्रा की शुरुआत के अवसर पर पुलिस फोर्स एकेडमी के विद्यार्थियों ने ताली बाजा कर भारत माता की जयघोषों के साथ स्वागत और अभिनंदन किया। इस अवसर पर वित्त लेखा अधिकारी संजय चौधरी प्रभारी जनसंर्पक अधिकारी गुलाब कुमार सहित अन्य अधिकारी कर्मचारी उपस्थित थे।

नरवा विकास: खारी नाला खारा नहीं बल्कि अब मीठा और लाभप्रद साबित होने लगा किसानों के लिए

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रायपुर। राज्य सरकार द्वारा संचालित सुराजी गांव योजना के तहत नरवा विकास कार्यक्रम अंतर्गत मनेन्द्रगढ़ वनमंडल के खारी नाला में लगभग 01 करोड़ रूपए की लागत राशि से अर्दन डेम का निर्माण किया गया है। इसके निर्माण से वन क्षेत्रों में जल के स्तर में वृद्धि के साथ-साथ 100 एकड़ रकबा में सिंचाई की सुविधा निर्मित हुई है। उक्त सुविधा के उपलब्ध होने पर वनांचल के किसानों के लिए खारी नाला अब मीठा एवं लाभप्रद साबित होने लगा है।

गौरतलब है कि वनमंडल मनेन्द्रगढ़ अंतर्गत ग्राम पंचायत भौता के खारी नाला में 210 मीटर चौड़ाई एवं 10 मीटर ऊंचाई के अर्दन डेम निर्मित की गई है, जिसकी कुल लागत 01 करोड़ रूपए है।  इसका कैचमेंट एरिया 55.00 हेक्टेयर है। उक्त अर्दन डेम के निर्माण से निकटतम ग्रामों के लगभग 40 परिवार प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित होने लगे हैं। जिसमें से 5 सीमांत एवं 35 लघु किसानों के कुल 100 एकड़ रकबा सिंचित होगा एवं जल संरक्षण संरचनाओं के निर्माण से ग्रामों के आसपास क्षेत्रों एवं वन क्षेत्रों में जल के स्तर में वृद्धि होगी। इसके फलस्वरूप वनों के पुनरूत्पादन एवं घनत्व में सघन वृद्धि के साथ-साथ वन्यप्राणियों के लिए पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित हुई है। अन्य परिवारों द्वारा निस्तार के साथ-साथ मछली पालन से संबंधित आजीविका कार्य किया जा सकेगा। निर्मित अर्दन डेम से लगा गौठान बना हुआ है जो पशुधन हेतु लाभप्रद होगा।

गौरतलब है कि वनमंत्री मोहम्मद अकबर के कुशल मार्गदर्शन में वनांचल स्थित नालों में कैम्पा मद के तहत भू-जल संवर्धन संबंधी संरचनाओं का निर्माण तेजी से जारी है। इस तारतम्य में प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वनबल प्रमुख संजय शुक्ला ने बताया कि मनेन्द्रगढ़ वनमंडल स्थित 15 किमी लम्बाई के खारी नाला में कैम्पा मद से वर्तमान में 435 भू-जल संवर्धन संबंधी संरचनाओं का निर्माण प्रगति पर है। इनमें से अब तक 385 भू-जल संवर्धन संबंधी संरचनाओं का निर्माण पूर्ण हो चुका है। इनके निर्माण के लिए कैम्पा की वार्षिक कार्ययोजना 2021-22 के तहत 4 करोड़ 10 लाख रूपए की राशि स्वीकृत है।

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