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नवनिर्मित केशव भवन शिक्षा, संस्कृति और संस्कारों का बनेगा संगम - मुख्यमंत्री विष्णु देव

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज प्रदेश की ऊर्जाधानी कोरबा स्थित प्रदेश के सबसे बड़े सरस्वती शिशु मंदिर परिसर में नन्हें-मुन्हें बच्चों के लिए नवनिर्मित केशव भवन का लोकार्पण किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि यह भवन शिक्षा, संस्कृति और संस्कारों का संगम बनेगा।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि केशव भवन बच्चों के सर्वांगीण विकास का एक सशक्त माध्यम सिद्ध होगा। सरस्वती शिशु मंदिर संस्था शिक्षा जगत में उल्लेखनीय योगदान दे रहा है। यहां विद्यार्थियों को केवल शैक्षणिक ज्ञान ही नहीं, बल्कि उत्तम संस्कार भी प्रदान किए जाते हैं। उन्होंने कहा कि सरस्वती शिशु मंदिर केवल विद्यालय नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की एक सशक्त आधारशिला है, जहाँ से सच्चे राष्ट्रभक्तों का निर्माण होता है। उल्लेखनीय है कि राष्ट्रप्रेम और नैतिक शिक्षा को समर्पित इस भवन को आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित करते हुए विद्यार्थियों के समग्र विकास हेतु तैयार किया गया है।

कार्यक्रम में उप मुख्यमंत्री, अरुण साव, उद्योग मंत्री लखन लाल देवांगन, विद्यायक प्रेम चंद पटेल, छत्तीसगढ़ गृह निर्माण मंडल के अध्यक्ष अनुराग सिंहदेव, महापौर कोरबा श्रीमती संजू देवी राजपूत सहित अनेक जनप्रतिनिधि, सरस्वती शिशु मंदिर के प्रबंधन समिति से जुड़े सदस्यगण तथा शिक्षक उपस्थित थे।

विशेष लेख : आस्था, आध्यात्म और संस्कृति का त्रिवेणी संगम, राजिम माघी पुन्नी मेला

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रायपुर। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले में स्थित पवित्र धार्मिक नगरी राजिम में प्रतिवर्ष माघ पूर्णिमा से महाशिवरात्रि तक पंद्रह दिनों का मेला लगता है। राजिम में तीन नदियों का संगम है इसलिए इसे त्रिवेणी संगम भी कहा जाता है, यहाँ मुख्य रूप से तीन नदियां बहती हैं, जिनके नाम क्रमशः महानदी, पैरी नदी तथा सोंढूर है। संगम स्थल पर कुलेश्वर महादेव जी विराजमान है।

राज्य शासन द्वारा वर्ष 2001 से राजिम मेले को राजीव लोचन महोत्सव के रूप में मनाया जाता था, वर्ष 2005 से इसे कुम्भ के रूप में मनाया जाता रहा था, और अब 2019 से राजिम माघी पुन्नी मेला के रूप में मनाया जा रहा है। यह आयोजन छत्तीसगढ़ शासन धर्मस्व एवं पर्यटन विभाग एवं स्थानीय आयोजन समिति के तत्वाधान में होता है। मेला की शुरुआत कल्पवास से होती है।

पखवाड़े भर पहले से श्रद्धालु पंचकोशी यात्रा प्रारंभ कर देते हैं पंचकोशी यात्रा में श्रद्धालु पटेश्वर, फिंगेश्वर, ब्रम्हनेश्वर, कोपेश्वर तथा चम्पेश्वर नाथ के पैदल भ्रमण कर दर्शन करते हैं तथा धुनी रमाते हैं। 101 कि॰मी॰ की यात्रा का समापन होता है और माघ पूर्णिमा से मेला का आगाज होता है। इस वर्ष 5 फरवरी माद्य पूर्णिमा से 18 फरवरी 2023 महाशिवरात्रि तक राजिम माद्यी पुन्नी मेला आयोजित किया गया है।

राजिम माघी पुन्नी मेला में विभिन्न जगहों से हजारो साधू संतों का आगमन होता है, प्रतिवर्ष हजारो की संख्या में नागा साधू, संत आदि आते हैं, तथा विशेष पर्व स्नान तथा संत समागम में भाग लेते हैं, प्रतिवर्ष होने वाले इस माघी पुन्नी मेला में विभिन्न राज्यों से लाखों की संख्या में लोग आते हैं और भगवान श्री राजीव लोचन तथा श्री कुलेश्वर नाथ महादेव जी के दर्शन करते हैं और अपना जीवन धन्य मानते हैं। लोगो में मान्यता है कि भगवान जगन्नाथपुरी जी की यात्रा तब तक पूरी नही मानी जाती, जब तक भगवान राजीव लोचन तथा श्री कुलेश्वर नाथ के दर्शन नहीं कर लिए जाते, राजिम माघी पुन्नी मेला का अंचल में अपना एक विशेष महत्व है।

राजिम अपने आप में एक विशेष महत्व रखने वाला एक छोटा सा शहर है। राजिम गरियाबंद जिले का एक तहसील है। प्राचीन समय से राजिम अपने पुरातत्वों और प्राचीन सभ्यताओं के लिए प्रसिद्ध है। राजिम मुख्य रूप से भगवान राजीव लोचन जी के मंदिर के कारण प्रसिद्ध है। राजिम का यह मंदिर आठवीं शताब्दी का है। यहाँ कुलेश्वर महादेव जी का भी मंदिर है। जो संगम स्थल पर विराजमान है। राजिम माघी पुन्नी मेला प्रतिवर्ष माघ पूर्णिमा से महाशिवरात्रि तक चलता है। इस दौरान प्रशासन द्वारा विविध सांस्कृतिक व धार्मिक आयोजन होते हैं।

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