Media24Media.com: शुभेंदु और टीएमसी

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ममता को बड़ा झटका, TMC के वरिष्ठ नेता ने बीजेपी का थामा दामन

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तृणमूल कांग्रेस (TMC) के वरिष्ठ नेता शुभेंदु अधिकारी (Subhendu Adhikari leave TMC) ने ममता बनर्जी का साथ छोड़ दिया है। उन्होंने आज टीएमसी से इस्तीफा दे दिया है। पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से ठीक पहले उनके इस्तीफे ने राजीनितक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। हालांकि उन्होंने विधायक के रूप में इस्तीफा दिया है। बंगाल विधानसभा की सदस्यता से शुभेंदु का इस्तीफा तृणमूल कांग्रेस और ममता के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।





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बीजेपी में हो सकते हैं शामिल





बीजेपी के सूत्रों शुभेंदु के 18 दिसंबर को दिल्ली जाने और बीजेपी की सदस्यता लेने के संकेत दिए हैं। दूसरी तरफ ये संभावना जताई जा रही है कि शुभेंदु 19 दिसंबर को पश्चिम बंगाल के मेदिनीपुर में भाजपा से जुड़ने का आधिकारिक एलान कर सकते हैं, कयास लगाए जा रहें हैं कि इस कार्यक्रम में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह भी मौजूद होंगे।





नाराज चल रहे थे शुभेंदु





तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शुभेंदु पिछले कुछ दिनों से तृणमूल से नाराज चल रहे थे। ममता बनर्जी व कई अन्य वरिष्ठ तृणमूल नेताओं ने शुभेंदु से संवाद कायम करने की कोशिश की थी, लेकिन बाद में दोनों के बीच दरार बढ़ती ही गई, और आज शुभेंदु बंगाल विधानसभा से अलग हो गए।





जानिए कौन है शुभेंदु अधिकारी (Subhendu Adhikari leave TMC)





  • 2011 में तृणमूल कांग्रेस की ऐतिहासिक जीत के वे एक महत्वपूर्ण नायक रह चुके हैं।
  • कांथी पी.के कॉलेज से स्नातक शुभेंदु अधिकारी ने छात्र जीवन में ही राजनीति में कदम रखा था। 1989 में छात्र परिषद के प्रतिनिधि चुने गए, इसके बाद वह 36 साल की उम्र में पहली बार वर्ष 2006 में कांथी दक्षिण सीट से विधायक निर्वाचित हुए।
  • इस साल वह कांथी नगर पालिका के चेयरमैन भी बने।
  • शुभेंदु वर्ष 2009 और 2014 में तुमलुक लोकसभा सीट से सांसद निर्वाचित हुए।
  • वर्ष 2016 उन्होंने नंदीग्राम विधानसभा सीट पर जीत दर्ज की, जिसके बाद उन्हें ममता सरकार में मंत्री बनाया गया था।
  • ममता बनर्जी के नेतृत्व में हुए नंदीग्राम आंदोलन के शुभेंदु 'शिल्पी' रहें हैं। इंडोनेशियाई रासायनिक कंपनी के लिए भूमि अधिग्रहण के खिलाफ उन्होंने 'भूमि उच्छेद प्रतिरोध कमेटी' के बैनर तले आंदोलन खड़ा किया।
  • नंदीग्राम सीट से विधायक 49 वर्षीय अधिकारी ने मंत्री पद से इस्तीफे के साथ ही अपनी 'जेड प्लस' सुरक्षा वापस कर दी। सरकारी आवास भी छोड़ दिया है।

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