Media24Media.com: शिक्षा नीति

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छत्तीसगढ़ में उल्लास नव भारत साक्षरता कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्यव्यापी अभियान प्रारंभ

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रायपुर। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अंतर्गत संचालित उल्लास नव भारत साक्षरता कार्यक्रमके सफल क्रियान्वयन के लिए छत्तीसगढ़ शासन ने राज्य भर में व्यापक अभियान की शुरुआत कर दी है। इसका उद्देश्य 15 वर्ष से अधिक आयु के असाक्षर नागरिकों को बुनियादी साक्षरता, संख्यात्मक ज्ञान और जीवनोपयोगी कौशल से सशक्त बनाना है, ताकि वे सितंबर 2025 और मार्च 2026 में आयोजित होने वाली FLNAT परीक्षा में सम्मिलित हो सकें।

राज्य से लेकर ग्राम पंचायत स्तर तक कार्यक्रम के सुचारू संचालन हेतु विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। सामान्य प्रशासन विभाग के निर्देशानुसार जिला, ब्लॉक और नगरीय साक्षरता मिशन प्राधिकरणों (DLMA, BLMA, TLMA) की बैठकें 20 जून तक अनिवार्य रूप से आयोजित की जाएगी। इनमें वार्षिक कार्ययोजना पर गहन चर्चा की जाएगी।

स्कूल शिक्षा सचिव  ने बताया कि चिन्हांकित स्कूलों की स्मार्ट क्लासों में केंद्र और राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध ऑनलाइन वीडियो सामग्री के माध्यम से शिक्षण कार्य शुरू किया जाएगा। प्रत्येक ब्लॉक में तकनीकी रूप से दक्ष शिक्षकों को केन्द्र प्रभारी बनाया जाएगा। इसके साथ ही पंचायती राज संस्थाओं और नगरीय निकायों के जनप्रतिनिधियों को भी सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। सरपंचों, पार्षदों एवं अन्य निर्वाचित जनप्रतिनिधियों की भागीदारी को विशेष महत्व दिया गया है।

ड्रॉपआउट और शालात्यागी बच्चों की पहचान कर उन्हें भी उल्लास केन्द्रों से जोड़ा जा रहा है। प्रत्येक जिले से इनकी सूची तैयार कर राज्य कार्यालय को भेजी जा रही है। वहीं स्वयंसेवी शिक्षकों और असाक्षर नागरिकों का सर्वेक्षण कर उन्हें उल्लास पोर्टलपर पंजीकृत करने का कार्य 15 जून तक पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है। पूर्ण साक्षर ग्राम पंचायत, श्पूर्ण साक्षर ब्लॉक और श्पूर्ण साक्षर जिलाश् की प्राथमिकता सूची तैयार कर 15 जुलाई तक राज्य कार्यालय को प्रस्ताव भेजे जाएंगे।

राज्य स्तर पर सूचना, शिक्षा और संचार (IEC) गतिविधियाँ भी तेज़ी से चलाई जा रही हैं। पंचायत भवनों, स्कूलों और प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर पोस्टर, बैनर, नुक्कड़ नाटकों एवं प्रचार माध्यमों से जन-जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। सभी बैठकों और कार्यक्रमों में उल्लास शपथको अनिवार्य रूप से शामिल किया गया है, जिससे साक्षरता आंदोलन में जनभागीदारी सुनिश्चित हो सके।

छत्तीसगढ़ माध्यमिक शिक्षा मण्डल द्वारा कक्षा 10वीं और 12वीं के छात्रों को प्रोत्साहित करने हेतु एक अभिनव योजना लागू की गई है, जिसके तहत वे छात्र जो 10 असाक्षरों को FLNAT परीक्षा में सफल कराते हैं, उन्हें बोर्ड परीक्षा में 10 बोनस अंक प्रदान किए जाएंगे। इस पहल से युवा वर्ग में काफी उत्साह देखा जा रहा है। राज्य के सभी जिलों में आदर्श उल्लास साक्षरता केन्द्रों की स्थापना की जा रही है। ये केंद्र नवाचारी शिक्षण पद्धतियों, डिजिटल सामग्री, जादुई पिटारा एवं रोचक गतिविधियों से समृद्ध होंगे। राज्य साक्षरता मिशन के अधिकारियों के अनुसार, साप्ताहिक मॉनिटरिंग, नियमित समीक्षा बैठकें, विभागीय समन्वय और स्थानीय प्रतिनिधियों की सक्रिय भागीदारी के साथ यह कार्यक्रम एक जन आंदोलन का रूप ले रहा है। स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव ने सभी जिला कलेक्टरों, जिला शिक्षा अधिकारियों और संबंधित विभागों को निर्देशित किया है कि वे श्उल्लासश् कार्यक्रम को राज्य की सर्वाेच्च प्राथमिकताओं में शामिल कर समयबद्ध और प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करें।

छत्तीसगढ़ में शालाओं और शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण से शिक्षा में नया संतुलन

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने और प्रत्येक विद्यार्थी को बेहतर शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और शिक्षा का अधिकार अधिनियम 2009 के अंतर्गत शिक्षकों के युक्तियुक्तकरण की एक व्यापक और प्रभावशाली प्रक्रिया शुरू की है। इस पहल से दूरस्थ, आदिवासी व ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय से शिक्षकों की कमी से जूझ रहे स्कूलों में शिक्षकों की उपलब्धता और शिक्षा की गुणवत्ता का नया संतुलन कायम होगा।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का कहना है कि युक्तियुक्तकरण का उद्देश्य शहरी एवं ग्रामीण इलाकों में शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाना है। इसको ध्यान में रखकर शालाओं और शिक्षकों का तर्कसंगत समायोजन किया जा रहा है। जहां जरूरत ज्यादा है, वहां शिक्षकों का बेहतर ढंग से उपयोग सुनिश्चित हो। उन स्कूलों को, जो कम छात्रों के कारण समुचित शिक्षा नहीं दे पा रहे हैं, उन्हें नजदीक के अच्छे स्कूलों के साथ समायोजित किया जा रहा है, ताकि बच्चों को बेहतर माहौल, संसाधन और पढ़ाई का समान अवसर मिल सके। युक्तियुक्तकरण से शिक्षा का स्तर सुधरेगा और हर बच्चे को अच्छी और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलेगी। यह पहल राज्य की शिक्षा व्यवस्था को ज्यादा सशक्त और संतुलित बनाएगी।

कोरबा जिले के सभी प्राथमिक और मिडिल स्कूलों में अब न्यूनतम दो व तीन शिक्षक पदस्थ किए गए हैं। 287 सहायक शिक्षक, 147 माध्यमिक शिक्षक और 75 व्याख्याताओं को काउंसलिंग के माध्यम से ऐसी शालाओं में पदस्थ किया गया है, जहां शिक्षक की जरूरत थी। इससे पोड़ी उपरोड़ा, पाली, करतला, कटघोरा जैसे दूरस्थ क्षेत्रों में वर्षों से शिक्षकविहीन रहे विद्यालयों में शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा। गणित, विज्ञान जैसे विषयों के विशेषज्ञों शिक्षक स्कूलों में उपलब्ध होंगे।

रायपुर के धरसीवां विकासखंड में कई स्कूलों में छात्रों की संख्या के मान से शिक्षक अधिक पदस्थ हैं। नयापारा कन्या स्कूल में 33 छात्राओं पर 7 शिक्षक तथा रविग्राम में 82 विद्यार्थियों पर 8 शिक्षक पदस्थ हैं। युक्तियुक्तकरण के माध्यम से इन शिक्षकों को आवश्यकता वाली शालाओं में पदस्थ किया जाएगा, जिससे शिक्षक और छात्र के अनुपात का संतुलन कायम होने के साथ ही दूरस्थ इलाकों के बच्चों को भी अध्यापन के लिए शिक्षकों की उपलब्धता सुनिश्चित होगी।

इसी तरह शिक्षकों की पदस्थापना में असंतुलन के चलते राजनांदगांव और दुर्ग जिले के ग्रामीण स्कूलों के परीक्षा परिणामों में गिरावट आई है। राजनांदगांव के घोटिया स्कूल में 103 छात्रों पर मात्र 3 व्याख्याता हैं, वहीं दुर्ग के मुरमुदा, सिलितरा और बिरेझर जैसे स्कूलों में पर्याप्त संख्या में व्याख्याता न होने के कारण इन स्कूलों का परीक्षा परिणाम प्रभावित हो रहा है। इसके उलट शहरी स्कूलों में शिक्षक आवश्यकता से अधिक पदस्थ हैं। युक्तियुक्तकरण से अब इस असमानता को दूर किया जा रहा है।

बस्तर संभाग के सात जिलों बस्तर, बीजापुर, कोंडागांव, नारायणपुर, दंतेवाड़ा, कांकेर और सुकमा में कुल 1611 स्कूलों का युक्तियुक्तकरण किया जा रहा है। इससे शैक्षणिक संसाधनों का समुचित वितरण, पुस्तकालय, प्रयोगशाला, कंप्यूटर, खेल सामग्री जैसी सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित होगी। साथ ही, एक ही परिसर में संचालित शालाओं का एकीकरण कर प्रशासनिक खर्च में भी बचत होगी। कमोवेश यह स्थिति कोरिया जिले में मिली, जिसके कारण जिले में 81 सहायक शिक्षक, 33 शिक्षक व 7 व्याख्याताओं को ऐसी शालाओं में पदस्थ किया गया, जहां शिक्षकों की जरूरत रही है। जिलों में युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया पूरी तरह से पारदर्शी ढंग से संचालित की जा रही है और अतिशेष शिक्षकों को काउंसलिंग के माध्यम से उनकी पसंद की शालाओं में पदस्थ किया जा रहा है।

सरगुजा जिले में भी युक्तियुक्तकरण के माध्यम से 283 सहायक शिक्षकों को उन शालाओं में भेजा गया है, जहां शिक्षकों की जरूरत थी। जांजगीर जिले में 18 प्रधान पाठक, 196 शिक्षक और 436 सहायक शिक्षकों की काउंसलिंग प्रक्रिया पारदर्शी व वरिष्ठता प्रणाली के आधार पर पूर्ण की गई। चयनित शिक्षकों को तत्काल पदस्थापना आदेश भी दे दिए गए हैं। छत्तीसगढ़ में शिक्षक युक्तियुक्तकरण की यह नीति न केवल शैक्षणिक असमानताओं को दूर कर रही है, बल्कि प्रत्येक विद्यार्थी को समान, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने की दिशा में एक सशक्त और दूरदर्शी कदम है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति से संवरेगा बच्चों का भविष्य : स्कूल शिक्षा सचिव परदेशी

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रायपुर। स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी ने कहा है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 में शिक्षकों को नए पाठ्यक्रमों के लिए तैयार करने और नई शिक्षा नीति के प्रावधानों को लागू करने में एससीईआरटी की महत्वपूर्ण भूमिका है। परदेशी कल एससीईआरटी कार्यालय में ध्वजारोहण के बाद अधिकारियों की समीक्षा बैठक को सम्बोधित कर रहे थे।

स्कूल शिक्षा सचिव परदेशी ने कहा कि हम सबको टीम वर्क के जरिए कार्य करते हुए नई शिक्षा नीति के लिए पाठ्यक्रम तैयार करना है। यह पाठ्यक्रम आने वाले कई वर्षों तक बच्चों के भविष्य निर्धारित करेगा। पाठ्यक्रम तैयार करते समय यह ध्यान रखने की जरूरत है कि यह न केवल यह बच्चों का भविष्य तैयार करेगा, बल्कि देश का भविष्य भी बनाएगा। प्रधानमंत्री के विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने में भी मदद करेगा।

परदेशी ने कहा कि सभी शिक्षकों का दायित्व है कि हम भावी पीढ़ी को अच्छा नागरिक बनाने के लिए अच्छी से अच्छी शिक्षा दें और इसके लिए बच्चों में अनुशासन और उन्हें संस्कारवान बनाएं। उन्होंने कहा कि समाज में बड़े से बड़े और छोटे से छोटे व्यक्ति की इच्छा होती है कि उनके बच्चों को अच्छी शिक्षा और संस्कार मिले और आगे चलकर वह परिवार, समाज और देश का नाम रोशन करें। शिक्षक का दायित्व भावी पीढ़ी का निर्माण करना होता है।

कार्यक्रम को समग्र शिक्षा के प्रबंध संचालक संजीव कुमार झा एससीईआरटी के अतिरिक्त संचालक जयप्रकाश रथ व समग्र के अतिरिक्त मिशन संचालक के. सी. काबरा ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम का संचालन स्टेट मीडिया सेंटर के नोडल अधिकारी प्रशांत पांडेय ने व आभार प्रदर्शन उप संचालक प्रोफसर पुष्पा किस्पोट्टा ने किया। इस अवसर पर बीएड कॉलेज के शिक्षक, छात्र सहित स्कूल शिक्षा विभाग के विभिन्न निकायों के अधिकारी उपस्थित थे।

छत्तीसगढ़ : के 10 हजार आंगनबाड़ी केन्द्र मॉडल केन्द्र के रूप में हो रहे विकसित

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रायपुर। बच्चों तथा महिलाओं के कल्याणकारी योजनाओं में मैदानी स्तर पर सुचारू रूप से संचालन के लिए आंगनबाड़ी केन्द्रों का सक्षम होना जरूरी है। इसे देखते हुए राज्य के 10 हजार आंगनबाड़ी केन्द्रों को मॉडल केन्द्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। इनमें से 1047 आंगनबाड़ी केन्द्रों को आकर्षक रूप देकर बाल सुलभ केन्द्र के रूप में विकसित किया गया है। 

साथ ही प्रदेश के 10 आकांक्षी जिलों एवं 20 विकासखण्ड में आंगनबाड़ी केन्द्र को सक्षम आंगनबाड़ी केन्द्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। आंगनबाड़ी केन्द्रों के माध्यम से दी जाने वाली सेवाओं की गुणवत्ता में वृद्धि के लिए स्वयं का आंगनबाड़ी भवन होना आवश्यक है। जिन स्थानों पर आंगनबाड़ी केन्द्र के लिए भवन नहीं हैं

वहां हितग्राहियों की सुविधा के लिए राज्य शासन द्वारा अधिकाधिक संख्या में आंगनबाड़ी भवन निर्माण के कार्य को प्राथमिकता दी जा रही है। राज्य सरकार द्वारा प्रदेश में कुल स्वीकृत 52 हजार 474 आंगनबाड़ी और मिनी आंगनबाड़ी केन्द्रों में से कुल 47 हजार 189 केन्द्रों के लिए स्वयं के भवन स्वीकृत किया गया है। साथ ही वित्तीय वर्ष 2023-24 में 5000 आंगनबाड़ी भवन निर्माण किये जाने लक्ष्य निर्धारित किया गया है। नवीन शिक्षा नीति के अनुरूप स्कूल शिक्षा विभाग के साथ समन्वय करते हुए 5000 से अधिक आंगनबाड़ी केन्द्रों में बालवाड़ियां प्रारंभ की जा रही है।


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