Media24Media.com: शासकीय भूमि

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रायपुर जिले में राजीव गांधी आश्रय योजना के तहत हितग्राहियों को जल्द पट्टे दिए जाएंगे: राजस्व मंत्री अग्रवाल

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रायपुर। राजस्व मंत्री जयसिंह अग्रवाल ने आज रायपुर जिले में राजीव गांधी आश्रय योजना के तहत पट्टा वितरण के कार्यांे की समीक्षा की। उन्होेंने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के घोषणा के अनुरूप और निर्देशानुसार राजीव गांधी आश्रय योजना के नियम-उपनियम बनाए जा चुके है और इसका राजपत्र में प्रकाशन हो चुका है। इस योजना के तहत रायपुर जिले में हितग्राहियों को जल्द पट्टे वितरण किए जाएंगे।

इस योजना के अंतर्गत शासकीय भूमि का निःशुल्क पट्टा दिया जाएगा। इसके लिए जिला प्रशासन द्वारा अभियान चलाया जाएगा। अग्रवाल ने कहा कि नगर निगम, सीएसईबी, सिंचाई विभाग और सीआईडीसी तथा अन्य विभाग उनके अंतर्गत की भूमि पर जल्द एनओसी प्रदान करें, जिससे जिला प्रशासन द्वारा प्रक्रिया जल्द पूर्ण कर सकें। इस बैठक में वरिष्ठ विधायक सत्यनारायण शर्मा, संसदीय सचिव  विकास उपाध्याय, छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड के अध्यक्ष एवं विधायक कुलदीप जुनेजा, महापौर एजाज ढ़ेबर और रायपुर विकास प्राधिकरण सुभाष धुप्पड़ उपस्थित थे।

 बैठक में वरिष्ठ विधायक सत्यनारायण शर्मा सहित अन्य विधायक तथ जनप्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री और राजस्व मंत्री के प्रति इस योजना के लिए आभार व्यक्त किया। शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री बघेल ने निर्धन तथा जरूरतमंदो की समस्याओं को समक्षा और संवेदनशीलता से उन्हें पट्टे प्रदान करने का निर्णय लिया। जल्द ही इस योजना के हितग्राहियों को पट्टे दिए जाएंगे। इस अवसर पर कलेक्टर डॉ सर्वेश्वर नरेन्द्र भुरे, नगर निगम आयुक्त श्री मयंक चतुर्वेदी, अपर कलेक्टर बी.बी पंचभाई, गजेन्द्र ठाकुर सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित थे।

उल्लेखनीय है कि राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा छत्तीसगढ़ के नगरीय क्षेत्रों में आवासहीन व्यक्तियों के लिए पट्टाधृति अधिकार अधिनियम 2023 की अधिसूचना का प्रकाशन छत्तीसगढ़ राजपत्र में कर दिया गया है। नगरीय क्षेत्रों में शासकीय भूमि पर 20 अगस्त 2017 से लगातार काबिज आवासहीन व्यक्तियों को शासकीय भूमि का निःशुल्क पट्टा दिया जाएगा। राज्य सरकार के नगर निगम क्षेत्र में आवासहीन व्यक्ति 600 वर्ग फीट तथा नगर पालिका, नगर पंचायत क्षेत्रों में 800 वर्ग फीट से अनधिक शासकीय भूमि के पट्टे के लिए पात्र होंगे, लेकिन जल संरक्षण अधिनियम के प्रावधानों व सर्वाेच्च न्यायालय द्वारा पारित निर्णय का पालन सुनिश्चित किया जाएगा। सभी जारी नए पट्टे निःशुल्क होंगे तथा सभी प्रयोजनों के लिए इन्हें रियायती पट्टा माना जाएगा।

छत्तीसगढ़ : नगरीय क्षेत्रों में आवासहीनों को मिलेगा काबिज भूमि का निःशुल्क पट्टा

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रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा नगरीय क्षेत्रों में शासकीय भूमि पर 20 अगस्त 2017 से लगातार काबिज आवासहीन व्यक्तियों को शासकीय भूमि का निःशुल्क पट्टा दिया जाएगा। राज्य सरकार के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग द्वारा छत्तीसगढ़ के नगरीय क्षेत्रों में आवासहीन व्यक्तियों के लिए पट्टाधृति अधिकार अधिनियम 2023 की अधिसूचना का प्रकाशन छत्तीसगढ़ राजपत्र में कर दिया गया है। 

नगर निगम क्षेत्र में आवासहीन व्यक्ति 600 वर्ग फीट तथा नगर पालिका, नगर पंचायत क्षेत्रों में 800 वर्ग फीट से अनधिक शासकीय भूमि के पट्टे के लिए पात्र होंगे, लेकिन जल संरक्षण अधिनियम के प्रावधानों व सर्वाेच्च न्यायालय द्वारा पारित निर्णय का पालन सुनिश्चित किया जाएगा। सभी जारी नए पट्टे निःशुल्क होंगे तथा सभी प्रयोजनों के लिए इन्हें रियायती पट्टा माना जाएगा। इस पर नगरीय निकाय, संपत्ति व अन्य कर के विषय में अपनी विधियों के अंतर्गत निर्णय ले सकेगा।

रजिस्टर तथा स्थल योजना तैयार करना - प्राधिकृत अधिकारी, इस अधिनियम के प्रयोजन हेतु प्रत्येक क्षेत्र के लिए प्ररूप-क में एक रजिस्टर तैयार करेगा। प्राधिकृत अधिकारी, क्षेत्र के प्रत्येक कुटुम्ब के अधिभोग के अधीन भू-खण्ड को दर्शाने वाली स्थल योजना तैयार करवाएगा। प्राधिकृत अधिकारी, ऐसे क्षेत्रों का भुवन या मुक्तस्रोत के नक्शे के आधार पर एक ले-आउट तैयार करेगा।

आवासहीन व्यक्ति का रजिस्ट्रीकरण - प्राधिकृत अधिकारी द्वारा प्रत्येक क्षेत्र में प्रत्येक भू-खण्ड का सर्वे कराया जाएगा और उक्त रजिस्टर में, स्वप्रेरणा से, ऐसे प्रत्येक आवासहीन व्यक्ति का मामला पंजीकृत किया जाएगा, जिसके पक्ष में भूमि का, पट्टाधृति अधिकारों के अंतर्गत व्यवस्थापित करने के विषय में विनिश्चय किया जाना है।

भूमि कब्जे के संबंध में सत्यापन - भूमि के कब्जे के संबंध में सत्यापन के लिए आधार दस्तावेज 20 अगस्त 2017 के पूर्व जारी दस्तावेज होंगे। इनमें निर्वाचन आयोग की मतदाता सूची, विद्युत बिल, टेलीफोन बिल, स्थानीय निकाय का संपत्तिकर या समेकित कर पंजी, जलकर भुगतान दस्तावेज, भवन या दुकान अनुज्ञा, अधिनियम के अधीन प्रदत्त पट्टाधृति  पट्टे व आधार या ड्रईविंग लाइसेंस शामिल है।

अतिरिक्त भूमि का व्यवस्थापन - कब्जे की अतिरिक्त भूमि के नियमितीकरण प्रकरणों के संबंध में आवेदन की प्राप्ति पर संयुक्त दल द्वारा प्रत्येक प्रकरण में स्थल का निरीक्षण किया जाएगा। इस संबंध में संयुक्त दल के संतुष्ट होने पर कब्जे की अतिरिक्त भूमि संहिता के अंतर्गत व्यवस्थापन के लिए योग्य है, प्राधिकृत अधिकारी द्वारा संहिता के अनुरूप कार्यवाही सुनिश्चित की जाएगी। निर्धारित सीमा से अधिक भूमि होने पर अतिरिक्त भूमि के व्यवस्थापन नहीं कराए जाने की दशा में व्यवस्थापन नहीं कराए जाने की दशा में अतिरिक्त भूमि का कब्जा छोड़े या हटाए जाने के बाद ही कब्जाधारी को पट्टे की पात्रता होगी, अन्यथा वह अपात्र माना जाएगा।

पट्टा हस्तांतरण नियमितीकरण - अधिनियम के अंतर्गत अवैध, अनियमित पट्टा या कब्जा हस्तांतरण के नियमितीकरण के प्रकरणों के संबंध में इस प्रयोजन के लिए आवेदन या शिकायत की प्राप्ति पर या स्वप्रेरणा से कार्यवाही करते हुए प्राधिकृत अधिकारी संयुक्त दल को सूचित करेगा, जो स्थल निरीक्षण करेंगे, यदि हस्तांतरण किसी ऐसे व्यक्ति के पक्ष में किया गया था, जो आवासहीन नहीं है या अन्यथा अधिनियम के तहत हितग्राही बनने की पात्रता नहीं रखता है तो पट्टे के हस्तांतरण को निरस्त कर दिया जाएगा तथा संबंधित भूमि को कब्जा मुक्त किया जाएगा।

पट्टा भूमि का उपयोग - पट्टा भूमि आवासीय प्रयोजन में उपयोग की जाएगी। यदि पट्टाधारी द्वारा पट्टा भूमि का उपयोग गैर-आवासीय प्रयोजन के लिए किया जाता है, तो पट्टा निरस्त किया जा सकेगा। हालांकि इसके पहले सुनवाई का अवसर दिया।

स्थायी पट्टा 30 साल के लिए होगा - स्थायी पट्टा 30 वर्ष की कालावधि के लिए जारी किया जाएगा। यदि प्राधिकृत अधिकारी इस निष्कर्ष पर पहुंचता है कि लोकहित में कब्जाधारियों का अन्यत्र व्यवस्थापन आवश्यक है तो ऐसे गृहस्थल के अधिभोगियों को उनके अधिभोग के गृहस्थल के लिए अस्थायी पट्टे जारी किए जाएंगे।

कब्जा हटाया जाना - कब्जे की भूमि को लोकहित में खाली कराए जाने की आवश्यता होने पर कलेक्टर की पद श्रेणी से अनिम्न अधिकारी द्वारा लेखबद्ध कारणों सहित लिखित आदेश से पात्र व्यक्तियों का अन्यत्र व्यवस्थापन किया जा सकेगा।

शुल्क - उपरोक्त नियमों के अध्यधीन रहते हुए, सभी जारी नये पट्टे निःशुल्क होंगे एवं समस्त प्रयोजनों के लिए इन्हें रियायती पट्टा माना जाएगा। इस पर नगरीय निकाय, संपत्ति एवं अन्य कर के विषय में अपने विधियों के अंतर्गत निर्णय ले सकेगा।

भूमि के पट्टे का नवीनीकरण - पट्टाधारी द्वारा अधिनियम तथा इन नियमों एव पट्टे की शर्ताें का उल्लंघन नहीं करने तथा नगरीय निकाय की समस्त देनदारियों का सम्यक, भुगतान करने पर, संबंधित भूमि के पट्टे का नवीनीकरण किया जा सकेगा। स्थायी पट्टे की अवधि का विस्तार (नवीनीकरण) 30 वर्षाें की अवधि के लिए किया जाएगा। पट्टे का नवीनीकरण करते समय ऐसी अन्य शर्तें भविष्य में जोड़ी सकेंगी, जैसा कि शासन उचित समझे।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों को लिखा पत्र

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने एक बड़ी पहल करते हुए विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर छत्तीसगढ़ सरकार की ’’छत्तीसगढ़ कल्चरल कनेक्ट’’ योजना  से अवगत कराया है। मुख्यमंत्री ने पत्र में ’’छत्तीसगढ़ कल्चरल कनेक्ट’’ योजना की जानकारी देते हुए लिखा है कि इन केंद्रों की स्थापना से राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय महत्व के स्थानों में छत्तीसगढ़ के लोगों के निवास और भ्रमण की सुविधा मिलेगी। मुख्यमंत्री ने उक्त केंद्रों की स्थापना हेतु विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्री से दो एकड़ शासकीय भूमि आबंटित करने का अनुरोध किया है। मुख्यमंत्री ने विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों को आश्वस्त किया है कि छत्तीसगढ़ में संस्कृति केंद्र खोलने के लिए भूमि आबंटन की उन्हें भी सहर्ष स्वीकृति दी जाएगी।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से ऋषिकेश, गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेन्द्र भाई पटेल से गिरनार एवं सोमनाथ, ओड़िसा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक से पुरी में, आंध्रप्रदेश के मुख्यमंत्री वाय.एस. जगनमोहन रेड्डी से तिरूपति में, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे से शिरडी में, झारखण्ड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से देवघर में, उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदिनाथ से वाराणसी, अयोध्या, प्रयागराज एवं मथुरा में दो एकड़ शासकीय भूमि आबंटित करने का अनुरोध किया है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने पत्र में लिखा है कि भारत में विभिन्न भाषाओं, जातियों, धर्मों तथा संस्कृतियों के लोग एक साथ रहते है। 

अनेकता में एकता ही हमारी सबसे बड़ी शक्ति एवं धरोहर है। विभिन्न संस्कृतियों के परस्पर आदान-प्रदान की प्रक्रिया की निरंतरता ने हमारे राष्ट्र को एकजुट रखने एवं शक्तिशाली बनाने में सहायता प्रदान की है। छत्तीसगढ़ की सरकार ने ’’छत्तीसगढ़ कल्चरल कनेक्ट’’ नामक योजना प्रारंभ करने का निर्णय लिया है। देश के विभिन्न भागों में स्थित राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर के सांस्कृतिक महत्व के स्थानों में छत्तीसगढ़ के लोगों के भ्रमण एवं निवास हेतु ’छत्तीसगढ़ संस्कृति केन्द्रों’ की स्थापना की जाये। इन केन्द्रों के माध्यम से राज्य वासियों को न केवल देश की सांस्कृतिक बहुलता की जानकारी प्राप्त होगी बल्कि उन स्थानों पर छत्तीसगढ़ राज्य की संस्कृति, पुरातत्व एवं पर्यटन स्थलों की जानकारी दिये जाने के साथ ही छत्तीसगढ़ के परंपरागत हस्तशिल्प उत्पादों की भी अन्य राज्यों एवं देशों से आने वाले पर्यटकों को जानकारी मिल सकेगी।

मुख्यमंत्री ने विभिन्न राज्यों के मुख्यमंत्रियों को आश्वस्त किया है कि यदि वे अपने राज्य की संस्कृति के प्रति छत्तीसगढ़ के लोगों की रूचि बढ़ाने की दृष्टि से छत्तीसगढ़ में सांस्कृतिक एवं पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण स्थलों पर भूमि आवंटन की मांग करते है तो उस पर सहर्ष स्वीकृति प्रदान की जाएगी।

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