Media24Media.com: शहीद वीर नारायण

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शहीद वीर नारायण सिंह संग्रहालय बनेगा आदिवासियों के गौरव, शौर्य एवं बलिदान का प्रतीक

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रायपुर। आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा ने आज नवा रायपुर स्थित आदिम जाति अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान के समीप बन रहे आदिवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों पर आधारित शहीद वीर नारायण सिंह संग्रहालय की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि यह संग्रहालय प्रदेश का पहला संग्रहालय है, जो छत्तीसगढ़ के आदिवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के अदम्य शौर्य एवं बलिदान को समर्पित है। इसके निर्माण कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। संग्रहालय का निर्माण 30 सितंबर तक पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है।

उन्होंने समीक्षा के दौरान इसके सभी गैलरियों में और बेहतर बनाने के लिए आवश्यक सुझाव दिए और समय-सीमा में कार्य संपन्न करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि संग्रहालय के निर्माण में लगने वाली प्रत्येक सामग्री उच्च गुणवत्तायुक्त एवं मानकीकृत हो। उन्होंने मध्यप्रदेश, ओडीशा एवं झारखंड राज्य में निर्मित संग्रहालयों का भी अवलोकन कर इसकी विशेषताओं का अध्ययन करने को कहा। जिससे इस संग्रहालय में सभी आधारभूत विषयों एवं ऐतिहासिक तथ्यों विशेष रूप से ध्यान दिया जा सके।

उल्लेखनीय है कि शहीद वीर नारायण सिंह संग्रहालय में स्वतंत्रता आंदोलन के समय छत्तीसगढ़ में हुए विभिन्न आदिवासी विद्रोहों जैसे- हल्बा विद्रोह, सरगुजा विद्रोह, भोपालपट्टनम विद्रोह, परलकोट विद्रोह, तारापुर विद्रोह, लिंगागिरी विद्रोह, कोई विद्रोह, मेरिया विद्रोह, मुरिया विद्रोह, रानी चौरिस विद्रोह, भूमकाल विद्रोह, सोनाखान विद्रोह, झण्डा सत्याग्रह एवं जंगल सत्याग्रह के वीर आदिवासी नायकों के संघर्ष एवं शौर्य के दृश्य का जीवंत प्रदर्शन किया जा रहा है।

बैठक में टीआरटीआई के संचालक जगदीश कुमार सोनकर, उपसचिव बी.के.राजपूत, उपायुक्त श्रीमती गायत्री नेताम, कार्यपालन यंत्री त्रिदीप चक्रवर्ती, सहित इंजीनियर्स एवं अन्य विभागीय अधिकारी उपस्थित थे।


शहीद वीर नारायण सिंह संग्रहालय में बन रही ब्रिटिश कालीन जनजाति विद्रोह की झांकी

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रायपुर। छत्तीसगढ़ के आदिवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों की ऐतिहासिक योगदान की थीम पर नवा रायपुर अटल नगर में तैयार हो रहे शहीद वीरनारायण सिंह संग्रहालय का तेजी से निर्माण किया जा रहा है। संग्रहालय में 15 गैलरी तैयार किए जा रहे हैं। यहां ब्रिटिश हुकूमत के दौरान हुए जनजाति विद्रोहों की झांकी तैयार की जा रही है।

शहीद वीर नारायण सिंह आदिवासी (स्वतंत्रता संग्राम सेनानी) संग्रहालय पुरखौती मुक्तांगन के समीप 45 करोड़ की लागत से लगभग 10 एकड़ भूमि पर स्थापित किया जा रहा है। यह संग्रहालय न केवल छत्तीसगढ़ के आदिवासी स्वतंत्रता सेनानियों के स्वतंत्रता काल में दिए गए सर्वोच्च बलिदान को याद दिलाएगा, बल्कि छत्तीसगढ़ की गौरवशाली आदिवासी परंपरा से भी आमजन को रूबरू करवाएगा। यह संग्रहालय सभी वर्ग के लोगों के लिए एक आकर्षण का केन्द्र के रूप में बनकर उभरेगा। 

प्रमुख सचिव श्र बोरा ने कहा कि भगवान बिरसा मुण्डा की जन्मदिवस के अवसर पर माह नवंबर में शहीद वीर नारायण सिंह संग्रहालय का लोकार्पण किया जाना प्रस्तावित है। अतः कार्य में गुणवत्ता के साथ तेजी लाई जाए। उन्होंने अधिकारियों, इंजीनियर्स, क्यूरेटर एवं निर्माण एजेंसी के अधिकारियों से अब तक के कार्य की प्रगति की जानकारी ली और ंनिर्माण एजेंसी के अधिकारियों से कार्य को निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने के लिए मैन पावर बढ़ाने के निर्देश भी दिए।

अधिकारियों ने बताया गया कि संग्रहालय में लगने वाली मूर्तियों का निर्माण तेजी से चल रहा है, निर्धारित समयावधि में मूर्ति निर्माण का कार्य पूरा कर लिया जाएगा। मूर्तियों की फिनिशिंग का कार्य भी समानांतर रूप से किया जा रहा है। इस अवसर पर आदिवासी अनुसंधान एवं प्रशिक्षण संस्थान के संचालक पी.एस. एल्मा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

 संग्रहाल में दिखेगी जनजाति विद्रोह की झांकी  

प्रथम गैलरी में छत्तीसगढ़ की जनजातीय जीवन शैली को दर्शाया जाएगा, वहीं दूसरी गैलरी में राज्य की जनजातियों पर अंग्रेजों और स्थानीय हुकूमत के अत्याचार, तीसरी गैलरी में हल्बा विद्रोह, चौथी गैलरी में सरगुजा विद्रोह, पांचवी गैलरी में भोपालपट्टनम विद्रोह, छठवीं गैलरी में परलकोट विद्रोह, सातवीं गैलरी में तारापुर विद्रोह, आठवीं गैलरी में लिंगागिरी विद्रोह, नौवीं गैलरी में कोई विद्रोह, के दृश्य होंगे।

इसी प्रकार दसवीं गैलरी में दंतेवाड़ा के मेरिया विद्रोह, ग्यारवीं गैलरी में मुरिया विद्रोह, बारहवीं गैलरी में रानी चौरिस विद्रोह, तेरहवीं गैलरी में बस्तर के भूमकाल विद्रोह, चौदहवीं गैलरी में शहीद वीर नारायण सिंह के सोनाखान विद्रोह एवं पंद्रहवीं गैलरी में झण्डा सत्याग्रह एवं जंगल सत्याग्रह के वीर आदिवासी नायकों के संघर्ष को बखूबी चित्रण किया जा रहा है।

 


मुख्यमंत्री ने शहीद वीर नारायण सिंह की आदमकद प्रतिमा का किया अनावरण

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज जिला मुख्यालय बलौदाबाजार के संयुक्त जिला कार्यालय परिसर में शहीद वीर नारायण सिंह की आदमकद प्रतिमा का अनावरण किया। बघेल ने इस अवसर पर शहीद वीर नारायण सिंह का स्मरण करते हुए उनकी प्रतिमा पर श्रद्धासुमन अर्पित किए।

कांस्य मेटल से निर्मित यह आदमकद मूर्ति 12 फीट ऊंची और 2 टन वजनी है। इस मूर्ति को पूर्व में स्थापित राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा के क्रम में स्थापित किया गया है। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 10 दिसम्बर 2020 को सोनाखान में शहादत दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में जिला कार्यालय परिसर बलौदाबाजार में शहीद वीर नारायण सिंह की आदमकद प्रतिमा स्थापित करने की घोषणा की थी।

छत्तीसगढ़ के महान क्रांतिकारी, सोनाखान के माटी सपूत, जिले की शान, सन 1857 की क्रांति के प्रथम शहीद वीर नारायण सिंह की आदमकद प्रतिमा की स्थापना से न केवल जिला परिसर बल्कि पूरा प्रदेश गौरवान्वित हुआ है। इस प्रतिमा से छत्तीसगढ़ की स्वर्णिम इतिहास की झलक दिखलायी दे रही है।

मुख्यमंत्री ने शहीद वीर नारायण सिंह की आदमकद प्रतिमा का किया अनावरण

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज जिला मुख्यालय बलौदाबाजार के संयुक्त जिला कार्यालय परिसर में शहीद वीर नारायण सिंह की आदमकद प्रतिमा का अनावरण किया। बघेल ने इस अवसर पर शहीद वीर नारायण सिंह का स्मरण करते हुए उनकी प्रतिमा पर श्रद्धासुमन अर्पित किए। कांस्य मेटल से निर्मित यह आदमकद मूर्ति 12 फीट ऊंची और 2 टन वजनी है। इस मूर्ति को पूर्व में स्थापित राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और संविधान निर्माता डॉ. भीमराव अंबेडकर की प्रतिमा के क्रम में स्थापित किया गया है।

गौरतलब है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 10 दिसम्बर 2020 को सोनाखान में शहादत दिवस के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में जिला कार्यालय परिसर बलौदाबाजार में शहीद वीर नारायण सिंह की आदमकद प्रतिमा स्थापित करने की घोषणा की थी। छत्तीसगढ़ के महान क्रांतिकारी, सोनाखान के माटी सपूत, जिले की शान, सन 1857 की क्रांति के प्रथम शहीद वीर नारायण सिंह की आदमकद प्रतिमा की स्थापना से न केवल जिला परिसर बल्कि पूरा प्रदेश गौरवान्वित हुआ है। इस प्रतिमा से छत्तीसगढ़ की स्वर्णिम इतिहास की झलक दिखलायी दे रही है।

मुख्यमंत्री ने सोनाखान में ओपन एयर म्यूजियम का किया शुभारंभ

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रायपुर। शहीद वीर नारायण सिंह की जन्म एवं कर्म स्थली को उनके गौरव के अनुरूप विकसित करने के लिए जिला प्रशासन बलौदाबाजार-भाटापारा द्वारा सोनाखान में भव्य ओपन एयर म्यूजियम का निर्माण किया गया है, जिसका शुभारंभ आज मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने किया। इसके अलावा उन्होंने बलौदाबाजार-भाटापारा टूरिज्म सर्किट का भी शुभारंभ किया। इस टूरिज्म सर्किट में बाबा गुरू घासीदास की जन्म एवं कर्म स्थली गिरौदपुरी, शहीद वीर नारायण सिंह की जन्म एवं कर्म स्थली सोनाखान, कबीर पंथियों के प्रसिद्ध धर्म स्थली दामाखेड़ा, तुरतुरिया, सिद्धखोल जलप्रपात, बलारडेम, सिद्धेश्वर मंदिर पलारी और नारायणपुर का शिव मंदिर शामिल है। इस टूरिज्म सर्किट में आने वाले पर्यटकों को विभिन्न सुविधाएं उपलब्ध करायी जाएंगी।

 


सोनाखान में बनाया गया यह म्यूजियम प्रदेश में अपनी तरह का पहला म्यूजियम होगा, जहां ऑडियो- विजुअल सेटअप और एक विशेष धातु कॉर्टेन स्टील के माध्यम से शहीद वीर नारायण सिंह की जीवनी को प्रदर्शित किया जा रहा है। कॉर्टेन स्टील के बनें लम्बे और सुंदर पैनल्स पर शहीद वीर नारायण सिंह की जीवनी उकेरी गई है। जिसकी भव्यता दिन के साथ ही रात में भी देखी जा सकती है। लाइट के अद्भुत सेटअप इसे खास और अलग बनाते हैं। सभी पैनल एक ऑडियो सेटअप लगा हुआ है, जिसके माध्यम से शहीद वीर नारायण सिंह की जन्म से लेकर क्रांति और बलिदान को सुना जा सकता है। यह ऑडियो हिंदी, अंग्रेज़ी और छत्तीसगढ़ी भाषा में उपलब्ध है। यहां आने वाले लोग अपनी पसंद मुताबिक ऑडियो की भाषा तय कर सकते हैं।



देश में कॉर्टेन स्टील का उपयोग विभिन्न महान परियोजनाओं में कलाकृतियां बनाने के लिए किया जा चुका है। काशी विश्वनाथ कॉरिडोर, बिहार म्यूज़ियम और कई देशों के प्रतिष्ठित प्रोजेक्ट में इसका उपयोग किया गया है। यहां पार्किंग और केंटिन की भी व्यवस्था रहेगी। केंटिन की व्यवस्था स्व-सहायता समूह के द्वारा संचालित की जाएगी। इसके साथ ही यहां आने वाले लोगों को म्यूजियम में प्रवेश सशुल्क रहेगा। इस नवाचार से पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और लोगों को भी रोजगार उपलब्ध होगा।

प्रयास के विद्यार्थियों ने देश के सर्वोच्च संस्थानों में प्रवेश पाकर छत्तीसगढ़ का मान बढ़ाया: मंत्री डॉ. टेकाम

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रायपुर। आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम ने शहीद वीर नारायण सिंह बलिदान दिवस के अवसर पर आज रायपुर के नवीन विश्राम गृह परिसर में आयोजित स्वर्गीय राजीव गांधी स्मृति प्रयास आवासीय विद्यालयों के प्रतिभाशाली 58 विद्यार्थियों को सम्मानित किया। प्रयास आवासीय विद्यालय के यह प्रतिभावान विद्यार्थी वर्ष 2021-22 की राष्ट्रीय स्तर की जेईई, नीट और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल होकर राष्ट्रीय स्तर की संस्थाओं में अध्ययन कर रहे हैं। मंत्री डॉ. टेकाम ने इस अवसर पर आईआईटी, एनआईटी, ट्रीपल आईटी और मेडिकल में प्रवेश लेने वाले प्रत्येक विद्यार्थियों को लैपटॉप के लिए 50-50 हजार रूपए की राशि का चेक प्रदान कर सम्मानित किया। 



अतिथियों द्वारा सम्मान समारोह में वर्ष 2021-22 में प्रयास आवासीय विद्यालय की उपलब्धि पर आधारित पुस्तिका का विमोचन भी किया। मंत्री डॉ. टेकाम ने इस अवसर पर राज्य की विभिन्न शैक्षणिक संस्थाओं के अधोसंरचना निर्माण के लिए 72 करोड़ 83 लाख 73 हजार रूपए की लागत वाले 32 निर्माण कार्यों का भूमिपूजन और लोकार्पण किया। इसमें 67 करोड़ 86 लाख 28 हजार रूपए के 29 विकास कार्यों का भूमिपूजन और 04 करोड़ 97 लाख 45 हजार रूपए के तीन विकास कार्यों का लोकार्पण शामिल है। प्रतिभा सम्मान समारोह का शुभारंभ अतिथियों द्वारा शहीद वीर नारायण सिंह के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्ज्वलन कर किया गया। प्रयास आवासीय विद्यालय की उपलब्धियों पर आधारित लघु फिल्म का अवलोकन अतिथियों द्वारा किया गया। 

 शहीद वीर नारायण सिंह बलिदान दिवस पर प्रयास के प्रतिभाशाली विद्यार्थी सम्मानित

इस अवसर पर आईआईटी धनबाद में अध्ययनरत छात्रा कु. मेरिना स्मृति मिंज और आईआईटी रायपुर में अध्ययनरत छात्र मुरली मनोहर वर्मा ने अपने अनुभव भी साझा किए। मंत्री डॉ. टेकाम ने समारोह में सम्मानित होने वाले सभी विद्यार्थियों को बधाई और शुभकामनाएं देते हुए कहा कि प्रतिभावान बच्चों को आज उनके परिश्रम का इनाम मिल रहा है, जो बच्चे आज यहां जगह नहीं बना पाए है उन्हें इनसे सीखने की जरूरत है। चुनौती कोई भी हो प्रयास करने से उसे दूर किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि जनजाति क्षेत्रों के विद्यार्थियों ने देश के सर्वोच्च संस्थानों में प्रवेश पाकर राज्य एवं जनजाति का मान बढ़ाया है। बच्चों की मेहनत, अभिभावकों का सहयोग और शिक्षकों के मार्गदर्शन को सराहने का अवसर है। प्रतिभाओं को सम्मानित करने से उनमें नई ऊर्जा का संचार होता है



साथ ही आने वाली पीढ़ी को प्रेरणा मिलती है। इस प्रकार के आयोजन से प्रतिस्पर्धा बढ़ती है और प्रतिभा निखर कर सामने आती है। मंत्री डॉ. टेकाम ने कहा कि प्रयास आवासीय विद्यालय राज्य के संपूर्ण अनुसूचित क्षेत्र सहित गैर-अनुसूचित क्षेत्र में स्थित नक्सल प्रभावित जिलोें के आदिवासी उप-योजना क्षेत्र के प्रतिभावान विद्यार्थियों को प्रारंभ से प्रतियोगी परीक्षाओं की दृष्टिकोण से तैयार करता है, जिससे वे विभिन्न राष्ट्रीय एवं राज्य स्तर की प्रतिष्ठापूर्ण संस्थाओं में प्रवेश पाना योग्य बन सके। उन्होंने बताया कि वर्ष 2021-22 में अब तक प्रयास विद्यालय से 107 आईआईटी, 305 एनआईटी, 916 विद्यार्थी विभिन्न इंजीनियरिंग कॉलेजों में और 47 विद्यार्थियों ने मेडिकल कॉलेज में प्रवेश प्राप्त का रिकॉर्ड बनाया है। 

वर्ष 2021-22 में प्रयास आवासीय विद्यालयों ने आईआईटी में 10, एनआईटी में 36, ट्रीपल आईटी में 08, मेडिकल कॉलेज में 04 विद्यार्थियों ने और विभिन्न राज्य स्तरीय परीक्षाओं को मिलाकर कुल 451 विद्यार्थियों ने व्यावसायिक शैक्षणिक संस्थाओं में प्रवेश प्राप्त किया है। समारोह को अध्यक्ष अनुसूचित आयोग के.पी. खाण्डे, उपाध्यक्ष राज्य पिछड़ा वर्ग आयोग आर.एन. वर्मा, उपाध्यक्ष अनुसूचित जनजाति आयोग सुश्री राजकुमारी ने भी संबोधित किया। आयुक्त आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास श्रीमती शम्मी आबिदी प्रयास आवासीय विद्यालय योजना का प्रतिवेदन प्रस्तुत किया।

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