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छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण के नये आयाम

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रायपुर। महिलाओं को सशक्त बनाना है तो स्वास्थ्य-शिक्षा के साथ-साथ उन्हें अधिकार और आगे बढ़ने के सुरक्षित अवसर देने होंगे। उन्हें आर्थिक रूप से संपन्न बनाने के लिए नये रास्ते बनाना भी जरूरी हैे। इसी सोच के साथ छत्तीसगढ़ सरकार ने महिलाओं को अधिकार संपन्न बनाने के साथ उनके स्वावलंबन की नीति अपनाई है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की पहल पर महिलाओं की रचनात्मक क्षमता को बढ़ाने के साथ उनकी सृजन क्षमता को स्थानीय संसाधनों के साथ जोड़ा गया है।

महिलाओं की व्यक्तिगत, सामाजिक और आर्थिक स्थिति से जुड़ा यह दृष्टिकोण उनके लिए विकास के नये आयाम खोलता है। नीति आयोग द्वारा जारी वर्ष 2020-21 की इंडिया इंडेक्स रिपोर्ट के अनुसार लैंगिक समानता में छत्तीसगढ़ पहले स्थान पर है। कुपोषण और एनीमिया से लड़ाई में भी छत्तीसगढ़ को बड़ी सफलता मिली है। छत्तीसगढ़ में 2 अक्टूबर 2019 से शुरू हुए मुख्यमंत्री सुपाषण अभियान से अब तक 2 लाख 65 हजार बच्चे कुपोषण मुक्त तथा एक लाख 50 लाख महिलाएं एनीमिया मुक्त हो चुकी हैं। एनीमिया मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत बच्चों, किशोरों, गर्भवती तथा शिशुवती महिलाओं को आईएफए (आयरन फोलिक एसिड) सप्लीमेंटेशन उपलब्ध कराने में छत्तीसगढ़ देश में तीसरे स्थान पर है।

बिहान से जुड़ी है ढाई लाख महिला समूह- छत्तीसगढ़ में महिलाओं की प्रगति के लिए अपनाई गई नीतियों और उनके संरक्षण का ही परिणाम है, कि यहां वनोपज के कारोबार से 50 हजार से अधिक महिलाएं जुड़कर छत्तीसगढ़ की आर्थिक उन्नति में अपना योगदान दे रहींे हैं, वहीं जिला खनिज न्यास निधि बोर्ड में ग्रामीण महिलाएं, ग्राम सभा सदस्यों के रूप में खुद के लिए नीतियां भी तैयार कर रही हैं। प्रदेश में करीब 300 रूरल इंडस्ट्रियल पार्क शुरू किए जा चुके हैं, जहां महिलाओं को अच्छा रोजगार और अच्छी आय मिल रही है। महिलाओं को बैंकिंग प्रक्रिया से जोड़ने लगभग चार हजार बहनें बीसी सखी के रूप में चलते-फिरते बैंक के रूप में बैंकिंग सुविधाएं दूर-दराज के क्षेत्रों तक पहुंचा रही हैं। छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान से करीब 27 लाख गरीब परिवारों की महिलाएं 02 लाख 54 हजार स्व-सहायता समूहों से जुड़ी हैं।

महिलाओं के श्रम से चमका डेनेक्स- बस्तर के घने जंगलों में नक्सलियों से साहस के साथ मोर्चा ले रहीं बस्तर की दंतेश्वरी फाइटर्स अपने पूरे देश के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। गोधन न्याय योजना के तहत गांव-गांव में बनाए गए गौठानों में लगभग 45 प्रतिशत भागीदारी महिलाओं की है। ये महिलाएं गौठानों में आर्थिक गतिविधियों के माध्यम से न सिर्फ सशक्त बन रही हैं, बल्कि अपने परिवारों के लिए भी संबल बन गई हैं। गोठानों बनाए जा रहे रूरल इंडस्ट्रियल पार्क और सी-मार्ट स्टोर जैसी नई अवधारणा से महिलाओं का आर्थिक सशक्तिकरण हो रहा हैं। महिलाओं द्वारा तैयार सामाग्री को बाजार मिल रहा हैं। बस्तर के आदिवासी जिले दंतेवाड़ा की डेनेक्स गारमेंट फैक्टरी में काम कर रही महिलाओं ने देश-विदेश में डेनेक्स ब्रांड को लोकप्रिय बनाकर आर्थिक सशक्तिकरण की नई मिसाल पेश की है। बीजापुर की महिलाओं का महुआ लड्ड, कोंडागांव का तिखुर शेक, सुकमा की ईमली-कैंडी और नारायणपुर का फूल झाडू भी प्रसिद्ध हो चुका है।

महिला कोष का बजट 25 करोड़- महिला कोष से ऋण लेकर आर्थिक गतिविधि जुड़ी महिला समूहों को प्रोत्साहन देने के उद्देश्य से समूह द्वारा लिए गए पुराने 12 करोड़ रूपये के ऋण माफ कर दिये हैं। साथ ही ऋण लेने की सीमा को भी दो से चार गुना तक बढ़ा दिया है। महिला कोष द्वारा दिए जाने वाले ऋण सीमा में भी दोगुनी वृद्धि की गई है। महिला कोष के बजट में ऐतिहासिक वृद्धि की गई है। पूर्व वर्षों में महिला कोष को एक या दो करोड़ वार्षिक आबंटन उपलब्ध होता था मगर वर्ष 2023-24 में 25 करोड़ रूपए का वार्षिक बजट उपलब्ध कराया गया है। वित्तीय वर्ष 2022-23 में छत्तीसगढ़ महिला कोष के द्वारा 10 हजार 500 से अधिक महिलाओं के लिए पिछले 5 सालों में सर्वाधिक 10 करोड़ 70 लाख रुपए से अधिक ऋण राशि स्वीकृत की गई है। नई कौशल्या समृद्धि योजना शुरू करने की योजना है, इसमें महिलाओं को व्यवसाय के लिए आसान शर्तों पर 3 प्रतिशत ब्याज दर पर ऋण दिया जाएगा। इसके लिए 25 करोड़ रूपए का बजट अतिरिक्त रूप से स्वीकृत किया है।

महिला उद्यमिता नीति- महिलाएं जितनी सशक्त होंगी, राज्य का विकास उतनी ही तेजी से होगा, इसे देखते हुए छत्तीसगढ़ में महिलाओं की क्षमता को एक नई ऊंचाई देने के लिए महिला उद्यमिता नीति 2023-28 लागू कर दी गई है। इसमें महिलाओं को उद्यम स्थापित करने के लिए आर्थिक सहायता देने के साथ कई प्रकार की छूट का प्रवाधान किया गया है। राज्य की महिला उद्यमी को विनिर्माण उद्यम परियोजना के लिए 10 से 50 लाख रूपए ऋण के साथ विद्युत शुल्क, अतिरिक्त स्टाम्प शुल्क से छूट, परिवहन अनुदान, मण्डी शुल्क से छूट, किराया अनुदान जैसे कई प्रावधान किये गए हैं। महिला स्व-सहायता समूहों और महिलाओं द्वारा स्थापित स्टार्ट-अप उद्यमों के लिए भी 5 प्रतिशत अतिरिक्त अनुदान एवं एक वर्ष अतिरिक्त छूट का प्रावधान किया गया है, इससे उद्योग एवं व्यापार में महिलाओं की भागीदारी और बढ़ेगी।

राशन कार्ड और मकान महिलाओं के नाम पर- छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए भूमि और संपत्ति पंजीयन पर एक प्रतिशत की छूट दी जा रही है। राशन कार्ड और आवास आबंटन महिलाओं के नाम पर किए जा रहे है। सरकारी सेवाओं में महिलाओं के अधिकार सुरक्षित रहें, इसके लिए भर्ती, पदोन्नति, दस्तावेजों की छानबीन के कार्यों के लिए बनाई गई समितियों में एक महिला प्रतिनिधि अनिवार्य रूप से रखने की व्यवस्था बनाई गई है। लैंगिक अपराध को रोकने के लिए प्रत्येक कार्यालय में एक समिति बनाई गई है, जो इस मामले की जांच पड़ताल कर आवश्यक कार्यवाही करने वरिष्ठ अधिकारियों को प्रतिवेदन प्रस्तुत करती हैं।

कामकाजी महिलाओं के लिए हॉस्टल- हर संभाग में कामकाजी हॉस्टल के साथ जिला मुख्यालयों में महिला हॉस्टल बनाए जाने की शुरूआत की गई है। थानों में महिलाओं के लिए हेल्प डेस्क संचालित हैं, जिससे महिलाएं मजबूती से अपने कदम आगे बढ़ा सकें। छत्तीसगढ़ पुलिस द्वारा सहायता के लिए अभिव्यक्ति एप बनाया गया है। महिला हेल्पलाईन नम्बर 181 और सखी सेंटर के माध्यम से पीड़ित महिलाओं को तुरंत सहायता और आश्रय भी प्रदान किया जा रहा है। अब तक 37 हजार 158 पीड़ित महिलाओं को सहायता और 13 हजार 750 महिलाओं को आश्रय दिया गया है। नवा बिहान योजना के माध्यम से घरेलू हिंसा के प्रकरणों में 4331 महिलाओं को सहायता प्रदान की गई है।

बढ़ा मान और बढ़ा मानदेय- राज्य सरकार ने बड़ी संख्या में महिलाओं और बच्चों की सेहत और स्वास्थ्य की देखभाल कर रहीं महिला कर्मियों के मानदेय में वृद्धि कर उनका सम्मान भी बढ़ाया है। इस साल बजट में प्रदेश के 46 हजार 660 आंगनवाड़ी केंद्रों में कार्यरत आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं के मासिक मानदेय में वृद्धि करते हुए अब इसे 06 हजार 500 रुपए से बढ़ाकर 10 हजार रुपए प्रति माह कर दिया गया है। आंगनवाड़ी साहियकाओं का मानदेय 03 हजार 250 रुपए से बढ़ाकर 05 हजार रुपए प्रति माह कर दिया गया है। मिनी आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं का मानदेय 04 हजार 500 रुपए से बढ़ाकर 07 हजार 500 रुपए प्रति माह कर दिया गया है। मितानिन बहनों को दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि के अतिरिक्त राज्य मद से 22 सौ रुपए प्रति माह की दर से मानदेय देने का प्रावधान भी बजट में किया गया है, इससे प्रदेश की 72 हजार मितानिनों की पुरानी मांग पूरी हुई है। इसके साथ ही मध्यान्ह भोजन बनाने वाले रसोईयों के मानदेय को भी बढ़ाया गया है, जिससे बहुत सी ग्रामीण महिलाएं लाभान्वित होंगी।

कन्या विवाह के लिए अब 50 हजार- मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सामाजिक पृष्टिभूमि में महिलाओं और उनके परिवारोें के मान-सम्मान का भी ध्यान रखते हुए कई निर्णय लिए हैं। मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के अंतर्गत दी जाने वाली सहायता राशि को भी अपने कार्यकाल में दो बार बढ़ाकर बेटियों के विवाह के लिए बड़ी राहत दी है। 2019 में यह राशि 15 हजार रूपए से बढ़ाकर 25 हजार रुपए की गई और अब बढ़ाकर 50 हजार रुपए कर दिया गया है। निराश्रितों, बुजुर्गों, दिव्यांगों, विधवा तथा परित्यक्ता महिलाओं को मिलने वाली सामाजिक सुरक्षा पेंशन की राशि में भी बढ़ोतरी की गई है।

9 नए महिला महाविद्यालय- महिलाओं को शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए उन तक उनके अधिकारों की जानकारी पहुंचाकर जागरूकता लाना भी आवश्यक है। इसे देखते हुए पिछले साल 2239 विधिक व महिला जागृति शिविरों का आयोजन किया गया। इस वर्ष महिला जागृति शिविर मद के बजट में दोगुनी वृद्धि कर 4.85 करोड़ से बढ़ाकर 9.33 करोड़ किया गया। इसके साथ ही राज्य महिला आयोग के द्वारा मुख्यमंत्री महतारी न्याय रथ के माध्यम से गांव-गांव पहुंचकर महिलाओं को उनके अधिकारियों और कानूनों की जानकारी भी दी जा रही हैं। राज्य की 9 जिला मुख्यालयों में नए महिला महाविद्यालय की शुरूआत के साथ महिलाओं के लिए उच्च शिक्षा के रास्ते खोले गए हैं।

 

 

ऑनलाईन आवेदन किये गये आवेदकों के लिए वृहद रोजगार मेला 22 दिसंबर को होगा

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रायपुर। जिला रोजगार एंव स्वरोजगार मार्गदर्शन केंद्र रायपुर के मार्गदर्शन में 46 हजार 616 पदों के विरूद्ध ऑनलाईन आवेदन किये गये आवेदकों के लिए 22 दिसंबर को सबेरे 10ः30 बजे से शाम 4 बजे तक रोजगार मेला आयोजित है। जिला रोजगार विभाग के उप संचालक ने बताया कि ऐसे आवेदक जिन्होंने ऑनलाईन गुगल फार्म के माध्यम से अपनी शैक्षणिक एवं तकनीकी योग्यता एवं व्यक्तिगत जानकारी की विवरणी भेजे है, वे आवेदक उक्त निर्धारित दिनांक को शासकीय आई.टी.आई. सड्डू, लाईवलीहूड कॉलेज-जोरा एवं गर्ल्स पॉलिटेक्निक कॉलेज रायपुर मे से किसी भी एक स्थल पर उपस्थित होकर साक्षात्कार की प्रक्रिया में सम्मिलित हो सकते है। लाईवलीहूड कॉलेज जोरा में 28 नियोजक, शासकीय आई.टी.आई. सड्डू में 25 नियोजक एवं शासकीय गर्ल्स पॉलिटेक्निक कॉलेज में 15 नियोजक उपस्थित रहेंगे।



उन्होंने बताया कि नियोजकों के नाम एवं उनके द्वारा अधिसूचित रिक्तियों की जानकारी तथा वृहद रोजगार मेला का आवेदन पत्र जिला प्रशासन रायपुर की वेबसाईट raipur.gov.in एवं रोजगार विभाग की वेबसाईट cgemployment.gov.in से डाउनलोड कर सकते है तथा उसे भरकर साक्षात्कार में शामिल हो सकते है। उन्होंने यह भी बताया कि दूरस्थ जिलों के आवेदकों के लिए भी समय समय पर अन्य जिलों में वृहद रोजगार मेला का आयोजन किया जावेगा। आवेदक जिला रोजगार कार्यालय रायपुर से भी जानकारी प्राप्त कर सकते है।

वन अधिकार के आवेदनों का पुनर्परीक्षण कर 17 तक प्रस्तुत करें : कलेक्टर

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धमतरी। वन अधिकार अधिनियम 2006 के तहत व्यक्तिगत वन अधिकार के आवेदनों पर पुनर्परीक्षण कर आगामी 17 अक्टूबर तक जिला स्तरीय समिति के समक्ष प्रस्तुत किए जाएंगे। उक्ताशय के निर्देश कलेक्टर पी.एस. एल्मा ने आज समिति की बैठक के दौरान दिए। उन्होंने इस संबंध में सर्वोच्च न्यायालय की याचिका के परिप्रेक्ष्य में मुख्य सचिव छत्तीसगढ़ शासन अमिताभ जैन के निर्देश का परिपालन करते हुए निरस्त किए गए वन अधिकार के व्यक्तिगत आवेदनों पर निर्णय लेते हुए कहा।



आज सुबह 11.30 बजे कलेक्टोरेट सभाकक्ष में आयोजित बैठक में उन्होंने बताया कि इस संबंध में बुधवार 12 अक्टूबर को आयोजित वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में मुख्य सचिव के द्वारा निरस्त किए गए व्यक्तिगत वन अधिकार प्रकरणों के पुनर्विलोकन एवं पुनर्परीक्षण करने के निर्देश दिए गए थे। कलेक्टर ने कहा कि इस परिप्रेक्ष्य में निरस्त किए गए आवेदनों का पुनः परीक्षण कर आगामी 17 अक्टूबर तक कारणों का उल्लेख करते हुए सभी अनुविभागीय अधिकारी प्रस्तुत करे। इस दौरान सहायक आयुक्त आदिवासी विकास डॉ. रेशमा खान ने बताया कि तीन पीढ़ी के साक्ष्य के अभाव में कुल 1439 आवेदन निरस्त हुए हैं,

जिनमें धमतरी विकासखण्ड के 694, मगरलोड के 607 और नगरी विकासखण्ड के 138 व्यक्तिगत दावे शामिल हैं। कलेक्टर ने वन अधिकार अधिनियम की विभिन्न धाराओं का गम्भीरता से अध्ययन करते हुए सभी निरस्त आवेदनों का पुनरावलोकन करते हुए निर्धारित तिथि तक प्रस्तुत करने के लिए अधिकारियों को निर्देशित किया। इस अवसर पर एसडीएम नगरी सुश्री गीता रायस्त सहित जनपद पंचायतों के सी.ई.ओ., तहसीलदार और आदिवासी विकास विभाग के अधिकारी-कर्मचारी उपस्थित थे।

प्रमुख सचिव एवं सचिव स्कूल शिक्षा ने परखी स्कूलों की जमीनी वस्तुस्थिति

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महासमुंद। राज्य में स्कूली शिक्षा में बच्चों के सीखने-सिखाने के स्तर एवं जमीनी वास्तविकताओं को परखने आज स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव डॉ. आलोक शुक्ल, स्कूल शिक्षा सचिव डॉ. एस. भारतीदासन, संचालक लोक शिक्षण सुनील जैन महासमुंद जिले के साराडीह गाँव के प्राथमिक स्कूल का अवलोकन करने पहुंचे।उन्होंने स्कूल की प्रधानाध्यापिका के साथ सभी कक्षाओं में बच्चों के साथ विस्तार से बातचीत कर उनके स्तर के आकलन करने का प्रयास किया। 145 की दर्ज संख्या वाले स्कूल में लगभग 120 विद्यार्थी ही उपस्थित पाए गए। 



डॉ. आलोक शुक्ला ने अनियमित उपस्थिति वाले बच्चों की सूची बनाकर उन्हें नियमित करने के लिए बच्चों के पालकों और समुदाय के साथ मिलकर काम करने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान कक्षा शिक्षण में कक्षा के एक बच्चे को बोर्ड या चार्ट पर लिखे शब्दों या वाक्यों को पढ़कर अन्य बच्चों को दोहराने की बरसों पुरानी परंपरा भी यहाँ दिखाई दी। प्रमुख सचिव ने शिक्षकों को बच्चों को पढ़ाने के कौशल और इसे रोचक बनाने पर अधिक जोर दिया। उन्होंने इसके लिए शिक्षक प्रशिक्षण की नियमित व्यवस्था करने की आवश्यकता बताई। 

स्कूल शिक्षा सचिव डॉ. भारतीदासन ने कक्षा में एक बच्चे के साथ कितने देर शिक्षक व्यक्तिगत ध्यान दे पाते हैं आदि की जानकारी ली। उन्होंने शिक्षकों से बच्चों को सिखाने में व्यक्तिगत रूचि लेने का आग्रह किया। संचालक, लोक शिक्षण सुनील जैन ने सभी संकुल समन्वयकों को शीघ्र प्रशिक्षित करते हुए उन्हें बच्चों में मूलभूत भाषाई एवं गणितीय कौशल विकास में फोकस होकर कार्य करने के निर्देश दिए। राष्ट्रीय सूचना विज्ञान केंद्र के सोमशेखर ने बच्चों को निक्लर एप्प के प्रदर्शन के माध्यम से शिक्षण कौशल की जानकारी दी।

वरिष्ठ अधिकारियों के इस निरीक्षण दल द्वारा परिसर में संचालित बालवाड़ी, शौचालय एवं किचन शेड आदि का निरीक्षण करते हुए आवश्यक सुधार के निर्देश भी दिए। उन्होंने मध्यान्ह भोजन को चखकर भी देखा। इस अवसर पर महासमुंद जिले के मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत, जिला शिक्षा अधिकारी, प्राचार्य जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थान, जिला मिशन समन्वयक समग्र शिक्षा एवं शिक्षा विभाग के अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

मुख्य सचिव की अध्यक्षता में वनाधिकार अधिनियम के तहत गठित राज्य स्तरीय निगरानी समिति की बैठक सम्पन्न

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रायपुर। मुख्य सचिव अमिताभ जैन की अध्यक्षता में आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में वन अधिकार अधिनियम 2006 के क्रियान्वयन हेतु गठित राज्य स्तरीय निगरानी समिति की बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में वन अधिकार पत्रों के वितरण, व्यक्तिगत वन अधिकार के तहत मान्य वन अधिकार पत्रधारकों में से शेष वन अधिकार पत्र धारकों की वन भूमि को चिन्हित कर राजस्व और वन अभिलेखों में दर्ज हुए वन अधिकार पुस्तिका प्रदान करने के संबंध में अधिकारियों से विस्तार से जानकारी ली गई। बैठक में बस्तर संभाग के बीजापुर, नारायणपुर, दंतेवाड़ा एवं सुकमा जिलें में व्यक्तिगत वनाधिकार के दावों को ग्राम स्तर पर फाईल करने के कार्य की समीक्षा की गई। 



बैठक में वन अधिकार पत्रों के डिजिटलाइजेशन की प्रगति और व्यक्तिगत वन अधिकार पत्र धारकों को दी जाने वाली सुविधाओं की भी समीक्षा की गई। सामुदायिक वन संसाधन अधिकार प्राप्त ग्रामों में ग्राम सभा स्तर पर सामुदायिक वन संसाधन प्रबंधन समितियों के गठन के संबंध में अधिकारियों को निर्देश दिए। वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए इस बैठक में कांकेर विधानसभा क्षेत्र के विधायक शिशुपाल सोरी, जशपुर के विधायक विनय भगत एवं पूर्व विधायक कटघोरा बोधराम कंवर एवं पीसीसीएफ राकेश चतुर्वेदी भी शामिल हुए। मुख्य सचिव ने वन अधिकार अधिनियम के तहत वितरित किए गए वन अधिकार पत्रों के हितग्राहियों को अधिक से अधिक लाभ पहुंचाने के लिए विशेष प्रयास करने के निर्देश अधिकारियों को दिए है।

बैठक में राजस्व विभाग के अधिकारियों ने बताया कि व्यक्तिगत वन अधिकार पत्रों के अभिलेखीकरण के तहत एक लाख 76 हजार से अधिक वन अधिकार पत्रों की जानकारी भूईया पोर्टल में अद्यतन की जा चुकी है। इसी तरह से वन विभाग के अंतर्गत वन भूमि पर वितरित वन अधिकार पत्रों के अभिलेखीकरण की कार्यवाही की जा रही है। मार्च 2022 की स्थिति में करीब चार लाख 45 हजार 986 वन अधिकार पत्र वितरित किए जा चुके है और तीन लाख 12 हजार 342 वन अधिकार पत्र ऋण पुस्तिकाओं का वितरण कर दिया गया है।

बैठक में जानकारी दी गई कि वन अधिकार अधिनियम के अंतर्गत अब तक वितरित भूमि में एक लाख 16 हजार 621 हितग्राहियों की भूमि को समतलीकरण एवं मेढ़ बंधान का कार्य किए गए है। इन कार्यों का क्षेत्रफल करीब 66 हजार 362 हेक्टेयर क्षेत्र है। इस कार्य के लिए 457 करोड़ रूपए की राशि स्वीकृत की गई है। इसी तरह से एक लाख 56 हजार 223 हितग्राहियों को खाद एवं बीज हेतु करीब 31 करोड़ की राशि स्वीकृत की गई है। कृषि उपकरण हेतु 12 हजार 854 हितग्राहियों को सात करोड़ की राशि स्वीकृत की जा चुकी है।

इसी तरह से वन अधिकार अधिनियम के अंतर्गत वितरित भूमि में सिंचाई हेतु नलकूप, कुंआ एवं स्टापडेम आदि के 32 हजार से अधिक कार्य स्वीकृत किए गए है। इसके लिए 265 करोड़ से अधिक की राशि स्वीकृत की जा चुकी है। प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के तहत 63 हजार 644 हितग्राहियों को लाभान्वित किया जा चुका है। व्यक्तिगत वन अधिकार पत्र धारकों को लाभान्वित करने के लिए अभिसरण के माध्यम से कार्ययोजना तैयार की गई है। इसमें करीब 56 हजार 561 कार्य प्रस्तावित किए गए है। जिसके लिए 415 करोड़ से अधिक की राशि स्वीकृत की गई है।

इसमें 43 हजार 235 के कार्य मनरेगा के अंतर्गत प्रस्तावित किए गए है। इनमें 4364 कार्य महिला हितग्राहियों और 5504 कार्य पीवीटीजी हितग्राहियों की भूमि पर किया जाना प्रस्तावित किया गया है। बैठक में प्रमुख सचिव वन मनोज पिंगुवा, आदिम जाति एवं अनुसूचित जनजाति विभाग के सचिव डी.डी.सिंह, राजस्व विभाग के सचिव एन.एन.एक्का, आयुक्त आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विभाग सुश्री शम्मी आबिदी सहित पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग एवं अन्य विभागों के अधिकारी शामिल हुए।

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