Media24Media.com: वृक्षारोपण

Responsive Ad Slot


 

Showing posts with label वृक्षारोपण. Show all posts
Showing posts with label वृक्षारोपण. Show all posts

प्रकृति को मां जैसा सम्मान दें : अरूण साव

No comments Document Thumbnail

रायपुर। उप मुख्यमंत्री अरुण साव आज बिलासपुर के वन चेतना केन्द्र सकरी में वन महोत्सव में शामिल हुए। उन्होंने इस अवसर पर ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत पौधा लगाया और लोगों से अधिक से अधिक संख्या में पौधरोपण करने की अपील की। विधायक सर्वश्री धरमलाल कौशिक, धर्मजीत सिंह और सुशांत शुक्ला, महापौर श्रीमती पूजा विधानी तथा जिला पंचायत के अध्यक्ष राजेश सूर्यवंशी भी वन महोत्सव में शामिल हुए,

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि 1950 से अनवरत वन महोत्सव मनाया जा रहा है। हमारे राज्य का 44 प्रतिशत क्षे़त्र वनों से आच्छादित है। 55,812 वर्ग किमी भूभाग वनों से आच्छादित है। वनों की वजह से ही हम कोरोना जैसी महामारी पर विजय पाने में सफल हुए। लगातार हो रहे वृक्षारोपण कार्यक्रम के चलते वनों का क्षेत्रफल लगातार बढ़ रहा है। यह हमारे लिए गर्व का विषय है कि वन क्षेत्रों में सर्वाधिक वृद्धि छत्तीसगढ़ में हुई है।

साव ने कहा कि हमपनी आने वाली पीढ़ी को अच्छे पर्यावरण की सौगात दें, यह हमारी जिम्मेदारी है। हमें पर्यावरण को संरक्षित, पल्लवित और पुष्पितp करना होगा। मां का हमारे जीवन में बहुत महत्व है। जिस प्रoo9कार मां हमारा जीवन भर पालन-पोषण करती है, उसी प्रकार एक वृक्ष भी जीवनभर हमारे लिए करते हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इसलिए मां से पेड़ को जोड़कर ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान की शुरूआत की। अपनी मां की तरह ही हमें पेड़ को सम्मान देना होगा। हमें पर्यावरण और जल संरक्षण के महत्व को समझना होगा। बारिश की एक-एक बूंद को संरक्षित करना होगा।

विधायक धरमलाल कौशिक ने अपने संबोधन में कहा कि प्रकृति का संतुलन बनाए रखने के लिए हमें अधिक से अधिक पौधे लगाने होंगे। बिल्हा ब्लॉक में इस दिशा में अच्छा प्रयास कियाíc है। यहां एक ही दिन में 60 हजार से ज्यादा पौधे लगाये गये। विधायक धरमजीत सिंह ने कहा कि पर्यावरण संरक्षण के लिए हमें लगातार प्रयास करना चाहिए। हमें वृक्षों का महत्व समझना होगा। अपने प्रदेश को हरा-भरा बनाने के लिए हरसंभव प्रयास किया जाना चाहिए। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत वृक्षारोपण के लिए सराहनीय पहल की गई है।

विधायक सुशांत शुक्ला ने कार्यक्रम में कहा कि प्रकृति हमारी मां जैसी है। प्रकृति हमें सब देती है। हमने पर्यावरण का संतुलन बिगाड़कर बड़ा कुठाराघात किया है। हमें अपने जीवन के विशेष अवसरों जैसे जन्मदिन, शादी की वर्षगांठ इत्यादि पर पौधे लगाकर उन्हें अविस्मरणीय बनाना चाहिए। तखतपुर जनपद पंचायत की अध्यक्ष डॉ. माधवी संतोष वस्त्रकार, कलेक्टर संजय अग्रवाल, एसपी रजनेश सिंह, सीसीएफ प्रभात मिश्रा, डीएफओ विपुल अग्रवाल और जिला पंचायत के सीईओ संदीप अग्रवाल सहित बड़ी संख्या में नागरिक एवं स्कूली बच्चे भी वन महोत्सव में मौजूद थे।



‘एक पेड़ मां के नाम 2.0’ में लगाए जाएंगे 2.75 करोड़ पौधे

No comments Document Thumbnail

रायपुर। एक पेड़ मां के नाम 2.0’ अभियान के तहत प्रदेश में करीब दो करोड़ 75 लाख से अधिक पौधों का रोपण किया जाएगा। पौधों की उपलब्धता वन विभाग के नर्सरियों और विभागीय स्त्रोतों से सुनिश्चित की जाएगी। उप मुख्यमंत्री अरुण साव और वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने आज मंत्रालय में आयोजित बैठक में एक पेड़ मां के नामअभियान की गहन समीक्षा की। बैठक में अभियान के तहत शासकीय विभागों द्वारा निर्धारित लक्ष्य के अनुरूप वृक्षारोपण के निर्देश दिए गए।

उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने बैठक में अधिकारियों से एक पेड़ मां के नाम 2.0’ अभियान के तहत जनभागीदारी सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पौधरोपण करने वालों को उस पौधे के ग्रोथ की निगरानी से जोड़ें, जिससे वृक्षारोपण के वास्तविक लक्ष्य को प्राप्त किया जा सके। उन्होंने कहा कि हमारे प्रदेश के विभिन्न इंजीनियरिंग महाविद्यालयों, विश्वविद्यालयों और अन्य महाविद्यालयों से अनेक लोग निकलकर आज कामयाबी के शिखर पर हैं। इन सभी संस्थाओं को ऐसे लोगों को संस्था में वृक्षारोपण कार्यक्रम के दौरान अवश्य आमंत्रित करना चाहिए। नगरीय निकायों में शहरों के बड़े व्यवसाईयों, उद्योगपतियों और अन्य गणमान्य नागरिकों की उपस्थिति में वृक्षारोपण कराया जाना चाहिए। उप मुख्यमंत्री साव ने स्कूलों में वृक्षारोपण कार्यक्रम में सहयोग प्रदान करने वालों की भागीदारी सुनिश्चित करने और सभी को वृक्षारोपण के दौरान रोपे गए पौधों के ग्रोथ की भी जानकारी देना सुनिश्चित करने को कहा।

वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री केदार कश्यप ने वृक्षारोपण में महत्वपूर्ण सहयोग देने वाले लोगों को 15 अगस्त और वानिकी दिवस पर सम्मानित किए जाने की बात कही। उन्होंने आगामी पर्यावरण दिवस 5 जून को होने वाले वृक्षारोपण कार्यक्रमों में व्यापक जनसहभागिता सुनिश्चित करने के निर्देश अधिकारियों को दिए। उन्होंने वृक्षारोपण अभियान के दौरान कलेक्ट्रेट परिसरों, राष्ट्रीय राजमार्गों, पर्यटन स्थलों, धार्मिक स्थलों, औद्योगिक क्षेत्रों, माइनिंग परिसरों, जल स्त्रोतों के आसपास, स्कूल परिसरों तथा अन्य संस्थाओं एवं स्थानों को चिन्हित कर व्यापक कार्ययोजना के तहत कार्य करने को कहा।

वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग की अपर मुख्य सचिव श्रीमती ऋचा शर्मा ने वृक्षारोपण कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी देते हुए सभी विभागों के अधिकारियों को समन्वय एवं सहयोग से कार्य करने को कहा। उन्होंने  अधिकारियों को एक पेड़ मां के नाम 2.0’ अभियान के क्रियान्वयन के संबंध में आवश्यक निर्देश दिए। बैठक में स्कूल शिक्षा, तकनीकी शिक्षा, लोक निर्माण, आवास एवं पर्यावरण, नगरीय प्रशासन एवं विकास, खनिज, पर्यटन, पंचायत एवं ग्रामीण विकास, वन एवं जलवायु परिवर्तन और जल संसाधन विभाग द्वारा एक पेड़ मां के नाम 2.0’ अभियान के क्रियान्वयन के संबंध में प्रस्तुतिकरण दिया गया। पीसीसीएफ अरूण पाण्डेय ने वृक्षारोपण अभियान में किए जाने वाले कार्यों की विस्तार से जानकारी दी।

लोक निर्माण विभाग के सचिव डॉ. कमलप्रीत सिंह, मुख्यमंत्री के सचिव पी.दयानंद और उच्च शिक्षा विभाग के सचिव एस. भारतीदासन सहित वन विभाग, वन विकास निगम, आवास एवं पर्यावरण, पर्यटन, वाणिज्य एवं उद्योग, संस्कृति, स्कूल शिक्षा, कृषि, पंचायत एवं ग्रामीण विकास तथा नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के वरिष्ठ अधिकारी भी समीक्षा बैठक में मौजूद थे।

मेरी माटी मेरा देश अभियान में किया जाएगा पौधरोपण

No comments Document Thumbnail

जांजगीर-चांपा। कलेक्टर सुश्री ऋचा प्रकाश चौधरी के निर्देशन में जिले में आजादी का अमृत महोत्सव अंतर्गत ‘‘मेरी माटी, मेरा देश’’ वसुधा वंदन कार्यक्रम तहत वृक्षारोपण किया जाएगा। जिसके तहत प्रत्येक ग्राम पंचायत में कम से कम 75 स्वदेशी पौधे लगाए जाएंगे। इस गतिविधि का आयोजन 9 अगस्त से 15 अगस्त तक संचालित होगा। अभियान के तहत ग्राम पंचायतों में वीरों को याद करते हुए शिला फलकम लगाया जाएगा और पंचप्रण शपथ ली जाएगी। आयोजित कार्यक्रम के साथ सेल्फी अपलोड की जाएगी। कार्यक्रम में राष्ट्रीय ध्वज के बाद राष्ट्रगान का भी आयोजन किया जाएगा। अभियान को लेकर जिला पंचायत मुख्य कार्यपालन अधिकारी डॉ. ज्योति पटेल ने सभी जनपद पंचायत को पत्र जारी कर आवश्यक तैयारियां करने को लेकर निर्देश दिए हैं।

जिला पंचातय सीईओ ने बताया कि आजादी का अमृत महोत्सव के दौरान ‘‘मेरी माटी, मेरा देश’’ अभियान चलाने के निर्देश प्राप्त हुए हैं। इस अभियान के तहत मिट्टी को नमन, वीरों का वंदन इसकी टैगलाइन है। वसुधा वंदन कार्यक्रम के तहत जनभागीदारी से प्रत्येक गांव में कम से कम 75 पौधारोपण किया जाना है। अमृत सरोवर के बंड पर जिस प्रकार पौधरोपण किया जा रहा है और इनकी देखरेख एवं रखरखाव संबंधित ग्राम एवं ग्राम पंचायत के ग्रामीणों द्वारा ही की जा रही है। इसी तरह इस अभियान के तहत स्वदेशी पौधे वन विभाग एवं उद्यानिकी विभाग के महात्मा गांधी नरेगा द्वारा तैयार नर्सरी के द्वारा उपलब्ध कराए जाएंगे। अमृत सरोवर तालाब के आसपास कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा, जिस ग्राम पंचायत में अमृत सरोवर नहीं है ऐसी स्थिति में किसी भी जलाशय के आसापास, पंचायत भवन, स्कूल, ऐसी भूमि जहां पर वृक्षारोपण के लिए पर्याप्त स्थल उपलब्ध हो तथा चारों ओर से बाउण्ड्री बनी हो वहां पर पौधे लगाए जाएंगे। 

देश के मुख्य कार्यक्रम में भेजेंगे गांव की मिट्टी-

जिला पंचातय सीईओ ने बताया कि मेरी मिट्टी मेरा देश अभियान के तहत गांव की मिट्टी को एकत्रित करते हुए दिल्ली में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में भेजा जाएगा। इस दौरान पवित्र मिट्टी को हाथ में लेकर शपथ लेते हुए अपनी सेल्फी को वेबसाइट पर अपलोड भी किया जाएगा। अभियान के दौरान विभिन्न गतिविधियों का आयोजन भी होगा। जिसमें पंच-प्रण प्रतिज्ञा ली जाएगी, वसुदावंदन के तहत पौधें रोपे जाएंगे साथ ही वीरों के नामपट्टी शिलाफलकम लगाया जाएगा। वीरों, स्वतंत्रता संग्राम सैनिकों का वंदन किया जाएगा और परिवारों का सम्मान करते हुए राष्ट्रीय ध्वज फहराते हुए राष्ट्रगान का गायन किया जाएगा।

मनरेगा में राम-वन-गमन-पथ के दोनों किनारों पर वृक्षारोपण के कार्य लिए जाए : मुख्य सचिव जैन

No comments Document Thumbnail

रायपुर। मुख्य सचिव अमिताभ जैन ने कहा है कि ग्रामीण क्षेत्रों में जरूरतमंद लोगों को महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना में रोजगार उपलब्ध कराया जाए। इस योजना के अंतर्गत राम-वन-गमन-पथ के दोनों किनारों पर वृक्षारोपण के कार्य लिए जाए। उन्होंने कहा कि जरूरतमंद परिवारों को नियमित रूप से रोजगार उपलब्ध कराने पर विशेष ध्यान दिया जाए।

मुख्य सचिव आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, इलेक्ट्रॉनिक एवं सूचना प्रौद्योगिकी विभाग की समीक्षा कर रहे थे। बैठक में मुख्यमंत्री के अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू, पंचायत विभाग के संचालक कार्तिकेय गोयल के साथ ही सूचना प्रौद्योगिकी, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। बैठक में इलेक्ट्रॉनिक एवं सूचना प्रौद्योगिकी प्रगति के दौरान सीजी कैम्प क्रियाशीलता के तहत समस्त विभागों को जोड़ने, डाटा सेंटर और पीएम गतिशक्ति के अंतर्गत केडेस्टल मैप जियो-रिफ्रेसिंग के कार्यों की समीक्षा की गई।

मुख्य सचिव ने कहा है कि प्रत्येक विकासखण्ड में कम से कम एक गोबर वेस्ट पेंट की इकाई स्थापित किए जाए, जिससे वहां के शासकीय कार्यालय, स्कूल, छात्रावास, आश्रम एवं आंगनबाड़ी केन्द्र के भवन के रंग-रोगन के लिए गोबर वेस्ट पेंट आसानी से उपलब्ध हो सके। नरवा विकास की समीक्षा में अधिकारियों ने बताया कि दो लाख 36 हजार 387 कार्य स्वीकृत किए गए हैं। जिसमें से एक लाख 85 हजार 628 कार्य पूर्ण किए गए तथा शेष 25 हजार 820 कार्य प्रगतिरत हैं। छत्तीसगढ़ को प्रधानमंत्री सड़क योजना अच्छे प्रदर्शन के लिए केन्द्र सरकार द्वारा वर्ष 2022-23 में 107 करोड़ रूपए की प्रोत्साहन राशि प्रदान की गई है।

प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत वर्ष 2022-23 में नवीनीकरण के अंतर्गत 1808 सड़कें जिनकी लम्बाई 5763 किलोमीटर है तथा पांच वर्ष नियमित संधारण के अंतर्गत 3664 सड़कें जिनकी लम्बाई 17577 किलोमीटर है, जिसका कार्य पूर्ण कर लिया गया है। इन कार्यों में 765 करोड़ रूपए की राशि व्यय की गई है, इसके लिए राज्य शासन द्वारा 700 करोड़ रूपए का बजट का प्रावधान किया गया था। वर्ष 2023-24 में नवीनीकरण कार्य के अंतर्गत 782 सड़कें लम्बाई 2915 किलोमीटर तथा पांच वर्ष नियमित संधारण अंतर्गत लम्बाई 23225 किलोमीटर की कुल अनुमानित लागत 916 करोड़ रूपए बजट प्रस्ताव के विरूद्ध राज्य शासन द्वारा 300 करोड़ का बजट का प्रावधान किया गया है।

अधिकारियों ने बताया कि राज्य के पंचायतों के प्रतिनधियों में पंच, सरपंच, जनपद सदस्य एवं जिला पंचायत सदस्यों के प्रतिनिधियों को पेसा संबंधी टेªनिंग दी गई है। मुख्यमंत्री ग्राम सड़क विकास योजना के अंतर्गत अब तक 1783 सड़कें जिनकी लम्बाई 5429 किलोमीटर है, स्वीकृत की गई इनमें से 1718 सड़कों का कार्य पूर्ण कर लिया गया है। इसी तरह से मुख्यमंत्री ग्राम गौरवपथ योजना के अंतर्गत अब तक 7178 गौरवपथ स्वीकृत किए गए है और 7126 गौरवपथ का कार्य पूर्ण किया जा चुका है।

 बैठक में महात्मा गांधी रूरल इंडस्ट्रियल पार्क (रीपा) के संचालन की स्थिति की समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि 300 महात्मा गांधी रूरल इंडस्ट्रियल पार्क (रीपा) स्वीकृत किए गए है। जिसमें से 263 रीपा के कार्य प्रारंभ किए गए हैं। इनमें 2267 महिलाएं एवं 867 पुरूष हितग्राहियों को रीपा गतिविधियों से जोड़कर रोजगार प्रदान किया जा चुका है। प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के अंतर्गत वर्ष 2016-17 से वर्ष 2022-23 तक 11 लाख 76 हजार 150 प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत किए गए। इनमें 8 लाख 52 हजार 838 कार्य पूर्ण कर लिए गए है।

सीएम भूपेश बघेल ने राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना मुख्यमंत्री वृक्ष संपदा योजना का किया शुभारंभ

No comments Document Thumbnail

रायपुर। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री वृक्ष सम्पदा योजनावाणिज्यिक वृक्षारोपण करने वाले हितग्राहियों के लिए आर्थिक दृष्टि से, पर्यावरण, सॉइल हेल्थ की दृष्टि से महत्वपूर्ण योजना साबित होगी। उन्होंने कहा कि यह प्रसन्नता का विषय है कि बस्तर और सरगुजा के लोगों ने जहां प्रदेश में सर्वाधिक वन हैं, वृक्षारोपण की इस योजना में गहरी रूचि दिखाई है। मैदानी इलाके के दुर्ग और रायपुर संभाग में हितग्राहियों ने कम रूचि दिखाई है। जबकि यहां वृक्षों की ज्यादा जरूरत है।

मुख्यमंत्री ने वन विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि दुर्ग और रायपुर संभाग में इस योजना को व्यापक प्रचार-प्रसार कर योजना से होने वाले लाभों की जानकारी लोगों को दी जाए, ताकि इस क्षेत्र में भी वृक्षारोपण को बढ़ावा मिले। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के जंगल और यहां की जैव विविधता छत्तीसगढ़ की पहचान है। हमारी कला, संस्कृति, परम्पराएं, दर्शन, चिंतन, आध्यात्म, इतिहास सब कुछ हमारे जंगलों से जुड़ा है। छत्तीसगढ़ के वन पूरे देश की धरोहर है। इन वनों से पूरे देश का पर्यावरण जुड़ा हुआ है।

उन्होंने कहा कि हमारे जंगल बचे रहे, हमारा पर्यावरण बचा रहे, जंगल से जुड़ी हमारी गौरवशाली संस्कृति बची रहे और खूब फले-फूले इस दिशा में बीते चार वर्षों के दौरान हमारी सरकार ने लगातार काम किया है। मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि यह योजना देश में एक अनूठी योजना है, जिसमें वाणिज्यिक प्रजातियों का वृक्षारोपण कर निजी व्यक्ति, संस्था अथवा कम्पनियों के माध्यम से अधिकाधिक लाभ कमा सकते हैं। यह केवल वृक्षारोपण की योजना न होकर देश के जलवायु परिवर्तन की दिशा में भी हमारी सहभागिता और प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

मुख्यमंत्री वृक्ष संपदा योजना में सभी वर्ग के इच्छुक किसानों की पड़त भूमि में वाणिज्यिक वृक्षारोपण होगा। योजना के तहत 33 जिलों के 23 हजार 600 किसानों द्वारा 36 हजार 230 एकड़ में वृक्षारोपण किया जाएगा। योजना से किसानों को सालाना प्रति एकड़ 15 से 50 हजार रूपए तक की आय होगी। इसके अलावा कार्बन क्रेडिट के माध्यम से भी किसानों को अतिरिक्त आय होगी।

वन एवं पर्यावरण मंत्री मोहम्मद अकबर ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ वन संपदा की दृष्टि से बहुत समृद्ध राज्य है। मुख्यमंत्री वृक्ष संपदा योजना के माध्यम से अगले 5 वर्षों में 1 लाख 80 हजार एकड़ में वृक्षारोपण किया जाएगा। यह योजना हितग्राहियों की आय में वृद्धि के साथ-साथ पर्यावरण संतुलन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण योजना है। योजना में 5 एकड़ में वाणिज्यिक वृक्षारोपण करने वाले हितग्राहियों को शतप्रतिशत अनुदान तथा 5 एकड़ से अधिक भूमि पर वृक्षारोपण करने वाले हितग्राहियों को 50 प्रतिशत अनुदान देने का प्रावधान किया गया है।

मुख्यमंत्री वृक्ष संपदा योजना का लाभ किसान, इच्छुक भूमि स्वामी, शासकीय, अर्ध शासकीय एवं शासन के स्वायत्त संस्थाएं, निजी शिक्षण संस्थाएं, निजी ट्रस्ट, पंचायत तथा भूमि अनुबंध धारक उठा सकते हैं। छत्तीसगढ़ में योजना के तहत इस वर्ष 12 प्रकार की प्रजाति के वृक्ष का रोपण किया जाएगा। इनमें क्लोनल यूकलिप्टस, रूटशूट टीक, टिश्यू कल्चर, चंदन, मेलिया दुबिया, सामान्य बांस, टिश्यू कल्चर बम्बू, रक्त चंदन, आंवला, खमार, शीशम तथा महानीम आदि के पौधे रोपे जाएंगे।

मोबाईल एप का लोकार्पण

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कार्यक्रम के दौरान सामुदायिक वन संसाधन अधिकार जारी करने की प्रक्रिया को ट्रेक करने हेतु मोबाइल एप का लोकार्पण भी किया। इस मोबाइल एप के उपयोग से सामुदायिक वन संसाधन अधिकार प्राप्त करने की पूरी प्रक्रिया सरलीकृत होगी। सामुदायिक वन संसाधन अधिकार के आवेदन से लेकर अधिकार प्राप्ति तक 12 स्तर की प्रक्रिया है तथा 18 प्रपत्रों में जानकारी भरी जाती है। मोबाइल एप के माध्यम से अधिकार प्राप्त करने की प्रक्रिया का मॉनिटरिंग भी की जा सकती है।

नेशनल टांजिट परमिट सिस्टम लॉन्च

मुख्यमंत्री बघेल ने वन विभाग द्वारा वनोपज के परिवहन हेतु तैयार कराए गए नेशनल ट्रांजिट परिमिट सिस्टम को लॉन्च किया। इस सुविधा के अंतर्गत आवेदक ट्रांजिट परमिट के लिए ऑनलाईन आवेदन कर सकते हैं तथा वन विभाग ऑनलाईन ट्रांजिट परमिट जारी करेगा। अंतरराज्यीय सीमा में नये टी.पी. की आवश्यकता नहीं होगी। मध्यप्रदेश, पश्चिम बंगाल एवं जम्मू कश्मीर के बाद छत्तीसगढ़ एनटीपीएस योजना को लागू करने वाला चौथा राज्य बन गया है।

सकरी नदी पुनर्जीवन कार्यक्रम का शुभारंभ

मुख्यमंत्री कार्यक्रम में कवर्धा जिले के सकरी नदी को संरक्षित करने तथा नदी का बहाव अपने पूर्ण क्षमता पर लाने के उद्देश्य से वृक्षारोपण के माध्यम से सकरी नदी पुनर्जीवन कार्यक्रम की शुरूआत की। जिसके तहत वन एवं राजस्व भूमि में नदी तट वृक्षारोपण कार्य, निजी भूमि में मुख्यमंत्री वृक्ष सम्पदा योजना के अंतर्गत वृक्षारोपण, वन क्षेत्रों में नरवा योजना के अंतर्गत कैम्पा मद से जल एवं मृदा संरक्षण कार्य तथा राजस्व क्षेत्र में मनरेगा अंतर्गत रोपण एवं संरचानाओं का निर्माण किया जाएगा।

इस एकीकृत परियोजना से कर्वधा जिले में किसानों को घरेलू उपयोग तथा कृषि के लिए सिंचाई हेतु पर्याप्त पानी उपलब्ध होगी। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ के अपर प्रबंध संचालक अनिल राय सहित वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, फाउंडेशन फार इकोलॉजिक सिक्यूरटी स्टेट लीडर सुश्री नमिता मिश्रा और सीनियर प्रोग्राम मैनेजर डॉ. मंजीत बल भी उपस्थित थीं।

‘मुख्यमंत्री वृक्ष संपदा योजना’ का शुभारंभ 21 मार्च को विश्व वानिकी दिवस के अवसर पर

No comments Document Thumbnail

गरियाबंद। मुख्यमंत्री वृक्ष संपदा योजना किसानों की निजी भूमि पर वृक्षारोपण कर ग्रामीणों की आय बढ़ाने के साथ-साथ छत्तीसगढ़ में ग्रीन कवर बढ़ाने की एक महत्वकांक्षी योजना है। इस योजना अंतर्गत समस्त वर्ग के सभी इच्छुक भूमि स्वामी, शासकीय, अर्द्ध शासकीय एवं शासन की स्वायत्त संस्थाऐं, निजी शिक्षण संस्थाऐं, निजी ट्रस्ट, गैर शासकीय संस्थाऐ, पंचायते तथा भूमि अनुबंध धारक इंस योजना का लाभ ले सकते है।

हितग्राही की निजी भूमि में 05 एकड़ तक रोपण हेतु 100 प्रतिशत तथा 05 एकड़ से अधिक क्षेत्र में रोपण हेतु 50 प्रतिशत वित्तीय अनुदान शासन द्वारा हितग्राहियों को प्रदाय किया जावेगा। राज्य में इस योजना के माध्यम से प्रति वर्ष 36000 एकड़ के मान से कुल 05 वर्षों में 180000 एकड़ में 15 करोड़ पौधों के रोपण का लक्ष्य रखा गया है। शासन द्वारा चयनित वृक्ष प्रजातियों की खरीदी के लिए प्रतिवर्ष न्यूनतम क्रय मूल्य निर्धारित किया जावेगा, जिससे कृषकों को निश्चित आय प्राप्त हो सकें। वनक्षेत्र से बाहर लकड़ी के उत्पादन बढ़ने से काष्ठ आधारित उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा। इसके साथ ही कार्बन क्रेडिट के माध्यम से भी कृषकों को अतिरिक्त आय प्राप्त होने का संभावना है।

वन संरक्षक, सह प्रभारी वनमण्डलाधिकारी श्री मणिवासगन एस ने बताया कि मुख्यमंत्री द्वारा 21 मार्च 2023 को विश्व वानिकी दिवस के अवसर पर जिले में मुख्यमंत्री वृक्ष संपदा योजना का शुभांरभ वन परिक्षेत्र, गरियाबंद के ग्राम दशपुर में किया जावेगा। उक्त कार्यक्रम का आयोजन स्थानीय जनप्रतिनिधि एवं अन्य विभागों के अधिकारी/कर्मचारियों की सहभागिता से किया जावेगा। गरियाबंद वनमण्डल अंतर्गत उक्त योजना के तहत कुल 303 हितग्राहियों के 454.57 एकड़ भूमि में विभिन्न प्रजातियों के कुल 3 लाख 20 हजार 183 पौधों का रोपण किया जायेगा। जिसमें माह मार्च में सिंचित क्षेत्र में 47 एकड़ भूमि पर कुल 14 हजार 276 वाणिज्यिक प्रजाति के पौधा रोपण किया जायेगा।

मुख्यमंत्री वृक्ष संपदा योजना : योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए बजट में 100 करोड़ रूपए का प्रावधान

No comments Document Thumbnail

रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा राज्य में वृक्षों के व्यवसायिक उपयोग को बढ़ावा देने की अपार संभानाओं को देखते हुए ‘‘मुख्यमंत्री वृक्ष संपदा योजना’’ को लागू किए जाने की घोषणा की गई है। योजनांतर्गत कृषकों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से कृषकों की सहमति पर उनके भूमि पर वाणिज्यिक वृक्षारोपण किया जाना है। राज्य में इसके सफल क्रियान्वयन के लिए मुख्यमंत्री बघेल द्वारा वर्ष 2023-24 के प्रस्तुत बजट में 100 करोड़ रूपए की राशि का प्रावधान किया गया है।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा वाणिज्यिक वृक्षारोपण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ में ‘‘मुख्यमंत्री वृक्ष सम्पदा योजना’’ लागू किये जाने की घोषणा उपरान्त छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री वृक्ष सम्पदा योजना की क्रियान्वयन की तैयारी में वन विभाग जुट गया है और तैयारियां जोरो पर है। वन विभाग द्वारा वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री मोहम्मद अकबर के कुशल मार्गदर्शन और वन विभाग के प्रमुख सचिव मनोज पिंगुआ के निर्देशन में अब तक 19 हजार से अधिक हितग्राहियों के लगभग 30 हजार एकड़ निजी भूमि में वृक्षारोपण हेतु पंजीयन किया जा चुका है।

इस वर्ष 12 प्रजाति के वृक्षों का 30 हजार एकड़ रकबे में होगा रोपण

इस संबंध में प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख संजय शुक्ला ने बताया कि मुख्यमंत्री वृक्ष सम्पदा योजनांतर्गत राज्य में इस वर्ष 12 प्रकार के प्रजाति के वृक्ष का 30 हजार एकड़ रकबे में रोपण किया जाएगा। इनमें से क्लोनल यूकलिप्टस का 17 हजार 182 एकड़ में, रूटशूट टीक का 6 हजार 456 एकड़ में, टिश्यू कल्चर का 2 हजार 617 एकड़ में, चंदन का 1 हजार 462 एकड़ में, मेलिया दुबिया का 8 सौ 34 एकड़ में, सामान्य बांस का 7 सौ 37 एकड़ में, टिश्यू कल्चर बम्बू का 6 सौ 7 एकड़ में, रक्त चंदन का 1 सौ 26 एकड़ में, आमला का 43 एकड़ में, खमार का 40 एकड़ में, शीशम का 20 एकड़ में तथा महानीम का 20 एकड़ रकबे में लगाने का लक्ष्य रखा गया है।

मुख्यमंत्री वृक्ष सम्पदा योजनांतर्गत 5 वर्षाे में 1 लाख 80 हजार एकड़ में 15 करोड़ वृक्षारोपण का लक्ष्य

 मुख्यमंत्री वृक्ष सम्पदा योजना अंतर्गत किसान, इच्छुक भूमि स्वामी, शासकीय, अर्ध शासकीय एवं शासन के स्वायत्त संस्थाएं, निजी शिक्षण संस्थाएं, निजी ट्रस्ट, पंचायत तथा भूमि अनुबंध धारक इस योजना का लाभ उठा सकते हैं। राज्य शासन द्वारा 1 वर्ष में 36 हजार एकड़ तथा 5 वर्षाे में 1 लाख 80 हजार एकड़ क्षेत्रफल में कुल 15 करोड़ वृक्षारोपण करने का लक्ष्य रखा गया है।इस योजनांतर्गत राज्य शासन द्वारा 5 एकड़ तक वृक्षारोपण हेतु 100 प्रतिशत अनुदान तथा 5 एकड़ से अधिक क्षेत्र में वृक्षारोपण हेतु 50 प्रतिशत वित्तीय अनुदान देगी। चिन्हित वृक्ष प्रजातियों की खरीदी हेतु न्यूनतम क्रय मूल्य का निर्धारण भी शासन द्वारा किया जाएगा। 5 वर्षाे में रोपित सभी प्रजातियो के वृक्ष परिपक्व होने पर उनका मूल्य 10 हजार करोड़ रुपये होने की सम्भावना है। इस योजना से किसानों को प्रति एकड़ प्रतिवर्ष 15 हजार से 50 हजार रूपए तक की आय सम्भावित है। इसके अतिरिक्त कार्बन क्रेडिट के माध्यम से भी किसानों को अतिरिक्त आय होगी।

मुख्यमंत्री वृक्ष संपदा योजना अंतर्गत समस्त वर्ग के सभी इच्छुक भूमि स्वामी पात्र होंगे। इसके अलावा शासकीय, अर्धशासकीय तथा शासन के स्वायत्व संस्थान जो अपने स्वयं के भूमि पर रोपण करना चाहते हैं, पात्र होंगे। इसी तरह निजी शिक्षण संस्थाएं, निजी ट्रस्ट, गैर शासकीय संस्थाएं, पंचायतें, भूमि अनुबंध धारक, जो अपने भूमि में रोपण करना चाहते हैं, वे पात्र होंगे। मुख्यमंत्री वृक्ष संपदा योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य में वाणिज्यिक वृक्षारोपण को बढ़ावा देना है। इसके तहत राज्य के सभी कृषकों, शासकीय, गैर शासकीय, अर्धशासकीय, पंचायतें, अथवा स्वायत्व संस्थानों की भूमि पर वाणिज्यिक प्रजातियों के वृक्षारोपण उपरांत सहयोगी संस्था, निजी कंपनियों के माध्यम से निर्धारित समर्थन मूल्य पर वनोपज के क्रय की व्यवस्था करते हुए एक सुदृढ़ बाजार व्यवस्था आदि सुनिश्चित करना है।

मुख्यमंत्री वृक्ष संपदा योजना: 5 एकड़ में वृक्षारोपण करने पर मिलेगा शत् प्रतिशत अनुदान

No comments Document Thumbnail

रायपुर। छत्तीसगढ़ राज्य में निजी भूमि पर व्यावसायिक उद्देश्य से वृक्षारोपण को प्रोत्साहित करने के लिए मुख्यमंत्री वृक्ष संपदा योजना लागू की गई है। इससे राज्य में काष्ठ आधारित उद्योग लगेंगे। वहीं आय के साथ-साथ ग्रामीणों को रोजगार और आजीविका के साधन भी मिलेंगे। इस योजना के बेहतर क्रियान्वयन के लिए वन विभाग से जुड़े अधिकारियों के लिए राज्य स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया।

कार्यशाला में जानकारी दी गई कि मुख्यमंत्री वृक्ष संपदा योजना में निजी भूमि पर वृक्षारोपण के लिए इच्छुक एवं पात्र हितग्राहियों को 5 एकड़ भूमि में वृक्षारोपण करने के लिए शत् प्रतिशत अनुदान दिया जाएगा। इसी प्रकार 5 एकड़ से अधिक भूमि होने पर 50 प्रतिशत अनुदान उपलब्ध कराया जाएगा। कार्यशाला में यह भी जानकारी दी गई कि वृक्षों से अधिक मात्रा में काष्ठ की पैदावार को सुनिश्चित करने के लिए प्रति एकड़ 1000 एवं अधिकतम 5000 पौधे के रोपण करना उपयुक्त होगा। इससे निजी भूमि पर वृक्षारोपण करने वाले भूमिधारकों को प्रतिवर्ष 15 से 50 हजार रूपए प्रति एकड़ तक की आमदनी होगी।

संस्थाओं को मिलेगा 50 प्रतिशत अनुदान

मुख्यमंत्री वृक्ष संपदा योजना में निजी शिक्षण संस्थाएं, निजी ट्रस्ट, पंचायते भूमि अनुबंध धारक, गैर शासकीय संस्थाओं को अपने भूमि में रोपण कराने पर 50 प्रतिशत अनुदान की प्राथमिकता होगी। इन संस्थाओं को शेष राशि स्वयं वहन करना होगा। निजी भूमिधारकों, संस्थाएं वृक्षारोपण की तैयारी के लिए दिए जा रहे अनुदान राशि से क्षेत्र तैयारी, गड्डा खुदाई, रोपण निदाई गुडाई आदि करा सकेंगे। वृक्षारोपण उपरांत वृक्षों के काष्ठ विक्रय के लिए निजी भूमिधारकों, शासकीय अथवा निजी संस्थाओं को ट्रायो एग्रीमेंट करना होगा।

इन पौधों का होगा रोपण

योजना अंतर्गत रोपण किये जाने वाले टिशू कल्चर सागौन, चंदन, क्लोनल नीलगिरी, मिलिया डुबिया, टिशू कल्चर बांस व अन्य उपयोगी प्रजाति के पौधों के रोपण किया जाएगा। कार्यशाला में योजना के इच्छुक निजी भूमिधारकों और विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों को योजना के प्रावधानों सहित इस संबंध में उनकी जिज्ञासाओं का समाधान किया गया। कार्यशाला में वृक्षारोपण विशेषज्ञ प्रेमलाल जैन, उद्योगपति, टिम्बर मर्चेन्ट, भूमि-स्वामी कृषक, एन.जी.ओ. कलेक्टर रायपुर सहित नगर निगम और वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

कार्यशाला में निजी भूमिधारकों और विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों से अधिक से अधिक मात्रा में वृक्षारोपण कर इस योजना का लाभ उठाने का आग्रह किया गया। कार्यशाला में वृक्षारोपण के लिए इच्छुक भूमिधारकों और विभिन्न संस्थाओं के प्रतिनिधियों ने अपनी उपलब्ध भूमि में वृक्षारोपण किये जाने की इच्छा जतायी।

वृक्षारोपण से 40 नदियों का तट हुआ हरा-भरा : चार सालों में नदियों के तट पर लगाए गए 47 लाख पौधे

No comments Document Thumbnail

रायपुर। छत्तीसगढ़ में विगत 04 वर्षों के दौरान नदी तट वृक्षारोपणकार्यक्रम के तहत 40 विभिन्न नदियों के तट पर 46 लाख 76 हजार 729 पौधों का रोपण किया गया है। इसके रोपण से नदी तट के 4 हजार 321 हेक्टेयर रकबा हरीतिमा से आच्छादित और फल-फूल के पौधों से सुरभित हो रहे हैं, जो विशेष आकर्षण का केन्द्र बना हुआ है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मंशा के अनुरूप वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री मोहम्मद अकबर के मार्गदर्शन में विभाग द्वारा नदी तट रोपण का कार्य किया गया।

इनका रोपण कैम्पा तथा विभागीय मद सहित नदी तट वृक्षारोपण कार्यक्रम के तहत किया गया है। नदी तट रोपण कार्यक्रम के तहत विगत 04 वर्षों के दौरान शामिल नदियों में शिवनाथ, इन्द्रावती, फुलकदेई, केंदई, लीलागर नदी, महानदी, हसदेव, आगर, रेड नदी, मेघानाला, झींका नदी, केलो नदी, मोरन, सोंढूर, ईब नदी, पैरी नदी, तान्दुला, नारंगी, बांकी नदी, गलफुला, हसदो नदी, नेउर नदी, केवई, खटम्बर, भैसुन, चूंदी, भवई नदी, बनास नदी, रांपा नदी तथा भुलू नदी, महान नदी आदि शामिल हैं।

प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख संजय शुक्ला ने बताया कि इनमें वर्ष 2019 के दौरान नदी तट वृक्षारोपण कार्यक्रम के अंतर्गत 831 हेक्टेयर रकबा में 9 लाख 14 हजार पौधों का रोपण किया गया। इसी तरह वर्ष 2020 के दौरान 845 हेक्टेयर रकबा में 8 लाख 77 हजार पौधों, वर्ष 2021 के दौरान 01 हजार 647 हेक्टेयर रकबा में 17 लाख 87 हजार पौधों और वर्ष 2022 के दौरान 999 हेक्टेयर रकबा में 11 लाख पौधों का रोपण किया गया है।

प्रदेश में नदी तट वृक्षारोपण कार्य से 9 लाख 63 हजार मानव दिवस रोजगार का सृजन हुआ है। साथ ही नदी तट कार्यक्रम अंतर्गत कृषि कार्य तथा सब्जी उत्पादन जैसे कार्यों से निकटवर्ती 372 ग्रामों के लोग सीधे-सीधे लाभान्वित हुए हैं। नदी तट वृक्षारोपण के फलस्वरूप एक ओर जहां स्थानीय ग्रामीणों को वृक्षारोपण कार्यों से रोजगार की प्राप्ति हुई है, वहीं दूसरी ओर नदी तट के समीपस्थ किसानों को भूमि कटाव की कमी से कृषि कार्य में सुविधा तथा उत्पादन में वृद्धि का भी लाभ प्राप्त हो रहा है। इसके तहत फलदार पौधों के वृक्षारोपण से ग्रामीणों की आय में बढ़ोत्तरी भी हो रही है। इसके अलावा स्थानीय ग्रामीणों अंतर्वतीय फसल तथा नदी किनारे सब्जी उत्पादन का कार्य भी कुशलतापूर्वक कर रहे हैं।

विशेष लेख : नए स्वरूप में खिला बारनवापारा अभ्यारण्य

No comments Document Thumbnail

रायपुर। छत्तीसगढ़ का सबसे उत्कृष्ट तथा आकर्षक अभ्यारण्य बारनवापारा का नया स्वरूप में कायाकल्प हुआ है। यह कायाकल्प वन्यप्राणी रहवास उन्नयन कार्य के अंतर्गत कैम्पा (छत्तीसगढ़ प्रतिकरात्मक वनरोपण निधि प्रबंधन और योजना प्राधिकरण) के वार्षिक कार्ययोजना 2021-22 में स्वीकृत राशि से किया गया है। इसके तहत 5 हजार 920 हेक्टेयर रकबा में सघन लेन्टाना उन्मूलन तथा यूपोटोरियम उन्मूलन का कार्य हुआ है। जिसमें से बारनवापारा अभ्यारण्य के 19 कक्षों में कुल 950 हेक्टेयर रकबा में लेन्टाना उन्मूलन का कार्य और 32 कक्षों में कुल 4 हजार 970 हेक्टेयर रकबा में यूपोटोरियम उन्मूलन का कार्य शामिल है।



राजधानी रायपुर से लगभग 100 किलोमीटर की दूरी पर बलौदाबाजार वनमंडल अंतर्गत स्थित बारनवापारा अभ्यारण्य में हुए वन्यप्राणी रहवास उन्नयन कार्य से वहां मृदा में नमी होने के कारण घास प्रजाति शीघ्रता से बढ़ने लगी हैं। साथ ही इससे अभ्यारण्य में वन्यप्राणियों को अब घास चरने के लिए अच्छी सुविधा उपलब्ध हो गई है। जिससे वे लेन्टाना तथा यूपोटोरियम के उन्मूलन कार्य के बाद स्वच्छंद विचरण भी करने लगे हैं। इससे पर्यटकों को वन्यप्राणियों की सहजता से दृष्टता हुई है और वन्यप्राणी भी स्वस्थ व तन्दुरूस्त दिखाई देने लगे हैं।



अभ्यारण्य में वन्यप्राणी रहवास उन्मूलन कार्य के उपरांत घास पुनुरोत्पादन में स्पष्ट अंतर देखा जा सकता है। बारनवापारा अभ्यारण्य का कुल क्षेत्रफल 244.86 वर्ग किमी है जिसमें मुख्यतः मिश्रित वन, साल वन व पूर्व के सागौन वृक्षारोपण है। बारनवापारा में मुख्य रूप से कर्रा, भिर्रा, सेन्हा, मिश्रित वनों में पाये जाते हैं। सागौन वृक्षारोपण क्षेत्र में प्राकृतिक रूप से उगे सागौन है तथा साल वन क्षेत्र कम रकबे में है। उक्त छत्रक प्रजाति के अतिरिक्त शाकिय प्रजाति जैसे यूपोटोरियम, लेन्टाना, चरोठा आदि प्रमुख खरपतवार हैं, जिनके कारण बारनवापारा अभ्यारण्य क्षेत्र में पाये जाने वाले शाकाहारी वन्यप्राणियों को घास आदि नहीं मिलती

वन्यप्राणियों को आवागमन में भी दिक्कत होती है तथा मॉसभक्षी प्राणियों से भी बचाव कठिन हो जाता है। इसे दृष्टिगत रखते हुए अभ्यारण्य में वन्यप्राणी रहवास उन्नयन कार्य के तहत सघन लेन्टाना एवं यूपोटोरियम के उन्मूलन का कार्य किया गया है, जिससे बारनवापारा अभ्यारण्य में अब वन्यप्राणियों को वर्षभर हरी खाद्य घास उनके भोजन व चारा के रूप में उपलब्ध हो सके। गौरतलब है कि बारनवापारा अभ्यारण्य में तेन्दुए, गौर, भालू, साम्भर, चीतल, नीलगाय, कोटरी, चौसिंघा, जंगली सुअर, जंगली कुत्ता, धारीदार लकड़बग्घा, लोमड़ी, भेड़िया एवं मूषक मृग जैसे वन्यप्राणी बहुतायत में मिलता है एवं आसानी से दिखते भी है।

रायपुर जिले में चलेगा 'हर घर हरियाली 'अभियान

No comments Document Thumbnail

रायपुर जिले में हरियाली प्रसार करने के लिए पहले सावन सोमवार 18 जुलाई को वृक्षारोपण महा अभियानहर घर हरियालीके तहत घर-घर पौधों का वितरण किया जाएगा। जिला प्रशासन की तरफ से इस वृक्षारोपण महा अभियान में अपेक्षा की गई है कि ज्यादा से ज्यादा लोग इस अभियान में शामिल हो। प्रत्येक व्यक्ति एक पौधा जरूर लगाएं और पेड़ बनने तक सुरक्षा की जवाबदारी स्वयं ले। प्रकति की सुदंरता एवं संरक्षण के लिए प्रत्येक आदमी को वृक्षारोपण करना चाहिए।



वन और उद्यानिकी विभाग ग्राम पंचायत, नगरीय निकाय कार्यालय तक माँग के अनुसार संख्या में पौधे उपलब्ध कराये जायेंगे। इस अभियान के तहत उपयोगिता और स्थान के अनुसार पौधे लगाए जाएंगे। सार्वजनिक स्थानों, सरकारी भवनों, स्कूलों, उद्योग, आंगनबाड़ी केंद्रों, रिहायशी इलाकों में फलदार-छायादार पेड़ लगेंगे तो सड़क किनारे और डिवाइडर्स पर प्रदूषण शोषक पेड़ लगाए जाएँगे। इस अभियान में पूरे जिले के नगरीय और ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में पेड़ लगाया जाएगा। इस वृक्षारोपण महा अभियान में प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल अपने निवास स्थान में रुद्राक्ष के पौधे का रोपण करेंगे। 

इस महाभियान में प्रदेश के जनप्रातिनिधिगण, शासकीय अधिकारी/कर्मचारी सहित आमजनो की भी सक्रिय भूमिका होगी। शासकीय कार्यालयों में पौधों की उपलब्धता के लिए वितरण स्टाल बनेंगे। आमजन इन दफ़्तरों से पौधे लेकर अपने घरों और चिन्हांकित ज़मीन पर लगा सकेंगे। वृक्षारोपण के लिए जन जागरूकता और पेड़ लगाने के लिए पार्षदों, सरपंचों सहित जनप्रतिनिधियों और समाज सेवी संस्थाओंकी भी मदद ली जाएगी। सभी सरकारी कार्यालयों में भी उपलब्ध जमीन पर पौधे लगाए जाएँगें।


Don't Miss
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.