Media24Media.com: विद्यार्थियों

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राज्यपाल से मिले हाई स्कूल के विद्यार्थी, डेका ने जीवन में सफलता के लिए दिया मार्गदर्शन

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रायपुर। राज्यपाल रमेन डेका से आज राजभवन में रायपुर के निजी स्कूल के विद्यार्थियों ने सौजन्य मुलाकात की। इस अवसर पर डेका ने बच्चों को जीवन और कैरियर में सफलता पाने के लिए मार्गदर्शन दिया और विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का समाधान किया। विद्यार्थियों ने राज्यपाल की बातों को पूरे उत्साह से ध्यानपूर्वक सुना।

राज्यपाल ने विद्यार्थियों से उनके सपनों और हॉबी पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि अनुशासन और धैर्य सफलता की कुंजी हैं। यदि किसी परीक्षा में सफलता न मिले तो उसके विकल्प तैयार रखें। विद्यार्थी यूपीएससी की परीक्षा देना चाहते हैं, उसके लिए पूरी लगन के साथ तैयारी करें लेकिन अन्य विकल्पों पर भी ध्यान दें।

डेका ने कहा कि हर विद्यार्थी को अपनी हॉबी विकसित करना चाहिए क्योंकि यह व्यक्तित्व निर्माण में सहायक होते हैं। एक छात्रा ने संगीत से जुड़े अपने हॉबी का जिक्र किया। इस पर राज्यपाल ने कहा कि संगीत जीवन के लिए महत्वपूर्ण है, इसमें विज्ञान भी निहित है। विद्यार्थियों ने जब राजनीति के बारे में पूछा तो राज्यपाल ने कहा कि अच्छे लोगों को राजनीति में आना चाहिए। उन्होंने कहा कि चुनौतियों का समाधान करने के लिए सही समय पर सही निर्णय लेना जरूरी है और गुस्से में कोई निर्णय नहीं लेना चाहिए। उन्होंने अनुभव, तर्कशक्ति और निर्णय क्षमता को जीवन में सफलता के लिए अहम बताया।

डेका ने कहा कि सतत् विकास सबसे जरूरी विषय है। हमें अपनी पृथ्वी और पर्यावरण को बचाने के लिए काम करना होगा। हमें अपने वातावरण को स्वच्छ रखना होगा। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में 45 प्रतिशत वन क्षेत्र है यह बात उन्हें बहुत प्रभावित करती है। राज्यपाल ने विद्यार्थियों से कहा कि वे मेहनत और लगन के साथ पढ़ाई करें और टॉपर बनने का लक्ष्य रखें। उन्होंने बताया कि इस वर्ष के बोर्ड परीक्षाओं के टॉपर विद्यार्थियों को उनके द्वारा 5 हजार रूपये की प्रोत्साहन राशि भी दी गई है। इस अवसर पर रेयान इंटरनेशनल स्कूल के प्राचार्य श्रीमती धनेश्वरी शर्मा, मैनेजर एवं अन्य स्टॉफ के साथ विद्यार्थियों को राजभवन का भ्रमण भी कराया गया।


अनुशासनहीनता पर बड़ी कार्रवाई, प्रभारी प्राचार्य निलंबित

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रायपुर। अनुशासनहीनता को बढ़ावा देने,शराब पीकर विद्यालय आने, विद्यार्थियों एवं उनके पालकों से एडमिशन के नाम पर अवैध वसूली एवं अमर्यादित व्यवहार सम्बन्धी शिकायत पर कड़ी कार्यवाही करते हुए प्रभारी प्राचार्य को निलंबित कर दिया गया है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार विकासखंड बलौदाबाजार अंतर्गत स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट उच्चत्तर माध्यमिक विद्यालय अर्जुनी में पदस्थ प्रभारी प्राचार्य (मूल पद व्याख्याता एल बी ) खूबचंद सरसींहा के द्वारा शराब पीकर विद्यालय आने, विद्यार्थियों एवं उनके पालकों से एडमिशन के नाम पर अवैध वसूली, कर्मचारियों क़ो मानसिक रूप से प्रताड़ित करने,अमर्यादित व्यवहार एवं अनुशासनहीनता को बढ़ावा देने सम्बन्धी शिकायत की जांच विकासखंड शिक्षा अधिकारी द्वारा कराई गई।जांच उपरांत शिकायत प्रथम दृष्टया सही पाई गई। जांच प्रतिवेदन के आधार पर कलेक्टर दीपक सोनी के द्वारा प्रभारी प्राचार्य खूबचंद सरसीहा को कारण बताओ नोटिस जारी किया गया। नोटिस का जवाब संतोषप्रद नहीं पाए जाने के कारण प्रभारी प्राचार्य के निलंबन की अनुशंसा की गई।

पदीय दायित्वों के निर्वहन में घोर लापरवाही, अनुशासनहीनता एवं स्वेच्छाचारिता के कारण छत्तीसगढ़ सिविल सेवा आचरण नियम 1965 के नियम 3 के विपरीत मानते हुए संचालक लोक शिक्षण ने प्रभारी प्राचार्य खूबचंद सरसीहा को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। निलंबन अवधि में इनका मुख्यालय विकासखंड शिक्षा अधिकारी कार्यालय कसडोल नियत किया गया है। निलंबन अवधि में नियमानुसार जीवन निर्वाह भत्ता की पात्रता होगी।


शैक्षणिक सत्र शुरू होने से पहले आश्रम-छात्रावासों की कराएं साफ-सफाई और रंग-रोगन: मंत्री रामविचार नेताम

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रायपुर। आदिम जाति मंत्री रामविचार नेताम ने कहा है कि  आश्रम-छात्रावास में रहकर पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक माहौल उपलब्ध कराने के लिए नये शिक्षण सत्र के प्रारंभ होने से पहले राज्य के सभी आश्रम-छात्रावासों की मरम्मत, साफ-सफाई, पेयजल, रंग-रोगन आदि की व्यवस्था कर ली जाए। उन्होंने नवा रायपुर में विभागीय काम-काज की समीक्षा के दौरान अधिकारियों को आश्रम-छात्रावासों के नियमित निरीक्षण और रख-रखाव कराने के निर्देश दिए।

आदिम जाति विकास मंत्री नेताम ने कहा है कि आदिम जाति कल्याण विभाग में आश्रम-छात्रावासों के अधीक्षक के पद पर पदोन्नत होने वाले अधीक्षकों की पदस्थापना के लिए काउंसिलिंग की प्रक्रिया अपनाई जाए। यह प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से एक दिन आश्रम-छात्रावास में समय बिताने और विद्यार्थियों के साथ भोजन करने को भी कहा। नेताम ने बैठक में कहा कि आगामी दो वर्षों में सभी आश्रम छात्रावासों के लिए भवन निर्माण किया जाना है, इसलिए भवनविहिन आश्रम-छात्रावासों का चिन्हांकन कर लिया जाए। उन्होंने कहा कि जिन आश्रम-छात्रावासों में सीटों की संख्या बढ़ाई गई है वहां रहने वाले छात्रों के लिए अतिरिक्त भवन अथवा कमरों की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।

नेताम ने राज्य में प्रयास विद्यालयों की व्यवस्था और रख-रखाव के लिए भी आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन विद्यालयों में छात्रों को अखिल भारतीय इंजीनियरिंग और मेडिकल परीक्षाओं की तैयारी के लिए कोचिंग संस्थान के चयन के लिए टेंडर प्रक्रिया पूर्ण कराने कहा।

बैठक में अधिकारियों ने बताया कि आगामी 15 जून से प्रधानमंत्री धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के प्रचार-प्रसार के लिए विशेष कैंप लगाए जाएंगे। राष्ट्रीय स्तर पर 15 जून से शुरू होगी। राज्य में 16 और 17 जून को दो दिवसीय राज्य स्तरीय अभियान चलाया जाएगा, वहीं जिला स्तर पर 17 से 20 जून और विकासखण्ड स्तर पर 20 से 30 जून तक चलेगा। इस अभियान के तहत पीएम जनमन योजना से छुटे हुए जनजातीय परिवारों के आधार कार्ड, आयुष्मान कार्ड, वनाधिकार पत्र जैसे दस्तावेज बनाए जाएंगे। शासकीय योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा। मंत्री नेताम ने सिकलसेल और टीव्ही मुक्त भारत अभियान के प्रति भी बच्चों को जागरूक करने के निर्देश अधिकारियों को दिए।

मंत्री नेताम ने बैठक में कहा कि निर्धारित मीनू के आधार पर आश्रम और छात्रावास के बच्चों को भोजन उपलब्ध कराया जाए। आश्रम-छात्रावासों की दीवारों पर महापुरूषों के संदेशों का लेखन किया जाए। साथ ही बच्चों में शैक्षणिक क्षमता को बढ़ाने के लिए भाषण, वाद-विवाद प्रतियोगिता कराई जाए। उन्होंने आश्रम-छात्रावासों की विशिष्ट पहचान बनाने पर जोर दिया। मंत्री नेताम ने विभाग में सुशासन तिहार के तहत प्राप्त आवेदनों के निराकरण की भी जानकारी ली। उन्होंने निराकरण के लिए शेष बचे आवेदनों को गंभीरता के साथ निराकरण करने के निर्देश दिए।

विशेष पिछड़ी जनजातियों के लिए 75 बहुउद्देशीय भवन

बैठक में जानकारी दी गई कि विशेष पिछड़ी जनजाति वर्ग के समग्र विकास के लिए राज्य में 75 बहुउद्देशीय भवन का निर्माण किया जा रहा है। 31 भवनों का निर्माण लगभग पूर्णतः की ओर है। इन भवनों में सांस्कृतिक, शैक्षणिक, स्वास्थ्य और सामाजिक गतिविधियां आयोजित की जा सकेगी। उन्होंने अधिकारियों को इन भवनों के तेजी से पूर्ण कराने के निर्देश भी दिए।

बैठक में आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा, उप सचिव बी.एस. राजपूत, अपर संचालक संजय गौड़, जितेन्द्र गुप्ता, कार्यपालन अभियंता त्रिदीप चक्रवर्ती सहित जिलों के परियोजना प्रशासक और सहायक आयुक्त उपस्थित थे।

कला साधना की तपस्थली खैरागढ़ में कला की नई क्रांति

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रायपुर। छत्तीसगढ़ के इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय, खैरागढ़ नृत्य, संगीत एवं ललित कला के क्षेत्र में एशिया का एकमात्र विशिष्ट विश्वविद्यालय है। यह संस्थान विद्यार्थियों के लिए एक समग्र, शोधोन्मुख एवं विद्यार्थी-केंद्रित वातावरण तैयार कर उनकी रचनात्मक क्षमता को जागृत करने और कला की गहराइयों से परिचित कराने का सुनहरा अवसर प्रदान करता है। संगीत विश्वविद्यालय में शैक्षणिक सत्र 2025-26 के लिए ऑनलाइन आवेदन आमंत्रित किया गया है।

ऑनलाइन प्रवेश प्रक्रिया का पंजीयन 16 जून तक होगी। प्रवेश के लिए प्रथम अभिरुचि परीक्षा 24 से 27 जून तक आयोजित होगा, 30 जून तक इसका परिणाम जारी किया जाएगा। इसी तरह द्वितीय अभिरुचि परीक्षा 22 से 24 जुलाई तक आयोजित होगी, इसकी चयन सूची 25 जुलाई को जारी की जाएगी। छत्तीसगढ़ शासन द्वारा इस विश्वविद्यालय को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करने का निर्णय लिया गया है। भारत के अतिरिक्त अन्य कई देशों के विदेशी विद्यार्थियों द्वारा भी इस विश्वविद्यालय में प्रवेश हेतु बढ़-चढ़कर आवेदन किए जा रहें है।

इस विश्विद्यालय में स्नातक और स्नातकोत्तर स्तर पर हिन्दुस्तानी गायन, हिन्दुस्तानी वायलिन, सितार, सरोद, तबला, कत्थक, भरतनाट्यम, ओडिसी, लोक संगीत, नाटक, नृत्य, चित्रकला, मूर्तिकला, टेक्सटाइल्स डिज़ाइन जैसे पाठ्यक्रमों में डिप्लोमा और डिग्री दी जाती है। इस विस्तृत पाठ्यक्रम संरचना से न केवल कला की विविध धाराओं में पारंगत होने का अवसर मिलेगा, बल्कि विद्यार्थियों का सर्वांगीण विकास सुनिश्चित होगा। इसके साथ-साथ विश्वविद्यालय में शोधात्मक गतिविधियों के विस्तार हेतु विभिन्न विषयों में पीएच.डी. एवं डी.लिट् की सुविधा प्रदान करने वाला संभवतः भारत का एकमात्र विश्वविद्यालय है।

विश्वविद्यालय की अनोखी विशेषताएँ

इंदिरा गांधी कला विश्वविद्यालय रचनात्मकता का मुक्त मंच- यहां छात्रों को अनुभवी शिक्षकों द्वारा मनोहारी प्राकृतिक वातावरण में तनावरहित शिक्षण एवं प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है, जिससे उनकी कला में गहराई एवं शोध का समागम होता है। नृत्य, संगीत, ड्रामा एवं ललित कला के साथ-साथ अन्य विषयों की भी व्यापक जानकारी दी जा रही है, जिससे छात्रों का बौद्धिक विकास सुनिश्चित हो रहा है। विश्वविद्यालय का लक्ष्य शुद्ध अंतःकरण एवं बाधा रहित प्रशिक्षण व्यवस्था के साथ कला साधकों को ज्ञान के नए आयामों तथा कला की सच्ची भावना से परिचित कराना है। 

इंदिरा कला संगीत विश्वविद्यालय न केवल एक शिक्षण संस्थान है, बल्कि यह एक ऐसा मंच है जहाँ विद्यार्थी अपनी रचनात्मक प्रतिभा को उजागर कर, कला के क्षेत्र में नया इतिहास रच रहे हैं। विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों द्वारा लगातार राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर 700 से अधिक पुरस्कार प्राप्त किए हैं। हाल ही में यूथ-फेस्टिवल में संगीत विश्वविद्यालय द्वारा चौंपियनशिप ट्राफी प्राप्त किया है। इस विश्वविद्यालय को सभी कला साधकों एवं समुदाय के लिए एक तीर्थस्थल के रूप में स्थापित किया गया है, जहाँ परंपरा एवं नवाचार साथ-साथ प्रगति कर रहें हैं। विश्वविद्यालय के शैक्षणिक सत्र 2025-26 के प्रवेश हेतु विश्वविद्यालय की अधिकारिक वेबसाईट www.iksv.ac.in पर  विस्तृत जानकारी प्राप्त की जा सकती है।

शिक्षा ही जीवन की असली पूंजी: सीएम साय

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा है कि शिक्षा ही जीवन की असली पूंजी है। इसके बिना जीवन अधूरा है। यह न केवल रोजगार का माध्यम है, बल्कि समग्र विकास का आधार भी है।वे आज सवेरे मुंगेली जिला मुख्यालय में जिला ग्रंथालय में 29.90 लाख रुपये की लागत से निर्मित अतिरिक्त कक्ष का लोकार्पण कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उप मुख्यमंत्री अरुण साव, केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू, मुंगेली विधायक पुन्नूलाल मोहले तथा पूर्व सांसद लखन साहू भी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री साय ने कार्यक्रम में विद्यार्थियों से संवाद करते हुए आदर्श विद्यार्थी के पाँच गुण काक चेष्टा बको ध्यानं, श्वान निद्रा तथैव च। अल्पाहारी गृहत्यागी, विद्यार्थी पंच लक्षणं का उल्लेख करते हुए विद्यार्थियों को अनुशासित, मेहनती और लक्ष्यनिष्ठ बनने की प्रेरणा दी। एक छात्र द्वारा सोशल मीडिया के प्रभाव पर पूछे गए प्रश्न के उत्तर में उन्होंने कहा, डिजिटल युग में अच्छाई को अपनाएं और बुराई से दूर रहें। साय ने अपने छात्र जीवन के संघर्ष साझा करते हुए बताया कि अविभाजित रायगढ़ जिले में शिक्षा के अवसर सीमित थे। नटवर स्कूल ही एकमात्र विकल्प था। उन्होंने विद्यार्थियों से समय का सदुपयोग करने, कभी निराश न होने और परिश्रम को अपना मूल मंत्र बनाने का आह्वान किया।

 मुख्यमंत्री ने प्रयासऔर नालंदा परिसरजैसे शैक्षणिक नवाचारों की सराहना की और कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि हर जिले में आधुनिक ग्रंथालय स्थापित किए जाएं। उन्होंने मुंगेली जिला ग्रंथालय की सराहना करते हुए बताया कि यह ग्रंथालय अब तक सैकड़ों युवाओं की सफलता की नींव बन चुका है। उन्होंने इसे केवल अध्ययन का स्थल न मानकर एक सफलता केंद्र बताया। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम में कक्षा 10वीं और 12वीं की बोर्ड परीक्षाओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यार्थियों को स्मृति चिन्ह व प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया। इस मौके पर मुख्यमंत्री को तोप सिंह कुंभकार द्वारा उनके चित्र का हस्तनिर्मित छायाचित्र तथा भगवद् गीता और अन्य स्मृति चिन्ह भी भेंट किए गए।

गौरतलब है कि जिला ग्रंथालय में वर्तमान में यहाँ 4780 से अधिक पुस्तकों का संग्रह, 893 पंजीकृत सदस्य, 32 टेबल, 11 सीसीटीवी कैमरे हैं। कार्यक्रम में राज्य के मुख्य सचिव अमिताभ जैन, मुख्यमंत्री के सचिव पी. दयानंद सहित कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी, शिक्षकगण एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।

महासमुंद : एसडीएम बागबाहरा ने किया स्कूलों और छात्रावास का निरीक्षण, सुविधाओं का लिया जायजा

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महासमुंद। कलेक्टर विनय कुमार के निर्देशानुसार जिले में शैक्षणिक संस्थानों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से सतत निरीक्षण जारी हैं। इसी कड़ी में आज एसडीएम बागबाहरा उमेश साहू द्वारा विभिन्न विद्यालयों एवं छात्रावासों का दौरा किया गया। इस दौरान उन्होंने शिक्षकों की उपस्थिति, कक्षाओं की स्थिति, विद्यार्थियों को दी जाने वाली सुविधाओं तथा मध्यान्ह भोजन की गुणवत्ता की गहन समीक्षा की।

निरीक्षण के तहत प्राथमिक शाला मेंस सुखरी डबरी एवं माध्यमिक विद्यालय सुखरी डबरी का दौरा किया गया। इस दौरान उन्होंने स्कूल की व्यवस्था, शिक्षकों की उपस्थिति तथा छात्रों की शैक्षणिक प्रगति की जानकारी ली। विद्यार्थियों से चर्चा कर उनकी समस्याओं एवं आवश्यकताओं को भी समझने का प्रयास किया गया। एसडीएम ने कक्षाओं में जाकर बच्चों से बातचीत की और उनकी पढ़ाई की स्थिति का जायजा लिया। साथ ही शिक्षकों को निर्देशित किया कि वे पढ़ाई के स्तर को सुधारने और विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए विशेष प्रयास करें।

एसडीएम साहू ने निरीक्षण के दौरान छात्रावासों की साफ-सफाई, भोजन व्यवस्था, सुरक्षा एवं अन्य बुनियादी सुविधाओं की भी जांच की। उन्होंने छात्रावास में रह रहे विद्यार्थियों से चर्चा कर उनकी समस्याओं को समझा तथा उनके समाधान हेतु संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए। निरीक्षण के उपरांत एसडीएम ने शिक्षकों एवं विद्यालय प्रशासन को निर्देश दिए कि वे शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार लाने, छात्रों की उपस्थिति बढ़ाने विशेष ध्यान दें। इसके अलावा, यदि किसी विद्यालय या छात्रावास में कोई कमी पाई गई, तो उसे शीघ्र सुधारने के लिए संबंधित विभाग को निर्देशित किया गया।

शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार के उद्देश्य से कक्षा 5वीं और 8वीं के लिए केन्द्रीकृत परीक्षा का आयोजन

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार के उद्देश्य से सत्र 2024-25 में कक्षा 5वीं और 8वीं की केन्द्रीकृत परीक्षा आयोजित करने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री साय द्वारा यह कदम विद्यार्थियों की शिक्षा स्तर को सुधारने और शैक्षणिक वातावरण को और प्रभावी बनाने के लिए उठाया गया है। यह परीक्षा राज्य के सभी शासकीय और अशासकीय विद्यालयों में संचालित होगी, हालांकि सीबीएससी और आईसीएससी पाठ्यक्रम वाले विद्यालय इस व्यवस्था से बाहर रहेंगे। इस संबंध में आज छत्तीसगढ़ शासन के मंत्रालय, स्कूल शिक्षा विभाग महानदी भवन नवा रायपुर से समस्त जिला कलेक्टर एवं जिला शिक्षाधिकारियों को निर्देश जारी कर दी गई है।

स्कूल शिक्षा सचिव सिद्धार्थ कोमल सिंह परदेशी ने कहा कि परीक्षाएं जिला स्तर पर निःशुल्क आयोजित की जाएगी और जिला शिक्षा अधिकारी गोपनीयता बनाए रखते हुए गुणवत्तापूर्ण परीक्षा सम्पन्न कराएगें। परीक्षा मार्च माह में आयोजित होगी और इसकी समय-सारणी लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा जारी की जाएगी। उन्होंने कहा कि प्रश्न पत्र  विषय विशेषज्ञ शिक्षकों द्वारा पूर्ण गोपनीयता के साथ तैयार किए जाएंगे और प्रश्न पत्र वितरण के बाद, उन्हें संबंधित केंद्र के निकटवर्ती थाने में सुरक्षित रखा जाएगा। शिक्षकों को प्रश्न पत्र के नमूने पहले से उपलब्ध कराए जाएंगे ताकि छात्रों को सही दिशा में तैयारी करा सकें।

सचिव परदेशी ने बताया कि उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन केन्द्रीय मूल्यांकन केंद्रों में किया जाएगा। मूल्यांकन कार्य उन्हीं शिक्षकों से कराया जाएगा, जो कक्षा 5वीं और 8वीं पढ़ाते हैं। कक्षा चौथी और सातवीं की उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन अन्य विद्यालयों में कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि जिन विद्यार्थियों को किसी विषय में अनुत्तीर्ण घोषित किया जाएगा, उन्हें दो महीने के भीतर पूरक परीक्षा का अवसर दिया जाएगा। हालांकि, विद्यार्थियों को अगली कक्षा में प्रवेश (छठवीं और नवमीं) दे दिया जाएगा। विद्यार्थियों की तैयारी सत्र प्रारंभ से ही सुनिश्चित किया जाएगा। केन्द्रीकृत परीक्षा की तैयारी के लिए संकुल समन्वयकों और प्रधान पाठकों की बैठक आयोजित की जाएगी।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु के हाथों इंजीनियरिंग के होनहार विद्यार्थियों को मिला स्वर्ण पदक

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रायपुर। राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, रायपुर के लिए आज 25 अक्टूबर का दिन ऐतिहासिक रहा। देश की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज संस्थान के 14वें दीक्षांत समारोह में अपनी गरिमामय मौजूदगी दी और 12 होनहार विद्यार्थियों को उनकी बेहतरीन शैक्षणिक उपलब्धियों के लिए अपने हाथों से स्वर्ण पदक प्रदान किया। राज्यपाल रमेन डेका, मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और केन्द्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू भी दीक्षांत समारोह में विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए।

रायपुर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में आज आयोजित एनआईटी के दीक्षांत समारोह में वर्ष 2023-24 में संस्थान से ग्रेजुएट, पोस्ट ग्रेजुएट और पीएचडी किए 1439 विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं। इनमें बी.टेक. और बी.आर्क. प्रोग्राम के 1044, एमसीए और एम.टेक. प्रोग्राम के 225 और पीएचडी के 170 विद्यार्थी शामिल थे।

राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने विद्यार्थियों को एनआईटी जैसे उत्कृष्ट शिक्षण संस्थान से शिक्षा ग्रहण कर डिग्री प्राप्त करने पर हृदय से बधाई दी। उन्होंने दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए विद्यार्थियों से कहा कि आज आप अपने जीवन के एक महत्वपूर्ण चरण को पूरा कर दूसरे चरण में प्रवेश कर रहे हैं। आप लोगों ने अपने परिश्रम और प्रतिभा के बल पर विशिष्ट मान्यता प्राप्त की है। विद्यार्थियों की सफलता में परिवार के प्रोत्साहन तथा प्राध्यापकों के मार्गदर्शन की निर्णायक भूमिका होती है। मैं सभी विद्यार्थियों के परिवार-जनों तथा प्राध्यापकों को भी बधाई देती हूं।

राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने अपने संबोधन में कहा कि तकनीक का विकास विज्ञान पर निर्भर होता है। इंजीनियरिंग में उत्कृष्ट योगदान देने के लिए अत्याधुनिक वैज्ञानिक प्रगति के बारे में जानकारी बनाए रखना आप सब के लिए सहायक सिद्ध होगा। उन्होंने कहा कि डिजिटल इनक्लुजन (Digital Inclusion) के क्षेत्र में भारत की सफलता ने पूरे विश्व को आश्चर्यचकित कर दिया है। हमारे देश में ऐसे अन्य उदाहरण प्रस्तुत करने की संभावनाएं और क्षमताएं विद्यमान हैं। एनआईटी रायपुर जैसे उच्च तकनीकी शिक्षण संस्थानों और आप जैसे युवाओं में यह उत्साह होना चाहिए कि ऐसी संभावनाओं को समझें और उन्हें कार्यरूप प्रदान करें। आप अपने योगदान का दायरा जितना अधिक विस्तृत करेंगे, उतना ही अधिक आपका व्यक्तिगत विकास होगा। बड़ी सोच, बड़ी आकांक्षाओं को जन्म देती है। बड़ी आकांक्षाएं ही प्रभावशाली यथार्थ का रूप लेती हैं।

राष्ट्रपति ने विद्यार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि जो व्यक्ति अपना काम पूरी निष्ठा, नैतिकता और कुशलता के साथ निरंतर करते रहते हैं, उन्हें सहज ही लोगों का सम्मान प्राप्त होता है। आप सभी लगन के साथ कर्तव्य पथ पर आगे बढ़ते रहिए। सफलता और प्रतिष्ठा आपका अनुसरण करेंगी। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति और वैज्ञानिक डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का उदाहरण देते हुए कहा कि दूसरों के कल्याण के लिए कार्य करना व्यक्तिगत जीवन को सार्थक और सामाजिक जीवन को बेहतर बनाता है। पूर्व राष्ट्रपति डॉ. कलाम ने विज्ञान और तकनीक का देश की सुरक्षा और समाज कल्याण के लिए उपयोग करते हुए अपार यश अर्जित किया।

राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मु ने दीक्षांत समारोह में कहा कि भारत सरकार ने देश को ग्लोबल सेमीकंडक्टर मेनुफैक्चरिंग हब बनाने तीन वर्ष पहले इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन का शुभारंभ किया है। आर्थिक विकास, राष्ट्रीय सुरक्षा और टेक्नोलॉजिकल सेल्फ-रिलायंस (Technological Self-reliance) की दृष्टि से सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री बहुत महत्वपूर्ण है। इस उद्योलग में युवा इंजीनियरों को रोजगार तथा स्टार्ट-अप्स के अनेक अवसर मिलेंगे। उन्होंने कहा कि हमारे देश के प्रतिभाशाली इंजीनियर्स ने ऐसे अनोखे उद्यम स्थापित किए हैं, जिनके बारे में कोई कल्पना भी नहीं कर सकता था। आप जैसे इंजीनियरिंग टैलेंट पूल (Engineering Talent Pool) के बल पर देश में महत्वाकांक्षी योजनाएं बनाई जा रही हैं, उनको कार्यरूप दिया जा रहा है। राष्ट्रपति ने उम्मीद जताई कि युवा विकसित भारत का निर्माण करेंगे। युवाओं के प्रयासों से भारत विश्व में अपनी स्थिति को और मजबूत बनाएगा।

राज्यपाल रमेन डेका ने दीक्षांत समारोह को विशिष्ट अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए कहा कि आज हम सब मिलकर एक ऐतिहासिक अवसर का जश्न मना रहे हैं जो कि विद्यार्थियों की सालों की कड़ी मेहनत, धैर्य और लगन का नतीजा है। यहाँ उपस्थित हर विद्यार्थी ने शैक्षिक चुनौतियों का सामना किया, सहपाठियों से मित्रता की और साथ मिलकर बेहतरीन अनुभव के दौर से गुज़रे, जिसने उन्हें आज इस मुक़ाम पर पहुँचाया है। उन्होंने आज डिग्री हासिल करने वाले सभी विद्यार्थियों को अपनी बधाई और शुभकामनाएं दीं।

राज्यपाल ने कहा कि आज यहाँ विद्यार्थी सिर्फ़ ज्ञान लेकर नहीं जा रहे, बल्कि आपसी समन्वय, संघर्ष करने और डटे रहने का कौशल भी लेकर जा रहे हैं। ये गुण उन्हें संस्थान की चार दीवारी से बाहर की दुनिया में मार्गदर्शन देंगे। विद्यार्थी एक ऐसी अनोखी दुनिया में प्रवेश करेंगे जो अभूतपूर्व परिवर्तन का समय है, जहाँ उनकी रचनात्मकता और जुनून महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेंगी। पूरा विश्व इन विद्यार्थियों की तरफ़ टकटकी लगाए देख रहा होगा कि इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी कौशल का उपयोग करके जलवायु परिवर्तन, ग़रीबी, वैश्विक भूखमरी, लिंग भेद, असमान आय, बेरोज़गारी जैसी अनसुलझी वैश्विक समस्याओं का हल निकाल सकें। 

राज्यपाल डेका ने विद्यार्थियों से आह्वान किया कि वे सफलता के लिए नैतिक और शैक्षिक मूल्यों को अपनाएं और नई ऊँचाइयों को छुएँ। उन्होंने कहा कि मौजूदा केंद्र और राज्य की सरकार ने इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में बेहतरीन प्रयास किए हैं। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की कुशल नेतृत्व वाली सरकार ने शैक्षणिक अधोसंरचना को बढ़ावा देने के लिए काफ़ी कार्य किए हैं। साथ ही तकनीकी संस्थाओं में शोध और नवाचार को भी छत्तीसगढ़ में बढ़ावा दिया जा रहा है। प्रदेश की मौजूदा साय सरकार ने विभिन्न प्रयास किए हैं जिससे कि तकनीकी शिक्षा और कौशल विकास को बढ़ावा मिले। साथ ही कार्य बल को उद्योगों की ज़रूरत के हिसाब से ढाला जा सके। तकनीकी क्षेत्र में विकास और अनुसंधान के लिए शैक्षणिक संस्थानों और उद्योगों की साझेदारी को भी बढ़ावा दिया जा रहा है जिससे कि क्षेत्रीय समस्याओं का स्थानीय हल भी ढूंढा जा सके।

राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान के दीक्षांत समारोह को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बतौर विशिष्ट अतिथि संबोधित करते हुए राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु के राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान में प्रथम आगमन पर इसे संस्थान के लिए ऐतिहासिक और गौरवशाली दिन बताया। उन्होंने राष्ट्रपति के प्रति आभार जताया कि छत्तीसगढ़ की प्रतिभाओं और नागरिकों को प्रोत्साहित करने के लिए उन्होंने अपने क़ीमती समय में दो दिनों का बहुमूल्य समय प्रदेश को दिया है। मुख्यमंत्री ने राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान से डिग्री प्राप्त करने वाले सभी ग्रेजुएट, पोस्ट ग्रेजुएट, पीएचडी विद्यार्थियों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह दिन केवल डिग्री हासिल करने का दिन नहीं, बल्कि देश और समाज के लिए अपने ज्ञान व कौशल को भविष्य में योगदान देने के लिए भी तैयार होने का दिन है।

 मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ एक कृषि प्रधान राज्य है। यहाँ की बड़ी आबादी गांवों और जंगलों में निवास करती है। ये वर्ग आज भी कई तरह के अभावों का सामना कर रही है। सुविधा और संपन्नता की दृष्टि से पीछे रह गए इन लोगों के जीवन में आपका ज्ञान और कौशल बदलाव ला सकता है। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि यह प्रदेश प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर है। यहाँ पर औद्योगिक विकास के लिए बहुत संभावना है। इस क्षेत्र में भी आपका ज्ञान और कौशल राज्य के लिए बहु उपयोगी है। हमारे यशस्वी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने वर्ष 2047 तक विकसित भारत के निर्माण का लक्ष्य रखा है। इसी के अनुरूप हम लोगों ने भी विकसित छत्तीसगढ़ के निर्माण का संकल्प लिया है। यह संकल्प आप लोगों के योगदान के बिना पूरा नहीं हो सकता।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हमारा देश दुनिया की तीसरी बड़ी अर्थव्यवस्था बनने वाला है। छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था को मज़बूत करते हुए हम लोग भी इसमें बड़े बूस्ट की तैयारी कर रहे हैं। देश और प्रदेश को आप जैसे युवा प्रतिभाओं से बहुत उम्मीद है। आज प्रदेश में नई राष्ट्रीय शिक्षा नीति लागू हो चुकी है। यह छात्र-छात्राओं में ज्ञान के साथ-साथ कौशल विकास पर भी ज़ोर देती है। हमारी आने वाली पीढ़ी तकनीकी रूप से कुशल और उद्यमिता से भरपूर पीढ़ी होगी। प्रदेश के 160 औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों का भी हम आधुनिकीकरण कर रहे हैं। छत्तीसगढ़ में सड़क, रेल, हवाई और संचार नेटवर्क का विस्तार बहुत तेज़ी से किया जा रहा है। आने वाले दिनों में हमारे पास युवाओं की बहुत बड़ी टीम होगी जो इस प्रदेश को अपने ज्ञान, कल्पनाशीलता और प्रतिभा से विकास की नई उंचाईयों पर स्थापित करने में सक्षम होगी। रायपुर एनआईटी के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष डॉ. सुरेश हवारे और निदेशक डॉ. एन.वी. रमना राव ने भी दीक्षांत समारोह को संबोधित किया। एनआईटी बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के सदस्य, सीनेट सदस्य, रजिस्ट्रार, डीन, विभागाध्यक्ष और संस्थान के संकाय सदस्य भी समारोह में मौजूद थे।  

 राष्ट्रपति ने इन टॉपर्स को अपने हाथों से दिया स्वर्ण पदक

राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने एनआईटी के वर्ष 2023 के विभिन्न इंजीनियरिंग शाखाओं के 11 टॉपर्स को स्वर्ण पदक प्रदान किया। उन्होंने कम्प्यूटर साइंस एंड इंजीनियिरिंग तथा एनआईटी के ओवर-ऑल टॉपर यश बंसल को दो स्वर्ण पदक प्रदान किए। राष्ट्रपति ने बैचलर ऑफ आर्किटेक्चर के टॉपर अंकित महोबिया, बायो मेडिकल इंजीनियरिंग की टॉपर ईशिका जैन, बायो टेक्नोलॉजी के टॉपर सिब्बू कुमार सिंह, केमिकल इंजीनियरिंग की टॉपर शिखा राय, सिविल इंजीनियरिंग की टॉपर मुस्कान अग्रवाल, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग के टॉपर शुभम अग्रवाल, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग के टॉपर अभिषेक कुमार, इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी की टॉपर दिशा जैन, मेटा एंड मटेरियल्स इंजीनियरिंग के टॉपर प्रखर जाधव और माइनिंग इंजीनियरिंग के टॉपर प्रियांशु कुमार को स्वर्ण पदक प्रदान किया।     

जीवन में तरक्की के साथ-साथ प्रकृति से जुड़ के रहना जरूरी : सोनमणि बोरा

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रायपुर। आदिम जाति, अनुसूचित जाति एवं पिछड़ा वर्ग तथा अल्प संख्यक विकास विभाग के प्रमुख सचिव एवं जांजगीर-चांपा जिले के प्रभारी सचिव सोनमणि बोरा ने छात्रावास-आश्रम व पीएम स्वामी आत्मानंद स्कूल का निरीक्षण किया और अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए। प्रभारी सचिव बोरा ने निरीक्षण के दौरान विद्यार्थियों से कहा कि जीवन में तरक्की के साथ-साथ प्रकृति से जुड़ के रहना जरूरी है। प्रकृति से जुड़े रहने से मन शांत और एकाग्र रहता है।

जिले के प्रभारी सचिव ने कहा कि छात्रों को बेहतर शैक्षिक वातावरण मिले और सभी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध हों। उन्होंने छात्रावासों में बिजली, पानी और अन्य जरूरी संसाधनों की पर्याप्त आपूर्ति के लिए भी विशेष ध्यान देने संबंधितों को निर्देश दिए। इस दौरान उन्होंने छात्रावासों की व्यवस्था, स्वच्छता और छात्रों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं का बारीकी से जायजा लिया। बोरा ने छात्रावास में रहने वाले छात्रों से भी चर्चा की। उन्होंने बच्चों को नियमित योगाभ्यास करने कहा।

पीएम स्वामी आत्मानंद शासकीय उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम विद्यालय के विद्यार्थियों से चर्चा करते हुए जिले के प्रभारी सचिव बोरा ने कहा कि अपने विषय की तैयारी लक्ष्य बनाकर करें। इससे संबंधित विषय को लेकर बेहतर परिणाम प्राप्त कर सकेंगे। उन्होंने जिले में चलाये जा रहें उत्कृष्ट जांजगीर-चांपा अभियान को लेकर शिक्षकों और विद्यार्थियों से चर्चा की और बोलेगा बचपन, पढ़ाई का कोना अभियान की सराहना भी की। उन्होंने बारहवीं के विद्यार्थियों से कहा कि शिक्षा में लक्ष्य बनाकर आगे बढ़ने से आप सफलता की ओर बढ़ सकते हैं। इसके लिए आपको लक्ष्य बनाने से आपको मोटिवेशन मिलता है। उन्होंने कहा कि आपके पास अभी जो समय है उसका सही तरीके से उपयोग करें। लक्ष्य बनाकर मेहनत करते हुए आगे बढ़ने से सफलता प्राप्त कर सकते हैं और अपने जीवन के लक्ष्यों को हासिल कर सकते हैं। बच्चों ने अपने हाथों से बनायें ग्रीटिंग भी जिले के प्रभारी सचिव बोरा को भेंट किये, जिन्हे देखकर उन्होंने बच्चों की सराहना की। इस अवसर पर उन्होंने जाति प्रमाण पत्र का वितरण भी किया।

प्रमुख सचिव बोरा ने राहौद के शासकीय नवीन प्री मैट्रिक अनुसूचित जाति बालक छात्रावास का निरीक्षण कर छात्रवास के बच्चों से खेल कूद मनोरंजन एवं पढ़ाई से संबंधित सवाल जवाब किये। उन्होंने एसडीएम तहसीलदार को समय-समय पर छात्रावास का निरीक्षण करने तथा बच्चों की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए आवश्यक कार्य को तत्काल पूरा करने के निर्देश दिए। उन्होंने छात्रावास में बागवानी एवं फल-सब्जी भी लगाने कहा। इस मौके पर कलेक्टर आकाश छिकारा, पुलिस अधीक्षक विवेक शुक्ला, सहायक कलेक्टर दुर्गा प्रसाद अधिकारी उपस्थित थे।

बदलेगी स्कूल की तस्वीर और विद्यार्थियों की तकदीर

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रायपुर। ‘‘शिक्षा शेरनी का वह दूध है, जो पीएगा वो दहाड़ेगा‘‘ भारत रत्न डॉ. भीमराव अम्बेडकर के इस संदेश में शिक्षा का वह महत्व छिपा है जो किसी गरीब, वंचित समाज को प्रगति के रास्ते पर ले जाकर अलग पहचान दिलाने का काम करता है। जो जितना अधिक शिक्षित होगा, वह उतना ही प्रभावशाली पहचान बना पायेगा। अनुसूचित जिले में शिक्षा के इसी महत्व को ध्यान रखकर कोरबा जिले के कलेक्टर अजीत वसंत द्वारा मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के निर्देश पर बेहतर शैक्षणिक माहौल विकसित करने की दिशा में पहल की जा रही है।

विगत छह महीने में जिले की शिक्षा व्यवस्था और गुणवत्ता को बेहतर बनाने उन्होंने जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) से जर्जर हो चुके स्कूल भवनों के लिए नवीन भवन की स्वीकृति प्रदान की। शिक्षकों की कमी से जूझ रहे विद्यालयों में विषय विशेषज्ञ शिक्षकों की नियुक्ति, शिक्षकों तथा विद्यार्थियों की सुविधाओं के लिए भृत्यों की नियुक्ति की। शिक्षा की गुणवत्ता को बढ़ाने और परीक्षा परिणाम बेहतर करने की दिशा में एकीकृत पाठ्यक्रम प्रणाली, जिले के शासकीय विद्यालयों में पढ़ाई करने वाले प्रतिभावान विद्यार्थियों को प्रतिष्ठित संस्था में नीट, जेईई की रायपुर में कोचिंग, 12वीं पास प्रतिभावान विद्यार्थियों को प्रोत्साहित करने मेडिकल, इंजीनियरिंग में प्रवेश के लिए विशेष छात्रवृत्ति तथा प्राथमिक, मीडिल स्कूल के विद्यार्थियों को स्कूल आने प्रोत्साहित करने मिड डे मील के अतिरिक्त सुबह का नाश्ता देने की पहल की गई है। जाति प्रमाण पत्र बनाने तथा छात्रावासों में आवश्यक सुविधाएं प्रदान करने के भी निर्देश दिए गए हैं। जिला प्रशासन द्वारा महाविद्यालयों तथा छात्रावासों में भी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में अनेक कार्य स्वीकृत किए गए हैं।

140 से अधिक नवीन स्कूल भवन बनने से जर्जर भवनों से मिलेगी मुक्ति

जिला प्रशासन कोरबा द्वारा जिले के दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों तथा आसपास मौजूद जर्जर स्कूल भवनों का चिन्हांकन कर नए भवनों के निर्माण की स्वीकृति प्रदान की गई है। कलेक्टर ने कुल 140 से अधिक नए स्कूल भवन निर्माण, अतिरिक्त कक्ष, जीर्णाेद्धार कार्य हेतु प्रशासकीय स्वीकृति प्रदान की है। दूरस्थ क्षेत्रों सहित आसपास के जर्जर स्कूल भवनों के स्थान पर नए भवन बनने से स्कूल में पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों सहित शिक्षकों की समस्याएं दूर होंगी। कई स्थानों पर बारिश के दिनों में छत से पानी टपकने की समस्या है। भवन पुराने हैं। कम कमरे हैं। ऐसे में नवीन भवन स्वीकृति मिलने से विद्यार्थियों सहित शिक्षकों की समस्याएं दूर होंगी।

शिक्षा गुणवत्ता के लिए अतिथि शिक्षक की नियुक्ति

कोरबा जिले के हाई स्कूल व हायर सेकंडरी स्कूल में विभिन्न विषयों के 116 व्याख्याता के रिक्त पदों पर 1 जुलाई 2024 से स्थानीय स्तर पर उपलब्ध एवं शैक्षणिक योग्यताधारी बेरोजगार युवकों की नियुक्ति अतिथि शिक्षक के रूप में अध्यापन कार्य कराने हेतु किया गया है। इसी तरह इस प्रकार विद्यालयों में समस्त विषयों के व्याख्याताृ हो जाने पर निश्चित रूप से शिक्षा गुणवत्ता में वृद्धि होगी। इसी तरह कोरबा जिले के विशेष पिछड़ी जनजाति बिरहोर व पहाड़ी कोरवा जनजाति के शिक्षित बेरोजगारों में से 8वीं उत्तीर्ण 77 युवाओं को जिले के माध्यमिक शाला, हाई स्कूल, हायर सेकंडरी स्कूल में चतुर्थ वर्ग भृत्य के रिक्त पदों पर तथा 29 लोगों को प्राथमिक शाला में सहायक शिक्षक के रिक्त पदों पर पदस्थापना की गई है।

सुविधाएं बढ़ने से अध्ययन का माहौल विकसित होता है: शिक्षक

जिले में शिक्षा व्यवस्था में सुधार के साथ भवन आदि की स्वीकृति पर खुशी जताते हुए शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय रजगामार के प्रभारी प्राचार्य रामनाथ बघेल और व्याख्याता श्रीमती एम धनलक्ष्मी ने कहा कि जिला प्रशासन द्वारा जर्जर स्कूल भवनों के स्थान पर नए भवन स्वीकृत किए जा रहे हैं। अतिथि शिक्षकों और भृत्य की नियुक्ति की जा रही है। इससे विद्यार्थियों और शिक्षकों को भी फायदा होगा। पहुँच मार्ग, साइकिल स्टैंड, शेड से स्कूल आने वाले विद्यार्थियों को बहुत सहूलियत होगी। सेवानिवृत्त प्राचार्य घनश्याम जाटवर का कहना है कि पहले की अपेक्षा स्कूलों को काफी सुविधाएं मिलने लगी है। इससे शिक्षा के गुणवत्ता में सुधार होगा। उन्होंने जिला प्रशासन की पहल की सराहना की।

पहुंच मार्ग सहित साइकिल स्टैंड और शेड का होगा निर्माण

कलेक्टर द्वारा जिले के सभी स्कूल भवनों में पहुंच मार्ग तथा हाईस्कूल, हायर सेकेण्डरी स्कूलों तक पहुंच मार्ग निर्माण करने और साइकिल स्टैंड, शेड निर्माण के संबंध में जानकारी मांगी गई है। पहुंच मार्ग तथा साइकिल स्टैंड बनने से स्कूली विद्यार्थियों को राहत मिलेगी। 

100 विद्यार्थियों को रायपुर में निःशुल्क कोचिंग

दसवीं कक्षा उत्तीर्ण आगे नीट व जेईई की तैयारी करने के इच्छुक जिले के शासकीय विद्यालय से 10वीं उत्तीर्ण 50 नीट व 50 जेईई कुल 100 छात्र-छात्राओं को जिले के आरक्षण रोस्टर अनुसार चयन कर 01 जुलाई 2024 से देश की प्रतिष्ठित कोचिंग सेंटर ऐलेन की रायपुर शाखा में दो वर्ष की कोचिंग कराया जा रहा है। चयनित 100 छात्र-छात्राओं का शिक्षण शुल्क, आवास शुल्क एवं भोजन का खर्च का वहन भी जिला प्रशासन द्वारा डीएमएफ से किया जा रहा है।

सुबह का नाश्ता देकर बच्चों को स्कूल आने किया जा रहा प्रोत्साहित

कोरबा जिले के आकांक्षी विकासखण्ड पोड़ी-उपरोड़ा एवं कोरबा विधानसभा क्षेत्र अंतर्गत प्राथमिक शाला एवं माध्यमिक शाला के छात्र-छात्राओं को स्कूल प्रारंभ होने के पूर्व 9.30 बजे नाश्ता दिया जा रहा है। प्रत्येक प्राथमिक शाला-माध्यमिक शाला में कार्यरत महिला स्वसहायता समूह के रसोइया द्वारा ही नाश्ता तैयार कर गरम-गरम नाश्ता प्रदान किए जाने से स्कूलों में विद्यार्थियों की रूचि शाला आने में बढ़ी है।

 10वीं व 12वीं के छात्रों के गुणवत्ता में वृद्धि हेतु विशेष कार्ययोजना

कलेक्टर द्वारा जिले के समस्त 180 प्राचार्यों की बैठक लेकर निर्देशित किया गया है कि जिले के समस्त हाई स्कूल व हायर सेकेंडरी के 10वीं व 12वीं के छात्र/छात्राओं को एकीकृत पाठ्यक्रम अनुसार प्रत्येक विषय का अध्ययन विषय शिक्षकों द्वारा किया जाएगा तथा सितम्बर-दिसम्बर में संपूर्ण जिले के छात्रों की एकीकृत जांच परीक्षा आयोजित की जाएगी। जिसके लिए प्रश्न पत्र जिला स्तर पर तैयार किया जाएगा तथा उक्त परीक्षा के उत्तर पुस्तिका की जांच दूसरे विद्यालय के शिक्षकों द्वारा कराया जाएगा। दिसंबर में अर्धवार्षिक परीक्षा उपरांत कमजोर छात्रों का चिन्हांकन कर विकासखण्ड स्तर पर 4 विषय विशेषज्ञ द्वारा जनवरी फरवरी में बोर्ड परीक्षा के लिए विशेष तैयारी कराया जाएगा। जिला प्रशासन की इस पहल से जिले में शिक्षा की गुणवत्ता में वृद्धि होगी।

विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के लिए दी जाएगी छात्रवृत्ति

कोरबा जिले के निवासी तथा शासकीय विद्यालय से 12वीं उत्तीर्ण छात्र यदि मेडिकल, इंजीनियरिंग या देश के प्रतिष्ठित विश्विद्यालय में प्रवेश परीक्षा आधार पर विशेष कोर्स में चयन होने पर उनका शिक्षण शुल्क डीएमएफ मद से किया जाएगा। इस पहल से जिले के गरीब और शासकीय विद्यालय में अध्ययन करने वाले विद्यार्थियों को आगे बढ़ने का अवसर मिलेगा।

जाति प्रमाण पत्र बनाने की जा रही है पहल

कलेक्टर द्वारा सभी एसडीएम को निर्देशित कर स्कूल में पढ़ाई करने वाले कक्षा एक से 12वीं तक के विद्यार्थियों को जाति प्रमाण पत्र बनाने के निर्देश दिए हैं। इसके लिए जिला शिक्षा अधिकारी को भी निर्देशित किया गया है कि वे आरक्षित वर्ग के सभी विद्यार्थियों का जाति प्रमाण पत्र बनवाएं। इसके लिए विद्यार्थियों का रिकॉर्ड जुटाने तथा दस्तावेज उपलब्ध न होने पर ग्राम सभा के माध्यम से जाति प्रमाण पत्र बनाने के लिए पहल करने कहा गया गया।

विद्यार्थियों को बड़ा सपना देखने प्रेरित करें शिक्षक : राज्यपाल रमेन डेका

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रायपुर। राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने आज शिक्षक दिवस के अवसर पर राजभवन गरिमामयी समारोह में वर्ष 2023-24 के उत्कृष्ट शिक्षकों को राज्य स्तरीय सम्मान प्रदान किया। राज्यपाल डेका ने कहा शिक्षक विद्यार्थियों को बड़ा सपना देखने प्रेरित और पूरा करने प्रोत्साहित करें। उन्होंने कहा कि शिक्षक विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ-साथ नैतिक मूल्यों की भी शिक्षा देना सुनिश्चित करें।

राज्यपाल और मुख्यमंत्री ने वर्ष 2023-2024 के लिए सभी सम्मानित शिक्षकों को बधाई और शुभकामनाएं दी। प्रदेश के तीन महान साहित्यकारों के नाम पर 03 शिक्षकों को राज्य शिक्षक सम्मान स्मृति पुरस्कार तथा 52 शिक्षकों को राज्य स्तरीय शिक्षक पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने राज्य शिक्षक सम्मान वर्ष 2024-25 के लिए चयनित 64 शिक्षकों के नामों की घोषणा की।

राजभवन के दरबार हॉल में आज आयोजित राज्यस्तरीय समारोह में तीन उत्कृष्ट शिक्षकों बिलासपुर जिले की डॉ. रश्मि सिंह धुर्वे को डॉ. पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी स्मृति पुरस्कार, कबीरधाम जिले के राजर्षि पाण्डेय को डॉ. मुकुटधर पाण्डेय स्मृति पुरस्कार और दुर्ग जिले की डॉ. श्रीमती सरिता साहू को डॉ. बलदेव प्रसाद मिश्र स्मृति पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इस तरह प्रधान पाठक, व्याख्याता, व्याख्याता एल.बी., शिक्षक एल.बी., सहायक शिक्षक, सहायक शिक्षक एल.बी वर्ग के 52 शिक्षकों को राज्य स्तरीय शिक्षक सम्मान से सम्मानित किया गया।

इस गरिमामय कार्यक्रम को संबोधित करते हुए राज्यपाल रमेन डेका ने कहा कि गुणवत्तापूर्ण प्रतिभाओ के विकास में शिक्षकों की भूमिका महत्वपूर्ण है। शिक्षक समाज के प्रमुख नागरिक हैं। राज्यपाल ने कहा कि आजादी के 75 वर्ष बाद लार्ड मैकाले की शिक्षा पद्धति में बड़ा परिवर्तन हो रहा है, जिसका परिणाम भी अच्छा होगा।

राज्यपाल डेका ने कहा कि आज हर क्षेत्र में क्रांति हो रही है और शिक्षा के क्षेत्र में भी क्रांति हो रही है। शिक्षक इस क्रांति का एक हिस्सा है। शिक्षकों के पढ़ाने का तरीका बदल गया है, लेकिन इस बदलाव के साथ-साथ शिक्षा के गुणवत्ता पर भी ध्यान देना होगा। बच्चों में नैतिक मूल्यांे का विकास करने की जवाबदारी भी शिक्षकों की है।

डेका ने कहा कि माता-पिता एक बच्चे को जन्म देते हैं जबकि शिक्षक उस बच्चे के व्यक्तित्व को गढ़ते हैं और उसे उज्ज्वल भविष्य प्रदान करते हैं। शिक्षा के अलावा, शिक्षक बेहतर इंसान बनने के लिए मार्गदर्शन, प्रोत्साहन और प्रेरणा देने के लिए हर कदम पर हमारे साथ खड़े रहते हैं। शिक्षक ज्ञान और बुद्धि का स्रोत हैं। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार एक देश उतना ही अच्छा होता है जितने उसके लोग, उसी प्रकार उसके नागरिक भी उतने ही अच्छे होते हैं जितने उसके शिक्षक। इसलिए बहुत कुछ शिक्षकों पर निर्भर करता है कि बच्चों को अच्छी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दें। मैं सभी शिक्षकों को उनके जुनून, समर्पण, प्रतिबद्धता और योगदान के लिए सलाम करता हूं।

राज्यपाल डेका ने कहा कि शिक्षण सभी व्यवसायों की जननी है। शिक्षक दिवस हमें भविष्य की पीढ़ियों को और भी अधिक चुनौतियों का सामना करने और हमारे देश को मानव कल्याण के प्रति उच्च संवेदनशीलता के साथ एक उन्नत और विकसित राष्ट्र बनाने के लिए जिम्मेदारियों और प्रतिबद्धताओं की याद दिलाता है।

 मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि भारत में शिक्षक दिवस का जितना उत्साह और महत्व है वैसा शायद ही कहीं और देखने को नहीं मिलता। भूतपूर्व राष्ट्रपति भारत रत्न सर्वपल्ली डॉ. राधाकृष्णन की जयंती को हम सब शिक्षक दिवस के रूप में मनाते हैं। साय ने कहा कि भारत देश उत्तम शिक्षा के मामले में हमेशा से समृद्ध रहा है। गणित के क्षेत्र में शून्य भारत ने ही विश्व को दिया, आर्यभट्ट जैसे वैज्ञानिक और भाष्कराचार्य जैसे गणितज्ञ भारत में ही पैदा हुए। नागार्जुन जैसे रसायनज्ञ यहाँ हुए।

शिक्षकों ने देश को हमेशा नई दिशा दिखाई है। भले ही आज इंटरनेट की दुनिया में ज्ञान एक क्लिक पर उपलब्ध है लेकिन अनुभव भरा ज्ञान, संस्कारपूर्ण शिक्षा, जीवन जीने की कला, कौशल, उत्तम शैली की सीख केवल विद्यालयों में शिक्षकों के जरिए ही संभव है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसकी जरूरत को समझा और राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 लेकर आए। इस नीति के माध्यम से हमारी शिक्षा में आमूलचूल बदलाव की संभावना तैयार हुई है, जिसमें लोकल से वोकल तक के ज्ञान, सीख व समझ का समावेश किया गया है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति को हमने प्रदेश में भी लागू कर दिया है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत हमने प्रदेश में 9438 बालवाड़ियाँ आरंभ की हैं। हमने 18 स्थानीय भाषाओं में पढ़ाई की शुरुआत की है। इसके लिए किताबें बनाई हैं और शिक्षक इसे पढ़ा रहे हैं। यह बच्चों की नींव तैयार करने में काफी महत्वपूर्ण है। शिक्षा से नक्सलवाद का अँधियारा छँटने से बस्तर में अब शिक्षा की रोशनी भी तेजी से फैल रही है। बस्तर में वर्षों से बंद 29 स्कूलों को पुनः शुरू किया गया है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि आधुनिक समय एआई तथा रोबोटिक्स का है। हमारे बच्चे भी इसमें पीछे नहीं रहेंगे। हमने आदिवासी क्षेत्र के बच्चों के लिए भी स्कूलों में रोबोटिक्स तथा एआई की शिक्षा आरंभ कर दी है। नक्सल प्रभावित जिलों के बच्चों को उच्च शिक्षा के लिए हम बिना ब्याज के शिक्षा ऋण दे रहे हैं। हमारा सबसे ज्यादा ध्यान कौशल विकास पर है। छोटे-छोटे ट्रेड में बच्चों को थोड़ा भी प्रशिक्षित कर दें, तो उनके लिए बेहतर भविष्य की राह खुल जाती है। हम हाइटेक स्कूल तैयार कर रहे हैं। प्रदेश में पीएम योजना के अंतर्गत 211 स्कूलों का शुभारंभ किया गया है। इसके अलावा 52 स्कूलों की और स्वीकृति मिल गई है। यहाँ गुणवत्तायुक्त शिक्षा बच्चों को उपलब्ध कराई जा रही है। हमारी सरकार ने 13 नगरीय निकायों में नालंदा की तरह हाइटेक लाइब्रेरी की स्थापना का निर्णय लिया है।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि हमारी सरकार ने स्कूलों में न्योता भोज की भी पहल की है, इससे सामुदायिक सहयोग से स्कूलों में बच्चों को रूचिकर पोषण आहार मिल रहा। इस अवसर पर स्कूल शिक्षा सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी ने स्वागत उद्बोधन के साथ प्रतिवेदन का वाचन किया। आभार प्रदर्शन संचालक लोक शिक्षण श्रीमती दिव्या उमेश मिश्रा ने किया। स्कूल शिक्षा सचिव सिद्धार्थ कोमल परदेशी ने राज्यपाल डेका और मुख्यमंत्री साय को स्मृति चिन्ह स्वरूप पुस्तक भेंट की।

कार्यक्रम में आयुक्त जनसंपर्क मयंक श्रीवास्तव, राज्यपाल के विधिक सलाहकार भीष्म प्रसाद पाण्डेय, समग्र शिक्षा के प्रबंध संचालक संजीव झा, राज्यपाल की संयुक्त सचिव श्रीमती हिना अनिमेष नेताम सहित स्कूल शिक्षा विभाग के अधिकारी, शिक्षक, पत्रकारगण उपस्थित थे।


स्वामी आत्मानंद स्कूलों की संचालन समितियां होगी समाप्त : शिक्षा मंत्री बृजमोहन अग्रवाल

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रायपुर। स्कूल शिक्षा मंत्री श्री बृजमोहन अग्रवाल ने कहा है कि छत्तीसगढ़ की महान विभूति, शिक्षाविद् और समाज सुधारक और जन जागरण के पुरोधा स्वामी आत्मानंद जी के नाम पर तत्कालीन सरकार ने राज्य भर में अंग्रेजी और हिन्दी माध्यम उत्कृष्ट स्कूल खोल कर न सिर्फ शिक्षा और विद्यार्थियों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया है, बल्कि स्वामी आत्मानंद जी के नाम को भी धूमिल किया है।

इन स्कूलों के संचालन की जिम्मेदारी कलेक्टर की अध्यक्षता में गठित समिति के जिम्मे सौंप कर तत्कालीन सरकार ने इसका भविष्य कलेक्टरों की इच्छा पर सौंप दिया है। यह राज्य की शिक्षा व्यवस्था और विद्यार्थियों के भविष्य के लिए किसी भी स्थिति में उचित नहीं है। स्वामी आत्मानंद स्कूलों में शिक्षा की वर्तमान स्थिति, अनियमितता और कुप्रबंधन को देखते हुए हमारी सरकार ने इसके संचालन के लिए कलेक्टरों की अध्यक्षता में गठित समितियों को तत्काल प्रभाव से समाप्त करने का निर्णय लिया है। स्वामी आत्मानंद स्कूलों में शिक्षा-दीक्षा की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी अब शिक्षा विभाग की होगी।

शिक्षा मंत्री बृजमोहन अग्रवाल आज विधानसभा में स्वामी आत्मानंद स्कूलों के कुप्रबंधन एवं वहां व्याप्त अनियमितता के संबंध में ध्यानाकर्षण का जवाब देने के बाद पत्रकारों से चर्चा करते हुए उक्त बातें कही। मंत्री अग्रवाल ने कहा कि स्वामी आत्मानंद पूरे देश में पूज्यनीय हैं। हम सभी के मन में उनके लिए सम्मान है। पहले ये स्कूल जिन महान हस्तियों के नाम से जाने जाते थे, उनका नाम फिर से स्वामी आत्मानंद से पहले जोड़ा जाएगा।

मंत्री अग्रवाल ने यह भी कहा कि स्वामी आत्मानंद स्कूलों को लेकर अगर कोई अनियमितता की शिकायत मिलती है, तो उसकी जांच कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि राज्य में स्वामी आत्मानंद स्कूलों के पुनर्निर्माण और अन्य मदों में लगभग 800 करोड़ रुपए घोटाले की आशंका है। जहां भी शिकायत प्राप्त होगी, उसकी जांच कराई जाएगी। अकेले राजधानी रायपुर के आर.डी. तिवारी स्कूल में ही लगभग 4.5 करोड़ रुपए बिलिं्डग मरम्मत पर खर्च किए गए, जबकि इतनी राशि में एक नई बिलिं्डग का निर्माण हो जाता।

चिकित्सक का धर्म सर्वप्रथम मरीजों की सेवा करना है : राज्यपाल हरिचंदन

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रायपुर। राज्यपाल विश्वभूषण हरिचंदन ने कहा कि चिकित्सक का धर्म सबसे पहले मरीजों की सेवा करना है। चिकित्सक मरीजों के लिए भगवान की तरह होते हैं। उन्होंने चिकित्सा के विद्यार्थियों से गरीब मरीजों की सेवा करने का आवाहन किया। उक्त उद्गार राज्यपाल ने रायपुर इंस्टीटयूट ऑफ मेडिकल साइंसेज में कैथ लैब के उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान व्यक्त किये।

हरिचंदन ने कहा कि चिकित्सा के विद्यार्थियों को शिक्षा पूरी करने के बाद समाज और देश की सेवा करना चाहिए। विशेषकर ऐसे मरीजों का इलाज करना चाहिए जो गरीबी के कारण अपना इलाज अन्यत्र नहीं करा पा रहें हैं। उन्होंने कहा कि चिकित्सा का पेशा, श्रेष्ठ पेशों में से एक है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने कोविड-19 का सामना अत्यंत साहस के साथ किया और देश-दुनिया को दिखा दिया कि भारत चुनौतियों से निपटने के लिए पूरी तरह से सक्षम है।

डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ ने कोविड-19 के चुनौतीपूर्ण समय में मानवता की सेवा करके एक मिसाल कायम की। आपदा के इस समय के दौरान डॉक्टरों और पैरा मेडिकल स्टॉफ ने हमारे हौसले बुलंद रखे थे। उन्होंने ने कहा कि आपके द्वारा अक्षरशः ली गई सेवा की शपथ का पालन करते हुए, आपने पूरे देश के प्रति कर्तव्य और समर्पण का अर्थ समझाया है। उन्होंने कहा कि अपने जीवन में सफलता हासिल करे और समाज और राष्ट्र की सेवा करें। इस अवसर पर राज्यपाल को संस्थान की ओर से स्मृति चिन्ह भेंट किया गया। कार्यक्रम में रिम्स के कार्यकारी निर्देशक डॉ. के. के. वाधवा, डॉ. गम्भीर, डॉ. आदिले, फैकल्टी मेंबर एवं विद्यार्थी बड़ी संख्या में उपस्थित थे।

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