Media24Media.com: वातावरण

Responsive Ad Slot


 

Showing posts with label वातावरण. Show all posts
Showing posts with label वातावरण. Show all posts

आंगनबाड़ी केंद्रों में बचपन खिल उठा - प्ले स्कूल की तर्ज पर संवर रहा भविष्य

No comments Document Thumbnail

रायपुर। ‘‘मुस्कुराइए कि आप आंगनबाड़ी केंद्र में हैं...’’ - यह नारा अब वास्तविकता का रूप ले चुका है। राजनांदगांव जिले के सक्षम आंगनबाड़ी केंद्रों ने नन्हे बच्चों की शिक्षा और विकास को नया आयाम दिया है। यहां का वातावरण अब पारंपरिक आंगनबाड़ी केंद्र से आगे बढ़कर प्ले स्कूल और प्री-नर्सरी जैसा बन गया है, जहां बच्चे खेल-खेल में सीख रहे हैं और मुस्कुरा रहे हैं।

सक्षम आंगनबाड़ी केन्द्र क्रमांक 1 भोथीपार खुर्द, क्रमांक 3 सिंघोला और क्रमांक 3 भोथीपार खुर्द में बच्चों को बाल सुलभ तरीके से अक्षर ज्ञान, कविता, गीत और विविध जानकारी दी जा रही है। दीवारों पर आकर्षक चित्रकारी, शैक्षणिक सामग्री और बाल केंद्रित गतिविधियों के माध्यम से बच्चों में पढ़ाई के प्रति उत्साह देखा जा रहा है। ‘आलू कचालू बेटा कहां गए थे...’ जैसी कविताएं बच्चे बड़े आनंद से याद कर रहे हैं।

राज्य सरकार की योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन के चलते ग्रामीण क्षेत्रों के ये आंगनबाड़ी केंद्र जागरूकता, पोषण और शिक्षा के संगम स्थल बन गए हैं। लड़का-लड़की एक समान, अच्छी वजन की रेखा - अच्छा बच्चा देखा जैसे संदेशों से सामाजिक सोच में बदलाव आ रहा है। गर्भवती महिलाओं को गरम पौष्टिक भोजन, किशोरी बालिकाओं को स्वास्थ्य शिक्षा और बच्चों को नियमित पूरक पोषण आहार उपलब्ध कराया जा रहा है।

महिला एवं बाल विकास विभाग की मंत्री श्रीमती लक्ष्मी राजवाड़े ने बताया कि राज्य में आंगनबाड़ी केंद्रों को सशक्त बनाकर प्ले स्कूल की तर्ज पर विकसित किया जा रहा है, ताकि बच्चों को प्रारंभिक अवस्था से ही समग्र विकास का अवसर मिले। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में सरकार बच्चों, माताओं और किशोरियों की देखभाल को सर्वाेच्च प्राथमिकता दे रही है।

जिला कार्यक्रम अधिकारी श्रीमती गुरूप्रीत कौर ने बताया कि जिले में मुख्यमंत्री बाल संदर्भ योजना, प्रधानमंत्री मातृत्व वंदन योजना, महतारी वंदन योजना, नोनी सुरक्षा योजना और सुकन्या समृद्धि योजना का प्रभावी संचालन किया जा रहा है।

सक्षम आंगनबाड़ी केन्द्र क्रमांक 3 भोथीपार खुर्द में ‘मोर जन्म दिन’ नामक विशेष कैलेंडर के माध्यम से बच्चों का जन्मदिन उत्सवपूर्वक मनाया जा रहा है। यहां बच्चों के लिए खेल सामग्री, पढ़ाई की सामग्रियां और स्वच्छ वातावरण उपलब्ध है।

इस प्रयास में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता श्रीमती गोदावरी साहू, श्रीमती पूनम यादव और सहायिका की सक्रिय भूमिका उल्लेखनीय रही। बच्चों की मुस्कान और उनकी सक्रियता इस बात का प्रमाण है कि आंगनबाड़ी केंद्र अब केवल पोषण का ही नहीं, बल्कि शिक्षा, संस्कार और संवेदनशीलता का केंद्र बन गए हैं।


परंपरागत श्रद्धा-भक्ति और उल्लास के वातावरण में निकाली गई भव्य रथयात्रा

No comments Document Thumbnail

रायपुर। जशपुर ज़िले के ऐतिहासिक एवं प्राचीन जगन्नाथ मंदिर दोकड़ा में इस वर्ष भी रथयात्रा महोत्सव का आयोजन परंपरागत श्रद्धा, भक्ति और भव्यता के साथ किया गया। मंदिर से रथ यात्रा के रवाना होने से पहले मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय एवं उनकी धर्मपत्नी श्रीमती कौशल्या देवी साय ने जगन्नाथ मंदिर में पूरे विधि-विधान से भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र एवं बहन सुभद्रा की पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों के सुख, समृद्धि और कल्याण की मंगलकामना की। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने झाडू से रथयात्रा के मार्ग को बुहारकर छेरा-पहरा की रस्म निभाई।

मुख्यमंत्री साय ने हजारों श्रद्धालुओं के साथ भक्तिभावपूर्वक रथ यात्रा में भाग लिया। श्रद्धालुओं ने भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र एवं बहन सुभद्रा के रथ को रस्सी खींचकर आगे बढ़ाया। पूरा वातावरण जय जगन्नाथ के जयघोष, भजन-कीर्तन और भक्तिमय उल्लास से गूंज उठा। रथ यात्रा मुख्य मार्गों से होते हुए मौसीबाड़ी पहुंची। भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र एवं बहन सुभद्रा नौ दिनों तक अपनी मौसी के घर मौसीबाड़ी में विराजमान रहेंगे। नौवें दिन 5 जुलाई को शुभ वापसी श्री जगन्नाथ मंदिर, दोकड़ा में होगी। यह आयोजन ओडिशा के पुरी धाम की परंपरा के अनुरूप आयोजित किया गया है।

दोकड़ा में सन् 1942 से जारी है रथ यात्रा की परंपरा

रथ यात्रा की शुरुआत दोकड़ा में वर्ष 1942 में हुई थी। इसकी शुरूआत स्वर्गीय सुदर्शन सतपथी एवं उनकी धर्मपत्नी स्वर्गीय श्रीमती सुशीला सतपथी द्वारा श्रद्धा और समर्पण के साथ की गई थी। तब से यह परंपरा निरंतर श्रद्धा और उत्साह के साथ निर्विघ्न रूप से जारी है। समय के साथ यह आयोजन अब एक भव्य धार्मिक मेले का रूप ले चुका है, जिसमें श्रद्धालुओं की विशाल सहभागिता देखने को मिलती है।


रथ यात्रा के पावन अवसर पर ओडिशा से आमंत्रित कीर्तन मंडलियों ने भक्ति संगीत की मनमोहक प्रस्तुतियां दीं, जिससे वातावरण भक्तिमय हो उठा। साथ ही रथ यात्रा में अनेक धार्मिक एवं सांस्कृतिक झांकियां भी शामिल रहीं, जो भगवान श्री जगन्नाथ की महिमा और हमारी सांस्कृतिक विविधता की भव्यता को अत्यंत आकर्षक रूप में प्रदर्शित कर रही थीं।

नौ दिनों तक चलेगा धार्मिक पर्व

श्री जगन्नाथ मंदिर समिति दोकड़ा के सदस्यों ने बताया कि रथ यात्रा महापर्व नौ दिवसीय भव्य धार्मिक और सांस्कृतिक उत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस अवसर पर मंदिर परिसर और दोकड़ा गांव पूरे श्रद्धा और उत्साह से सराबोर रहता है। पूरे महोत्सव के दौरान विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान, भजन-कीर्तन, संगीतमय प्रस्तुतियाँ, सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ-साथ बच्चों और युवाओं के लिए विविध प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाता है, जो पूरे क्षेत्र को आध्यात्मिक ऊर्जा और सांस्कृतिक रंगों से भर देता है।


रथ यात्रा के उपलक्ष्य में दोकड़ा में एक विशाल मेले का भी आयोजन किया गया है, जो इस उत्सव की शोभा को और अधिक बढ़ा देता है। मेला परिसर में मनोरंजन के लिए झूले, स्वादिष्ट व्यंजनों के स्टॉल, पारंपरिक हस्तशिल्प की दुकानें और अन्य आकर्षण मौजूद हैं।  जो सभी के लिए आनंद का केंद्र बनते हैं। यह आयोजन आस्था, संस्कृति और सामाजिक समरसता का अद्भुत संगम है।

बलौदाबाजार जिले में अब शांति का वातावरण

No comments Document Thumbnail

रायपुर। बलौदाबाजार के कलेक्टोरेट और एसपी कार्यालय में बीते दिनों हुई आगजनी की घटना के बाद अब जिले में शांति का वातावरण है। कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी दीपक सोनी के मार्गदर्शन में जिला कार्यालयों में अब दैनिक व शासकीय कार्यों का संचालन सुचारू रूप से होने लगा है। जिले के ग्रामीणों द्वारा भी अब जिला कार्यालयों में आकर अपनी समस्याओं व शासकीय कार्यों के आवेदन जमा किए जा रहे हैं। कलेक्टर सोनी के निर्देश पर आज 11 हितग्राहियों को उनकी मांग पर तत्काल राशनकार्ड जारी कर किया गया। वहीं दो दिनों में लोकसेवा केन्द्रों के माध्यम से 389 प्रकरणों का त्वरित निराकरण किया गया है।

बालौदाबाजार जिले के कलेक्टर दीपक सोनी ने आज यहां बताया कि जिले में कलेक्टोरेट (कम्पोजिट बिल्डिंग) में आगजनी की घटना के बाद एक ओर जहां रेस्टोरेशन के कार्यों में तेजी लाई गई है, वहीं दूसरी ओर दूर दराज से कामकाज के सिलसिले में ग्रामीण आवेदन लेकर जिला कार्यालय पहुंच रहे है। कलेक्टर ने बताया कि आज खाद्य शाखा में बड़ी संख्या में आवदेक राशन संबधित कार्यों के सिलसिले में पहुंचे थे। जिस पर त्वरित कार्रवाई करते हुए 11 हितग्राहियों को नवीन राशन कार्ड एवं 8 हितग्राहियों को नवीनकरण राशन कार्ड प्रदान किया गया।

कलेक्टर सोनी ने इस दौरान ग्रामीणों का हालचाल पूछा और कामकाज के बारे में भी जानकारी ली। इस दौरान ग्रामीण कविता बाई ने महिला समूह से जुड़कर काम करने की इच्छा जताई जिस पर कलेक्टर सोनी ने कहा कि हम आने वाले दिनों में बिहान समूह का विस्तार करते हुए आजीविका गतिविधियों में तेजी लाएंगे और आपको समूह से जोड़कर आजीविका गतिविधियों से प्रशिक्षित भी करेंगे। 11 हितग्राहियों में विकासखंड कसडोल अंतर्गत ग्राम पिकरी से श्रीमती दुर्गेश्वरी यादव, छाछी से श्रीमती प्रीति साहू, सेल से श्रीमती गणेशी, बलौदाबाजार अंतर्गत भरसेला निवासी कुलेश्वरी, नगर से धनेश्वरी यादव, पूजा पटेल, कुंती यादव, लीलाबाई, आशा साय, रेशमा एवं मनीषा वर्मा, 8 नवीकरण राशन कार्ड हितग्राहियों में शहर बाई, प्रमिला बाई मानिकपुरी, कविता बाई, धरम बाई, शिवकुमारी, कौशल्या एवं प्रभा मानिकपुरी शामिल है। सभी ने प्रशासन के प्रति आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया है।

इसी तरह ग्राम सुकलाभाठा एवं चिराही से पहुँचे कुमारी मीनाक्षी निषाद पिता शिव कुमार निषाद तथा वासु आज़ाद पिता रमेश आज़ाद आधार अपडेट हेतु लोक सेवा केन्द्र पहुंचे, जिस पर तत्काल उन्हें अपडेशन के साथ आधार कार्ड कलेक्टर द्वारा प्रदान किया गया। कलेक्टर ने लोगों से छोटे बच्चे जिनका आधार अपडेट 5 साल एवं 14 साल में होना है वह अपडेट अनिवार्य रूप नवीन आधार कार्ड अपग्रेड करने के लिए प्रेरित किया।

गौरतलब है कि कलेक्टर दीपक सोनी आज सुबह 10 बजे जिला कार्यालय पहुंचे। उन्होंने नियमित कामकाज करते हुए अधिकारियों की मैराथन बैठक लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। सोनी ने आमजनों से मुलाकात कर उनके आवेदनों को समय-सीमा में निराकरण करने के निर्देश संबधित अधिकारियों को दिए है।

 


बच्चों में देशभक्ति की भावना जगाना गुरूजनों का दायित्व : शिक्षा मंत्री अग्रवाल

No comments Document Thumbnail

रायपुर। स्कूल शिक्षा मंत्री बृजमोहन अग्रवाल पंडित शंकरानन्द झा मेमोरियल स्कूल के 27वें वार्षिकोत्सव में शामिल हुए। उन्होंने इस मौके पर स्कूली बच्चों को सम्बोधित करते हुए पढ़ाई के साथ-साथ बच्चों में देश सेवा और राष्ट्रभक्ति की भावना जगाने का दायित्व हमारे गुरूजनों पर है। यही भावना हमें देश के लिए कुछ कर गुजरने की प्रेरणा देती है।

स्कूल शिक्षा मंत्री ने कहा कि विद्यार्थी एक पौधे के समान होते हैं और शिक्षक उस माली की तरह होता है जिसकी देखभाल से पौधे पनपकर एक फलदार वृक्ष का रूप ले लेते हैं। ऐसे में शिक्षकों की यह जिम्मेदारी है कि विद्यार्थियों को स्कूल में एक अच्छा वातावरण उपलब्ध कराए, उनसे अच्छा व्यवहार करें और उनकी छुपी प्रतिभा को सामने लाए।

वार्षिकोत्सव में विद्यार्थियों ने देशभक्ति, लोकनृत्य सहित मनमोहक सांस्कृतिक कार्यक्रम की प्रस्तुति दी। इस अवसर पर स्कूल के निदेशक रविन्द्र झा, प्राचार्या डॉ. बबीता झा, प्रशासनिक प्रमुख ऋषि झा, शैक्षणिक प्रमुख श्रीमती विनिता अग्रवाल तथा शिक्षक व छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

 


शिक्षा में रचनात्मकता को बढ़ावा दिया जाये - राज्यपाल विश्वभूषण हरिचंदन

No comments Document Thumbnail

रायपुर। रचनात्मकता शिक्षा की वास्ताविक क्षमता को उजागर करने की कुंजी है। शिक्षा में रचनात्मकता की शक्ति का उपयोग करने के लिए, हमें ऐसे वातावरण को बढ़ावा देना चाहिए जो प्रयोग और जोखिम लेने को प्रोत्साहित करे। शिक्षकों को रचनात्मक शिक्षण विधि से पढ़ाने के लिए सशक्त बनाया जाना चाहिए। राज्यपाल विश्वभूषण हरिचंदन ने भोपाल में चल रहे अंतर्राष्ट्रीय साहित्य उत्सव में आयोजित परिचर्चा में उक्त विचार व्यक्त किया। 

संस्कृति मंत्रालय भारत सरकार एवं साहित्य अकादमी द्वारा रवींद्र भवन भोपाल में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय साहित्य उत्सव ‘‘उन्मेष‘‘ के अंतर्गत आज रचनात्मकता बढ़ाने वाली शिक्षा विषय पर परिचर्चा आयोजित की गई थी। जिसमें राज्यपाल हरिचंदन बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुये। परिचर्चा में राज्यपाल ने हरिचंदन ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि रचनात्मकता अकादमिक विषयों की गहरी समझ को बढ़ावा देती है। जब छात्रों को रचनात्मक रूप से सोचने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, तो वे रटने तक ही सीमित नहीं रहते हैं, बल्कि वे विभिन्न दृष्टिकोणों का पता लगाते हैं और विभिन्न समाधानों के साथ प्रयोग करते हैं।

यह प्रक्रिया उनके महत्वपूर्ण सोच कौशल को बढ़ाती है और उन्हें जटिल अवधारणाओं को अधिक आसानी से समझने में सक्षम बनाती है। इसके अलावा, रचनात्मकता जिज्ञासा पैदा करती है। यह विद्यार्थियों को अपने आसपास की दुनिया पर सवाल उठाने और पाठ्यपुस्तकों की सीमाओं से परे उत्तर खोजने के लिए मजबूर करता है। उनकी सहज जिज्ञासा को पोषित करने से शिक्षा एक कठिन कार्य के बजाय मनोरंजक बन जाती है। जिज्ञासु दिमाग सीखने के लिए अधिक व्यस्त और प्रेरित होते हैं, जिससे शैक्षिक अनुभव अधिक सार्थक और स्थायी हो जाता है।

राज्यपाल ने आगे कहा कि जब विद्यार्थियों को लीक से हटकर सोचने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, तो वे असफलताओं को सफलता की सीढ़ी के रूप में स्वीकार करना सीखते हैं। वे समझते हैं कि गलतियाँ डरने की चीज नहीं हैं बल्कि मूल्यवान सबक हैं जिनका उपयोग उनके विचारों और दृष्टिकोणों को परिष्कृत करने के लिए किया जा सकता है। यह लचीलापन एक आवश्यक जीवन कौशल है जो कक्षा से परे जाकर उन्हें अपने व्यक्तिगत और व्यावसायिक जीवन में चुनौतियों का सामना करने के लिए तैयार करता है।

जब कला, लेखन या किसी अन्य रचनात्मक माध्यम के माध्यम से खुद को अभिव्यक्त करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है, तो उनमें अपनी भावनाओं और दूसरों की भावनाओं की गहरी समझ विकसित होती है। यह सहानुभूति एक अधिक दयालु समाज की मजबूत नींव बनाती है। हरिचंदन ने शिक्षको, माता-पिता और समाज से अपील करते हुए कहा कि शिक्षा में रचनात्मकता को बढ़ावा देने के लिए सभी साथ मिलकर काम करें और हमारे बच्चों के जीवन और उनके द्वारा आकार दी जाने वाली दुनिया पर इसके परिवर्तनकारी प्रभाव को देखें। परिचर्चा कार्यक्रम की अध्यक्षता रमेश पोखरियाल निशंकने की। अन्य वक्ताओं के रूप में चक्रधर त्रिपाठी, गिरीश्वर मिश्र, गोविंद प्रसाद शर्मा, शांतिश्री धुलिपुड़ी पंडित और वी. कामकोटि उपस्थित रहे।

बच्चे ही हमारा भविष्य, इनके लिए शिक्षा का बेहतर वातावरण देना और संसाधन तैयार करना हमारी जिम्मेदारी : मुख्यमंत्री भूपेश बघेल

No comments Document Thumbnail

रायपुर। आज के दौर में स्कूलों में शिक्षा का वातावरण बनाना जरूरी है। बच्चों को शिक्षा के साथ खेलकूद और अनुशासन पर भी ध्यान देना है। छात्र जीवन में ही समय की कीमत समझनी होगी। उक्त बातें मुख्यमंत्री भूपेश बघेल  ने शिक्षा सत्र 2023-24 के शुभारंभ और शाला प्रवेशोत्सव के मौके पर आज प्रोफेसर जेएन पांडेय शासकीय उत्कृष्ट हिन्दी माध्यम विद्यालय  में कहीं। 

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि प्रत्येक स्कूल शिक्षा का मंदिर होता है और इस मंदिर को भी  हमेशा साफ सुथरा रहना चाहिए। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि स्वामी आत्मानंद स्कूलों के खुलने से राज्य में शिक्षा के प्रति फिर से रूझान बढ़ा है और वर्तमान में प्रत्येक वर्ग के लोग अपने बच्चों को इन स्कूलों में पढ़ाने के लिए प्रयासरत हैं।

मुख्यमंत्री ने तिलक लगाकर व मिठाई खिलाकर छात्रों को कराया शाला प्रवेश

मुख्यमंत्री ने शाला प्रवेशोत्सव के मौके पर स्कूली बच्चों को तिलक लगाकर, माला पहनाकर तथा उन्हें मिठाई खिलाकर शाला प्रवेश कराया। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने स्कूली बच्चों को गणवेश, पुस्तकें तथा स्कूल बैग का भी वितरण किया। मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों, शिक्षक-शिक्षिकाओं, प्राचार्यों  और अभिभावकों को नये शिक्षा सत्र के शुभारंभ और शाला प्रवेशोत्सव की बधाई देते हुए कहा कि यही बच्चे हमारा भविष्य हैं और इन बच्चों को शिक्षा का उचित वातावरण देना हमारी जिम्मेदारी है ताकि इनका पढ़ाई में मन लगा रहे।

स्कूल के जीर्णोद्धार के लिए 5 करोड़ रूपए की राशि स्वीकृत

मुख्यमंत्री ने ऐतिहासिक प्रो जेएन पांडेय शासकीय उत्कृष्ट हिन्दी माध्यम स्कूल के जीर्णोद्धार के लिए 5 करोड़ रूपए की राशि स्वीकृत करते हुए कहा कि शिक्षा के मंदिरों को सुदृढ़ और सुंदर बनाने के लिए राशि की कभी कभी भी आड़े नहीं आएगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने प्रदेश के स्कूलों के जीर्णोद्धार और मरम्मत के लिए बजट में 12 सौ करोड़ रूपए की राशि स्वीकृत की थी। इस राशि से वर्तमान में 23 हजार स्कूलों में काम चल रहा है।

दूसरे चरण में 4318 बालवाड़ियों का शुभारंभ

शाला प्रवेशोत्सव के अवसर पर मुख्यमंत्री बालवाड़ी योजना के दूसरे चरण में वर्चुअल रूप से 4 हजार 3 सौ 18 बालवाड़ियों का शुभारंभ किया। राज्य में बालवाड़ियों के जरिए पांच से छः वर्ष के  बच्चों को बुनियादी शिक्षा के प्रति जागरुक करने का प्रयास किया जाता है। बालवाड़ी में बच्चों को  खेल-खेल में शिक्षा प्रदान की जाती है ताकि स्कूल जाने में उन्हें कोई घबराहट का सामना न करना पड़े।  बालवाड़ी योजना के पहले चरण में 5 सितंबर 2022 को 5 हजार 1 सौ 73 बालवाड़ी की शुरूआत की गयी थी।

ऐतिहासिक स्कूल है प्रो. जेन पांडेय शासकीय उत्कृष्ट हिंदी माध्यम विद्यालय, राज्य  को यहां से मिले हैं 4 मुख्यमंत्री और एक उप राष्ट्रपति

प्रो. जेएन पांडेय स्कूल एक ऐतिहासिक स्कूल है। इस स्कूल की स्थापना सन 1864 में हुई थी और ये स्कूल कभी कलकत्ता विश्वविद्यालय तथा इलाहाबाद विश्वविद्यालय से भी संबद्ध रहा है। इस स्कूल ने राज्य को चार मुख्यमंत्री दिए हैं। स्व. पं. रविशंकर शुक्ल, स्व. द्वारका प्रसाद मिश्रा, स्व. श्यामा चरण शुक्ल तथा स्व. मोती लाल वोरा इसी स्कूल के विद्यार्थी रहे हैं। इसके साथ ही देश के पूर्व उपराष्ट्रपति स्व. हिदायतुल्ला भी इसी स्कूल के विद्यार्थी रहे हैं।

शाला प्रवेशोत्सव के मौके पर छत्तीसगढ़ हाउसिंग बोर्ड के अध्यक्ष एवं विधायक कुलदीप जुनेजा,  रायपुर नगर निगम के महापौर ऐजाज ढेबर, छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम के अध्यक्ष गिरीश देवांगन, छत्तीसगढ़ गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष महंत रामसुंदर दास,  शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव आलोक शुक्ला, शिक्षा विभाग के सचिव डॉ एस भारती दासन समेत विभाग के अधिकारी तथा स्कूलों के विद्यार्थी, शिक्षक, प्राचार्य एवं अभिभावक मौजूद थे।

व्यापारी भयमुक्त व्यापार करें, अनुचित परेशान करने वालों पर होगी कार्रवाई

No comments Document Thumbnail

दुर्ग। शासन का काम भयमुक्त वातावरण बनाना है। आपके साथ हम खड़े हैं। भिलाई के कुछ व्यापारियों ने मेरे पास एक थाने के अधिकारियों पर अनुचित दबाव डालने की शिकायत की। मैंने जांच कराई और आरोप सही पाए जाने पर अधिकारी पर कार्रवाई के निर्देश दिए। अग्रवाल समाज के कार्यक्रम में अपने संबोधन में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने अग्रसेन जयंती की बधाई देते हुए कहा कि आज आपके साथ सुखदुख साझा करने आया हूँ।



अग्रसेन महाराज के योगदान की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि वे व्यापार और निर्माण पर जोर देते थे। कुरुक्षेत्र के युद्ध में पांडवों के भंडार की देखरेख का जिम्मा आपके पूर्वजों का था। गांधी जी भी आपके समाज से थे, उन्होंने पूरा जीवन सत्य और अहिंसा से बिताया। आप निर्भय व्यापार करें। आपको सत्य मार्ग में विचलित करने के लिए कोई भी आगे आएगा तो उस पर कार्रवाई करेंगे। मुख्यमंत्री ने कहा कि मेरे पास व्यापारिक समुदाय के लोग आए। 


उन्होंने पूछा कि सभी वर्गों के लिए कुछ किया। हमारे लिए आपका योगदान क्या है। मैंने कहा कि गांव में किसान के पास पैसा आता है तो यह बाजार में आता है। किसान खेत में निवेश करता है तो बाजार में आता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि समय समय पर किसानों को मिलने वाली किश्त बाजार में आती है और अन्ततः आप भी समृद्ध होते हैं। दीपावली को देखते हुए हमने निश्चय किया कि 15 अक्टूबर को हम किश्त दे देंगे ताकि किसानों की भी दीवाली अच्छी हो और व्यापारियों की भी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि लोग मुझसे कहते हैं कि आप भी बनिया ही हो। गोबर को भी काम की चीज बना दिया और उससे भी पैसा बाजार में आ गया। कोरोना काल में अग्रवाल समाज द्वारा किये गए कार्यों की प्रशंसा करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस कार्य से समाज के बड़े वर्ग को लाभ पहुंचा। अपने संबोधन में विधायक देवेंद्र यादव ने कहा कि  भिलाई में समाज सेवा में अग्रवाल समाज की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण रही है। 

मैंने अग्रवाल समाज से समन्वय सीखा है। इस मौके पर अपने संबोधन में महापौर नीरज पाल ने कहा कि कोविड काल में अग्रवाल समाज ने जिस तरह से भिलाई शहर में सेवा की, वो प्रशंसनीय है। इस मौके पर विधायक अरुण वोरा, पूर्व विधायक प्रदीप चौबे,  अंत्यावसायी निगम की उपाध्यक्ष श्रीमती नीता लोधी एवं समाज के गणमान्य नागरिक मौजूद थे।

अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस : साक्षरता सप्ताह 08 से 14 तक होगा कार्यक्रम का आयोजन

No comments Document Thumbnail

महासमुंद। जिले में साक्षरता कार्यक्रम वातावरण बनाने के लिए गुरुवार 08 सितम्बर से बुधवार 14 सितम्बर 2022 तक अन्तर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस का आयोजन किया जाएगा। दुनियाभर में 08 सितम्बर को विश्व साक्षरता दिवस के रूप में मनाया जाता है। इस वर्ष 2022 साक्षरता दिवस की थीम ‘‘ट्रांसफॉर्मिंग लिटरेसी लर्निंग स्पेस’’ है। इसी तरह वर्ष 2021 साक्षरता दिवस की थीम ‘‘मानव-केंद्रित पुनर्प्राप्ति के लिए साक्षरता डिजिटल विभाजन को कम करना’’ विषय पर थी।



साक्षरता कार्यक्रम के लिए विशेष रणनीति तैयार कर सभी वर्गों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी। कलेक्टर निलेशकुमार क्षीरसागर ने संबंधित अधिकारियों से आज समय-सीमा की बैठक में तैयारियों की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि साक्षरता आज की सबसे बड़ी जरूरतों में से एक है इसका सामाजिक एवं आर्थिक विकास से गहरा संबंध है। मानव विकास और समाज के लिए उनके अधिकारों को जानने और साक्षरता की ओर मानव चेतना को बढ़ावा देने के लिए यह दिवस मनाया जाता है। साक्षरता में वो क्षमता है जो परिवार और देश की प्रतिष्ठा को बढ़ा सकता है। इसलिए लगातार शिक्षा को प्राप्त करने के लिए परिवार और समाज के लोग अपनी जिम्मेदारी को भी समझें।

विभागीय अधिकारी ने कार्यक्रम की रूपरेखा बताया कि साक्षरता सप्ताह के अंतर्गत (अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस) 08 सितम्बर को जिले के समस्त सरकारी, गैर सरकारी स्कूलों में प्रातः प्रभात फेरी/साक्षरता रैली आयोजन किया जाएगा। इसके अलावा साक्षरता संदेश व नारे का वाचन होगा। दूसरे दिन शुक्रवार 09 सितम्बर को जिला स्तर से लेकर ग्राम पंचायत स्तर तक विभिन्न संस्थाओं में साक्षरता संगोष्ठी/परिचर्चा आयोजित की जाएगी। इसमें साहित्यकार, लेखक, पत्रकार, अधिकारी-कर्मचारी, सामाजिक कार्यकर्ता, शिक्षावृत्त साक्षरता कार्यक्रम से जुड़े शासकीय, अशासकीय व्यक्ति की भागीदारी सुनिश्चित की जाएगी।

वहीं साक्षरता सप्ताह के तीसरे दिन 10 सितम्बर को जिले के शैक्षणिक संस्थाओं में नवभारत साक्षरता कार्यक्रम पर केन्द्रित गीत, नृत्य, पेंटिंग, चित्रकला, मेंहदी एवं रंगोली का आयोजन होगा। इसमें विशेष रूप से छात्र-छात्राएं, शिक्षक, अभिभावक गणों की भागीदारी ज्यादा से ज्यादा होगी। साक्षरता सप्ताह के चौथे दिन 11 सितम्बर को महिला साक्षरता पर केन्द्रित कार्यक्रम होंगे। इसमें आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, स्व सहायता समूह, मितानिन आदि की भागीदारी होगी। इस मौके पर महिला स्वास्थ्य एवं स्वच्छता पर चर्चा, लोकगीत, लोक परम्परा पर चर्चा एवं पारम्परिक खेलों का आयोजन होगा।

साक्षरता सप्ताह के पांचवे दिन 12 सितम्बर को विद्यालयीन और महाविद्यालय छात्र-छात्राओं के बीच भाषण, निबंध, पोस्टर आदि प्रतियोगिता का आयोजन होगा। छठवें दिन 13 सितम्बर को न्यू इंडिया लिटरेसी प्रोग्राम (एनआईएलपी) के शिक्षार्थियों का लेखन कार्यक्रम, प्रौढ़ शिक्षार्थियों हेतु चित्रलेख और लिखों कार्यक्रम का आयोजन होगा। साक्षरता सप्ताह के अंतिम दिन 14 सितम्बर को सम्मान एवं सामूहिक संकल्प कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा। इसमें जिला स्तर साक्षरता, शिक्षा के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने वाले व्यक्तियों, शिक्षकों को सम्मानित किया जाएगा।

मालूम हो कि अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस मनाने की योजना यूनेस्को द्वारा 07 नवम्बर 1965 को की गयी थी कि हर वर्ष 08 सितम्बर को विश्व साक्षरता दिवस मनाया जाएगा। इस प्रकार पहला अंतर्राष्ट्रीय साक्षरता दिवस 08 सितम्बर 1966 को मनाया गया। मनाने का उद्देश्य लोगों को शिक्षा के प्रति जागरूक करना है और व्यक्ति, समाज, समुदाय का ध्यान आकर्षित करने के लिए साक्षरता दिवस मनाया जाता है।

Don't Miss
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.