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ई-वे बिल के प्रावधान में छूट समाप्त करने से ईमानदारी से टैक्स जमा करने वाले व्यापारियों को होगा फायदा

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रायपुर। वाणिज्यिक कर (जीएसटी) विभाग द्वारा कर अपवंचन पर निगरानी तंत्र को मजबूत बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुये राज्य में ई-वे बिल के प्रावधानों में दी गई छूट को समाप्त कर दिया गया है। इसके लिए सरकार ने 24 मई को ही अधिसूचना जारी कर दी है। राज्य में व्यवसायियों के लिए अब 50 हज़ार रूपए से अधिक के गुड्स का परिवहन करने पर ई-वे बिल जेनरेट करना आवश्यक होगा। अभी तक राज्य में एक जिले के भीतर माल के परिवहन करने पर ई-वे बिल जारी करना आवश्यक नहीं था, साथ ही 15 वस्तुओं को छोड़ कर राज्य के भीतर किसी भी वस्तु के परिवहन पर ई-वे बिल कि आवश्यकता नहीं थी।


वर्ष 2018 में ई-वे बिल के प्रावधानों से छूट इसलिए दी गई थी क्योंकि ये प्रावधान नए थे और व्यवसायियों/ट्रांसपोर्टर्स को इन प्रावधानों से अच्छी तरह परिचित होने के लिए समय दिया जाना जरूरी था। देश भर में ई-वे बिल के प्रावधान लागू हुये अब 6 साल का समय हो गया है और सभी इससे अच्छी तरह परिचित भी हो चुके हैं, यहाँ यह बात उल्लेखनीय है कि एक दो राज्यों को छोडकर देश के अधिकांश राज्यों में राज्य के भीतर माल के परिवहन पर ई-वे बिल अनिवार्य है। केंद्रीय कर विभाग द्वारा भी ई-वे बिल से छूट को खत्म करने पर सहमति दी गई है।

ई-वे बिल जारी करने में दिये गए छूट का सबसे अधिक दुरुपयोग सर्क्युलर ट्रेडिंग करने वाले और बोगस बिल जारी करने वालों ने किया है, इसलिए इस छूट को समाप्त किए जाने का सबसे अधिक लाभ उन व्यवसायियों को होगा जो ईमानदारी से अपना कर जमा करते हैं परंतु सर्क्युलर ट्रेडिंग या बोगस बिल जारी करने वालों के कारण उन्हें आइ.टी.सी. का लाभ नहीं मिल पाता है। ई-वे बिल के प्रावधान लागू होने से सर्क्युलर ट्रेडिंग और बोगस बिलिंग रोकने में विभाग को मदद मिलेगी।

ई-वे बिल के प्रावधानों में दी गई छूट को समाप्त किए जाने से राज्य में कर अनुपालन के वातावरण में सकारात्मक प्रभाव होगा। इससे बोगस बिल जारी करने, कच्चा बिल जारी करके कर अपवंचन करने की प्रवृत्तियों पर अंकुश लगेगा।

 


वाणिज्यिक कर विभाग के अधिकारियों/कर्मचारियों के स्थानांतरण आदेश जारी

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रायपुर। वाणिज्यिक कर विभाग के अधिकारियों/कर्मचारियों के स्थानांतरण आदेश जारी। 21 अधिकारी/कर्मचारी हुए स्थानांतरित। वाणिज्यिक कर-जी.एस.टी. विभाग में पदस्थ संयक्त आयुक्त राज्य कर के 05, राज्य कर उपायुक्त के 02, सहायक आयुक्त राज्य कर के 12,  एक राज्य कर अधिकारी एवं एक निरीक्षक राज्य कर सहित 21 अधिकारी/कर्मचारियों के आदेश राज्य कर आयुक्त कार्यालय ने जारी किए हैं।

इनमें से विशेष रुप से ऐसे अधिकारियों/कर्मचारियों का स्थानांतरण किया गया है जो लंबे समय से एक ही स्थान पर थे और जिनके ख़िलाफ़ लंबे समय से शिकायतें आ रही थी। साथ ही बेहतर काम करने वाले अधिकारी/कर्मचारियों को नई पदस्थापना भी दी गई है। विभागीय मंत्री ओ.पी.चौधरी का कहना है कि, जीएसटी विभाग व्यापारियों के साथ ही आमजनों से जुड़ा विभाग है, अतः विभाग के कार्यों में और अधिक पारदर्शिता के साथ तेज़ी लाने स्थानांतरण आदेश जारी किये गए हैं। 

जीएसटी विभाग द्वारा समय समय पर नियमों की जानकारी देने व्यापारियों के लिए कार्यशालाएं भी आयोजित की जाएंगी। साथ ही केंद्र सरकार द्वारा समय समय पर नियमों की जानकारी एवं इज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस सुनिश्चित करने भी विभाग को निर्देशित किया जाता है। अधिकारियों/कर्मचारियों के स्थानांतरण से विभागीय कार्यों में और अधिक पारदर्शिता के साथ सुगमता लाने के मकसद से उक्त स्थानांतरण आदेश जारी किए गए हैं।

उप मुख्यमंत्री टी.एस. सिंहदेव जीएसटी परिषद की बैठक में हुए शामिल

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रायपुर। उप मुख्यमंत्री तथा वाणिज्यिक कर मंत्री टी.एस. सिंहदेव आज केन्द्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमन की अध्यक्षता में आयोजित जीएसटी परिषद की ऑनलाइन बैठक में शामिल हुए। जीएसटी परिषद की 51वीं बैठक में जीएसटी से संबंधित अधिसूचनाओं और परिपत्रों के अनुसमर्थन तथा जीएसटी कार्यान्वयन समिति के निर्णय पर चर्चा की गई।

साथ ही सीजीएसटी अधिनियम-2017, आईजीएसटी अधिनियम-2017 एवं सीजीएसटी नियम-2017 में संशोधन करने और कैसिनो, ऑनलाइन गेमिंग तथा घुड़दौड़ से संबंधित अधिसूचनाएं जारी करने व संशोधन के प्रस्ताव पर भी विचार-विमर्श किया गया। सिंहदेव ने बैठक में इन दोनों बिंदुओं पर अपने सुझाव रखे। वाणिज्यिक कर विभाग के आयुक्त रितेश अग्रवाल भी बैठक में रायपुर से ऑनलाइन शामिल हुए।

सीएम भूपेश बघेल ने राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी योजना मुख्यमंत्री वृक्ष संपदा योजना का किया शुभारंभ

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रायपुर। मुख्यमंत्री ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री वृक्ष सम्पदा योजनावाणिज्यिक वृक्षारोपण करने वाले हितग्राहियों के लिए आर्थिक दृष्टि से, पर्यावरण, सॉइल हेल्थ की दृष्टि से महत्वपूर्ण योजना साबित होगी। उन्होंने कहा कि यह प्रसन्नता का विषय है कि बस्तर और सरगुजा के लोगों ने जहां प्रदेश में सर्वाधिक वन हैं, वृक्षारोपण की इस योजना में गहरी रूचि दिखाई है। मैदानी इलाके के दुर्ग और रायपुर संभाग में हितग्राहियों ने कम रूचि दिखाई है। जबकि यहां वृक्षों की ज्यादा जरूरत है।

मुख्यमंत्री ने वन विभाग के अधिकारियों को निर्देशित किया कि दुर्ग और रायपुर संभाग में इस योजना को व्यापक प्रचार-प्रसार कर योजना से होने वाले लाभों की जानकारी लोगों को दी जाए, ताकि इस क्षेत्र में भी वृक्षारोपण को बढ़ावा मिले। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ के जंगल और यहां की जैव विविधता छत्तीसगढ़ की पहचान है। हमारी कला, संस्कृति, परम्पराएं, दर्शन, चिंतन, आध्यात्म, इतिहास सब कुछ हमारे जंगलों से जुड़ा है। छत्तीसगढ़ के वन पूरे देश की धरोहर है। इन वनों से पूरे देश का पर्यावरण जुड़ा हुआ है।

उन्होंने कहा कि हमारे जंगल बचे रहे, हमारा पर्यावरण बचा रहे, जंगल से जुड़ी हमारी गौरवशाली संस्कृति बची रहे और खूब फले-फूले इस दिशा में बीते चार वर्षों के दौरान हमारी सरकार ने लगातार काम किया है। मुख्यमंत्री बघेल ने कहा कि यह योजना देश में एक अनूठी योजना है, जिसमें वाणिज्यिक प्रजातियों का वृक्षारोपण कर निजी व्यक्ति, संस्था अथवा कम्पनियों के माध्यम से अधिकाधिक लाभ कमा सकते हैं। यह केवल वृक्षारोपण की योजना न होकर देश के जलवायु परिवर्तन की दिशा में भी हमारी सहभागिता और प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

मुख्यमंत्री वृक्ष संपदा योजना में सभी वर्ग के इच्छुक किसानों की पड़त भूमि में वाणिज्यिक वृक्षारोपण होगा। योजना के तहत 33 जिलों के 23 हजार 600 किसानों द्वारा 36 हजार 230 एकड़ में वृक्षारोपण किया जाएगा। योजना से किसानों को सालाना प्रति एकड़ 15 से 50 हजार रूपए तक की आय होगी। इसके अलावा कार्बन क्रेडिट के माध्यम से भी किसानों को अतिरिक्त आय होगी।

वन एवं पर्यावरण मंत्री मोहम्मद अकबर ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ वन संपदा की दृष्टि से बहुत समृद्ध राज्य है। मुख्यमंत्री वृक्ष संपदा योजना के माध्यम से अगले 5 वर्षों में 1 लाख 80 हजार एकड़ में वृक्षारोपण किया जाएगा। यह योजना हितग्राहियों की आय में वृद्धि के साथ-साथ पर्यावरण संतुलन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण योजना है। योजना में 5 एकड़ में वाणिज्यिक वृक्षारोपण करने वाले हितग्राहियों को शतप्रतिशत अनुदान तथा 5 एकड़ से अधिक भूमि पर वृक्षारोपण करने वाले हितग्राहियों को 50 प्रतिशत अनुदान देने का प्रावधान किया गया है।

मुख्यमंत्री वृक्ष संपदा योजना का लाभ किसान, इच्छुक भूमि स्वामी, शासकीय, अर्ध शासकीय एवं शासन के स्वायत्त संस्थाएं, निजी शिक्षण संस्थाएं, निजी ट्रस्ट, पंचायत तथा भूमि अनुबंध धारक उठा सकते हैं। छत्तीसगढ़ में योजना के तहत इस वर्ष 12 प्रकार की प्रजाति के वृक्ष का रोपण किया जाएगा। इनमें क्लोनल यूकलिप्टस, रूटशूट टीक, टिश्यू कल्चर, चंदन, मेलिया दुबिया, सामान्य बांस, टिश्यू कल्चर बम्बू, रक्त चंदन, आंवला, खमार, शीशम तथा महानीम आदि के पौधे रोपे जाएंगे।

मोबाईल एप का लोकार्पण

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कार्यक्रम के दौरान सामुदायिक वन संसाधन अधिकार जारी करने की प्रक्रिया को ट्रेक करने हेतु मोबाइल एप का लोकार्पण भी किया। इस मोबाइल एप के उपयोग से सामुदायिक वन संसाधन अधिकार प्राप्त करने की पूरी प्रक्रिया सरलीकृत होगी। सामुदायिक वन संसाधन अधिकार के आवेदन से लेकर अधिकार प्राप्ति तक 12 स्तर की प्रक्रिया है तथा 18 प्रपत्रों में जानकारी भरी जाती है। मोबाइल एप के माध्यम से अधिकार प्राप्त करने की प्रक्रिया का मॉनिटरिंग भी की जा सकती है।

नेशनल टांजिट परमिट सिस्टम लॉन्च

मुख्यमंत्री बघेल ने वन विभाग द्वारा वनोपज के परिवहन हेतु तैयार कराए गए नेशनल ट्रांजिट परिमिट सिस्टम को लॉन्च किया। इस सुविधा के अंतर्गत आवेदक ट्रांजिट परमिट के लिए ऑनलाईन आवेदन कर सकते हैं तथा वन विभाग ऑनलाईन ट्रांजिट परमिट जारी करेगा। अंतरराज्यीय सीमा में नये टी.पी. की आवश्यकता नहीं होगी। मध्यप्रदेश, पश्चिम बंगाल एवं जम्मू कश्मीर के बाद छत्तीसगढ़ एनटीपीएस योजना को लागू करने वाला चौथा राज्य बन गया है।

सकरी नदी पुनर्जीवन कार्यक्रम का शुभारंभ

मुख्यमंत्री कार्यक्रम में कवर्धा जिले के सकरी नदी को संरक्षित करने तथा नदी का बहाव अपने पूर्ण क्षमता पर लाने के उद्देश्य से वृक्षारोपण के माध्यम से सकरी नदी पुनर्जीवन कार्यक्रम की शुरूआत की। जिसके तहत वन एवं राजस्व भूमि में नदी तट वृक्षारोपण कार्य, निजी भूमि में मुख्यमंत्री वृक्ष सम्पदा योजना के अंतर्गत वृक्षारोपण, वन क्षेत्रों में नरवा योजना के अंतर्गत कैम्पा मद से जल एवं मृदा संरक्षण कार्य तथा राजस्व क्षेत्र में मनरेगा अंतर्गत रोपण एवं संरचानाओं का निर्माण किया जाएगा।

इस एकीकृत परियोजना से कर्वधा जिले में किसानों को घरेलू उपयोग तथा कृषि के लिए सिंचाई हेतु पर्याप्त पानी उपलब्ध होगी। कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज संघ के अपर प्रबंध संचालक अनिल राय सहित वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, फाउंडेशन फार इकोलॉजिक सिक्यूरटी स्टेट लीडर सुश्री नमिता मिश्रा और सीनियर प्रोग्राम मैनेजर डॉ. मंजीत बल भी उपस्थित थीं।

मुख्यमंत्री वृक्ष संपदा योजना : योजना के सफल क्रियान्वयन के लिए बजट में 100 करोड़ रूपए का प्रावधान

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा राज्य में वृक्षों के व्यवसायिक उपयोग को बढ़ावा देने की अपार संभानाओं को देखते हुए ‘‘मुख्यमंत्री वृक्ष संपदा योजना’’ को लागू किए जाने की घोषणा की गई है। योजनांतर्गत कृषकों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से कृषकों की सहमति पर उनके भूमि पर वाणिज्यिक वृक्षारोपण किया जाना है। राज्य में इसके सफल क्रियान्वयन के लिए मुख्यमंत्री बघेल द्वारा वर्ष 2023-24 के प्रस्तुत बजट में 100 करोड़ रूपए की राशि का प्रावधान किया गया है।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा वाणिज्यिक वृक्षारोपण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से छत्तीसगढ़ में ‘‘मुख्यमंत्री वृक्ष सम्पदा योजना’’ लागू किये जाने की घोषणा उपरान्त छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री वृक्ष सम्पदा योजना की क्रियान्वयन की तैयारी में वन विभाग जुट गया है और तैयारियां जोरो पर है। वन विभाग द्वारा वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री मोहम्मद अकबर के कुशल मार्गदर्शन और वन विभाग के प्रमुख सचिव मनोज पिंगुआ के निर्देशन में अब तक 19 हजार से अधिक हितग्राहियों के लगभग 30 हजार एकड़ निजी भूमि में वृक्षारोपण हेतु पंजीयन किया जा चुका है।

इस वर्ष 12 प्रजाति के वृक्षों का 30 हजार एकड़ रकबे में होगा रोपण

इस संबंध में प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वन बल प्रमुख संजय शुक्ला ने बताया कि मुख्यमंत्री वृक्ष सम्पदा योजनांतर्गत राज्य में इस वर्ष 12 प्रकार के प्रजाति के वृक्ष का 30 हजार एकड़ रकबे में रोपण किया जाएगा। इनमें से क्लोनल यूकलिप्टस का 17 हजार 182 एकड़ में, रूटशूट टीक का 6 हजार 456 एकड़ में, टिश्यू कल्चर का 2 हजार 617 एकड़ में, चंदन का 1 हजार 462 एकड़ में, मेलिया दुबिया का 8 सौ 34 एकड़ में, सामान्य बांस का 7 सौ 37 एकड़ में, टिश्यू कल्चर बम्बू का 6 सौ 7 एकड़ में, रक्त चंदन का 1 सौ 26 एकड़ में, आमला का 43 एकड़ में, खमार का 40 एकड़ में, शीशम का 20 एकड़ में तथा महानीम का 20 एकड़ रकबे में लगाने का लक्ष्य रखा गया है।

मुख्यमंत्री वृक्ष सम्पदा योजनांतर्गत 5 वर्षाे में 1 लाख 80 हजार एकड़ में 15 करोड़ वृक्षारोपण का लक्ष्य

 मुख्यमंत्री वृक्ष सम्पदा योजना अंतर्गत किसान, इच्छुक भूमि स्वामी, शासकीय, अर्ध शासकीय एवं शासन के स्वायत्त संस्थाएं, निजी शिक्षण संस्थाएं, निजी ट्रस्ट, पंचायत तथा भूमि अनुबंध धारक इस योजना का लाभ उठा सकते हैं। राज्य शासन द्वारा 1 वर्ष में 36 हजार एकड़ तथा 5 वर्षाे में 1 लाख 80 हजार एकड़ क्षेत्रफल में कुल 15 करोड़ वृक्षारोपण करने का लक्ष्य रखा गया है।इस योजनांतर्गत राज्य शासन द्वारा 5 एकड़ तक वृक्षारोपण हेतु 100 प्रतिशत अनुदान तथा 5 एकड़ से अधिक क्षेत्र में वृक्षारोपण हेतु 50 प्रतिशत वित्तीय अनुदान देगी। चिन्हित वृक्ष प्रजातियों की खरीदी हेतु न्यूनतम क्रय मूल्य का निर्धारण भी शासन द्वारा किया जाएगा। 5 वर्षाे में रोपित सभी प्रजातियो के वृक्ष परिपक्व होने पर उनका मूल्य 10 हजार करोड़ रुपये होने की सम्भावना है। इस योजना से किसानों को प्रति एकड़ प्रतिवर्ष 15 हजार से 50 हजार रूपए तक की आय सम्भावित है। इसके अतिरिक्त कार्बन क्रेडिट के माध्यम से भी किसानों को अतिरिक्त आय होगी।

मुख्यमंत्री वृक्ष संपदा योजना अंतर्गत समस्त वर्ग के सभी इच्छुक भूमि स्वामी पात्र होंगे। इसके अलावा शासकीय, अर्धशासकीय तथा शासन के स्वायत्व संस्थान जो अपने स्वयं के भूमि पर रोपण करना चाहते हैं, पात्र होंगे। इसी तरह निजी शिक्षण संस्थाएं, निजी ट्रस्ट, गैर शासकीय संस्थाएं, पंचायतें, भूमि अनुबंध धारक, जो अपने भूमि में रोपण करना चाहते हैं, वे पात्र होंगे। मुख्यमंत्री वृक्ष संपदा योजना का मुख्य उद्देश्य राज्य में वाणिज्यिक वृक्षारोपण को बढ़ावा देना है। इसके तहत राज्य के सभी कृषकों, शासकीय, गैर शासकीय, अर्धशासकीय, पंचायतें, अथवा स्वायत्व संस्थानों की भूमि पर वाणिज्यिक प्रजातियों के वृक्षारोपण उपरांत सहयोगी संस्था, निजी कंपनियों के माध्यम से निर्धारित समर्थन मूल्य पर वनोपज के क्रय की व्यवस्था करते हुए एक सुदृढ़ बाजार व्यवस्था आदि सुनिश्चित करना है।

मुख्यमंत्री ने अपने विभागों सहित तीन मंत्रियों के विभागों की बजट तैयारियों की समीक्षा की

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज यहां अपने निवास कार्यालय में आयोजित बैठक में अपने विभागों सहित केबिनेट मंत्री रविन्द्र चौबे, मोहम्मद अकबर और कवासी लखमा से संबद्ध विभागों की बजट तैयारियों की समीक्षा की।

बघेल ने बैठक में ऊर्जा विभाग, विमानन, सामान्य प्रशासन, वित्त, खनिज साधन, जनसंपर्क, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी, वाणिज्यिक कर (आबकारी), वाणिज्य एवं उद्योग, विधि एवं विधायी कार्य विभाग, परिवहन, आवास एवं पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन, संसदीय कार्य, कृषि एवं जैव प्रौद्योगिकी, पशुपालन, मछली पालन, जल संसाधन एवं आयाकट, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग की बजट तैयारियों की समीक्षा की। बैठक में विभागीय मंत्री, मुख्य सचिव अमिताभ जैन, अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू सहित सम्बंधित अधिकारी उपस्थित थे।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने 4 मंत्रियों के विभागों की बजट तैयारियों की समीक्षा की

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज यहां अपने निवास कार्यालय में लोक निर्माण, गृह, जेल, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व, पर्यटन विभाग, बीस सूत्रीय कार्यक्रम, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण, चिकित्सा शिक्षा, वाणिज्यिक कर (जीएसटी), नगरीय प्रशासन एवं विकास, श्रम, स्कूल शिक्षा, अनुसूचित जाति, जनजाति, अन्य पिछड़ा वर्ग एवं अल्पसंख्यक कल्याण और सहकारिता विभाग की बजट तैयारियों की समीक्षा की।

बैठक में गृह एवं लोक निर्माण मंत्री ताम्रध्वज साहू, लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री टी.एस. सिंहदेव, नगरीय प्रशासन एवं विकास मंत्री डॉ. शिवकुमार डहरिया, स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम, मुख्य सचिव अमिताभ जैन, अपर मुख्य सचिव सुब्रत साहू सहित संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी बैठक में उपस्थित थे।

वाणिज्यिक कर मंत्री टी.एस. सिंहदेव ने जीएसटी संग्रहण के लंबित मामलों पर त्वरित कार्यवाही के दिए निर्देश

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रायपुर। वाणिज्यिक कर मंत्री टी.एस. सिंहदेव ने आज सिविल लाइन स्थित वाणिज्यिक कर कार्यालय में विभागीय काम-काज की समीक्षा की। उन्होंने प्रदेश में जीएसटी संग्रहण के लिए विभाग द्वारा किए जा रहे कार्यों पर संतोष जताया और कहा कि इस साल भी हम कर संग्रहण का लक्ष्य पूर्ण करने की दिशा में तेजी से बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि कर संग्रहण से राज्य का विकास जुड़ा हुआ है। अत: लक्ष्य के अनुरूप जीएसटी अधिनियम के प्रावधानों के अनुसार इसका संग्रहण करें।

वाणिज्यिक कर मंत्री सिंहदेव ने बैठक में जीएसटी संग्रहण के लंबित मामलों पर अधिकारियों को त्वरित कार्यवाही के निर्देश दिए। उन्होंने जीएसटी जमा नहीं करने वालों पर नियमानुसार कार्रवाई करने को कहा। सिंहदेव ने बैठक में रिटर्न फाइलिंग, लंबित करों की वसूली, सेक्टरवाइज राजस्व वसूली, जीएसटी अधिनियम के तहत कर निर्धारण और विलंब के प्रकरणों में ब्याज वसूली की कार्यवाही तथा ऑडिट की प्रगति की भी समीक्षा की। वाणिज्यिक कर विभाग के विशेष सचिव हिमशिखर गुप्ता, आयुक्त भीम सिंह और विशेष आयुक्त टी.एल. ध्रुव भी समीक्षा बैठक में शामिल हुए।

वाणिज्यिक कर विभाग के आयुक्त भीम सिंह ने बैठक में बताया कि चालू वित्तीय वर्ष 2022-23 में 18 हजार 500 करोड़ रूपए कर संग्रहण का संशोधित लक्ष्य रखा गया है। चालू वित्तीय वर्ष में दिसम्बर-2022 तक 12 हजार 580 करोड़ रूपए का कर संग्रहण किया जा चुका है जो कि कुल लक्ष्य का 68 प्रतिशत है। यह पिछले वर्ष राज्य को इसी अवधि में मिले राजस्व से करीब 25 प्रतिशत ज्यादा है। इस वर्ष 26 प्रतिशत अधिक जीएसटी और 22 प्रतिशत अधिक वेट (VAT) मिला है। इस साल अब तक 8241 करोड़ रूपए जीएसटी के रूप में और 4339 करोड़ रूपए वेट के रूप में प्राप्त हुए हैं। पिछले वित्तीय वर्ष 2021-22 में कुल 15 हजार करोड़ रूपए के कर संग्रहण के लक्ष्य के विरूद्ध अप्रैल-2021 से दिसम्बर-2021 के बीच दस हजार 092 करोड़ रूपए का कर संग्रह हुआ था।   

बैठक में बताया गया कि प्रदेश में इस साल पिछले वर्ष की तुलना में डीजल की खपत में दो लाख 30 हजार किलोलीटर और पेट्रोल की खपत में 53 हजार किलोलीटर की बढ़ोतरी हुई है। तदनुरूप इनसे मिलने वाले टैक्स में भी 791 करोड़ 14 लाख रूपए की वृद्धि हुई है। अप्रैल-2021 से दिसम्बर-2021 के बीच पेट्रोल और डीजल की बिक्री से प्रदेश को 3546 करोड़ 90 लाख रूपए का राजस्व मिला था जो इस वर्ष बढ़कर 4338 करोड़ चार लाख रूपए हो गया है। समीक्षा बैठक में वाणिज्यिक कर विभाग के अपर आयुक्त टी.आर. धुरवे, एच.एल. हिड़को और श्रीमती नीलिमा तिग्गा सहित सभी डिवीजन और सर्किल के अधिकारी मौजूद थे।

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