Media24Media.com: वर्षा ऋतु

Responsive Ad Slot


 

Showing posts with label वर्षा ऋतु. Show all posts
Showing posts with label वर्षा ऋतु. Show all posts

वर्षा ऋतु में मछलियों के संरक्षण हेतु 16 जून से 15 अगस्त तक मत्स्याखेट रहेगा प्रतिबंधित

No comments Document Thumbnail

महासमुन्द। राज्य शासन द्वारा मछलियों की वंश वृद्धि एवं प्रजनन काल को ध्यान में रखते हुए वर्ष 2025-26 में भी विगत वर्षों की भांति मत्स्याखेट पर प्रतिबंध लगाने का निर्णय लिया गया है। यह प्रतिबंध आगामी 16 जून 2025 से 15 अगस्त 2025 तक लागू रहेगा।

इस अवधि में जिले के सभी तालाबों एवं जल स्त्रोतों (जो नदी-नालों से जुड़े हुए हैं) में मत्स्याखेट (मछली पकड़ने) की गतिविधियाँ पूर्णतः प्रतिबंधित रहेंगी। केवल ऐसे छोटे तालाब अथवा जल स्त्रोत, जिनका संबंध किसी भी नदी या नाले से नहीं है, एवं जलाशयों में किये जा रहे केज कल्चर को इस प्रतिबंध से मुक्त रखा गया है। यदि कोई व्यक्ति इस आदेश का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो छत्तीसगढ़ मत्स्य क्षेत्र (संशोधित) अधिनियम के नियम-3 (5) के अंतर्गत उस पर एक वर्ष तक का कारावास, 10,000 रुपए तक का जुर्माना अथवा दोनों एक साथ दंड के रूप में दिए जा सकते हैं।

मत्स्य विभाग द्वारा सभी मत्स्य पालकों, ठेकेदारों एवं मछुआ समुदाय को निर्देशित किया गया है कि वे उक्त अवधि में मछली पकड़ने से परहेज करें, जिससे प्राकृतिक रूप से मछलियों की संख्या में वृद्धि हो सके एवं जल स्रोतों में जैव विविधता बनी रहे।

 

महासमुंद : मत्स्याखेट पर 15 अगस्त तक लगा प्रतिबंध

No comments Document Thumbnail

महासमुंद। वर्षा ऋतु में मछलियों की वंश वृद्धि और प्रजनन काल को देखते हुए आज शुक्रवार 16 जून से मत्स्याखेट पर पूर्णतः प्रतिबंध लगा दिया गया है। यह प्रतिबंध 15 अगस्त 2023 तक रहेगा। जिला मत्स्य पालन विभाग के अनुसार सभी नदी, तालाब, मत्स्योद्योग अधिनियम के प्रावधान के तहत यह प्रतिबंध लगाया है। जिले के समस्त नदियों, नालों तथा छोटी नदियों, सहायक नदियों में जिन पर सिंचाई के तालाब, जलाशय (बड़े या छोटे) निर्मित किए गए हैं,

उनमें किये जा रहे केज कल्चर के अतिरिक्त सभी प्रकार का मत्स्याखेट पूर्णतः निषिद्ध रहेगा। यह प्रतिबंध छोटे तालाब या अन्य जल स्त्रोत जिनका संबंध किसी नदी नाले से नहीं है, के अतिरिक्त जलाशयों में किये जा रहे केज कल्चर में लागू नहीं होंगे। छत्तीसगढ़ राज्य मत्स्य क्षेत्र (संशोधित) अधिनियम के नियम-3(6) के अंतर्गत अपराध सिद्ध होने पर एक वर्ष का कारावास अथवा 10 हजार रूपए का जुर्माना या दोनों एक साथ होने का प्रावधान है।

Don't Miss
© Media24Media | All Rights Reserved | Infowt Information Web Technologies.