Media24Media.com: वनांचल

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सुशासन की रोशनी वनांचल तक अचानकमार के 12 गांवों के सोलर पैनलों में लगाई जा रही नई बैटरियां

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रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार के सुशासन के संकल्प के अनुरूप सुदूर और वनवासी क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाएं पहुंचाने लगातार नई पहल की जा रही हैं। मुंगेली जिले के अचानकमार टाइगर रिजर्व (एटीआर) के दुर्गम वनांचल गांवों में भी रात्रिकालीन सौर प्रकाश व्यवस्था को सुदृढ़ करने राज्य शासन ठोस कदम उठा रही है। इन गांवों में पूर्व में लगाए गए सोलर पैनलों की बैटरियां पुरानी हो गई हैं और उनकी क्षमता भी क्षीण हो गई हैं, जिसकी वजह से घरों और गलियों में लगी सोलर लाइट्स से पर्याप्त रोशनी नहीं मिल पा रही हैं।

अचानकमार टाइगर रिजर्व के रहवासियों की समस्या को देखते हुए राज्य शासन के क्रेडा (CREDA) द्वारा 12 गांवों महामाई, डंगनिया, तिलईडबरा, लमनी, छपरवा, अचानकमार, मंजूरहा, कटामी, अतरिया, बम्हनी, राजक और सुरही में सोलर पैनलों की बैटरियां बदली जा रही हैं। उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने शनिवार को लोरमी में इन गांवों की 13 बसाहटों के लिए बैटरी लेकर जा रहे वाहन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

सोलर पैनलों में लगी बैटरियों के पुराने व क्षमताहीन हो जाने के कारण इन बसाहटों में रात्रिकालीन जन-जीवन प्रभावित हो रहा था। घने जंगलों के बीच अपर्याप्त रोशनी में ग्रामीण स्वयं को असुरक्षित भी महसूस कर रहे थे। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की मौजूदगी में विगत 19 मई को अचानकमार क्षेत्र के वनग्राम बिजराकछार में सुशासन तिहार के तहत आयोजित समाधान शिविर में ग्रामीणों ने प्रकाश की व्यवस्था की समस्या को प्रमुखता से उठाया था। उप मुख्यमंत्री तथा क्षेत्रीय विधायक अरुण साव ने इस पर तत्परता से संज्ञान लेते हुए पुरानी बैटरियों को बदलने के निर्देश दिए थे।

अचानकमार टाइगर रिजर्व के 25 गांवों के घर और गलियां सौर ऊर्जा से रोशन हैं। इन्हें रोशन करने के लिए अलग-अलग समय में 112 सोलर पॉवर यूनिट्स स्थापित की गई हैं। इनमें से 12 गांवों की 13 बसाहटों में अभी नई बैटरियां लगाई जा रही हैं। इससे इन बसाहटों में रहने वाले 322 परिवारों को रात में पर्याप्त रोशनी मिलेगी। उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने बैटरी ले जा रहे वाहन को हरी झंडी दिखाते हुए कहा कि अब अचानकमार वनांचल में बरसात के दिनों में अंधियारा नहीं होगा। रात में पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था हो जाने से वहां के रहवासी जंगली जीव-जंतुओं के खतरे से सुरक्षित रहेंगे। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार गांवों के विकास के लिए प्रतिबद्धता से काम कर रही है। दूरस्थ गांवों में भी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में यह महत्वपूर्ण काम है।

वनांचल के गांवों में लौटी शिक्षा की रौशनी, युक्तियुक्तकरण से दूरदराज़ के स्कूलों में पहुंचे शिक्षक, ग्रामीणों ने जताया आभार

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रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा स्कूली शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए शुरू की गई युक्तियुक्तकरण प्रक्रिया का असर अब वनांचल के गांवों में साफ़ दिखाई देने लगा है। मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के दूरस्थ और पहुंचविहीन गांवों में वर्षों से शिक्षक की कमी से जूझते स्कूलों को अब राहत मिली है। लंबे समय से शिक्षक की मांग कर रहे ग्रामीणों के चेहरों पर खुशी झलक रही है।

                           

हाईस्कूल बड़गांवखुर्द को मिले दो व्याख्याता

गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र में स्थित हाईस्कूल बड़गांवखुर्द में पहले कोई भी स्थायी शिक्षक नहीं था। केवल एक अतिथि शिक्षक के सहारे स्कूल चल रहा था। लेकिन युक्तियुक्तकरण के तहत अब हिन्दी और गणित के दो व्याख्याताओं की पदस्थापना की गई है। इससे ग्रामीणों में खुशी की लहर दौड़ गई है। अब बच्चों को विषय विशेषज्ञों से पढ़ने का मौका मिलेगा, जिससे पढ़ाई का स्तर बेहतर होगा।

ढाब गांव में शिक्षा को मिला नया सहारा

विकासखंड भरतपुर के ग्राम ढाब की प्राथमिक शाला में वर्षों से सिर्फ एक शिक्षक कार्यरत थे। इससे बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही थी। अब यहां एक सहायक शिक्षक की नियुक्ति हुई है। गांव के सरपंच और अभिभावकों ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए कहा कि इससे शिक्षा का माहौल सुधरेगा और बच्चों की पढ़ाई सही ढंग से हो सकेगी।

खोखनिया गांव में पूरी हुई वर्षों की मांग

गुरु घासीदास राष्ट्रीय उद्यान के भीतर बसे खोखनिया गांव की प्राथमिक और माध्यमिक शालाओं में लंबे समय से शिक्षक नहीं थे। यहां 87 बच्चे दर्ज हैं, लेकिन शिक्षक कम थे। अब युक्तियुक्तकरण के बाद प्राथमिक शाला में एक और माध्यमिक शाला में दो शिक्षक नियुक्त किए गए हैं। इससे गांववालों को बड़ी राहत मिली है।

देवशील में शिक्षकों की पदस्थापना से जागी नई उम्मीद

ऐसे ही एक अन्य पहुंचविहीन गांव देवशील की प्राथमिक शाला में 57 बच्चे पढ़ते हैं, लेकिन स्कूल में केवल एक शिक्षक कार्यरत थे। अब एक और शिक्षक की नियुक्ति से यहां शिक्षा को नई गति मिलेगी। ग्रामीणों ने शिक्षक की नियुक्ति पर प्रसन्नता जताई है।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय का कहना है कि हमारी सरकार की प्राथमिकता है, कि शिक्षा की पहुंच अंतिम गांव तक हो। युक्तियुक्तकरण की प्रक्रिया के माध्यम से हमने उन स्कूलों में शिक्षक भेजे हैं, जहां सबसे ज़्यादा ज़रूरत थी । बच्चों को अच्छी पढ़ाई का अवसर मिले, यह हमारा संकल्प है। ग्रामीणों की प्रतिक्रिया से यह स्पष्ट है कि हम सही दिशा में बढ़ रहे हैं।

सुशासन तिहार 2025 : सुशासन तिहार में वनांचल के किसान गोवर्धन को मिला किसान किताब की द्वितीय प्रति सुशासन तिहार में अपने आवेदन पर शीघ्रता से काम होने पर

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बालोद। सुशासन तिहार के अंतर्गत समाधान शिविर कोटागांव में किसान किताब की द्वितीय प्रति मिलने पर किसान गोवर्धन ने प्रसन्नता व्यक्त की है। सुशासन तिहार 2025 के अंतर्गत आज डौण्डी विकासखण्ड के ग्राम कोटागांव में आयोजित समाधान शिविर का आयोजन किया गया। समाधान शिविर में पहुंचे ग्राम धोतिमटोला के किसान गोवर्धन हल्बा ने बताया कि उनका पहले जो किसान किताब था, वह बहुत पुराना होने के कारण उसे उपयोग में नहीं ला पा रहे थे, जिससे बहुत कठिनायों का सामना करना पड़ रहा था। 

नया किसान किताब बनाने के लिए काफी समय से सोंच रहे थे, लेकिन नहीं बनवा पा रहा था। गोवर्धन ने बताया कि सुशासन तिहार की जानकारी गांव में मुनादी द्वारा मिलने पर उन्होने पंचायत में जाकर नया किसान किताब बनाने के लिए आवेदन किया और आज उन्हें समाधान शिविर में निःशुल्क नया किसान किताब मिल गया।

नया किसान किताब के लिए किसी प्रकार की राशि भी नहीं लगा है। गोवर्धन ने कहा कि सुशासन तिहार बहुत मददगार साबित हुआ है। उन्होंने सुशासन तिहार आयोजन करने के लिए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के प्रति आभार व्यक्त किया है। किसान गोवर्धन ने कहा कि सुशासन तिहार के अंतर्गत समाधान शिविर सभी किसानों के लिए बहुत अच्छा है। उनके आवेदनों का त्वरित निराकरण किया गया है। इसके साथ ही विभिन्न विभागों से बहुत सारी योजनाओं की जानकारी मिली है।

नरवा विकास: खारी नाला खारा नहीं बल्कि अब मीठा और लाभप्रद साबित होने लगा किसानों के लिए

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रायपुर। राज्य सरकार द्वारा संचालित सुराजी गांव योजना के तहत नरवा विकास कार्यक्रम अंतर्गत मनेन्द्रगढ़ वनमंडल के खारी नाला में लगभग 01 करोड़ रूपए की लागत राशि से अर्दन डेम का निर्माण किया गया है। इसके निर्माण से वन क्षेत्रों में जल के स्तर में वृद्धि के साथ-साथ 100 एकड़ रकबा में सिंचाई की सुविधा निर्मित हुई है। उक्त सुविधा के उपलब्ध होने पर वनांचल के किसानों के लिए खारी नाला अब मीठा एवं लाभप्रद साबित होने लगा है।

गौरतलब है कि वनमंडल मनेन्द्रगढ़ अंतर्गत ग्राम पंचायत भौता के खारी नाला में 210 मीटर चौड़ाई एवं 10 मीटर ऊंचाई के अर्दन डेम निर्मित की गई है, जिसकी कुल लागत 01 करोड़ रूपए है।  इसका कैचमेंट एरिया 55.00 हेक्टेयर है। उक्त अर्दन डेम के निर्माण से निकटतम ग्रामों के लगभग 40 परिवार प्रत्यक्ष रूप से लाभान्वित होने लगे हैं। जिसमें से 5 सीमांत एवं 35 लघु किसानों के कुल 100 एकड़ रकबा सिंचित होगा एवं जल संरक्षण संरचनाओं के निर्माण से ग्रामों के आसपास क्षेत्रों एवं वन क्षेत्रों में जल के स्तर में वृद्धि होगी। इसके फलस्वरूप वनों के पुनरूत्पादन एवं घनत्व में सघन वृद्धि के साथ-साथ वन्यप्राणियों के लिए पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित हुई है। अन्य परिवारों द्वारा निस्तार के साथ-साथ मछली पालन से संबंधित आजीविका कार्य किया जा सकेगा। निर्मित अर्दन डेम से लगा गौठान बना हुआ है जो पशुधन हेतु लाभप्रद होगा।

गौरतलब है कि वनमंत्री मोहम्मद अकबर के कुशल मार्गदर्शन में वनांचल स्थित नालों में कैम्पा मद के तहत भू-जल संवर्धन संबंधी संरचनाओं का निर्माण तेजी से जारी है। इस तारतम्य में प्रधान मुख्य वन संरक्षक एवं वनबल प्रमुख संजय शुक्ला ने बताया कि मनेन्द्रगढ़ वनमंडल स्थित 15 किमी लम्बाई के खारी नाला में कैम्पा मद से वर्तमान में 435 भू-जल संवर्धन संबंधी संरचनाओं का निर्माण प्रगति पर है। इनमें से अब तक 385 भू-जल संवर्धन संबंधी संरचनाओं का निर्माण पूर्ण हो चुका है। इनके निर्माण के लिए कैम्पा की वार्षिक कार्ययोजना 2021-22 के तहत 4 करोड़ 10 लाख रूपए की राशि स्वीकृत है।

सफलता की कहानी अबूझमाड़ में फैलता संचार नेटवर्क

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रायपुर। छत्तीसगढ़ का अबूझमाड़ कहे जाने वाले क्षेत्र नारायणपुर-बीजापुर-दंतेवाड़ा जिलों जहां तक पहुंचपाना बेहद मुश्किल था। वहां के निवासी लम्बे समय से मुख्यधारा से नहीं जुड़ पाए थे। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ शासन की योजनाओं ने इस नामुमकिन को मुमकिन में बदल दिया है। पिछले चार सालों में इस क्षेत्र में हो रहे विकास कार्यों की किरण हर घर तक पहुंच रही है। छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा राज्य के वनांचल के विकास के लिए विकास, विश्वास और सुरक्षा की रणनीति अपनाई गई है।

अबूझमाड़ में इस रणनीति के तहत सड़क और संचार नेटवर्क का तेजी से विस्तार किया जा रहा है। शासन द्वारा वनांचल के दुर्गम, पहुंच विहीन, संवेदनशील स्थानों पर जहां मोबाइल नेटवर्क नहीं है, वहां नए मोबाइल टावर लगाए जा रहे हैं और मोबाइल नेटवर्क को अपग्रेड करने का भी काम किया जा रहा है। जिससे कोई भी व्यक्ति इंटरनेट सुविधा से अछूता न रह सके।

दंतेवाड़ा जिले के सीमा से लगे अबूझमाड़ इलाकों में भी अब तेजी से सड़क और संचार नेटवर्क की सुविधा मिल रही है। दन्तेवाड़ा में जिला प्रशासन एवं पुलिस प्रशासन के सहयोग से संचार सुविधाओं के विस्तार और सुदृढ़ीकरण का काम तेजी से कराया जा रहा है। दन्तेवाड़ा सीमा से लगे अबूझमाड़ में बसे गांव मालेवाही ऐसा क्षेत्र हैं, जहां वर्षों से मोबाइल नेटवर्क नहीं था। जिससे यहां रहने वाले ग्रामीणजन देश-दुनिया की उपलब्धियों, डिजीटीकरण और ऑनलाइन सुविधाओ से वंचित थे। गांव के लोगों को पहले एंबुलेंस बुलाने या आपातकालीन स्थिति में कई बार पहाड़ों पर चढ़ना पड़ता था या कई किलोमीटर सफर करना पड़ता था तब बड़ी मुश्किल से बात हो पाती थी। मोबाइल टावर लगाए जाने से उन्हें आसानी से संचार सुविधा मिल रही है। मालेवाही में मोबाइल टॉवर स्थापित होने से ग्रामीण जनों में उत्साह देखने को मिल रहा है। टॉवर लगने से सूचनाओं के आदान-प्रदान अब सहज हो गया है।

इन्टरनेट की सुविधा मिलने से ग्रामीण जनजीवन में अब तेजी से जागरूकता आ रही है। आने वाले समय में ग्रामीण अंचल में रह रहे हर वर्ग को मुख्यधारा से जोड़ने के साथ-साथ उनके जीवन स्तर को बेहतर बनाने के अवसर मिलेंगे। इसके साथ ही राज्य शासन द्वारा दुर्गम और पिछड़े इलाकों में तेजी से सड़क नेटवर्क का भी विस्तार किया जा रहा है। इन सब कार्यों से राज्य शासन की योजनाओं की पहुंच गरीब तबकों तक पहुंचना आसान हुआ है।

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