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आदिवासियों के उत्थान और खुशहाली के लिए कटिबद्ध छत्तीसगढ़ सरकार : अग्नि चंद्राकर

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महासमुंद। छत्तीसगढ़ राज्य बीज एवं कृषि विकास निगम अध्यक्ष तथा पूर्व विधायक अग्नि चंद्राकर ने विश्व आदिवासी दिवस पर प्रदेश के आदिवासी जनों को शुभकामनाएं देते हुए कहा है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार छत्तीसगढ़ के आदिवासियों की मूल कला-संस्कृति के संरक्षण व संवर्धन तथा आदिवासियों के उत्थान और खुशहाली के लिए निरंतर प्रयास कर रही है।


चंद्राकर ने कहा है कि जल
, जंगल, ज़मीन के मुद्दों पर छत्तीसगढ़ सरकार आदिवासियों को उनका हर अधिकार प्रदान कर रही है। वन अधिकारों के क्रियान्वयन में छत्तीसगढ़ देश में सबसे आगे है। अनुसूचित क्षेत्रों में पेसा एक्ट लागू किया गया है। वनवासी आदिवासियों को 4.46 लाख से अधिक व्यक्तिगत वन अधिकार पत्र और हजारों सामुदायिक वन अधिकार पत्र वितरित किए गए हैं। बस्तर जिले के लोहंडीगुड़ा इलाके की 4200 एकड़ जमीन आदिवासी किसानों को लौटाई गई

जिसे 2005 में टाटा स्टील की एक परियोजना के लिए अधिग्रहीत किया गया था। वर्षों से जेलों में बंद आदिवासियों के प्रकरणों की समीक्षा कर रिहाई की गई है। राज्य के विशेष पिछड़ी जनजातीय वर्ग के युवाओं को पात्रता अनुसार सरकारी नौकरी प्रदान की जा रही है। वनवासी आदिवासियों की आर्थिक समृद्धि के लिए 65 प्रकार के लघु वनोपजों की खरीदी छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा समर्थन मूल्य पर की जा रही है। यही नहीं आदिवासी क्षेत्रों में महिलाओं को लघु वनोपजों के प्रसंस्करण से जोड़कर सशक्तिकरण का नया अध्याय लिखा जा रहा है। 

जनजातियों के आस्था स्थल देवगुड़ियों का हो रहा कायाकल्प किया जा रहा है। हर साल अंतर्राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य कला महोत्सव आयोजन का फैसला भी आदिवासी समुदाय के प्रति छत्तीसगढ़ सरकार की सोच को दर्शाता है। बीज निगम भी आदिवासी किसानों को शासन की योजना के अनुसार कृषि यांत्रिकीकरण में विशेष छूट का लाभ दिलाते हुए, कृषि में आगे बढ़ाने का काम कर रहा है।

योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन होता है तो आम जनता नहीं करेगी शिकायत

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रायपुर. शासकीय योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन होता है तो जनता शिकायत नहीं करेगी। बस्तर और सरगुजा में भेंट मुलाकात के दौरान नागरिक सेवाओं की आपूर्ति को  लेकर बहुत कम शिकायतें आईं। इससे पता चलता है कि प्रशासनिक तंत्र अच्छा काम कर रहा है। आप सभी से अपेक्षा है कि इसी तरह जनसेवा के दायित्व को पूरे मनोयोग से निभाते रहें. यह बात मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने कांकेर में आयोजित समीक्षा बैठक में कही. उन्होंने कहा कि हमने प्रशासनिक तंत्र में जनसेवा के संकल्प को लगातार मजबूत करने की दिशा में काम किया है इसके प्रभावी नतीजे सामने रहे हैं. 



मुख्यमंत्री ने कहा कि वनवासियों के लिए निरंतर बेहतर कार्य किये जाने की जरूरत है. इस दौरान महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अनिला भेंड़िया, संसदीय सचिव शिशुपाल सोरी, मुख्यमंत्री के सलाहकार राजेश तिवारी एवं अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे. वनवासी वनों के संरक्षक हैं. फारेस्ट नियमों के दायरे में जंगल में रहने वाले रहवासियों को हर तरह की सुविधा देना सुनिश्चित करें. 

यहां उनके लिए जंगल के संसाधनों को ही विकसित तथा प्रसंस्कृत कर आजीविकामूलक गतिविधियों के अवसर बढ़ाने की दिशा में काम करें. मुख्यमंत्री ने कहा कि साढ़े तीन साल पहले और आज के कांकेर में बड़ा बदलाव महसूस किया जा सकता है. क्षेत्र में तेजी से विकास हो रहा है। शांति कायम हुई है. पर्यटन गतिविधियों का विस्तार हो रहा है. वनोपजों के प्रसंस्करण की दिशा में बड़ा काम हो रहा है.

समीक्षा बैठक में मुख्यमंत्री ने कहा कि कांकेर को पूरे देश में अपने रैली ककून और मिलेट मिशन की वजह से पहचान मिलने लगी है. कोदो, कुटकी, रागी भी कांकेर की पहचान बन रही है. इनका वैल्यू एडीशन करना है और लोगों के लिए आर्थिक आय के बड़े अवसर उपलब्ध कराना है. अपने वनसंसाधनों से कांकेर की पहचान है। वनोपजों के प्रसंस्करण और क्रय को लेकर शासन की बेहतर नीति की वजह से संग्राहकों और व्यापारियों के लिए भरपूर संभावनाएं उभर कर आई हैं. इस दिशा में काम इसी तरह से निरंतर चलना चाहिए.

 मुख्यमंत्री ने पर्यटन सुविधाएं बढ़ाने की दिशा में कार्य करने अधिकारियों को निर्देश दिये. उन्होंने कहा कि कांकेर बस्तर का प्रवेश द्वार है. प्रवेश द्वार से ही पर्यटकों का आकर्षण बनें, इसलिए पर्यटन अधोसंरचना को मजबूत करने कार्य करना है. उन्होंने कहा कि टाटामारी, लीमदरहा जैसे रिसार्ट मैंने देखें. बहुत अच्छा कार्य हो रहा है। इसी तरह के प्रयासों से बस्तर तेजी से पर्यटन हाटस्पाट के रूप में विकसित होगा.

 मुख्यमंत्री ने कहा कि मैं स्कूलों में भी गया. पढ़ाई की अधोसंरचना मजबूत हुई है. अभिभावकों में अपने बच्चों को पढ़ाने के लिए जागरूकता बढ़ी है. अधिकारियों से अपनी बात रखते हुए उन्होंने कहा कि मुझे सबसे ज्यादा खुशी इस बात की हुई है कि पूरे भेंट मुलाकात अभियान में मैंने संतुष्टि और मुस्कान से भरे चेहरे देखे, कहीं तनाव की कोई झलक नहीं. ऐसा ही छत्तीसगढ़ गढ़ने की दिशा में हम काम कर रहे हैं और आप निरंतर इस लक्ष्य को लेकर कार्य करते रहें.

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