Media24Media.com: लोक नृत्य

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अंतर्राज्यीय आदिवासी लोक नृत्य महोत्सव का हुआ समापन

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय राजधानी रायपुर के साइंस कॉलेज मैदान में दो दिवसीय जनजातीय गौरव दिवस एवं अंतर्राज्यीय आदिवासी लोक नृत्य महोत्सव के समापन समारोह में शामिल हुए। मुख्यमंत्री की उपस्थिति में विभिन्न राज्यों के लोक नर्तक दलों ने अपनी-अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों में उत्साह भर दिया। इस अवसर पर हिमाचल प्रदेश, त्रिपुरा, मेघालय, मिजोरम, उत्तराखंड समेत छत्तीसगढ़ के जनजातीय एवं लोक कलाकारों ने प्रस्तुति दी।

त्रिपुरा से आए ब्रू रियांग जनजाति समुदाय के नर्तक दल ने परंपरागत लोकनृत्य होजागिरी की प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।  इस नृत्य में ब्रू रियांग जनजाति समुदाय की युवतियों ने सिर के ऊपर बोतल को संभालते हुए अद्भुत सामंजस्य के साथ प्रस्तुति दी। नृत्य के दौरान नर्तकों के कलात्मक प्रदर्शन को भी दर्शकों की खूब सराहना मिली।

इसके पूर्व हिमाचल प्रदेश के लोक कलाकारों ने मनमोहक कायांग नृत्य की प्रस्तुति दी, जो हिमाचल प्रदेश के सबसे लोकप्रिय नृत्यों में से एक है। इस नृत्य में नर्तक दल एक दूसरे की भुजाओं को बुनकर माला जैसा पैटर्न बनाया, धीर-धीरे कदमताल करते हुए प्रतीकात्मक रूप से माला की मोती जैसे बिखरते हुए फिर जुड़ते हुए पारंपरिक कपड़े पहने और गहनों से सुसज्जित नृत्य प्रस्तुत किया।

इसके बाद मेघालय के गारो नृत्य की प्रस्तुति हुई। गारो समुदाय के लोग इस नृत्य में फसल कटाई के बाद देवता मिसी सालजोंग की आराधना कर उन्हें धन, धान्य के लिए अपनी आस्था और निष्ठा व्यक्त करते हैं। इस नृत्य में लोक वाद्य के प्रयोग से उत्पन्न ध्वनि ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया।

इसी क्रम में मिजोरम के मिजो और चरमा जनजाति समुदाय ने युद्ध कौशल, शौर्य, पराक्रम और युद्ध विजय के प्रतीक नृत्य मिजो प्रस्तुत किया। इस नृत्य के जरिए समुदाय ने वीर गाथा का जीवंत प्रदर्शन किया जिसमें यह बताया गया कि युद्ध के दौरान किस तरह समुदाय के वीर योद्धा ने गांव की रक्षा, जिसके बाद ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक उनका सम्मान किया। इसी तरह उत्तराखंड के जनजाति समुदाय ने हारुल नृत्य का प्रस्तुत किया जोकि  हाटी जनजाति का पारंपरिक नृत्य और लोकगीत की एक खास शैली है। हारुल नृत्य  जौनसार-बावर और चकराता क्षेत्र में किया जाता है। हारुल नृत्य में वीर पांडवों के साहस और वीरता, देवी-देवताओं की कहानियां, देवभूमि के इतिहास और जनजाति की संस्कृति से जुड़ी घटनाओं को बड़े ही रोचक ढंग से पेश किया गया। इसी क्रम में छत्तीसगढ़ के अलग-अलग जिलों से आए लोक कलाकारों ने भी छत्तीसगढ़ के प्रचलित लोकनृत्यों की प्रस्तुति दी।

उल्लेखनीय है कि महोत्सव के पहले दिन सिक्किम लिंबू जनजाति समुदाय द्वारा चाकोस तांगनाम नृत्य, गुजरात के लोक नर्तक दल ने सिद्धि गोमा नृत्य, अरुणाचल प्रदेश के कलाकारों ने गेह पदम ए ना न्यी, मध्यप्रदेश डिंडोरी के गोंड जनजाति ने सैला रीना, जम्मू कश्मीर से गुज्जर समुदाय ने गोजरी लोक नृत्य, छत्तीसगढ़ के माड़िया जनजाति ने गौर माड़िया नृत्य, उत्तराखंड के जनजातीय समुदाय द्वारा दिया बाती नृत्य, तेलंगाना के द्वारा मथुरी नृत्य, उत्तर प्रदेश के द्वारा कर्मा नृत्य, कर्नाटक के द्वारा सुगाली नृत्य, आंध्र प्रदेश के द्वारा ढीमसा नृत्य, दमन दीव द्वारा तारपा नृत्य तथा राजस्थान के जनजातीय कलाकारों द्वारा चकरी नृत्य की प्रस्तुति दी गई थी। इसके साथ ही छत्तीसगढ़ के सभी जिलों के जनजातीय कलाकारों द्वारा अलग-अलग तीज त्यौहारों के लोक नृत्यों की प्रस्तुति दी गई।

 

 

मुख्यमंत्री ने दो दिवसीय जनजातीय गौरव दिवस एवं अंतर्राज्यीय लोक नृत्य महोत्सव का किया भव्य शुभारंभ

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रायपुर। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने धरती आबा भगवान बिरसा मुंडा की 150 वीं जन्म जयंती के अवसर पर आज रायपुर के साइंस कॉलेज मैदान में दो दिवसीय जनजातीय गौरव दिवस एवं अंतर्राज्यीय आदिवासी लोक नृत्य महोत्सव का देवगुड़ी में पूजा-अर्चना और दीप प्रज्जवलन कर शुभारंभ किया। इस राज्य स्तरीय कार्यक्रम के तहत दो दिनों तक विभिन्न विषयों पर संगोष्ठी, जनजातीय चित्रकला प्रदर्शनी के साथ-साथ देश के 21 राज्यों के 28 आदिवासी नर्तक दलों द्वारा मनोहारी सांस्कृतिक कार्यक्रमों की प्रस्तुति होगी। 


मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने लोगों को जनजातीय गौरव दिवस की बधाई और शुभकामनाएं दी। मुख्यमंत्री ने इस मौके पर भगवान बिरसा मुंडा सहित शहीद वीर नारायण सिंह, शहीद गेंद सिंह, गुण्डाधुर को नमन करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने भगवान बिरसा मुंडा के जन्म दिवस को जनजातीय गौरव दिवस के रूप में मनाने की घोषणा करके जनजातीय समुदाय का गौरव बढ़ाया है। इसके लिए उन्होंने छत्तीसगढ़ की 3 करोड़ जनता की ओर से प्रधानमंत्री जी का आभार जताया।
                   

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ में जनजातीय गौरव दिवस की भव्य शुरूआत 13 नवम्बर से जशपुर से हो चुकी है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न स्व. अटल बिहारी वाजपेयी ने जनजातीय समुदाय की जितनी चिंता की है, उतनी किसी ने नहीं की है। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी जी ने देश की 10 करोड़ जनजातीय आबादी के कल्याण के लिए पृथक मंत्रालय बनाया।

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि पीएम जनमन योजना के तहत विशेष पिछड़ी जनजातीय समुदाय के गांवों में बुनियादी सुविधाओं का विकास हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी बिहार के जमुई से कल 15 नवम्बर को जनजातीय गौरव दिवस का शुभारंभ करेंगे। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार द्वारा आदिवासी गांवों के समग्र विकास के लिए धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान शुरू किया गया है। इसके लिए 80 हजार करोड़ रूपए का प्रावधान है। 

इससे छत्तीसगढ़ राज्य के 6,691 आदिवासी गांवों में बुनियादी सुविधाओं का विकास और जनजातीय समुदाय के कल्याण के काम होंगे। कार्यक्रम के आरंभ में सभी 21 राज्यों के आदिवासी नर्तक दलों के आकर्षक मार्चपास्ट के दौरान लोगों ने करतल ध्वनि कर कलाकारों का उत्साहवर्धन किया। 

आदिम जाति कल्याण मंत्री रामविचार नेताम ने स्वागत उद्बोधन दिया और कहा कि यह आयोजन कला, संस्कृति, परंपरा और देश की रक्षा के लिए प्राणों का न्यौछावर करने वाले महापुरूषों को नमन करने का अवसर है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में समाज के सभी वर्गाें के बेहतरी के काम तेजी से कराए जा रहे हैं।  

इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री अरूण साव, वन मंत्री केदार कश्यप, स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल, खेल मंत्री टंक राम वर्मा, राज्यसभा सांसद देवेन्द्र प्रताप सिंह, पूर्व मंत्री श्रीमती रमशीला साहू, विधायक सर्व पुरंदर मिश्रा, गुरू खुशवंत सिंह साहब, मोती लाल साहू, इंद्र कुमार साहू, अनुज शर्मा सहित अन्य जनप्रतिनिधि, मुख्य सचिव अमिताभ जैन, प्रमुख सचिव आदिम जाति कल्याण विभाग सोनमणि बोरा, मुख्यमंत्री के सचिव पी. दयानंद सहित अन्य अधिकारी एवं बड़ी संख्या में लोग उपस्थित थे।

 

 

संस्कृति विभाग द्वारा दिये जाने वाले विभिन्न राज्य सम्मान 2024 हेतु आवेदन 5 अक्टूबर तक

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रायपुर। प्रदेश के संस्कृति विभाग द्वारा स्थापित 11 राज्य स्तरीय सम्मानों एवं 01 राष्ट्रीय सम्मान इस प्रकार कुल 12 सम्मान हेतु अगले माह के 5 अक्टूबर 2024 तक  आवेदन आंमत्रित किए गए है। आवेदक निर्धारित प्रारूप में अपना आवेदन सीधे पंजीकृत डाक के माध्यम से संचालनालय संस्कृति एवं राजभाषा द्वितीय तल, व्यावसायिक परिसर, सेक्टर-27, नवा रायपुर अटल नगर (छ.ग.) को प्रेषित कर सकते है। इच्छुक आवेदक विस्तृत जानकारी के लिए सम्मान की नियमावली विभागीय वेबसाईट www.cgculture.in पर प्राप्त कर सकते है।

संस्कृति विभाग द्वारा स्थापित सम्मान में हिन्दी साहित्य के लिए पं. सुन्दरलाल शर्मा सम्मान, लोक नाट्य एवं लोक शिल्प के क्षेत्र में दाऊ मंदराजी सम्मान, शास्त्रीय संगीत एवं नृत्य के लिए चक्रधर सम्मान, देश के बाहर अप्रवासी भारतीय द्वारा सामाजिक कल्याण, साहित्य, मानव संसाधन, निकाय अथवा आर्थिक के क्षेत्र में छत्तीसगढ़ अप्रवासी भारतीय सम्मान, हिन्दी/छत्तीसगढ़ी सिनेमा में रचनात्मक लेखन, निर्देशन, अभिनय, पटकथा लेखन हेतु किशोर साहू सम्मान और हिन्दी/छत्तीसगढ़ी सिनेमा में सर्वश्रेष्ठ फिल्म निर्देशन हेतु किशोर साहू राष्ट्रीय सम्मान शामिल है।

इसी प्रकार लोक नृत्य और पंथी नृत्य हेतु क्रमशः देवदास बंजारे स्मृति पुरस्कार/सम्मान और देवदास बंजारे स्मृति पंथी नृत्य पुरस्कार/सम्मान, आंचलिक साहित्य/लोक कविता के लिए लाला जगदलपुरी साहित्य पुरस्कार/सम्मान, छत्तीसगढ़ी लोकगीत के लिए लक्ष्मण मस्तुरिया सम्मान, छत्तीसगढ़ी लोक संगीत के क्षेत्र खुमान साव सम्मान, समकालीन रंगकर्म (छत्तीसगढ़ी/हिन्दी/अन्य भाषा नाटक) के क्षेत्र हबीब तनवीर सम्मान शामिल है। उक्त क्षेत्र में उपलब्धि तथा दीर्घ साधना हेतु दिनांक 06 नवम्बर 2024 को छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस राज्योत्सव राज्य अलंकरण समारोह में चयनित पात्र को राज्य सम्मान से विभूषित किया जाएगा।

हरियाणा के घूमर नृत्य की मनमोहक प्रस्तुति से झूम उठे दर्शक

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रायपुर। राजधानी रायपुर के साइंस कॉलेज स्थित मैदान में आयोजित तीन दिवसीय राष्ट्रीय आदिवासी नृत्य महोत्सव एवं राज्योत्सव के अंतिम दिन हरियाणा के लोक कलाकारों ने घूमर नृत्य की प्रस्तुति सहित दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। घूमर नृत्य हरियाणा का एक अनोखा पारंपरिक लोक नृत्य है। नर्तक दल के लीडर सुनील कौशिक ने बताया कि यह नृत्य राज्य के पश्चिमी हिस्सों में लोकप्रिय है। इस नृत्य में नृत्यांगनाओं के वृत्ताकार आंदोलन इस नृत्य को अलग पहचान देते हैं।



आमतौर पर राज्य के सीमा क्षेत्र की लड़कियां घूमर का प्रदर्शन करती हैं। नर्तक, जो एक परिपत्र मोड लेते हैं और ताली बजाने और गाने के बारे में आगे बढ़ते हैं, इस नृत्य का प्रदर्शन करते हैं। लड़कियाँ गाती हैं जब वे एक घूमने वाले आंदोलन में नृत्य करती हैं और संगीत के गति के रूप में लड़कियों के जोड़े बढ़ते हैं और तेज़ी से और तेज़ी से घूमते हैं। साथ के गीत व्यंग्य, हास्य और समकालीन घटनाओं से भरे हुए हैं, जबकि नर्तक जोड़े में घूमते हैं। यह नृत्य होली, गणगौर पूजा और तीज जैसे त्योहारों के अवसर पर किया जाता है।

यह भील जनजाति का लोक नृत्य है।यह नृत्य फसल की कटाई के समय किया जाता है।यह एक समूह नृत्य है ।यह नृत्य विशेष अवसर पर किया जाता है।यह नृत्य फसल कटाई के बाद, फसल अच्छे दामों पर बिकने बाद किया जाती है पत्नि अपने पति से विभिन्न तरीके से भिन्न-भिन्न वस्तुओं की मांग करती है और वार्तालाप के माध्यम से इस घुमर नृत्य को प्रस्तुत किया जाता है। इसी खुशी के अवसर पर यह नृत्य किया जाता है।


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