Media24Media.com: रेलवे ओवरब्रिज

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महासमुंद : संयुक्त कार्यवाही में तुमगांव रेलवे ओवरब्रिज के सर्विस रोड पर अतिक्रमण हटाया गया

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महासमुंद। महासमुंद अंतर्गत तुमगांव रोड पर स्थित रेलवे ओवरब्रिज के सर्विस रोड में किए जा रहे अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही की गई। यह अतिक्रमण राजस्व विभाग, पुलिस विभाग एवं नगरपालिका महासमुंद की टीम द्वारा बुलडोजर चला कर हटाया गया। अतिक्रमण हटाने के दौरान 09 ठेले व गुमटीयो को भी हटाया गया।

अनुविभागीय अधिकारी राजस्व उमेश साहू ने बताया कि ओवरब्रिज के नीचे जिन भू-स्वामियों को मुआवजा की राशि मिल चुका है और पूर्व में उनकी जमीन आरओबी द्वारा अधिग्रहित किया गया था। उनके द्वारा पुनः अतिक्रमण किया गया था एवं निर्माण कार्य किया जा रहा था। उन सभी अवैध निर्माण पर आज मंगलवार को अतिक्रमण हटाने की कार्यवाही की गई। एसडीएम उमेश कुमार साहू के नेतृत्व में तहसीलदार रामप्रसाद बघेल, नायब तहसीलदार सूरज बंछोर, सीएमओ डी.एल. बर्मन, दिलीप चंद्राकर द्वारा कार्यवाही की गई। मौके पर थाना प्रभारी नितेश सिंह व पुलिस की टीम मौजूद थे।

Mahasamund : रेलवे ओवरब्रिज की फाइलें, मंत्री की फटकार के बाद झाड़ी गई धूल

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महासमुन्द। तुमगांव रोड रेलवे क्रासिंग पर निर्माणाधीन ओवरब्रिज के काम में अब जल्दी प्रगति आने की उम्मीद की जा सकती है। ब्रिज के ढलान की सड़क और रिटर्निंग वाल बनाने के लिए भूमि अधिग्रहण की फाइलें महीनों से कलेक्टोरेट में धूल खाती पड़ी थी।


बीते डेढ़ महीने से पेंडिंग पड़ी फाइलों की धूल जिले के प्रभारी मंत्री ताम्रध्वज साहू की फटकार के बाद आज झाड़ी गई। भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी नहीं होने और जिला प्रशासन की उदासीनता के चलते ओवरब्रिज निर्माण में विलम्ब हो रहा है। स्वतंत्रता दिवस मुख्य समारोह में ध्वजारोहण करने पहुंचे  लोकनिर्माण मंत्री के समक्ष यह मामला नागरिकों ने उठाया। व्यापक लोकहित के इस महत्वकांक्षी निर्माण कार्य में हो रहे विलंब पर मंत्री सख्त नाराज हुए। उन्होंने अफसरों को हिदायत देकर इसे प्राथमिकता से करने कहा। तब कहीं जाकर आज फाइलों की धूल झाड़कर भूअर्जन की प्रक्रिया शुरू की गई।

दर्जनभर में से चार फाइलों का निष्पादन

जानकार सूत्रों  के अनुसार दर्जनभर से अधिक लोगों का दुकान, मकान का अधिग्रहण ओवरब्रिज के लिए किए जाने का प्रस्ताव है। भूअर्जन की प्रक्रिया पूरी कर निर्माण कार्य के लिए साइट खाली कराना राजस्व अमले की जिम्मेदारी है। इसके लिए जिला प्रशासन की ओर से  बाकायदा भूअर्जन समिति भी गठित है। बावजूद, अफसरशाही इस कदर हावी है कि फाइलों को बस्ता बांधकर डेढ़ महीने से धूल खाने के लिए रख दिया गया था। मंत्री की नाराजगी के बाद दर्जनभर में से चार फाइलों को रूटीन में आगे बढ़ाया गया है। करीब सत्तर प्रतिशत भूअर्जन प्रकरण अभी भी लंबित हैं। जब तक मुआवजा देकर भूअर्जन नहीं किया जाएगा, तब तक निर्माण कार्य में प्रगति सम्भव नहीं है।

अधिग्रहण में लगेगा निर्माण से ज्यादा समय

अभी एक महीने से ज्यादा समय तो अधिग्रहण में ही लगेगा।  सबकुछ आपसी समझौता से क्रय नीति के तहत हुआ तो भी महीनेभर से अधिक समय तो कार्यस्थल को खाली कराने में लगेगा। तब मंत्री द्वारा एक महीने के भीतर कार्य पूर्ण करने की हिदायत देने का क्या हश्र होना है, यह भविष्य के गर्भ में है। बहरहाल, मंत्री की सख्ती के बाद प्रशासनिक अमले में खलबली मची है। 

आज जुटे रहे एडीएम-डिप्टी कलेक्टर

सोमवार 16 अगस्त को कार्यालय खुलते ही कलेक्टर डोमन सिंह ने सेतु निगम के अधिकारियों को बुलाया।  एडीएम सुनील चंद्रवंशी, डिप्टी कलेक्टर सीमा ठाकुर, पूजा बंसल, सेतु निगम के एसडीओ एलडी महाजन सहित भूअर्जन से जुड़े कर्मचारी-अधिकारियों  ने प्रकरणों की समीक्षा कर भूमि स्वामियों को धारणाधिकार और स्वामित्व सम्बन्धी जानकारी लेकर 20 अगस्त तक उपस्थित होने कहा है।

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