Media24Media.com: राष्ट्रीय रामायण

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सोशल मीडिया से 1 करोड़ लोगों तक पहुंचा रामायण महोत्सव

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रायपुर। रायगढ़ में आयोजित राष्ट्रीय रामायण महोत्सव की सोशल मीडिया में भी खासी धूम रही। विभिन्न सोशल मीडिया चौनलों में महोत्सव के 3 दिनों के कार्यक्रमों ने 10 मिलियन से ज्यादा व्यूज जनरेट किए हैं। जिसका मतलब है राष्ट्रीय रामायण महोत्सव लगभग 1 करोड़ लोगों तक फेसबुक, इंस्टाग्राम, यूट्यूब, ट्विटर के जरिए पहुंचा

रामायण महोत्सव के कार्यक्रमों का लगातार सीधा प्रसारण सोशल मीडिया पेजेस पर किया जा रहा था। फेसबुक और इंस्टाग्राम पर राज्य और जिलों के प्रोफाइल्स से कार्यक्रमों से जुड़े अपडेट प्रसारित हो रहे थे। यूट्यूब चैनल्स और ट्वीट के माध्यम से भी लोग रामायण महोत्सव से जुड़े गौरतलब है इस ऐतिहासिक आयोजन में दो रिकॉर्ड्स भी इस दौरान बने। 

पहला 10 हजार से अधिक लोगों द्वारा सामूहिक हनुमान चालीसा पाठ व दूसरा कंबोडिया व इंडोनेशिया सहित भारत के विभिन्न राज्यों के 17 दलों के 375 कलाकारों द्वारा अरण्यकाण्ड पर 765 मिनट की प्रस्तुति दी है। कुमार विश्वास, लखबीर सिंह लक्खा, बाबा हंसराज रघुवंशी, मैथिली ठाकुर, शन्मुख प्रिया और शरद शर्मा जिसे देश के नामचीन कलाकारों ने तीन दिनों तक अपनी शानदार प्रस्तुतियों से दर्शकों का मन मोहा। रामायण महोत्सव के आयोजन का सोशल मीडिया प्लेटफार्म ट्विटर पर भी काफी चर्चा में रहा। आयोजन के दौरान रामायण महोत्सव का हैशटैग पूरे देश में टॉप ट्रेडिंग में रहा।

 

राष्ट्रीय रामायण महोत्सव को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल संबोधित कर रहे हैं...

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रायपुर। छत्तीसगढ़ के पूर्वी प्रवेश द्वार रायगढ़ में आयोजित इस महोत्सव में शामिल होने वाले प्रतिभागी और श्रोता तथा मेहमानों, आयोजन से जुड़े अधिकारियों-कर्मचारियों का स्वागत है।


सब्बो झन ला राम राम अउ जय सियाराम

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमने महोत्सव का नाम भले ही राष्ट्रीय रामायण महोत्सव दिया है लेकिन यहां विदेशों के दल भी हैं। रायगढ़ संस्कारधानी है। यहां शैलचित्र भी मिले हैं। यह मानव संस्कृति के इतिहास को अपने भीतर बसाए हुए है। हमारा छत्तीसगढ़ माता कौशल्या और शबरी माता का प्रदेश है।

यहां सदियों से निवास कर रहे आदिवासियों, वनवासियों का प्रदेश है। यह कौशल्या माता का प्रदेश है। कहाँ भगवान राम का राजतिलक होना था लेकिन वे वनवास गए। निषादराज से मिले, शबरी से मिले। ऋषि मुनियों से मिले। कितनी कठिनाई झेली पर अपनी मर्यादा नहीं खोई। उन्होंने वनवास का 10 साल यहां गुजारा।

छत्तीसगढ़ में उन्होंने इतने बरस गुजारे, फिर भी हमारा रिश्ता वनवासी राम के साथ ही कौशल्या के राम से भी है इसलिए वे हमारे भांजे है इसलिए हम भांजों का पैर छूते हैं। छत्तीसगढ़ का कुछ न कुछ अंश भगवान राम के चरित्र में देखने को मिलता है।

हमारा रिश्ता राम से केवल वनवासी राम का नहीं है। बल्कि हमारा रिश्ता शबरी के राम, कौशल्या के राम के रूप में भी है। उन्होंने कहा कि तीन साल से हम लोग राष्ट्रीय आदिवासी महोत्सव का आयोजन कर रहे हैं।

उनकी संस्कृति के संरक्षण के लिए कार्य कर रहे हैं। उनके घोटुल, देवगुड़ी को संरक्षित कर रहे हैं। राष्ट्रीय रामायण महोत्सव का आयोजन पहली बार शासकीय रूप से किया जा रहा है। जैसा कि राष्ट्रीय आदिवासी महोत्सव किया गया है।

भगवान राम साकार भी है और निराकार भी। राम को मानने वाले उन्हें दोनों स्वरूप में मानने वाले हैं। हमारा प्रयास हमारी संस्कृति, हमारे खानपान, हमारे तीज-त्यौहारों को आगे बढ़ाने का है।

मैंने देखा कि रामनामी सम्प्रदाय के भाईयों ने मार्चपास्ट किया। जो कबीर का रास्ता है। रामनामी का रास्ता है। वो निराकार का रास्ता है। सबके अपने-अपने राम हैं।

अपनी संस्कृति को संरक्षित करने का काम हम लोग कर रहे हैं। हमारे गांव-गांव में भी रामकथा के दल बने हैं। राम सबके हैं। निषादराज के हैं शबरी के हैं। सब उनमें आत्मीयता महसूस करते हैं।

दूसरे राज्यों के मुख्यमंत्रियों को पत्र लिखकर हमने तीर्थ स्थलों के लिए 2 एकड़ जमीन मांगी है,  ताकि हमारे भक्त वहां जाएं तो उन्हें सुविधा मिले। बहुत गरिमापूर्ण ढंग से आप लोग यह कार्यक्रम कर रहे हैं।

केलो का संरक्षण भी हमारी प्राथमिकता में हैं। हमारी सुबह राम से होती है। शाम रामायण से होती है। अंत में सियावर रामचंद्र और हनुमान जी की जय के साथ उन्होंने अपने उद्बोधन का अंत किया।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने जिला कार्यालय परिसर में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमा में पुष्प अर्पित करते हुए किया नमन

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज राष्ट्रीय रामायण महोत्सव में शामिल होने के पूर्व कलेक्टर कार्यालय परिसर रायगढ़ में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी जी की प्रतिमा में पुष्पांजलि अर्पित करते हुए नमन किया। उन्होंने यहां स्थापित छत्तीसगढ़ महतारी की प्रतिमा का अनावरण किया, साथ ही रीपा के कार्यों का  अवलोकन कर इससे जुड़े समूहों के कार्यों को सराहा।

मुख्यमंत्री इस मौके पर रायगढ़ जिले को 465 करोड़ रूपये से अधिक के विकास कार्यों की सौगात दिया। जिनमें 258 करोड़ 74 लाख 26 हजार रुपये की लागत वाले 59 विकास एवं निर्माण कार्यों का भूमिपूजन एवं शिलान्यास तथा  207 करोड़ 4 लाख 49 हजार रुपये की लागत से निर्मित 53 कार्यों का लोकार्पण शामिल है। मुख्यमंत्री बघेल दूरस्थ अंचलों के लोगों को स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से धरमजयगढ़ एवं पुसौर विकासखण्ड में 58 लाख रुपये से अधिक लागत के 2 हमर लैब का लोकार्पण किया।

जिला चिकित्सालय रायगढ़ में सस्ती दवा दुकान धन्वंतरी मेडिकल का भी शुभारंभ किया। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के मार्गदर्शन और उन्हें तैयारी के अनुकूल माहौल उपलब्ध कराने के उद्देश्य से घरघोड़ा स्थित मुख्यमंत्री युवा केन्द्र में सुविधाओं का विस्तार किया गया है, यहां के उन्नयन कार्यों का भी लोकार्पण भी मुख्यमंत्री ने किया। रायगढ़ में संचालित जिला ग्रन्थालय का उन्नयन करते हुए हाईटेक बनाया गया है और छात्रों के लिए आवश्यक सुविधाएं बढ़ायी गयी है। इसका लोकार्पण भी मुख्यमंत्री के हाथों हुआ।

इसी तरह अन्य लोकार्पण, भूमिपूजन एवं शिलान्यास के तहत निर्माण विभागों के 186 करोड़ 39 लाख रुपये की लागत से 62 कार्य शामिल है। जिसमें सड़कों, स्कूल भवन व अन्य भवनों के निर्माण और जीर्णाद्धार/उन्नयन कार्य शामिल है। नगर पालिक निगम रायगढ़ अंतर्गत 14 करोड़ 39 लाख 71 हजार रुपये की लागत के सड़क सुधार कार्य, वार्डाे में सामुदायिक भवन निर्माण कार्य शामिल है। पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग अंतर्गत 38 करोड़ 24 लाख 70 हजार रुपये की लागत के कार्य शामिल है।

लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी विभाग अंतर्गत 107 करोड़ 68 लाख 20 हजार रूपये की लागत से 27 समूह नलजल, सोलर आधारित नलजल कार्य शामिल है। परिवहन विभाग अंतर्गत 95 लाख 95 हजार रुपये की लागत से जिला परिवहन कार्यालय का भूमिपूजन कार्य शामिल है। वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग अंतर्गत 4 करोड़ 58 लाख 63 हजार रुपये की लागत से 12 कार्य शामिल है। आदिवासी विकास विभाग अंतर्गत 4 करोड़ 68 लाख 70 हजार रुपये की लागत से 3 जगहों पर 50 सीटर प्री-मैट्रिक आदिवासी बालक छात्रावास तथा लोक निर्माण विभाग सेतु संभाग अंतर्गत 108 करोड़ 25 लाख रुपये की लागत से 5 पुल का निर्माण कार्य भी शामिल है

छत्तीसगढ़ में राष्ट्रीय रामायण महोत्सव का भव्य आयोजन : सीएम 1 जून को करेंगे शुभारंभ

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में पहली बार ‘राष्ट्रीय रामायण महोत्सव’ का भव्य आयोजन किया जा रहा है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल 01 जून को अपरान्ह 3 बजे रायगढ़ के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में इसका शुभारंभ करेंगे। इस राष्ट्रीय महोत्सव में देश के 12 राज्यों सहित कंबोडिया और इंडोनेशिया के रामायण दलों द्वारा रामकथा पर भक्तिपूर्ण प्रस्तुति दी जाएगी।

इन रामायण दलों की प्रस्तुति में सर्वव्यापी भगवान राम की रामकथा के विविधतापूर्ण राष्ट्रीय-वैश्विक स्वरूपों की झलक देखने को मिलेगी। रामायण के अरण्य काण्ड पर रामायण दलों की प्रतियोगिता प्रतिदिन आयोजित की जाएगी। साथ ही राष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त कलाकार भजन संध्या में अपनी संगीतमय प्रस्तुति देंगे। रामलीला मैदान में तीन दिनों तक रामकथा की अविरल भावधारा बहेगी। इस राष्ट्रीय महोत्सव में केरल, कर्नाटक, ओड़िसा, असम, गोवा, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, झारखण्ड, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ के रामायण दल शामिल हो रहे हैं। राष्ट्रीय रामायण महोत्सव के अंतिम दिन हिन्दी के प्रख्यात कवि कुमार विश्वास अपनी विशेष प्रस्तुति ‘अपने-अपने राम म्युजिक नाईट’ से भगवान राम की महिमा का बखान करेंगे।  

राष्ट्रीय रामायण महोत्सव के शुभारंभ समारोह में पंडितों, पुरोहितों और स्थानीय कलाकारों द्वारा हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ किया जाएगा। साथ ही छत्तीसगढ़ में  आमंत्रित विदेशी तथा अन्तर्राज्यीय कलाकारों द्वारा आकर्षक मार्च पास्ट किया जाएगा। ‘‘राष्ट्रीय रामायण महोत्सव‘‘ के शुभारंभ समारोह की अध्यक्षता संस्कृति मंत्री अमरजीत भगत करेंगे। इस अवसर पर स्कूल शिक्षा मंत्री एवं रायगढ़ जिले के प्रभारी मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम, खेल एवं युवा कल्याण मंत्री उमेश पटेल, विधायक लालजीत सिंह राठिया, प्रकाश नायक, चक्रधर सिंह, जिला पंचायत रायगढ़ के अध्यक्ष निराकार पटेल, नगर पालिक निगम की महापौर जानकी काटजू विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगी।

प्रथम दिवस का आकर्षण: कंबोडिया के रामायण दल की प्रस्तुति

आयोजन के प्रथम दिवस दोपहर 2 बजे से 3 बजे तक जसगीत गायक देवेश शर्मा प्रस्तुति देंगे। शाम 4.30 बजे से 5 बजे तक कंबोडिया के दल द्वारा प्रस्तुति दी जाएगी। इसके बाद शाम 5.15 बजे अन्तर्राज्यीय रामायण मंडलियों के मध्य अरण्यकाण्ड पर आधारित प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी, जिसमें उत्तराखंड, कर्नाटक, छत्तीसगढ़ के दल हिस्सा लेंगे। भजन संध्या में रात्रि 7.30 बजे से 9 बजे तक ख्यातिप्राप्त राष्ट्रीय कलाकार सण्मुख प्रिया (इंडिययन आइडल) तथा रात्रि 9 बजे से 10.30 बजे तक ख्यातिप्राप्त राष्ट्रीय कलाकार शरद शर्मा (सा रे गा मा) द्वारा भजन प्रस्तुत किए जाएंगे।

 दूसरे दिन का आकर्षण: बाबा हंसराज रघुवंशी और लखबीर सिंह लक्खा की प्रस्तुति

 राष्ट्रीय रामायण महोत्सव के दूसरे दिन का मंचीय कार्यक्रम दोपहर 2 बजे से प्रारंभ होगा, संस्कृति मंत्री अमरजीत भगत कार्यक्रम के मुख्य अतिथि होंगे तथा स्कूल शिक्षा मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम कार्यक्रम की अध्यक्षता करेंगे। कार्यक्रम में दोपहर 2.15 बजे हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ होगा तथा दोपहर 2.30 से रात्रि 8.30 बजे तक आयोजित अरण्यकाण्ड पर आधारित प्रतियोगिता में 8 राज्यों झारखण्ड, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, असम, ओड़िसा, हिमाचल प्रदेश, गोवा और छत्तीसगढ़ के दल हिस्सा लेंगे। भजन संध्या में रात्रि 8.30 बजे से 9.30 बजे तक ख्यातिप्राप्त राष्ट्रीय कलाकार बाबा हंसराज रघुवंशी तथा रात्रि 9.30 बजे से 10.30 बजे तक लखबीर सिंह लक्खा भजनों की प्रस्तुति देंगे।

तीसरे दिन का आकर्षण: इंडोनेशिया के रामायण दल की प्रस्तुति 

राष्ट्रीय रामायण महोत्सव के तीसरे दिन समापन समारोह का आयोजन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के मुख्य आतिथ्य में होगा। कार्यक्रम की अध्यक्षता संस्कृति मंत्री अमरजीत भगत करेंगे। महोत्सव के तीसरे दिन दोपहर 2 बजे से शाम 6 बजे तक अरण्यकाण्ड पर आधारित प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी, जिसमें 4 राज्य केरल, उत्तरप्रदेश, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ के दल हिस्सा लेंगे। शाम 6 बजे से 6.30 बजे तक कंबोडिया के दल द्वारा प्रस्तुति दी जाएगी।

शाम 6.30 बजे 7 बजे तक केलो महाआरती का आयोजन होगा, जिसमें महिला स्व-सहायता समूह की बहनें गोबर निर्मित दिये से दीपदान करेंगी। रात्रि 7 बजे से मंचीय कार्यक्रम शुरू होगा, जिसमें हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ किया जाएगा। राष्ट्रीय रामायण महोत्सव का समापन समारोह रात्रि 7.30 बजे से 8.30 बजे तक आयोजित किया जाएगा, जिसमें विजेता दलों को पुरस्कार वितरण किया जाएगा। इसके साथ ही विदेशी कलाकारों और प्रतियोगिता के निर्णायकों को भी सम्मानित किया जाएगा।

इस अवसर पर विजेता दलों और विदेशी कलाकारों द्वारा प्रस्तुति दी जाएगी। रात्रि 8.30 बजे से 9 बजे तक इंडोनेशिया के दल की प्रस्तुति होगी। भजन संध्या में रात्रि 9 बजे से 9.30 बजे तक ख्यातिप्राप्त राष्ट्रीय कलाकार मैथिली ठाकुर तथा 9.30 बजे से 10 बजे तक ख्यातिप्राप्त राष्ट्रीय कलाकार कुमार विश्वास द्वारा ‘अपने-अपने राम म्युजिक नाईट’ की प्रस्तुति दी जाएगी। छत्तीसगढ़ के लोक गायक दिलीप षड़ंगी अपनी टीम के साथ महोत्सव के तीनों दिन हनुमान चालीसा का पाठ करेंगे। इसके साथ ही साथ प्रतिदिन रात्रि में भजन संध्या का आयोजन किया जाएगा, जिसमें देश के सुप्रसिद्ध कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे।

राष्ट्रीय रामायण महोत्सव में ख्याति प्राप्त कलाकारों का बिखरेगा रंग

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रायपुर। राष्ट्रीय रामायण महोत्सव का शुभारंभ एक जून को होगा। इस दिन की शुरूआत हनुमान चालीसा के सामूहिक पाठ से होगी। इस मौके पर विदेशी एवं अंतरराज्यीय कलाकारों द्वारा मार्च पास्ट भी किया जाएगा। पहले दिन इंडियन आइडल की राष्ट्रीय ख्यातिप्राप्त कलाकार शण्मुख प्रिया तथा राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कलाकार शरद शर्मा द्वारा भजन संध्या का आयोजन किया जाएगा। दूसरे दिन राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कलाकार बाबा हंसराज रघुवंशी तथा लखबीर सिंह लक्खा द्वारा भजन संध्या की प्रस्तुति की जाएगी। तीसरे दिन राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कलाकार कुमार विश्वास द्वारा अपने अपने राम म्यूजिक नाइट की प्रस्तुति की जाएगी। साथ ही राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कलाकार मैथिली ठाकुर भी भजन संध्या की प्रस्तुति करेंगी।

पहले दिन होगा यह- समारोह दोपहर तीन बजे से आरंभ होगा। समारोह के मुख्य अतिथि द्वारा औपचारिक आरंभ के पश्चात सामूहिक हनुमान चालीसा की प्रस्तुति होगी। इसके पश्चात आमंत्रित विदेशी एवं अंतरराज्यीय कलाकारों द्वारा मार्च पास्ट किया जाएगा। इसके बाद कंबोडिया के दल की प्रस्तुति होगी। उत्तराखंड, कर्नाटक और छत्तीसगढ़ की रामायण मंडलियों के मध्य अरण्यकांड पर आधारित अंतरराज्यीय प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी। इसके पश्चात शण्मुख प्रिया तथा शरद शर्मा भजनसंध्या की प्रस्तुति देंगे।

दूसरे दिन होगा यह- दूसरे दिन समारोह का आरंभ दोपहर 2 बजे से होगा। दूसरे दिन भी हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ होगा। इसके पश्चात अंतरराज्यीय रामायण मंडलियों के मध्य अरण्यकांड पर आधारित प्रतियोगिता का आयोजन होगा। इसमें झारखंड, महाराष्ट्र, मध्यप्रदेश, असम, ओडिशा, हिमाचल प्रदेश, गोवा और छत्तीसगढ़ की टीम हिस्सा लेगी। इसके पश्चात बाबा हंसराज रघुवंशी और लखबीर सिंह लक्खा भजन संध्या की प्रस्तुति देंगे।

तीसरे दिन समापन समारोह पर होगा यह- तीसरे दिन समारोह दोपहर 2 बजे से आरंभ होगा। अंतरराज्यीय रामायण मंडलियों के मध्य अरण्य कांड पर आधारित प्रतियोगिता होगी। इसमें केरला, उत्तरप्रदेश, पश्चिम बंगाल और छत्तीसगढ़ की टीम हिस्सा लेगी। इसके पश्चात कंबोडिया के दल की प्रस्तुति होगी। इसके पश्चात केलो महाआरती तथा दीपदान का कार्यक्रम होगा। यह दीये स्व-सहायता समूहों द्वारा गोबर से निर्मित किये गये हैं। इसके पश्चात हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ होगा। इसके पश्चात समापन समारोह आयोजित होगा। इसमें अतिथिगण विजेता दलों को पुरस्कृत करेंगे तथा कलाकारों को सम्मानित करेंगे। इसके पश्चात इंडोनिशिया से आये दल की प्रस्तुति होगी। फिर मैथिली ठाकुर भजन संध्या प्रस्तुत करेंगी। इसके पश्चात कुमार विश्वास अपने अपने राम म्यूजिक नाइट प्रस्तुत करेंगे।

 


कुमार विश्वास प्रस्तुत करेंगे राष्ट्रीय रामायण महोत्सव में रामकथा, मैथिली ठाकुर भी देंगी प्रस्तुति

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रायपुर। देश में रामकथा के प्रख्यात प्रस्तुतकर्ता कुमार विश्वास रायगढ़ में राष्ट्रीय रामायण महोत्सव में रामकथा प्रस्तुत करेंगे। विश्वास की पहचान मूलतः कवि के रूप में रही है लेकिन विगत कुछ वर्षों से उन्होंने अपनी खास भाषा में प्रस्तुति के विशिष्ट अंदाज में रामकथा प्रस्तुत की है। इसी तरह अपनी सुमधुर आवाज और लोकगीतों में अद्भुत पकड़ के चलते सुश्री मैथिली ठाकुर का गायन भी बहुत लोकप्रिय रहा है। उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की पहल पर यह आयोजन किया जा रहा है, ताकि देश-विदेश में प्रचलित रामकथा का अस्वादन अधिकतम लोग कर सकें।

राष्ट्रीय रामायण महोत्सव मूलतः रामकथा के अरण्य कांड पर केंद्रित है। इस मायने में कुमार विश्वास की अब तक हुई रामकथा पर ध्यान दें तो उनका बहुत सा हिस्सा वनवास के दौरान प्रभु राम द्वारा किये गये विशिष्ट संघर्षों पर केंद्रित होता है। उनकी कथा में उन ऋषियों का जिक्र होता है, जिसमें अरण्य कांड के दौरान भगवान राम मिले। उल्लेखनीय है कि रामकथा से जुड़े हुए अनेक ऋषियों की पुण्यभूमि छत्तीसगढ़ रही है। भगवान राम वनवास के दौरान इन ऋषियों के आश्रम में गये और उनसे लगातार ब्रह्म ज्ञान पर चर्चा की। संस्कृति विभाग द्वारा अरण्य कांड पर महोत्सव रखने का एक विशिष्ट कारण यह भी है कि इनमें से अधिकतर लीला भगवान राम ने दंडकारण्य में की है।

युवा वर्ग में और संगीत प्रेमियों में इंडियन आइडल फेम शंमुख प्रिया बहुत चर्चित रही हैं। रायगढ़ में श्रोताओं के पास उन्हें सुनने के लिए विपुल समय होगा और वे तन्मयता से उनसे राम के चरित पर सुमधुर गीत सुन सकेंगे। इसी तरह सारेगामा फेम शरद शर्मा की खास प्रस्तुति भी दर्शकों के लिए होगी। मशहूर गायक हंसराज रघुवंशी और लखबीर सिंह लक्खा के भजनों से लोगों के दिन की सुंदर शुरूआत होती है। उन्हें प्रत्यक्ष रूप से सुनने का मौका इस महोत्सव में उपलब्ध होगा।

सबसे खास बात महोत्सव में दक्षिण पूर्वी एशियाई द्वीपों के दलों की प्रस्तुति होगी। रामकथा इन द्वीपों के मानस में गहराई से बसी हुई है और इनका नृत्य गायन बहुत कुछ रामलीला पर आधारित है। किस  प्रकार राम की कथा इन द्वीपों में फैली। इनकी सामूहिक स्मृति का हिस्सा बनी। इनके धरोहरों में अंकित हुई। इन सबकी समझ और इसकी सुंदरता की गहराई दर्शक राष्ट्रीय रामायण महोत्सव में जान सकेंगे।

राममय होगा छत्तीसगढ़ : 10 से अधिक राज्यों के रामायण दल होंगे शामिल

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रायपुर। छत्तीसगढ़ आगामी माह राममय होने जा रहा है। 01 से 03 जून तक रायगढ़ के रामलीला मैदान में राष्ट्रीय रामायण महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है। संस्कृति विभाग द्वारा महोत्सव की तैयारियाँ ज़ोरों पर किया जा रहा है। महोत्सव में विशेष रूप से अरण्य कांड पर केंद्रित रामायण गाथा की प्रस्तुति होंगी। मान्यता है कि भगवान राम अपने वनवास काल के दौरान ज्यादातर समय छत्तीसगढ़ के दंडकारण्य में बिताए थे। महोत्सव में विदेशी कलाकारों द्वारा भी आकर्षक स्वरूप में रामगाथा का मंचन किया जाएगा।

संस्कृति विभाग के अधिकारियों ने बताया कि रायगढ़ के रामलीला मैदान में आयोजित होने वाले राष्ट्रीय रामायण महोत्सव में मध्यप्रदेश, उत्तरप्रदेश, महाराष्ट्र, केरल, गोवा, असम, उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश के साथ ही लगभग 10 राज्यों के रामायण दल महोत्सव में शामिल होने वाले हैं। इसके साथ ही विदेशी रामायण कलाकारों के द्वारा विशेष रूप से रामायण का आकर्षक मंचन किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि दक्षिण एशियाई देशों में भी रामलीला के मंचन की परंपरा जीवित है, उन देशों के दल भी रामायण महोत्सव में शामिल होंगे। 

तीन दिवसीय इस वृहद आयोजन में प्रतिदिन राष्ट्रीय स्तर के बड़े कलाकारों की प्रस्तुतियाँ भी होंगी। 1 जून को इंडियन आइडल फेम शंमुख प्रिया और सारेगम फेम शरद शर्मा शिरकत करेंगे। वहीं 2 जून को मशहूर गायक बाबा हंसराज रघुवंशी और लखबीर सिंह लक्खा की संगीतमय प्रस्तुतियाँ होंगी। 3 जून को लोकप्रिय भजन गायिका मैथिली ठाकुर और देश के मशहुर कवि कुमार विश्वास की प्रस्तुति से रामभक्ति की धारा बहेगी।

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की विशेष पहल पर राज्य शासन द्वारा राम-वन-गमन पर्यटन परिपथ परियोजना के तहत भगवान राम के वनवास काल के दौरान यात्रा से जुड़े प्रदेश की ऐतिहासिक स्थलों को पर्यटन के रुप में विकसित किया जा रहा है। सरगुजा से लेकर बस्तर तक जहाँ-जहाँ प्रभु राम के चरण पड़े हैं, उन स्थलों को पर्यटन के रुप में विकसित किया जा रहा है।

 


रामकथा की कलात्मक प्रस्तुति के सबसे आरंभिक दृश्य रायगढ़ की ओंगना पहाड़ियों में राष्ट्रीय रामायण महोत्सव में होगा रामायण का विराट मंचन

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रायगढ़। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल रायगढ़ में राष्ट्रीय रामायण महोत्सव का आयोजन करा रहे हैं इसके माध्यम से देश-विदेश में प्रचलित रामायण के विविध रूपों और भगवान राम के आदर्श की झलक महोत्सव के माध्यम से देखने मिलेगी। मुख्यमंत्री द्वारा की जा रही यह पहल उस विशिष्ट परंपरा को ऊंचाई देने की दिशा में सार्थक पहल है जिसकी सबसे पहले शुरूआत उन शैलचित्रों से हुई जो रायगढ़ के ओंगना में दिखते हैं। यहां लोकअनुश्रुति है कि ओंगना की पहाड़ियों में रामकथा का चित्रण है। यहाँ दस सिरों वाले एक व्यक्ति का युद्ध एक युवक से होता दिखाया गया है। लोक अनुश्रुति है कि दस सिर वाला व्यक्ति रावण है और उनसे युद्ध कर रहे व्यक्ति राम। इस  तरह रामकथा की कलात्मक प्रस्तुति का जो बीज ओंगना में शैल चित्रकारों ने रोपा, अब उसकी विशिष्ट कलात्मक प्रस्तुति रामायण महोत्सव के रूप में होगी।

संस्कृतिधानी रायगढ़ अपने सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और पुरातात्विक धरोहर के लिए प्रदेश ही नहीं पूरे देश में विशिष्ट स्थान रखता है। रायगढ़ कला की नगरी है। यहां के मूर्धन्य कला साधकों ने देश विदेश के कला क्षितिज पर अपनी प्रतिभा से विशेष लालिमा बिखेरी है। रायगढ़ में रामायण को कहे और सुने जाने के साथ रामलीला मैदान में उसके जीवंत मंचन की एक समृद्ध परंपरा रही है। कला का यह स्वरूप रायगढ़ के इतिहास से भी जुड़ाव रखता है। रायगढ़ की ख्याति यहां की पहाड़ियों में हजारों वर्षाे पूर्व के बने शैल चित्रों के लिए भी है। जो तत्कालीन समाज के जीवनशैली से परिचय कराते हैं। शैल चित्रों की इन्हीं श्रृंखला के बीच रायगढ़ जिले के सुदूर वनांचल में बसे धरमजयगढ़ विकासखंड से 8 किमी दूर ओंगना पहाड़ी स्थित है। यहां पर भी कई शैल चित्र बने हुए हैं। जिनमें एक चित्र है जिसमें दस सर वाला व्यक्ति अंकित है जो दूसरे व्यक्ति से युद्ध करता दिखाई देता है। पास ही एक महिला खड़ी है। जनश्रुतियों के अनुसार यह रामायण के राम रावण युद्ध प्रसंग से समानता रखता है।

शैल चित्र प्राचीन कालीन समाज और जीवनशैली का जीवंत पुलिंदा है। हजारों वर्ष पूर्व बने ओंगना पहाड़ी के इन शैलाश्रयों में बने चित्र जनश्रुतियों के अनुसार तब के समाज में रामायण के प्रभाव को प्रदर्शित करते हैं। रामायण की गाथा पीढ़ियों से कही और सुनी जा रही है। देश के विभिन्न भागों में इसके विभिन्न स्वरूप प्रचलित हैं। किंतु पुरातात्विक अवशेषों के रूप में रामायण प्रसंग का उल्लेख दुर्लभ है। छत्तीसगढ़ की धरा से भगवान के राम के जुड़ाव के कई प्रसंग मिलते हैं। छत्तीसगढ़ को भगवान राम की माता कौशल्या की जन्मभूमि माना जाता है। इस नाते उन्हें छत्तीसगढ़ में भांजे का दर्जा प्राप्त है। प्रदेश में माता कौशल्या भी आराध्य हैं। चंदखुरी में देश का इकलौता कौशल्या माता का मंदिर निर्मित है। वनवास के दौरान भी भगवान राम छत्तीसगढ़ के विभिन्न स्थानों से गुजरे थे। जिन्हें चिन्हांकित कर राम वन गमन परिपथ के रूप में विकसित किया जा रहा है।

रायगढ़ से रामायण के जुड़ाव की इस अमूल्य विरासत को आगे बढ़ाने के क्रम में मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की विशेष पहल पर रायगढ़ के रामलीला मैदान में 01 से 03 जून तक प्रदेश का पहला राष्ट्रीय रामायण महोत्सव का भव्य आयोजन होने जा रहा है। जिसमें देश विदेश की मंडलियां रामायण के अरण्य काण्ड पर प्रस्तुति देंगी। इस विराट आयोजन की तैयारियां जोर-शोर से की जा रही हैं। रामायण प्रसंग के मंचन के साथ ही कार्यक्रम में हनुमान चालीसा का सामूहिक पाठ और केलो महाआरती व दीपदान का कार्यक्रम भी आयोजित है।

छत्तीसगढ़ के ‘राष्ट्रीय रामायण महोत्सव‘ में सभी राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों के रामायण ‘झांकी प्रदर्शन समूह‘ की होगी भागीदारी

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में पहली बार आयोजित हो रहे राष्ट्रीय रामायण महोत्सव में सभी राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों के रामायण ‘झांकी प्रदर्शन समूह‘ को आमंत्रित किया गया है। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सभी राज्यों के मुख्यमंत्रियों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के प्रशासनिक प्रमुखों को पत्र भेजकर छत्तीसगढ़ में 01 से 03 जून 2023 तक आयोजित किए जा रहे राष्ट्रीय रामायण महोत्सव 2023 में उनसे उनके राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के रामायण ‘झांकी प्रदर्शन समूह‘ की भागीदारी का आग्रह किया है।

मुख्यमंत्री ने अपने पत्र में लिखा है कि राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की भागीदारी से इस राष्ट्रीय रामायण महोत्सव की भव्यता और गरिमा बढ़ेगी। बघेल ने पत्र में यह भी लिखा है कि राष्ट्रीय रामायण महोत्सव के अंतर्गत प्रतियोगी कार्यक्रम होंगे, जिसमें प्रस्तुत की जाने वाली नृत्य नाटिका का विषय महाकाव्य रामायण के अरण्य-कांड पर आधारित होगा। छत्तीसगढ़ की कला और संस्कृति की नगरी रायगढ़ के ऐतिहासिक रामलीला मैदान में राष्ट्रीय रामायण महोत्सव का आयोजन किया जा रहा है।

मुख्यमंत्री बघेल ने पत्र में लिखा है कि छत्तीसगढ़ राज्य धार्मिक व सांस्कृतिक विरासतों से समृद्ध एक ऐसा प्रदेश है, जिसका श्रीराम, माता कौशल्या व उनके जीवन चरित्र पर आधारित महाकाव्य रामायण से बहुत गहरा संबंध है। हमारे राज्य को राम की माता कौशल्या की जन्मभूमि होने का विशेष गौरव प्राप्त है। माता कौशल्या का जन्म तत्कालीन दक्षिण कोसल में हुआ था, जो वर्तमान छत्तीसगढ़ में है। माता कौशल्या को उनके उदार भाव, उनके ज्ञान व राम के प्रति उनके वात्सल्य भाव के लिये जाना जाता है, यही कारण है कि उन्हें मातृत्व भाव के प्रतीक के रूप में कई स्थानों पर पूजा जाता है, परंतु छत्तीसगढ़ राज्य एक मात्र ऐसा प्रदेश है जहां माता कौशल्या को समर्पित मंदिर स्थापित है, यह मंदिर रायपुर जिले में चन्द्रखुरी नामक स्थान पर स्थित है।

मुख्यमंत्री ने पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि भगवान राम धर्म व सदाचार के प्रतीक के रूप में हमारे देश सहित विदेशों में भी सर्वाधिक पूजनीय देवता है। राम के चरित्र को सदैव ही एक आदर्श राजा, एक आदर्श पति, एक आदर्श भाई व एक आदर्श पुत्र के रूप में चित्रित किया गया है। रामायण में उनके द्वारा किये गये कार्यों व उनकी शिक्षाओं ने प्राचीन काल से पीढ़ियों को नैतिकता के मार्ग पर चलने व उनका अनुसरण करने हेतु प्रेरित किया है। मुख्यमंत्री ने पत्र में लिखा है कि भगवान राम ने अपने 14 वर्ष के वनवास के लगभग 10 वर्ष अधिकांशतः दण्डकारण्य (ज्यादातर वर्तमान छत्तीसगढ़ एवं ओडिशा, तेलंगाना व आंध्रप्रदेश भी) में व्यतीत किये हैं एवं उक्त सभी स्थानों पर राम की उपस्थिति से संबंधित बहुत सी कथाएं प्रचलित हैं। 

मध्य भारत में स्थित छत्तीसगढ़ प्रदेश के वनक्षेत्र के संदर्भ में ऐसी धारणा है कि  राम ने अपने वनवास अवधि का एक महत्वपूर्ण भाग यहां व्यतीत किया था, इसलिए इस क्षेत्र में राम को समर्पित बहुत से मंदिर एवं पवित्र स्थल स्थित हैं एवं इन स्थलों को तीर्थ स्थली भी माना जाता है। यह क्षेत्र कई आदिवासी समुदायों का भी निवास स्थान माना जाता है, जिन्होंने सदियों से अपने पूर्वजों की परंपराओं व संस्कृति को सहेज कर रखा है। राम ने छत्तीसगढ़ की दो सर्वाधिक महत्वपूर्ण नदियां शिवनाथ व महानदी के तट के निकट अपने वनवास का अधिकांश समय बिताया था। बघेल ने लिखा है कि छत्तीसगढ़ राज्य सरकार प्रदेश के समृद्ध सांस्कृतिक व धार्मिक विरासतों के संरक्षण व प्रचार प्रसार के लिए पूर्णतया समर्पित है। राम तथा रामायण हमारी संस्कृति का अटूट हिस्सा हैं। 

अपनी विरासतों एवं राम से अपने संबंधों के संरक्षण हेतु अपने सतत् प्रयासों के अंतर्गत छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा माता कौशल्या को समर्पित मंदिर के जीर्णाेद्धार का कार्य किया गया है तथा वार्षिक कौशल्या महोत्सव भी मनाया जा रहा है। साथ ही भगवान  राम की यात्रा से जुड़े स्थलों को एकक्रम में व्यवस्थित कर ‘राम वन गमन पथ‘ के रूप में मान्यता देने का कार्य भी राज्य शासन द्वारा किया जा रहा है। इसी क्रम में राज्य शासन द्वारा प्रथम राज्य स्तरीय रामायण मानस मंडली प्रतियोगिता 08 अप्रैल 2022 से 10 अप्रैल 2022 तक जिला जांजगीर-चांपा के शिवरीनारायण नामक नगर में आयोजित किया गया एवं द्वितीय राज्य स्तरीय रामायण मानस मंडली प्रतियोगिता का आयोजन 16 फरवरी 2023 से 18 फरवरी 2023 तक गरियाबंद जिला के राजिम में आयोजित किया गया, जिसमें वियतनाम व श्रीलंका केे विदेशी सांस्कृतिक दलों ने भी अपनी प्रस्तुतियां दी।

मुख्यमंत्री ने पत्र में लिखा है कि इसी अनुक्रम में हमारे राज्य द्वारा राष्ट्रीय रामायण महोत्सव आयोजित करने की योजना बनाई जा रही है, जो 01 जून 2023 से 03 जून 2023 तक राम लीला मैदान, रायगढ़, छत्तीसगढ़ में आयोजित होना प्रस्तावित है। यह एक प्रकार का प्रतियोगिता वाला कार्यक्रम होगा, अतएव आपके राज्य से रामायण ‘झांकी प्रदर्शन‘ समूह के प्रतिनिधि मंडल को आमंत्रित करते हुए हमें अत्यन्त हर्ष का अनुभव हो रहा है। नृत्यनाटिका का विषय महाकाव्य रामायण के अरण्यकाण्ड पर आधारित होगा। मुख्यमंत्री ने आग्रह किया है कि राष्ट्रीय रामायण महोत्सव में आपके राज्य की गरिमामय उपस्थिति से कार्यक्रम की भव्यता व उत्साह में और अधिक वृद्धि होगी।


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