Media24Media.com: राजिम मेला

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राजिम अध्यात्म, धर्म और हमारी गौरवशाली संस्कृति का संगम: CM भूपेश बघेल

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महाशिवरात्रि के अवसर पर CM भूपेश ने राजिम के त्रिवेणी संगम में 33.12 करोड़ रूपए की लागत से निर्मित लक्ष्मण झूले का लोकार्पण किया। इस दौरान राजिम माघी पुन्नी मेले के समापन समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ का सुप्रसिद्ध तीर्थ राजिम मात्र एक शहर नहीं बल्कि आध्यात्म, धर्म और हमारी गौरवशाली संस्कृति का संगम है। राजिम के महत्व को देखते हुए हमने यहां राजिम माघी पुन्नी मेला को भव्यता प्रदान करने के लिए न सिर्फ नए मेला स्थल के लिए 54 एकड़ जमीन आवंटित की है। बल्कि मेले में आने वाले श्रद्धालुओं के लिए धर्मशाला के निर्माण समेत अन्य सुविधाएं विकसित की जा रही हैं। 

मेले स्थल का तेजी से विकास किया जा रहा है। महानदी, पैरी और सोंढूर के पवित्र त्रिवेणी संगम के तट पर 16 फरवरी से 01 मार्च तक 15 दिनों तक चलने वाले श्रद्धा-भक्ति और आस्था के छत्तीसगढ़ के इस सबसे बड़े राजिम माघी पुन्नी मेला 2022 का भव्य समापन महाशिवरात्री के अवसर पर मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के मुख्य आतिथ्य में सम्पन्न हुआ। 

मुख्यमंत्री समेत अतिथियों ने भगवान राजीव लोचन की प्रतिमा में दीप प्रज्वलित कर पूजा अर्चना की और महानदी की आरती में शामिल होकर प्रदेश की खुशहाली और समृद्धि की कामना की। कार्यक्रम की अध्यक्षता गृहमंत्री ताम्रध्वज साहू ने की। राजिम माघी पुन्नी मेला में इस साल 10 लाख श्रद्धालुओं ने शामिल होकर धर्म और आस्था के संगम में डुबकी लगाई।

राजिम माघी पुन्नी मेला का गरिमामय समापन

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आगे कहा कि विधायक अमितेष शुक्ल ने 15 दिन तक शराब पर प्रतिबंध लगाने कि बात कही थी, जिसे हमने तुरंत स्वीकृति दे दी और 15 दिन राजिम समेत आस-पास के क्षेत्रों की शराब दुकानें भी बंद रही। उन्होंने कहा कि भगवान राम ने वनवासकाल में सबसे ज्यादा समय छत्तीसगढ़ में बिताया। राजिम से लेकर शिवरीनारायण तक का क्षेत्र कमल क्षेत्र कहलाता है। उन्होंने रामवनगमन पथ के संबंध में कहा कि इस पथ के लिए 9 महत्वपूर्ण स्थलों को पूरी भव्यता के साथ विकसित किया जा रहा है। इसमें राजिम महत्वपूर्ण पड़ाव है। 

मुख्यमंत्री ने कहा की राजिम को संवारने का कार्य हमारी सरकार द्वार किया जा रहा है। उन्होंने ने कहा कि हमारी नीति और योजनाओं से छत्तीसगढ़ के किसान समृध्दि की ओर बढ़ रहे हैं। आज राज्य की संस्कृति, खानपान, रहन-सहन और व्यंजन का भी सम्मान हो रहा है। उन्होंने कहा की गोधन न्याय योजना की तारीफ प्रधानमंत्री भी कर चुके हैं। CM बघेल ने कहा की गौठानों में विकसित किए जा रहे रुरल इंडस्ट्रीज पार्क के माध्यम से हमारे किसान और ग्रामीण भाई-बहन अब उद्योगकर्मी भी कहलायेंगे। उन्होंने ने कहा की मजदूरों के लिए शुरू की गई राजीव गांधी ग्रामीण भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना से गरीबों की आय भी बढ़ेगी। उन्होंने शानदार आयोजन के लिए स्थानीय प्रशासन और आम नागरिकों को बधाई दी।

इस अवसर पर मंत्री ताम्रजध्वज साहू ने कहा की राज्य सरकार द्वारा हर साल आयोजन को बेहतर रुप देने का प्रयास रहता है, जिसमें हम सफल हो रहे है। इस साल लक्ष्मण झूला की सौगात अंचल वासियों को मिली है। इससे बारह महीने भगवान कुलेश्वरनाथ का दर्शन होगा। उन्होंने बताया की मेले में इस साल लगभग 3 हजार हितग्राहियों को 98 करोड़ रुपये का विभिन्न योजनाओं के माध्यम से लाभान्वित किया गया है। राजिम विधायक अमितेश शुक्ल ने कहा की लक्ष्मण झूला की सौगात से अंचल वासियों में खुशी की लहर है। उन्होंने गोधन न्याय योजना अंतर्गत गोबर खरीदी के लिए धन्यवाद दिया। साथ ही शराब बंदी के लिए मुख्यमंत्री का अभार व्यक्त किया। 

अभनपुर विधायक धनेंद्र साहू ने कहा की मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के नेतृत्व में राज्य में हर वर्गों का विकास हो रहा है। कलेक्टर नम्रता गांधी ने मेले के आयोजन और वहां की गई व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी दी। उन्होंने मेले के सफल आयोजन के लिए हर वर्ग का आभार व्यक्त किया। समारोह में छत्तीसगढ़ राज्य गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष राजेश्री महंत रामसुन्दरदास महाराज, महंत गोवर्धन शरण महाराज, संत उमेशानंद महाराज, संत रविकर साहेब, ब्रम्हाकुमारी पुष्पा बहन, ब्रम्हाकुमारी हेमा बहन, संत विचार साहेब और विशिष्ट साधु-संतों की गरिमामयी मौजूदगी रही। इस मौके पर विधायक संगीता सिन्हा, भिलाई विधायक देवेंद्र यादव, वरिष्ठ अधिकारी, स्थानीय जनप्रतिनिधि, नागरिकगण मौजूद रहे।

राज्यपाल उइके राजिम माघी पुन्नी मेला में हुईं शामिल, संत समागम समारोह का किया शुभारंभ

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राज्यपाल अनुसुइया उइके ने गरियाबंद जिले के राजिम में त्रिवेणी संगम तट पर लगने वाले प्रसिद्ध माघी-पुन्नी मेला के संत समागम समारोह का साधु-संतों की उपस्थिति में शुभारंभ किया। राज्यपाल उइके ने भगवान राजीवलोचन की पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल ने कहा कि पवित्र नगरी राजिम में आकर अत्यधिक प्रसन्नता हो रही है। राजिम पुन्नी मेले में आए साधु-संतों, श्रद्धालुजनों का मैं हार्दिक अभिनंदन करती हूं। यहॉं न सिर्फ सोंढूर, पैरी एवं महानदी का संगम है बल्कि धर्म अध्यात्म और आस्था का भी संगम है। 

साधु संतों का समागम छत्तीसगढ़ के साथ  ही देशभर का आयोजन बन गया है। किसी भी मेले का  सामुदायिक और सामाजिक महत्व होता है। उन्होंने आगे कहा कि भारत हमेशा से ही साधु-संतों की भूमि रही है। संतों का जीवन सदैव परोपकार के लिए समर्पित रहता है। संतों के दिखाए मार्ग पर चलने से ज्ञान की प्राप्ति के साथ-साथ जीवन में सकारात्मक बदलाव भी आते हैं। उन्होंने राजिम के धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि यहां के मंदिरों में भारतीय स्थापत्य और मूर्ति कला के गौरवशाली इतिहास के दर्शन होते हैं। राज्यपाल उइके ने कहा कि राजिम माघी पुन्नी मेले का विशेष सांस्कृतिक महत्व है, जहां लोक संस्कृति व आस्था का अनूठा संगम देखने को मिलता है। 

ऐसे आयोजनों से निश्चित ही जनमानस को उनकी पुरातन धार्मिक-सांस्कृतिक परंपराओं की जानकारी मिलती है। हमें स्थानीय कला, संस्कृति और धार्मिक आयोजनों के लिए अपने प्रयासों को बढ़ाने की आवश्यकता है, जिससे छत्तीसगढ़ पर्यटन मानचित्र में उभर कर सामने आ सके। राज्यपाल ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि कोरोना वायरस बचने के लिए अभी भी सावधानी बरतें और मास्क का उपयोग करें। जिन्होंने वैक्सीन नहीं लगवाया है, वे वैक्सीन जरूर लगाएं। संबोधन के अंत में राज्यपाल उइके ने कहा कि ऐसे पवित्र नदियों को स्वच्छ और पर्यावरण को प्रदूषण मुक्त बनाए रखने में अपनी सहभागिता निभानी होगी।

महानदी आरती में शामिल हुई राज्यपाल  

धर्मस्व एवं गृह मंत्री ताम्रध्वज साहू ने कहा कि हम मेला को लगातार अच्छा बनाने के लिए प्रयासरत है। उन्होंने कहा कि हमने श्रद्धालुओं की सुविधा का पूरा ख्याल रखा है। मंत्री ने राजिम मेला के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इस अवसर पर राज्यपाल उइके ने साधु-संतों को स्मृति चिन्ह भेंट की। राज्यपाल  उइके राजिम में महानदी, पैरी और सोंढूर के संगम तट पर आयोजित प्रख्यात महानदी आरती में शामिल हुईं। उल्लेखनीय है कि प्रतिवर्ष माघी पूर्णिमा से महाशिवरात्रि तक लगने वाले राजिम माघी-पुन्नी मेले में महानदी आरती का आयोजन किया जाता है।

राज्यपाल ने विभागीय स्टाल और सरस मेला का अवलोकन

राज्यपाल उइके ने राजिम माघी-पुन्नी मेले के सरस मेला में लगाए विभिन्न स्टॉलों और महिला समूह द्वारा उत्पादित सामग्री का अवलोकन किया। राज्यपाल उइके ने स्टॉलों में पहुंचकर समूह की महिलाओं से बड़ी आत्मीयता के साथ चर्चा की और उनके परिश्रम को सराहा। उन्होंने महिलाओं से उनके द्वारा तैयार सामग्रियों की जानकारी लेते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ के स्थानीय उत्पादों और कलाकृतियों का संरक्षण-संवर्धन करने में उनका योगदान अतुलनीय है। इस अवसर पर राज्यपाल उइके ने सरस मेला स्टॉल के सँगवारी सेल्फी जोन में फोटो ली। 

ये रहे उपस्थित

समारोह में राजिम विधायक अमितेश शुक्ल, गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष महंत राम सुंदर दास, महंत गोवर्धन शरण जी महाराज, उमेश आनंद जी महाराज, देवदास जी महाराज संत विचार साहेब, सिद्धेश्वरानंद महाराज मंच पर विशेष रूप से उपस्थित थे।

CM ने राजिम माघी पुन्नी मेले की प्रदेशवासियों को दी शुभकामनाएं, मेला स्थल के आस-पास की 6 शराब दुकानें 14 दिन तक बंद

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मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने आज से शुरू हो रहे राजिम माघी पुन्नी मेला और शिवरीनारायण मेला की प्रदेशवासियों को बधाई और शुभकामनाएं दी है। CM बघेल ने कहा है कि राजिम माघी पुन्नी मेला छत्तीसगढ़ की आस्था का प्रतीक है। यहां छत्तीसगढ़ की लोक कला संस्कृति का दर्शन होता है। छत्तीसगढ़ के प्रयागराज के रूप में प्रसिद्ध राजिम में महानदी, पैरी और सोंढूर नदियों के पवित्र त्रिवेणी संगम पर सदियों से इस मेले का आयोजन होता है।  छत्तीसगढ़ ही नहीं आसपास के राज्यों के लोग भी बड़ी संख्या में श्रद्धापूर्वक इस मेले में शामिल होते हैं। 

 

राज्य सरकार की ओर से छत्तीसगढ़ की गौरवशाली सांस्कृतिक परम्पराओं को संरक्षित और संवर्धित करने के प्रयासों के तहत राजिम माघी पुन्नी मेले को उसके प्राचीन मूल स्वरूप में आयोजित किया जा रहा है। CM बघेल ने कहा कि राजिम की तरह माघ पूर्णिमा के अवसर पर शिवरीनारायण में भी महानदी, शिवनाथ और जोंक नदी के पावन संगम पर शुरू होने वाले मेले में भी लोग बड़ी श्रद्धा और आस्था के साथ शामिल होते है। उन्होंने महानदी के तट पर सिरपुर में माघी पूर्णिमा के दिन से शुरू हो रहे सिरपुर महोत्सव की शुभकामनाएं भी प्रदेशवासियों को दी है।

पुन्नी मेला क्षेत्र के आस-पास की 6 शराब दुकानें 1 मार्च तक बंद 

वहीं मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की घोषणा के मुताबिक साल 2022 में आयोजित होने वाले राजिम माघी पुन्नी मेला के दौरान राजीम मेला क्षेत्र के आस-पास की 6 देसी और विदेशी शराब दुकानें 16 फरवरी से 01 मार्च 2022 तक बंद रहेंगी। इसे लेकर मंत्रालय महानदी भवन स्थित वाणिज्यिक कर (आबकारी) विभाग ने आदेश जारी कर दिए हैं। जारी आदेश के मुताबिक गरियाबंद, धमतरी और रायपुर जिले के कलेक्टर्स को इस आदेश को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए गए हैं।

 14 दिन तक बंद रहेगी शराब दुकानें

वाणिज्यिक कर (आबकारी) विभाग द्वारा जारी आदेश के मुताबिक राजिम माघी पुन्नी मेला के दौरान राजिम मेला क्षेत्र के आसपास की देसी और विदेशी शराब दुकानें, देसी-विदेशी शराब दुकान राजिम (बाह्य) जिला गरियाबंद, देशी-विदेशी शराब दुकान गोबरा नवापारा, जिला रायपुर के देशी और विदेशी मदिरा दुकान समेत मगरलोड जिला धमतरी के कुल 06 शराब दुकानों को 16 फरवरी से 01 मार्च 2022 तक बंद रखा जाएगा। 

राजिम मेला: श्रीसंगम की सांस्कृतिक विरासत, कहां जाहू बड़ दूर हे गंगा

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डॉ सुखदेव राम साहू 'सरस'. 

लोक प्रसिद्ध व्यक्तित्व के साथ अनेक संदर्भ और मान्यताओं का समावेश होता है। समय सापेक्ष उसमें आंशिक परिवर्तन , परिवर्धन भी होते रहते हैं । वही कल्पना की उड़ान अनेक बार ऐतिहासिक समीकरण से बहुत दूर हो जाते हैं । छत्तीसगढ़ का सर्वाधिक लोकप्रिय राजिम मेला, माघी पुन्नी मेला इन्हीं झंझावातों में भ्रमण करते हुए वर्तमान में भी स्थिर नहीं हो पाया है ।

राजिम (स्थान या व्यक्ति नाम ) छत्तीसगढ़ अंचल का पवित्र ऐतिहासिक, धार्मिक और सांस्कृतिक केंद्र रहा है। यहां माघी पुन्नी से महाशिवरात्रि पर्व तक विशाल और भव्य मेला का आयोजन किया जाता है। राजिम मेला से, राजीवलोचन महोत्सव से, राजिम कुंभ से, राजिम कुंभ कल्प से, माघी पुन्नी मेला तक सतत गतिमान है । अपने आप में उत्तर तथा दक्षिण भारत ( परिपथ ) की संस्कृति को संजोए राजिम श्रीसंगम के पुण्य को बाटती है और हर छत्तीसगढ़िया 'कहां जाहू बड़ दूर हे गंगा , जुर मिल यीहें तरौ रे' मानकर उसमें समस्त धार्मिक और पारंपरिक कार्य पूर्ण कर पुण्य लाभ लेते हैं। 

प्रामाणिक दस्तावेजीकरण की आवश्यकता

इस आध्यात्मिक उपस्थिति के पीछे निःसंदेह एक महान नारी का आत्मोत्सर्ग, सेवाभाव, श्रम, श्रद्धा साधना एवं संकल्प का भाव समाहित है । यह अभी भी अनुत्तरित है कि वह माता राजिम, राजिम तेलिन भक्तिन कौन थी । निःसंदेह इस पर मान्यताएं, किवदंती शोध कार्य अनेक तत्व उत्तरदायी हैं। वह राजीवा, राजू राजिबा, राजम, राजमाल, पद्म या कमल पयार्यवाची शब्द की संगति में सहमति है । शोध परक प्रामाणिक दस्तावेजीकरण की आवश्यकता है। 

पद्मा लोचन का प्रयोग समाहित 

वास्तव में अद्यतन जो लगभग स्वीकृति ( इतिहास मान्यता, जनश्रुति, कल्पना आदि के ही अंतर्गत ) समीकरण करने पर लगभग ये बातें रेखांकित होती हैं कि (1) पूर्व में यह नाम पौराणिक था । (2) राजिम भक्तिन माता धनिक परिवार की थीं । (3) उनका तेल विक्रय का व्यवसाय था । (4) वह राजा जगतपाल, सामंत जगपाल देव कलचुरी राजवंश की समकालीन थीं । (5) उनका प्रवासी स्थल चांदा / चंद्रपुर था । (6) उन्हें प्राप्त अनगढ़ प्रस्तर चमत्कारिक था । (7) वह शिव भक्त परिवार की थीं । (8) कमल पर्यायवाची शब्द पद्मा लोचन का प्रयोग समाहित रहा है ।

अंकित शिला मंदिर का इतिहास

इस प्रसंग में उक्त तथ्यों के साथ इसका भी समावेश किया जाना चाहिए कि राजिम भक्तिन मंदिर ( समकालीन निर्मिति ) के गर्भगृह में स्थापित पूजारत दंपत्ति, घानी, बैल, सूर्य, चंद्र अंकित शिला मंदिर का ऐतिहासिक है । वहीं इसी प्रकार की आंशिक परिवर्तन युक्त प्रस्तर खंड छत्तीसगढ़ में इन स्थानों में भी पाए गए हैं, यथा भोरमदेव, केशकाल घाटी के ऊपर के प्राचीन खंडहर, बस्तर क्षेत्र आदि के 9 स्थानों में । कोल्हू (घानी ) का सीधा संबंध तैलिक वंश से संभव है । 

पवित्र श्रीसंगम की सांस्कृतिक विरासत

संक्षिप्त में यह कथन अधिक उपयुक्त होगा कि क्या अंकित दंपत्ति ही राजिम भक्तिन तेलिन हेतु अभिधेय है । अंकन की सिद्धि, प्रसिद्धि, संपन्नता, गुणात्मकता एवं राजवंश के परिचायक हो सकता है । राजिम के लिए भी पूर्व नामांकन पद्मावतीपुरी ही इच्छित सूत्र प्रदान करते हैं । निःसंदेह पर्याप्त शोधपरक कार्य का होना आवश्यक है । शोध पीठ की स्थापना के साथ पर्याप्त दस्तावेजीकरण ही इस ऐतिहासिक धरोहर पवित्र श्रीसंगम की सांस्कृतिक विरासत को समुचित एवं नामांकित स्थान प्रदान करेंगे । यही शुभ होगा ।

-पुरानी बस्ती रायपुर छ. ग.

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