Media24Media.com: राईस मिल

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खाद्य विभाग की टीम द्वारा महासमुंद सहित अन्य जिलों में स्थित राईस मिलों का किया गया आकस्मिक निरीक्षण

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 रायपुर। खाद्य विभाग की टीम द्वारा रायपुर, धमतरी, महासमुंद और राजनांदगांव जिले में स्थित राईस मिलों का औचक निरीक्षण किया गया। जिसमें आर.टी. राईस मिल (प्रो. प्रमोद जैन) के परिसर पर विधिक कार्यवाही की गई।


आर.टी. राईस मिल द्वारा खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 में कस्टम मिलिंग हेतु पंजीयन कराने के उपरांत भी अनुमति एवं अनुबंध का निष्पादन नहीं कराया गया है। शासकीय धान का उठाव नहीं किया जा रहा है। मिल परिसर में 390 क्विंटल उसना चावल एवं 1200 क्विंटल धान फ्री सेल प्रयोजन हेतु पाया गया, जो कि प्रथम दृष्टया छत्तीसगढ़ कस्टम मिलिंग चावल उपार्जन आदेश, 2016 का उल्लंघन है। मिल परिसर को सील कर धान एवं चावल को जब्त कर लिया गया है। जांच दल में तहसीलदार श्री बाबूलाल कुर्रे, नायब तहसीलदार राजेन्द्र चन्द्राकर, सहायक खाद्य अधिकारी श्रीमती बिन्दु प्रधान सम्मिलित थे।

इसके अतिरिक्त जिला महासमुंद में श्रीवास्तव राईस मिल, नारायण राईस मिल, माँ लक्ष्मी राईस मिल, जिला धमतरी में आकांक्षा राईस मिल, जिला राजनांदगांव में अतुल राईस मिल में जांच टीम द्वारा दबिश दी गई है एवं नियमानुसार जांच किया जा रहा है।

उपार्जित धान का समय पर कस्टम मिलिंग हो: CM बघेल

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रायपुर : मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने छत्तीसगढ़ में खरीफ वर्ष 2020-21 में समर्थन मूल्य पर उपार्जित किए जा रहे धान का समय पर कस्टम मिलिंग कराने के संबंध में केन्द्रीय खाद्य मंत्री पीयूष गोयल को पत्र लिखा है। उन्होंने पत्र में राज्य की कस्टम मिलिंग की क्षमता का उल्लेख करते हुए केन्द्रीय पूल के अंतर्गत भारतीय खाद्य निगम में 26 लाख मेट्रिक टन उसना चावल एवं 14 लाख मेट्रिक टन अरवा चावल उपार्जन की अनुमति देने का अनुरोध किया है।





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मुख्यमंत्री बघेल ने केन्द्रीय खाद्य मंत्री पीयूष गोयल (Union Food Minister Piyush Goyal) को लिखे पत्र में कहा है कि भारतीय खाद्य निगम के द्वारा पूर्व खरीफ वर्षो 2016-17 एवं उसके पहले उसना के साथ-साथ अरवा चावल भी उपार्जित किया जाता रहा है। अतः एफ.सी.आई. द्वारा राज्य की आवश्यकता से अतिशेष चावल उसना के साथ-साथ अरवा चावल के रूप में भी लिया जाना होगा ताकि डी.सी.पी. योजना अंतर्गत उपार्जित समस्त धान का समय पर निराकरण किया जा सके और धान के रख-रखाव में कोई क्षति न हो।  





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 मुख्यमंत्री ने पत्र में यह भी लिखा है राज्य में स्थापित 400 उसना राईस मिलों की उसना मिलिंग क्षमता 5.68 लाख मेट्रिक टन प्रतिमाह और 1504 अरवा मिलों की अरवा मिलिंग क्षमता 18.83 लाख मेट्रिक टन प्रतिमाह है। इसे ध्यान में रखते हुए खरीफ वर्ष 2020-21 में भारतीय खाद्य निगम में 26 लाख मेट्रिक टन उसना चावल एवं 14 लाख मेट्रिक टन अरवा चावल उपार्जन की अनुमति दी जाए।





धान के कस्टम मिलिंग उपरांत 60 लाख मेट्रिक टन





 उल्लेखनीय है कि छत्तीसगढ़ राज्य में खरीफ विपणन वर्ष 2020-21 में समर्थन मूल्य पर उपार्जित किए जाने वाले धान के कस्टम मिलिंग उपरांत 60 लाख मेट्रिक टन चावल लेने की कार्ययोजना का अनुमोदन भारत सरकार द्वारा किया गया है। इसमें से भारतीय खाद्य निगम में केन्द्रीय पूल अंतर्गत अनुमानित सरप्लस 40 लाख मेट्रिक टन चावल उपार्जित किया जाएगा तथा शेष 20 लाख मेट्रिक टन (एन.एफ.एस.ए. अंतर्गत 15 लाख मेट्रिक टन अरवा व स्टेट पूल अंतर्गत 4.80 लाख मेट्रिक टन अरवा एवं 0.20 लाख मेट्रिक टन उसना) चावल राज्य में पीडीएस की आवश्यकता हेतु छत्तीसगढ़ स्टेट सिविल सप्लाईज कॉर्पोरेशन लिमिटेड में उपार्जित किया जाएगा।


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