Media24Media.com: रंग-रोगन

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शैक्षणिक सत्र शुरू होने से पहले आश्रम-छात्रावासों की कराएं साफ-सफाई और रंग-रोगन: मंत्री रामविचार नेताम

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रायपुर। आदिम जाति मंत्री रामविचार नेताम ने कहा है कि  आश्रम-छात्रावास में रहकर पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक माहौल उपलब्ध कराने के लिए नये शिक्षण सत्र के प्रारंभ होने से पहले राज्य के सभी आश्रम-छात्रावासों की मरम्मत, साफ-सफाई, पेयजल, रंग-रोगन आदि की व्यवस्था कर ली जाए। उन्होंने नवा रायपुर में विभागीय काम-काज की समीक्षा के दौरान अधिकारियों को आश्रम-छात्रावासों के नियमित निरीक्षण और रख-रखाव कराने के निर्देश दिए।

आदिम जाति विकास मंत्री नेताम ने कहा है कि आदिम जाति कल्याण विभाग में आश्रम-छात्रावासों के अधीक्षक के पद पर पदोन्नत होने वाले अधीक्षकों की पदस्थापना के लिए काउंसिलिंग की प्रक्रिया अपनाई जाए। यह प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से एक दिन आश्रम-छात्रावास में समय बिताने और विद्यार्थियों के साथ भोजन करने को भी कहा। नेताम ने बैठक में कहा कि आगामी दो वर्षों में सभी आश्रम छात्रावासों के लिए भवन निर्माण किया जाना है, इसलिए भवनविहिन आश्रम-छात्रावासों का चिन्हांकन कर लिया जाए। उन्होंने कहा कि जिन आश्रम-छात्रावासों में सीटों की संख्या बढ़ाई गई है वहां रहने वाले छात्रों के लिए अतिरिक्त भवन अथवा कमरों की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जानी चाहिए।

नेताम ने राज्य में प्रयास विद्यालयों की व्यवस्था और रख-रखाव के लिए भी आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि इन विद्यालयों में छात्रों को अखिल भारतीय इंजीनियरिंग और मेडिकल परीक्षाओं की तैयारी के लिए कोचिंग संस्थान के चयन के लिए टेंडर प्रक्रिया पूर्ण कराने कहा।

बैठक में अधिकारियों ने बताया कि आगामी 15 जून से प्रधानमंत्री धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के प्रचार-प्रसार के लिए विशेष कैंप लगाए जाएंगे। राष्ट्रीय स्तर पर 15 जून से शुरू होगी। राज्य में 16 और 17 जून को दो दिवसीय राज्य स्तरीय अभियान चलाया जाएगा, वहीं जिला स्तर पर 17 से 20 जून और विकासखण्ड स्तर पर 20 से 30 जून तक चलेगा। इस अभियान के तहत पीएम जनमन योजना से छुटे हुए जनजातीय परिवारों के आधार कार्ड, आयुष्मान कार्ड, वनाधिकार पत्र जैसे दस्तावेज बनाए जाएंगे। शासकीय योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा। मंत्री नेताम ने सिकलसेल और टीव्ही मुक्त भारत अभियान के प्रति भी बच्चों को जागरूक करने के निर्देश अधिकारियों को दिए।

मंत्री नेताम ने बैठक में कहा कि निर्धारित मीनू के आधार पर आश्रम और छात्रावास के बच्चों को भोजन उपलब्ध कराया जाए। आश्रम-छात्रावासों की दीवारों पर महापुरूषों के संदेशों का लेखन किया जाए। साथ ही बच्चों में शैक्षणिक क्षमता को बढ़ाने के लिए भाषण, वाद-विवाद प्रतियोगिता कराई जाए। उन्होंने आश्रम-छात्रावासों की विशिष्ट पहचान बनाने पर जोर दिया। मंत्री नेताम ने विभाग में सुशासन तिहार के तहत प्राप्त आवेदनों के निराकरण की भी जानकारी ली। उन्होंने निराकरण के लिए शेष बचे आवेदनों को गंभीरता के साथ निराकरण करने के निर्देश दिए।

विशेष पिछड़ी जनजातियों के लिए 75 बहुउद्देशीय भवन

बैठक में जानकारी दी गई कि विशेष पिछड़ी जनजाति वर्ग के समग्र विकास के लिए राज्य में 75 बहुउद्देशीय भवन का निर्माण किया जा रहा है। 31 भवनों का निर्माण लगभग पूर्णतः की ओर है। इन भवनों में सांस्कृतिक, शैक्षणिक, स्वास्थ्य और सामाजिक गतिविधियां आयोजित की जा सकेगी। उन्होंने अधिकारियों को इन भवनों के तेजी से पूर्ण कराने के निर्देश भी दिए।

बैठक में आदिम जाति एवं अनुसूचित जाति विकास विभाग के प्रमुख सचिव सोनमणि बोरा, उप सचिव बी.एस. राजपूत, अपर संचालक संजय गौड़, जितेन्द्र गुप्ता, कार्यपालन अभियंता त्रिदीप चक्रवर्ती सहित जिलों के परियोजना प्रशासक और सहायक आयुक्त उपस्थित थे।

गोबर से निर्मित प्राकृतिक पेंट से होगी शासकीय भवनों की पुताई

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रायपुर. मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देश के परिपालन में लोक निर्माण विभाग ने गौठानों में गोबर से उत्पादित प्राकृतिक पेंट को विभागीय निर्माण कार्यों के एसओआर में शामिल कर लिया है। लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता ने विभागीय अधिकारियों को सभी शासकीय भवनों के रंग-रोगन में केमिकल पेंट के बदले गोबर से बनने वाले प्राकृतिक पेंट का अनिवार्य रूप से उपयोग करने के निर्देश दिए है। प्रमुख अभियंता ने इस संबंध में जारी आदेश में कहा है कि गोबर पेंट का उपयोग ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सुदृढ़ीकरण एवं पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से मुख्यमंत्री की महत्वपूर्ण पहल है।

लोक निर्माण विभाग द्वारा नव निर्मित भवनों के दो या दो से अधिक कोट्स की वॉशेबल डिस्टेम्पर से पुताई के लिए प्रति वर्ग मीटर 53 रूपए तथा पुराने भवनों के लिए 30 रूपए प्रति वर्ग मीटर की दर निर्धारित की गई है। इसी तरह गोबर से निर्मित प्रीमियम ईमलशन पेंट से नवनिर्मित वॉल पेंटिंग की दर 69 रूपए प्रति वर्ग मीटर तथा पुराने भवन के लिए प्रति वर्ग मीटर 41 रूपए की दर निर्धारित की गई है। गौरतलब है कि राज्य में पशुधन के संरक्षण और संवर्धन के लिए 9619 गांवों में गौठानों की स्थापना की गई है। इन गौठानों में गोधन न्याय योजना के तहत 2 रूपए किलो की दर से गोबर की खरीदी और 4 रूपए लीटर की दर से गौमूत्र की खरीदी की जा रही हैं। 

गोबर से कम्पोस्ट खाद के साथ-साथ अन्य सामग्री का निर्माण महिला समूहों द्वारा किया जा रहा हैं। गौमूत्र से फसल कीटनाशक और जीवामृत तैयार किये जा रहे है। हाल ही में राज्य में गोबर से प्राकृतिक पेंट के उत्पादन की शुरूआत रायपुर के समीप स्थित हीरापुर जरवाय गौठान से हुई है। गोबर से प्राकृतिक पेंट बनाने की यूनिट कांकेर जिले के चारामा में भी लग चुकी है। मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल के मंशा के अनुरूप राज्य के 75 गौठानों में गोबर से प्राकृतिक पेंट एवं पुट्टी निर्माण की इकाईयां तेजी से स्थापित की जा रही है। इन इकाईयों के पूर्ण होने पर प्रतिदिन 50 हजार लीटर तथा साल भर में 37 लाख 50 हजार लीटर प्राकृतिक पेंट का उत्पादन होगा।

गोबर से प्राकृतिक पेंट के निर्माण का मुख्य घटक कार्बाेक्सी मिथाईल सेल्यूलोज (सीएससी) होता है। सौ किलो गोबर से लगभग 10 किलो सूखा सीएमसी तैयार होता है। कुल निर्मित पेंट में 30 प्रतिशत मात्रा सीएमसी की होती है। छत्तीसगढ़ में गोबर से प्राकृतिक पेंट और पुट्टी निर्मित किए जाने की केन्द्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने सराहना की है। छत्तीसगढ़ राज्य की इस पहल को उन्होंने ग्रामीणों को रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए बेहतर कहा है। 

राजधानी रायपुर के समीप स्थित हीरापुर जरवाय गौठान में महिला समूह ने गोबर से प्राकृतिक पेंट एवं पुट्टी तैयार करने के काम में 22 महिलाएं जुड़ी है। यहां तैयार किए गए जा रहे गोबर पेंट का उपयोग शासकीय भवनों की रंगाई पोताई के लिए उपयोग हो रहा है। गोबर से तैयार प्राकृतिक पेंट की कीमत 230 रूपए प्रति लीटर रखी गई है, जो मार्केट में कम्पनियों के पेंट के मूल्य से लगभग आधी है। इसकी क्वालिटी ब्रांडेड कम्पनी के जैसी है। हीरापुर जरवाय गौठान में गोबर से प्राकृतिक पेंट बनाने के लिए 25 लाख रूपए की मशीनें लगाई गई हैं। समूह की अध्यक्ष श्रीमती धनेश्वरी रात्रे ने बताया कि गाय के गोबर पहले डी वाटर कर्लिंग मशीन में डाला जाता है और पानी मिलाकर घोल तैयार कर उसमें कई अन्य सामग्री मिलाई जाती है,

फिर इन सब को हाई स्पीड डिस्पेंसर मशीन में मिक्स किया जाता है। इसके बाद पेंट और पुट्टी तैयार होती है। जरवाय गौठान में लगी मशीन से आठ घंटे में एक हजार लीटर पेंट तैयार किया जा सकता है। यहां यह भी उल्लेखनीय है कि गोबर से प्राकृतिक पेंट के निर्माण के लिए 21 नवम्बर 2021 को मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की मौजूदगी में कुमाराप्पा नेशनल पेपर इंस्टीट्यूट जयपुर, खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग, सूक्ष्म लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय नयी दिल्ली और छत्तीसगढ़ राज्य गौ सेवा आयोग के मध्य हुआ है।

शासकीय भवनों के रंग-रोगन के लिए गोबर पेंट का उपयोग नहीं करने से मुख्यमंत्री नाराज

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रायपुर। मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने सभी शासकीय विभागों, निगम-मंडलों एवं स्थानीय निकायों में भवनों के रंग-रोगन के लिए गोबर पेंट का अनिवार्यतः उपयोग करने के निर्देश दिये हैं। पूर्व में जारी किए गए निर्देशों के बावजूद अभी भी निर्माण विभागों द्वारा केमिकल पेंट का उपयोग किए जाने पर नाराजगी जताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा है कि निर्देशों का उल्लंघन करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों के विरुद्ध कार्यवाही की जाएगी। 


                    

मुख्यमंत्री  बघेल ने मुख्य सचिव को सभी विभागों, निगम-मंडलों और स्थानीय निकायों को भवनों के रंगरोगन के लिए गोबर पेंट का उपयोग अनिवार्यतः करने के निर्देश जारी करने को कहा है। बघेल ने कहा है कि गोबर पेंट का उपयोग ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सुदृढ़ीकरण और पर्यावरण संरक्षण की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण होगा। गौरतलब है कि रायपुर के नजदीक हीरापुर जरवाय के गौठान में महिला स्व-सहायता समूह द्वारा गोबर से पेंट तैयार किया जा रहा है। गोधन न्याय योजना के तहत गौठानों में दो रूपए किलो में गोबर की खरीदी करके इससे वर्मी कम्पोस्ट, सुपर कम्पोस्ट एवं अन्य उत्पाद निर्मित किये जा रहे हैं। गोबर से विद्युत उत्पादन और प्राकृतिक पेंट निर्माण की शुरूआत की गई है। 

गोधन न्याय योजना से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति मिली है। गांवों में रोजगार के अवसर बढ़े हैं। ग्रामीणों, पशुपालकों एवं महिला समूहों को आय का अतिरिक्त जरिया मिला है। गोधन न्याय योजना के हितग्राहियों को पिछले दो वर्षो में 380 करोड़ रूपए की राशि का भुगतान किया जा चुका है। योजना से मिलने वाली राशि से ग्रामीणों को अपनी छोटी मोटी जरूरतें पूरी करने का जरिया मिला है। गोबर खरीदी और उससे तैयार किए जा रहे उत्पादों की बिक्री से ग्रामीणों को हो रही आय के साथ गोबर पेंट का उपयोग बढ़ने से ग्रामीणों को और अधिक फायदा होगा।

ग्रामीणों और महिला स्व सहायता समूहों की आय में वृद्धि के लिए गोधन न्याय योजना का विस्तार करते हुए गौठानों में इस वर्ष से गौ मूत्र की खरीदी प्रारंभ की गई है। वर्तमान में प्रदेश के 96 गौठानों में गौ मूत्र की खरीदी की जा रही है। अब तक 1 लाख 5000 लीटर गौ मूत्र की खरीदी की गई जिसका मूल्य 4 लाख 20 हजार रूपए है। खरीदे गए गौ मूत्र से महिला स्व-सहायता समूहांे द्वारा 36 हजार 913 लीटर कीट नियंत्रक ब्रम्हास्त्रऔर 19 हजार 765 लीटर वृद्धि वर्धक जीवामृतजैसे जैविक उत्पाद तैयार किए गए हैं। अब तक 13 लाख 64 हजार 771 रूपए कीमत का 28 हजार 405 लीटर कीट नियंत्रक ब्रम्हास्त्रऔर 5 लाख 98 हजार 464 रूपए का 16 हजार 634 लीटर वृद्धि वर्धक जीवामृतका विक्रय महिला स्व सहायता समूहों द्वारा किया गया है।

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