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कलेक्टर ध्रुव मुख्यमंत्री हाट बाजार क्लिनिक का जायजा लेने पहुंचे बेलबहरा साप्ताहिक बाजार में

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रायपुर। मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले केे कलेक्टर पी.एस. ध्रुव ने मुख्यमंत्री हाट बाजार क्लिनिक योजना का जायजा लेने गत दिवस अचानक मनेन्द्रगढ़ विकासखण्ड के ग्राम बेलबहरा के साप्ताहिक बाजार पहुंचे। उन्होंने यहां पर स्वास्थ्य विभाग की ओर से ग्रामीणों के निःशुल्क इलाज के लिए लगे स्वास्थ्य कैम्प का मुआयना किया और ग्रामीणों से उनकी बीमारी और इलाज के संबंध में पूछताछ की। ग्रामीणों ने बताया कि बेलबहरा साप्ताहिक बाजार में नियमित रूप से मुख्यमंत्री हाट बाजार क्लिनिक लगता है। चिकित्सक और स्वास्थ्य कर्मियों की टीम ग्रामीणों का निःशुल्क स्वास्थ्य परीक्षण करने के साथ ही आवश्यक दवाएं भी निःशुल्क उपलब्ध कराती है।

मुख्यमंत्री हाट बाजार क्लिनिक योजना से ग्रामीणों को सहजता से स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध होने लगी है। इससे ग्रामीणों को सर्दी, खांसी, बुखार एवं अन्य बीमारियों के लिए भटकना नहीं पड़ता है। साप्ताहिक बाजार में आने वाले आस-पास के दर्जनों गांव के लोगों को यहां निःशुल्क चिकित्सा सुविधा उपलब्ध हो रही है। ग्रामीणों ने इस योजना की प्रशंसा की और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का आभार जताते हुए कहा कि इससे ग्रामीणों को इलाज के लिए अब नीम हकीम, झोला छाप डॉक्टरों के पास जाने और पैसा खर्च करने की जरूरत नहीं पड़ती है।

कलेक्टर ने ग्रामीणों से समर्थन मूल्य पर धान, कोदो, कुटकी, रागी, लघु वनोपज आदि की खरीदी और भुगतान सहित गोधन न्याय योजना, राजीव गांधी किसान न्याय योजना, राजीव गांधी ग्रामीण भूमिहीन कृषि मजदूर न्याय योजना के तहत मिल रहे लाभ के बारे में भी ग्रामीणों से जानकारी ली। कलेक्टर ने कहा कि छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा समाज के सभी वर्गाें के बेहतरी के लिए योजनाएं संचालित की जा रही है। उन्होंने इसका लाभ उठाने के लिए ग्रामीणों को प्रेरित किया और कहा कि इसका लाभ समाज के अन्य पात्र व्यक्तियों को दिलाने में मदद करें।

पुरानी पेंशन योजना खटाई में, मुख्यमंत्री भूपेश ने दोहराई प्रतिबद्धता

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रायपुर। नई पेंशन योजना के तहत कर्मचारियों और राज्य सरकार के अंशदान की राशि केन्द्र सरकार से वापस प्राप्त करने के लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने वित्त विभाग के अधिकारियों को कर्मचारी संगठन से बात कर इसका रास्ता निकालने को कहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हम पुरानी पेंशन योजना के लिए प्रतिबद्ध हैं।



कर्मचारी संगठनों से नई रणनीति पर सहमति बनाने की कोशिश होगी

गौरतलब है कि राज्य सरकार की वित्त सचिव ने पेंशन विनियामक विकास प्राधिकरण को पत्र लिखकर कर्मचारियों और राज्य सरकार के अंशदान के तौर पर जमा राशि को वापस देने का आग्रह किया था। जवाब में पेंशन विनियामक विकास प्राधिकरण की ओर से कहा गया है कि यह रकम लौटाने का कोई कानूनी प्रावधान नहीं है, जिसके बाद मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने केन्द्र सरकार को पत्र लिखकर यह रकम वापस मांगी थी। जबाव में बताया गया कि पीएफआरडीए अधिनियम और अन्य प्रासंगिक नियमों के तहत सरकार और कर्मचारियों के योगदान को वापस करने का कोई प्रावधान नहीं है।

मुख्यमंत्री शिक्षा गौरव अलंकरण: शिक्षा दूत, ज्ञान दीप और शिक्षा से सम्मानित होंगे शिक्षक

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रायपुर। मुख्यमंत्री द्वारा की गई घोषणा के अनुसार प्रति वर्ष 5 सितम्बर को विकासखण्ड स्तर, जिला स्तर और संभाग स्तर पर मुख्यमंत्री गौरव अलंकरणयोजना के अंतर्गत शिक्षकों को पुरस्कृत किया जा रहा है। शिक्षक दिवस 5 सितम्बर 2022 को विकासखण्ड स्तर पर शिक्षा दूतपुरस्कार दिया जाएगा। इसके लिए प्राथमिक शाला के कक्षा पहली से पांचवीं तक में अध्यापन कराने वाले शिक्षक ही पात्र होंगे, चाहें वे किसी भी पद नाम से जाने जाते हों। जिला स्तर पर ज्ञान दीपपुरस्कार दिया जाएगा। 



इसके लिए पूर्व माध्यमिक शाला अर्थात् कक्षा 6वीं से 8वीं तक अध्यापन करने वाले शिक्षक ही पात्र होंगे चाहे वे किसी भी नाम से जाने जाते हों। इसी प्रकार संभाग स्तर पर शिक्षा श्रीपुरस्कार प्रदान किया जाएगा। इसके लिए कक्षा 9वीं से 12वीं तक में अध्यापन करने वाले शिक्षक ही पात्र होंगे, चाहे वे किसी भी पद नाम से जाने जाते हों। लोक शिक्षण संचालनालय द्वारा इन तीनों पुरस्कार प्रदान करने के संबंध में सभी संभागीय संयुक्त संचालक लोक शिक्षण और जिला शिक्षा अधिकारियों को दिशा-निर्देश जारी किए हैं। 

इन तीनों पुरस्कारों के लिए राष्ट्रीय शिक्षक पुरस्कार शिक्षक, राज्य स्तरीय शिक्षक पुरस्कार प्राप्त शिक्षकों का चयन नहीं किया जाएगा। पुरस्कार के लिए यह नियम शासकीय प्राथमिक, पूर्व माध्यमिक, हाई एवं हायर सेकेण्डरी स्कूल से उन शिक्षकों पर लागू होगा, जो स्कूल में छात्र-छात्राओं को अध्यापन कराते हैं। उत्कृष्ट शिक्षक चयन हेतु संकुल, विकासखण्ड, जिला स्तर, संभाग स्तर पर दिए जाने वाले पुरस्कार के लिए चयन समिति का गठन किया गया है। इन सभी समितियों का कार्यकाल तीन वर्ष का रहेगा, किसी कारण से समिति का पद रिक्त होने पर शेष अवधि के लिए समिति गठन हेतु सक्षम अधिकारी पद की पूर्ति कर सकेगा।

संकुल स्तरीय समिति- प्रत्येक संकुल स्तर में एक समिति होगी जिसका गठन जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा किया जाएगा। इस समिति के अध्यक्ष हाई स्कूल या हायर सेकेण्डरी स्कूल के प्राचार्य, उपाध्यक्ष सहायक विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी और सदस्य सचिव विकासखण्ड स्त्रोत केन्द्र समन्वयक होंगे। समिति में सदस्य के रूप में व्याख्याता या व्याख्याता (पंचायत), पूर्व माध्यमिक शाला के प्रधान पाठक, संकुल स्त्रोत केन्द्र समन्वयक, शिक्षक या शिक्षक पंचायत, प्राथमिक शाला के प्रधान पाठक, सहायक शिक्षक या सहायक शिक्षक पंचायत शामिल होंगे।

शिक्षा दूत पुरस्कार के लिए विकासखण्ड स्तरीय चयन समिति का गठन जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा किया जाएगा। इस समिति के अध्यक्ष विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी और सदस्य सचिव विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी कार्यालय का एक सहायक विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी होगा। सदस्यों में प्राचार्य हाई स्कूल या हायर सेकेण्डरी स्कूल, विकासखण्ड स्त्रोत केन्द्र समन्वयक, व्याख्याता या व्याख्याता पंचायत, पूर्व माध्यमिक शाला का एक प्रधान पाठक और प्राथमिक शाला का प्रधान पाठक शामिल होंगे।

ज्ञान दीप पुरस्कार के लिए जिला स्तरीय चयन समिति का गठन आयुक्त राजस्व संभाग द्वारा किया जाएगा। इस समिति के अध्यक्ष जिला कलेक्टर, उपाध्यक्ष डीप्टी कलेक्टर और सदस्य सचिव जिला शिक्षा अधिकारी होंगे। सदस्यों में विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी, डाइट के प्राचार्य या जिले के वरिष्ठ प्राचार्य, सहायक संचालक जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय, एक सेवानिवृत्त शिक्षा या शासकीय अधिकारी-कर्मचारी जो शिक्षा के क्षेत्र में रूचि रखता हो, वे शामिल रहेंगे। 

शिक्षा पुरस्कार के लिए संभाग स्तरीय चयन समिति का गठन शासन स्तर पर स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा किया जाएगा। इस समिति के अध्यक्ष संभागीय आयुक्त, उपाध्यक्ष संभागीय उपायुक्त या सहायक आयुक्त और सदस्य सचिव डाइट के प्राचार्य होंगे। सदस्यों में संभागीय मुख्यालय का जिला शिक्षा अधिकारी, प्राचार्य हाई स्कूल या हायर सेकेण्डरी स्कूल, विकासखण्ड शिक्षा अधिकारी, एक शिक्षाविद् जो शिक्षा के क्षेत्र में अभिरूचि रखता हो, वे शामिल रहेंगे।

छत्तीसगढ़ में पॉयलट प्रोजेक्ट के रूप में शुरू हुआ एफजीआर पोर्टल

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रायपुर। भारत सरकार द्वारा प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना एवं मौसम आधारित फसल बीमा के संबंध में किसानों की शिकायतों की ऑनलाईन सुनवाई एवं निदान के लिए तैयार किया गया किसान शिकायत निवारण पोर्टल (एफ.जी.आर.) पॉयलट प्रोजेक्ट के रूप में आज 21 जुलाई से छत्तीसगढ़ राज्य में लांच किया गया। शिकायतों के निदान में इस पोर्टल की उपयोगिता और मूल्यांकन के बाद यह देश के सभी राज्यों में लागू किया जाएगा। इस पोर्टल के शुरू होने से अब किसानों को फसल बीमा संबंधी शिकायतों के निराकरण के लिए किसी कार्यालय और अधिकारी का चक्कर काटने की जरूरत नहीं होगी ही लिखित में आवेदन देना होगा।



किसान भाई टोल-फ्री नम्बर 14447 पर कॉल कर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते है, जिसका निदान तत्परता से किया जाएगा। किसान अपनी शिकायतों के निदान की जानकारी भी पोर्टल के जरिए प्राप्त कर सकेंगे। गौरतलब है कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, भारत सरकार के संयुक्त सचिव एवं मुख्य कार्यपालन अधिकारी रितेश चौहान, मुख्य कार्यपालन अधिकारी सी.एस.सी. डॉ. दिनेश कुमार त्यागी ने आज वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से एफजीआर पोर्टल के बीटा वर्जन का छत्तीसगढ़ में शुभारंभ करते हुए कहा कि देश में सबसे पहले छत्तीसगढ़ राज्य में इसे पॉयलट प्रोजेक्ट के रूप में लांच किया जा रहा है। 

छत्तीसगढ़ राज्य को इस पोर्टल के पॉयलट प्रोजेक्ट के रूप में चयन राज्य में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के क्रियान्वयन में उल्लेखनीय उपलब्धियों को देखते हुए किया गया है। छत्तीसगढ़ राज्य फसल बीमा के क्रियान्वयन में देश के अग्रणी राज्यों में से एक है। छत्तीसगढ़ देश का पहला राज्य है, जिसने अपने किसानों को रबी सीजन 2022 के फसल बीमा दावा राशि का भुगतान देश में सबसे पहले किया है। एफजीआर पोर्टल के शुभारंभ कार्यक्रम में कृषि उत्पादन आयुक्त छत्तीसगढ़ डॉ. कमलप्रीत सिंह, संचालक कृषि यशवंत कुमार, संयुक्त सचिव के.सी. पैकरा

अपर संचालक अभियांत्रिकी जी.के. पिड़िहा, अपर संचालक उद्यानिकी भूपेन्द्र कुमार पांडेय, संयुक्त संचालक कृषि बी.के. मिश्रा एवं जिला स्तर के अधिकारी तथा बीमा कंपनी के प्रतिनिधि भी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से शामिल हुए। किसान शिकायत निवारण (एफजीआर) पोर्टल में फसल बीमा से संबंधित शिकायत दर्ज कराने हेतु किसान को 14447 टोल-फ्री नंबर पर कॉल करना होगा। कॉल करने के पश्चात् कृषक से शिकायत संबंधित जानकारी कॉल सेन्टर द्वारा ली जावेगी। इसके पश्चात् शिकायत का विवरण संबंधित बीमा कंपनी को प्रेषित कर निर्धारित समय-सीमा में निराकरण करने हेतु निर्देशित किया जायेगा।

 किसान शिकायत निवारण पोर्टल के संचालन होने के किसानों को अब फसल बीमा संबंधी शिकायतों के लिए तो कार्यालयों और अधिकारियों के चक्कर लगाने पड़ेगें ही लिखित में आवेदन देने की जरूरत होगी। वह टोल-फ्री नम्बर 14447  पर कॉल कर अपना शिकायत दर्ज करा सकेंगे। शिकायत दर्ज कराने के बाद किसान के मोबाईल नंबर पर शिकायत दर्ज कराने का संदेश, शिकायत क्रमांक सहित आयेगा, जिसके माध्यम से शिकायत पोर्टल पर शिकायत की वास्तविक स्थिति का पता ऑनलाईन लगाया जा सकता है।

 यहां यह उल्लेखनीय है कि फसल बीमा दावा राशि का भुगतान करने में छत्तीसगढ़ देश में अव्वल रहा है। वर्ष 2021-22 में 05 लाख 66 हजार किसान भाईयों को 1063 करोड़ रुपए की बीमा दावा राशि का भुगतान किया गया था। कृषि विभाग ने राज्य के किसान भाईयों से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना और मौसम आधारित उद्यानिकी फसल बीमा योजना का लाभ उठाने के लिए बीमा कराने की अपील की है। प्रधानमंत्री फसल बीमा कराने की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2022 है। किसान भाई फसल बीमा से संबंधित शिकायत सीधे 14447 टोल फ्री नंबर पर कॉल कर दर्ज करा सकते है।

बुजुर्गों का ख्याल रख रही है छत्तीसगढ़ सरकार

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रायपुर। छत्तीसगढ़ शासन को अपने बुजुर्गों का बहुत ख्याल है उन्हें अच्छी स्वास्थ्य सुविधा देने के सियान जतन क्लिनिक योजना की शुरुआत की गई है। इसके लिए स्वास्थ्य विभाग हर महीने के पहले गुरुवार कोसियान जतन क्लिनिकका आयोजन कर रहा है। इन अस्पतालों में 60 साल से अधिक उम्र के बुजुर्गों की निःशुल्क जांच और इलाज किया जा रहा है। यह पहल बुजुर्गों को बेहतर उपचार और स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के उद्देश्य से की गई है। इसके माध्यम से प्रदेश के आयुर्वेदिक चिकित्सालयों में वृद्धावस्था में शारीरिक एवं मानसिक समस्याओं से पीड़ित वृद्धजनों को विशेष ओपीडी एवं पंचकर्म सेवाएं प्रदान की जा रही हैं। 



इन सभी अस्पतालों में मरीजों को संभालने के लिए विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम उपस्थित रहती है। महासमुंद ज़िले के 36 आयुर्वेदिक अस्पताल हेल्थ सेंटर में सियान जतन क्लिनिक की शुरूआत माह मई से हुई है, जहाँ 60 से अधिक उम्र के नागरिकों का निःशुल्क स्वास्थ्य  परीक्षण उपचार किया जा रहा है। प्रकृति से जुड़कर लोगों को स्वस्थ रहने के तौर-तरीके बताने का काम आयुष चिकित्सकों के द्वारा किया जा रहा है। इसके अंतर्गत दवा से लेकर अन्य सभी विधियां प्राकृतिक मापदंड से संबंधित हैं। इसके अच्छे परिणाम लोगों को प्राप्त हो रहे हैं।

आयुष का काम देख रहे डॉक्टर एस.एल.पटेल ने बताया कि पिछले दो माह में 4190  बुजुर्गों को इसका फ़ायदा मिला। माह मई में 1432 और जून माह में आयोजित शिविरों में 2758 बुजुर्गों का उपचार किया गया। साथ ही 60 वर्ष से अधिक आयु के मरीजों का निःशुल्क पंजीयन, सामान्य स्वास्थ्य परीक्षण, प्रकृति परीक्षण चिकित्सा की गई। इन जाँच शिविरों में स्मृति ह्रास, कम सुनाई पड़ना, नेत्ररोगजोड़ों का दर्द, लकवा, मधुमेह, उच्च रक्तचाप और शारीरिक दुर्बलता इत्यादि शामिल है। 

चिकित्सालय के सियान जतन क्लिनिक में लाभार्थियों को ग्रीष्म ऋतु पेय मिश्रेय पानक, दशमूल काढ़ा, गुडुच्यादि काढ़ा, रसायन औषधि आदि प्रदान की गयी। इसके अलावा लोगों को एक ही स्थान पर आयुर्वेद और एलोपैथी के विशेषज्ञों का परामर्श उपलब्ध होता है। उन्होंने बताया कि सियान जतन क्लिनिक में इलाज के लिए आए बुजुर्गों का विस्तृत विवरण भी रखा जा रहा है। यही नहीं, भविष्य में जरूरत पड़ने पर इन मरीजों का फॉलोअप भी किया जाएगा। नागरिकों का स्वास्थ्य बेहतर रहे और उन्हें किसी प्रकार की दिक्कतों का सामना ना करना पड़े, इसके लिए कई स्तर पर काम हो रहा है। जिसकी जिम्मेदारी आयुष विभाग को दी गई है।

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