Media24Media.com: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी

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केदारनाथ धाम में भक्ति का आलम, कपाट खुलने पर हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा

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देहरादून. देवभूमि उत्तराखंड स्थित केदारनाथ धाम के कपाट विधि विधान के साथ शुक्रवार सुबह सात बजे श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए. इस दौरान उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी भी मौजूद रहे. पुजारियों के वैदिक मंत्रोच्चार और श्रद्धालुओं के जयकारे के बीच कपाट खुले और इस दौरान श्रद्धालुओं पर हेलीकॉप्टर से पुष्प वर्षा की गई.


इससे पहले गुरुवार को ही बाबा केदार की पंचमुखी चल विग्रह उत्सव डोली केदारनाथ धाम पहुंची थी. बाबा के दर्शनों के लिये करीब 15 हजार से ज्यादा श्रद्धालु पहले ही पहुंच चुके थे और जैसे ही गुरुवार सुबह कपाट खुले तो पूरा धाम ‘हर-हर महादेव’ और ‘बम-बम भोले’ के जयकारों से गूंज उठा. इस अवसर पर बाबा केदार के मंदिर को 108 क्विंटल फूलों से भव्य तरीके से सजाया गया था.

सुरक्षा तैयारियों का लिया जायजा

इससे पहले गुरुवार को में प्रदेश के डीजीपी दीपम सेठ एवं अपर पुलिस महानिदेशक (अपराध एवं कानून व्यवस्था) वी. मुरुगेशन ने श्री बद्रीनाथ और श्री केदारनाथ धाम में जाकर सुरक्षा व्यवस्थाओं और अन्य तैयारियों का स्थलीय निरीक्षण किया. पुलिस अधीक्षक रुद्रप्रयाग अक्षय प्रल्हाद कोंडे ने उन्हें सुरक्षा तैयारियों की जानकारी दी.

इस बार केदारनाथ यात्रा में भीड़ नियंत्रण के लिए टोकन व्यवस्था लागू की जा रही है, जो पहले दिन से ही प्रभावी होगी. डीजीपी ने टोकन काउंटरों की संख्या बढ़ाने, पीए सिस्टम से यात्रियों को जानकारी देने और स्क्रीन पर स्लॉट व नंबर प्रदर्शित करने के निर्देश दिए. उन्होंने एटीएस और पैरा मिलिट्री बल की तैनाती को भी सुव्यवस्थित करने की बात कही.

इस बार मंदिर में फोन पर है पाबंदी

केदारनाथ में यात्रियों के लिये गाइडलाइन्स जारी की गई हैं. केदारनाथ मंदिर परिसर के 30 मीटर के दायरे में मोबाइल के इस्तेमाल की इजाजत नहीं है. रील या फोटो शूट करते पाए जाने पर मोबाइल फोन जब्त कर लिये जाएंगे और 5000 का जुर्माना देना पड़ सकता है

हर साल शीतकाल में भारी बर्फबारी के कारण बाबा केदारनाथ के मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं. जैसे ही ग्रीष्म ऋतु का आगमन होता है, मंदिर के द्वार पुनः खुलते हैं और बाबा केदार भक्तों को दर्शन देकर आशीर्वाद प्रदान करते हैं.

 

Uttarkashi tunnel rescue: टनल से सुरक्षित बाहर निकाले गए सभी 41 मजदूर, पूरा हुआ रेस्क्यू मिशन

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 Uttarkashi tunnel rescue: उत्तराखंड के उत्तरकाशी में एक सुरंग में फंसे 41 जिंदगियों को आखिरकार 17 दिनों के बाद नई जिंदगी मिलती हुई दिखाई दे रही है। सुरंग में फंसे 41 मजदूरों को अब धीरे-धीरे निकाला गया है। कुछ देर में सभी श्रमिक पूरी तरीके से बाहर होंगे। उन्हें मेडिकल जांच के लिए अस्पताल ले जाया जाएगा। साथ ही साथ उन्हें हर तरह की सुविधा दी जाएगी। खुद उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और केंद्रीय मंत्री जनरल वीके सिंह सुरंग में मौजूद रहे। यह दोनों लगातार सुरंग के पास डटे रहे। सबसे पहले 5 श्रमिकों को बाहर निकाला गया। मंगलवार को बचाव अभियान अंतिम चरण में पहुंचने पर सिल्कयारा सुरंग के अंदर फंसे एक श्रमिक के रिश्तेदार ने कहा, "मैं बहुत खुश हूं"। 


उत्तराखंड में उत्तरकाशी जिले के सिल्क्यारा में निर्माणाधीन सुरंग में फंसे सभी 41 श्रमिकों को बाहर निकाले जाने के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने बचाव अभियान से जुड़े सभी लोगों के जज्बे को सलाम किया। इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने सुरंग में फंसे श्रमिकों के साहस और धैर्य की सराहना की तथा उनके उत्तम स्वास्थ्य की कामना की। उन्होंने लिखा कि उत्तरकाशी में हमारे श्रमिक भाइयों के रेस्क्यू ऑपरेशन की सफलता हर किसी को भावुक कर देने वाली है। टनल में जो साथी फंसे हुए थे, उनसे मैं कहना चाहता हूं कि आपका साहस और धैर्य हर किसी को प्रेरित कर रहा है। मैं आप सभी की कुशलता और उत्तम स्वास्थ्य की कामना करता हूं।  

केंद्रीय मंत्री जनरल वीके सिंह ने कहा, "हमारे देश में जिस भी हमें ज़रूरत पड़ी वह प्रधानमंत्री ने मुहैया करवाई... जितने साधन जुटाए गए हैं इतने साधन किसी और ऑपरेशन के लिए नहीं जुटाए गए होंगे।" सीएम पुष्कर सिंह धामी ने कहा, "इस पूरे अभियान में लगे हुए सभी कर्मचारियों, विशेषज्ञों, विज्ञानिकों, भारत संस्थाओं को मैं धन्यवाद करता हूं।...पीएम मोदी लगातार मेरे संपर्क में थे और बचाव अभियान का अपडेट ले रहे थे। उन्होंने मुझे किसी भी तरह सभी को सुरक्षित बचाने की जिम्मेदारी दी.. उनके समर्थन के बिना यह संभव नहीं होता। उन्होंने अभी मुझसे बात की और निर्देश दिया कि सभी का मेडिकल चेक-अप किया जाए... और उन्हें उनके घर तक पहुंचाने की व्यवस्था की जाए...''


रैट-होल खनिकों को अपने ड्रिलर्स के साथ उत्तरकाशी में सिल्क्यारा सुरंग से बाहर निकलते देखा गया। इसके अलावा, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों को ढहने वाली जगह पर फंसे 41 श्रमिकों को निकालने के लिए अपने गियर के साथ प्रवेश करते देखा गया। 12 रैट-होल खनन विशेषज्ञ ढहने वाली जगह पर क्षैतिज उत्खनन पर काम कर रहे थे। रैट-होल खनन भारत में प्रचलित कोयला निष्कर्षण की एक आदिम और खतरनाक विधि है।


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