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असरकारी पुस्तक बेचने सरकारी आदेश, संकुल समन्वयकों पर दबाव!

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(आनंदराम साहू)





महासमुंद। 'महामारी लेकिन  पढ़ना लिखना जारी ' कथित तौर पर यह एक असरकारी पुस्तक है।असरकारी इसलिए, क्योंकि इसे स्कूल शिक्षा विभाग (Mahasamund Education Department) के प्रमुख सचिव और प्रभावशाली अफसर डॉक्टर आलोक शुक्ल ने लिखा है। पुस्तक असरकारी (गैर शासकीय) है जिसे असरकारी (प्रभावशाली) बताकर बेचा जा रहा है। इसे ई बोध प्रकाशन से प्रकाशित कराया गया है। अब इस असरकारी (गैर सरकारी) पुस्तक को सभी संकुल केन्द्रों में दबावपूर्वक खपाया जा रहा है । 









पुस्तक बेचने विभागीय पत्र (Mahasamund Education Department)





महासमुंद जिले में तो शिक्षाधिकारी (Education Officer) ने पुस्तक बेचने बाकायदा सरकारी आदेश तक जारी कर दिया है। असरकारी पुस्तक बेचने इस सरकारी आदेश से जिले के संकुल समन्वयक खासे परेशान हैं। बताया जाता है कि करीब 150 पेज के इस पुस्तक में कोई दम नहीं है। इसकी जमीनी स्तर पर कोई उपयोगिता भी नहीं है। फिर भी इसे असरकारी किताब मानकर बाकायदा आदेश (Mahasamund Education Department) जारी कर बेचा जा रहा है।






 









दबावपूर्वक 200 रुपये वसूली (Mahasamund Education Department)





पुस्तक की कीमत दो सौ रुपये है।  जानकारी मिली है कि कोरोना काल में छत्तीसगढ़ में स्कूलों में कैसे पढ़ाई हुई, इसी की जानकारी पुस्तक में है। जिसकी उपयोगिता न स्कूली बच्चों के लिए है, और न ही संकुल समन्वयकों के लिए। लेकिन यह किताब स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव ने लिखा है, इसलिए इसे शिक्षा की अलख जगाने वाला दस्तावेज बताकर दबाव पूर्वक बेचा जा रहा है। 





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प्रदेश भर में ऐसे बेच रहे पुस्तक





महासमुंद जिले के सभी विकासखंड शिक्षाधिकारी (Block Education Officer) और खंड संकुल समन्वयकों के लिए फरमान जारी किया गया है कि वे पुस्तक की कीमत दो सौ रुपये जमा कराएं। जिले के 120 संकुलों में इस पुस्तक को बेच रहे हैं। इस प्रकार 24 हजार रुपये का राजस्व पुस्तक की बिक्री से एक जिले से हो रहा है। प्रदेश के सभी 28 जिलों में पुस्तक की बिक्री ऐसे ही किए जाने की खबरें मिल रही है। इस प्रकार करीब साढ़े छह लाख रुपये का राजस्व पुस्तक को बेचकर मिलेगा। यहां यक्ष प्रश्न यह है कि सेवानिवृत्त होने के समय प्रदेश के विभिन्न जिलों में घुम-घुमकर एक शासकीय सेवक द्वारा लिखित पुस्तक को सरकारी फरमान जारी कर बेचा जाना क्या उचित है?





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शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मैदानी अमले का दुरूपयोग कर राजस्व की अवैधानिक वसूली नहीं की जा रही है? सरकार के विशेष कृपा पात्र डॉ आलोक शुक्ल को सेवानिवृत्ति के बाद संविदा नियुक्ति दी गई है, ऐसी खबर है। तब शिक्षा विभाग के शीर्ष अधिकारी द्वारा अपने पद का दुरूपयोग कर कदाचरण नहीं किया जा रहा है? इन सवालों का जवाब देने कोई तैयार नहीं है।





शिक्षाधिकारी की स्वीकारोक्ति





इस संबंध में जिला शिक्षाधिकारी रॉबर्ट मिंज (District Education Officer Robert Minz) से पूछने पर उन्होंने पुस्तक सप्लाई के लिए पत्र जारी करने की स्वीकारोक्ति के साथ यह भी कहा कि उच्चाधिकारियों के आदेश का पालन करना पड़ता है। जैसा हमें कहा गया है, हम कर रहे हैं। उच्च कार्यलय अथवा अधिकारी का आदेश दिखाने के आग्रह पर वे गोलमाल जवाब देने लगे। इस तरह पद का दुरूपयोग कर असरकारी पुस्तक बेचे जाने से शिक्षा जगत से जुड़े मैदानी अमले में रोष व्याप्त है।


धान खरीदी : बारदाना का कृत्रिम अभाव पैदा कर किसानों को कर रहे परेशान, किसान नेता योगेश्वर चंद्राकर आज धान खरीदी केंद्र में करेंगे प्रदर्शन

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महासमुंद: धान खरीदी केंद्रों में जानबूझकर अव्यवस्था फैलाई (Farmers leader Yogeshwar Chandrakar protest ) जा रही है। बारदाना का कृत्रिम अभाव पैदा कर किसानों को परेशान किया जा रहा है। खरीदी केंद्रों में नए बारदाना का स्टॉक होने के बावजूद किसानों को धान बेचने टोकन नहीं दे रहे हैं। धान बेचने किसानों के बीच मारामारी और प्रतिस्पर्धा पैदा की जा रही है। जिससे समर्थन मूल्य पर धान बेचने के आड़ में किसानों से उगाही कर सकें। धान खरीदी केंद्रों में अव्यवस्था बर्दाश्त नहीं की जाएगी।  ऐसा कहना है किसान नेता योगेश्वर चंद्राकर (Farmers leader Yogeshwar Chandrakar) का।









 विलंब से शुरू हुई खरीदी, किसान परेशान





मीडिया को जारी एक बयान में उन्होंने कहा है कि  विलंब से धान खरीदी प्रारंभ होने के कारण किसान पहले से ही परेशान हैं। और अब बारदानों की कृत्रिम कमी पैदा कर किसानों को परेशान किया जा रहा है। महासमुंद जिले का एक बड़ा क्षेत्र हाथी प्रभावित है। जहां किसान मौत के साये में खलिहान में रतजगा करने विवश हैं।  वैश्विक महामारी कोरोना संक्रमण के दौर में शीत लहर से जूझते हुए किसान खलिहानों में धान की रखवाली कर रहे हैं। खलिहानों में हाथी के हमले से गत वर्षों में हुई मौतों से  सरकार और जनप्रतिनिधियों ने सबक नहीं लिया है।  






धान की रखवाली करते किसानों की हुई थी मौत





गौरतलब है कि महासमुंद जिले के बांसकुड़ा गांव में धान की रखवाली करते दो लोगों को हाथी ने मार डाला था। आज उनके बच्चे मुखिया विहीन होकर जीने मजबूर हैं।  इस साल भी धनसूली गांव में हाथी के हमले से किसान की मौत हो गई।





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वहीं दो  दिन पूर्व ही महासमुंद शहर से लगे चोरभट्ठी गांव के खलिहान में एक किसान हाथी के आक्रमण से मरते-मरते बचा है। यही स्थिति विधायक के गृहग्राम और जनपद अध्यक्ष के गृहग्राम और आसपास क्षेत्र की भी है, लेकिन लापरवाही की हद इतनी है कि किसान हितैषी होने का दंभ भरने वाले सत्तासीन लोगों को किसानों की कोई परवाह ही नहीं है। फोटो खिंचाने और बारदाना की पर्याप्त उपलब्धता दिखाने के लिए सभी धान खरीदी केंद्रों में हजारों बंडल बारदाने रखे हैं। किसानों को बारदाना नहीं होने की बात कहकर गुमराह किया जा रहा है। 






 व्यापारियों को लाभ पहुंचाने कुचक्र





 व्यापारियों से सांठगांठ कर किसानों को 15 से 20 रूपये नग में बारदाना लेने मजबूर कर रहे हैं। इन समस्याओं को लेकर किसान नेता योगेश्वर चंद्राकर आज मंगलवार को सुबह 10 बजे बेमचा धान खरीदी केंद्र में किसानों के साथ (Farmers leader Yogeshwar Chandrakar protest) प्रदर्शन करेंगे। आवश्यकता पड़ने पर अनिश्चितकालीन हड़ताल में बैठने की बात उन्होंने कही है।  


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